Feb 10, 2018

स्टूडेंट्स और 500 रूपए




एक कॉलेज में प्रोफेसर साहब अपने लेक्चर में स्टूडेंट्स को पढ़ा रहे थे. लगातार क्लासेज चलते रहने से स्टूडेंट्स थका हुआ और बोरिंग महसूस कर रहे थे. 

उन्होंने प्रोफेसर साहब से रिक्वेस्ट किया कि सब्जेक्ट टॉपिक से कुछ अलग हटकर बतायें ताकि उनका पढ़ने का इंटरेस्ट दोबारा बन सके.

स्टूडेंट्स को कुछ नया सिखाने के लिए प्रोफेसर ने जेब से 500 रुपये का एक नोट निकाला. स्टूडेंट्स की तरफ वो नोट दिखाकर पूछा – क्या आप लोग बता सकते हैं कि यह कितने रुपये का नोट है ?

सभी स्टूडेंट्स ने कहा – “500 रुपये का”

प्रोफेसर बोले – इस नोट को कौन-कौन लेना चाहेगा? सभी स्टूडेंट्स ने हाथ खड़ा कर दिया.

अब प्रोफेसर साहब ने उस नोट को मुट्ठी में बंद करके बुरी तरह मसला जिससे वह नोट बुरी तरह कुचल सा गया मगर फटा नहीं. अब प्रोफेसर ने फिर से स्टूडेंट्स को नोट दिखाकर कहा कि अब ये नोट कुचल सा गया है अब इसे कौन लेना चाहेगा?

सभी स्टूडेंट्स ने फिर हाथ उठा दिया.

अब प्रोफेसर साहब ने उस नोट को जमीन पर फेंका और अपने जूते से बुरी तरह कुचल डाला. फिर नोट को उठाकर फिर से स्टूडेंट्स को दिखाया और पूछा कि अब इसे कौन लेना चाहेगा?

सभी स्टूडेंट्स ने फिर से हाथ उठा दिया.

अब प्रोफेसर ने कहा कि डिअर स्टूडेंट्स “आज मैंने तुमको एक बहुत बड़ा पाठ पढ़ाया है. 
ये 500 रुपये का नोट था, जब मैंने इसे हाथ से कुचला तो ये नोट कुचल गया लेकिन इसकी कीमत 500 रुपये ही रही, इसके बाद जब मैंने इसे जूते से मसला तो ये नोट गन्दा हो गया लेकिन फिर भी इसकी कीमत 500 रुपये ही रही”.

ठीक वैसे ही आपकी जो वैल्यू है और जो काबिलियत है, वो हमेशा वो ही रहती है, फ़िर चाहे आपके ऊपर कितनी भी मुश्किलें आयें, कितनी ही मुसीबतों के पहाड़ आपके ऊपर आकर गिरें, लेकिन आपको अपनी वैल्यू नहीं गंवानी है. 
आप कल भी बेहतर थे, आज भी बेहतर हैं और आगे भी बेहतर ही रहेंगे.


ये सब देखने और सुनने के बाद वो स्टूडेंट्स फिर कभी बोर नहीं हुए. उनको अपनी वैल्यू का एहसास होना शुरू हो गया था.

जाते-जाते: 
आप भी समय-समय पर अपना वैल्यू इंडेक्स चेक करते रहिये. फ़िर शायद ही कभी बोरियत आपको तंग कर सके. 

ट्रिपल फ़िल्टर टेस्ट



महान विचारक सुकरात को कौन नहीं जानता. प्राचीन यूनान में सुकरात को बहुत सम्मान से देखा जाता था और लोग जब भी किसी दुविधा में होते तो समस्या को हल कराने सुकरात के पास चले जाते थे. सुकरात को व्यवहारिक ज्ञान का प्रेरणा स्त्रोत कहा जा सकता है. 
आइये एक छोटी सी कहानी से समझे सुकरात को.

एक दिन सुकरात का एक जानकार व्यक्ति उनसे मिला और उनसे कहा, ” क्या आप जानते हैं मैंने आपके एक दोस्त के बारे में क्या सुना ?” 

“एक मिनट रुको,” सुकरात ने कहा, ” तुम्हारे कुछ बताने से पहले मैं चाहता हूँ कि तुम एक छोटा सा टेस्ट पास करो. इसे ट्रिपल फ़िल्टर टेस्ट कहते हैं.”

“ट्रिपल फ़िल्टर?”

”हां, सही सुना तुमने.”, सुकरात ने बोलना जारी रखा. इससे पहले कि तुम मेरे दोस्त के बारे कुछ बताओ, अच्छा होगा कि हम कुछ समय लें और जो तुम कहने जा रहे हो उसे फ़िल्टर कर लें. इसीलिए मैं इसे ट्रिपल फ़िल्टर टेस्ट कहता हूँ. 

पहला फ़िल्टर है ‘सच’.

क्या तुम पूरी तरह आश्वस्त हो कि जो तुम कहने जा रहे हो वो सच है?
“नहीं”, व्यक्ति बोला, ”दरअसल मैंने ये किसी दूसरे व्यक्ति से सुना है और ….....”
”ठीक है”, सुकरात ने कहा. तो तुम विश्वास के साथ नहीं कह सकते कि ये सच है या झूठ.
चलो कोई बात नहीं. 

अब दूसरा फ़िल्टर ट्राई करते हैं, ‘अच्छाई’ का फ़िल्टर.

ये बताओ कि जो बात तुम मेरे दोस्त के बारे में कहने जा रहे हो, क्या वो कुछ अच्छा है?”
”नहीं, बल्कि ये तो इसके बिलकुल उलट…..”
“तो”, सुकरात ने कहा , ”तुम मुझे कुछ बुरा बताने वाले हो , लेकिन तुम आश्वस्त नहीं हो कि वो सच है. कोई बात नहीं. 

तुम अभी भी ये टेस्ट पास कर सकते हो क्योंकि अभी तीसरा और अंतिम फ़िल्टर बचा हुआ है ‘उपयोगिता’ का फ़िल्टर.

मेरे दोस्त के बारे में जो तुम बताने वाले हो, क्या वो मेरे लिए उपयोगी है?”
“हम्म्म…. नहीं, कुछ ख़ास नहीं…”

“अच्छा,” सुकरात ने अपनी बात पूरी की. यदि जो तुम बताने वाले हो वो ना सच है, ना ही अच्छा और ना ही कुछ उपयोगी तो उसे सुनने का क्या लाभ?” और ये कहते हुए वो अपने काम में व्यस्त हो गए.

Feb 9, 2018

‘पैडमैन’



‘P’ अक्षर से शुरू होने वाली फिल्मों का जलवा देखते ही बन रहा है. पहले ‘पद्मावत’ और अब अक्षय कुमार की 'पैडमैन'. फ़िल्म 9 फ़रवरी को रिलीज़ हुई. सामाजिक संदेश देती इस फ़िल्म को दर्शकों का अच्छा साथ मिला और फ़िल्म ने पहले ही दिन 14 करोड़ का बिज़नेस दिया. फ़िल्म का कुल बजट सिर्फ़ 20 करोड़ था. इस तरह देखा जाये तो ये फ़िल्म तो चल निकली.

जानकारों के मुताबिक पहले सप्ताह तक फ़िल्म 70 करोड़ तक कमा सकती है और उम्मीद की जा रही है कि जल्दी ही ये 200 करोड़ क्लब में दस्तक दे सकती है.

ये फ़िल्म क्यों बनी? क्या मोटिवेशन था? कौन है असली पैडमैन? क्यों बना पैडमैन? इन सब सवालों के जवाब आपको इस आर्टिकल से मिलेंगे. आइये यात्रा शुरू करें.

1. 'पैडमैन' रियल स्टोरी बेस्ड फ़िल्म है और अक्षय कुमार फ़िल्म में अरुणाचलम मुरुगअनंतम का किरदार निभा रहे हैं.

2. असली ‘पैडमैन’ अरुणाचलम मुरुगअनंतम हैं जिन्होंने महिलाओं की माहवारी में इस्तेमाल होने वाले महंगे सैनिटरी पैड की जगह सस्ते सैनिटरी पैड बनाने की मशीन बनाई ताकि गावों और देहातों में रहने वाली गरीब महिलाएं साधारण कपड़े इस्तेमाल करने की बजाय पैड्स का यूज़ कर सकें.

3. उनके इस आविष्कार और सोशल रेस्पोंसिबिलिटी को देखते हुए उनको पद्मश्री अवॉर्ड से भी नवाजा गया है.

4. 'पैडमैन' फ़िल्म को डायरेक्शन आर. बाल्की ने दिया है और ट्विंकल खन्ना इस फिल्म की प्रोड्यूसर हैं.

5. आइये अरुणाचलम मुरुगअनंतम से मिलते हैं.


6. अरुणाचलम मुरुगअनंतम का जन्म 1962 में तमिलनाडु के कोयंबटूर में हुआ.

7. अरुणाचलम का बचपन गरीबी में निकला. कोयंबटूर में वो सबसे गरीब परिवार से आते हैं.

8. उनके बचपन के समय ही उनके पिता का देहांत हो गया. उनकी मां ने मेहनत-मजदूरी कर के उन्हें पाला पोसा.

9. 14 साल की उम्र में उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा. इधर-उधर काम करके वो गुजारा चलाते रहे.

10. 1998 में उनकी शादी शांति जी से हुई.

11. अब यहीं से ‘पैडमैन’ की असली कहानी शुरू होती है. शांति जी को जब पीरियड्स होते थे तो वो कपड़े और अखबार के कागज का इस्तेमाल करती थीं. सैनेटरी नेपकिन क्या होता है, ये उन्हें कहां पता था? अरुणाचलम को जब इसकी ख़बर लगी तो वो हैरान से रह गए. जिसके बाद उन्होंने पैड मशीन बनाने की ठान ली ताकि शांति जी और दूसरी और महिलाओं को वो कपड़ों से होने वाले इन्फेक्शन से बचा सकें और सस्ते दामों पर पैड भी उपलब्ध करा सकें.

12. उनको मशीन बनाने में करीब 2 साल का समय लगा और पूरी जानकारी जुटा कर उन्होंने 65,000 रु. में पैड मशीन तैयार कर दी. फ़िर उन्होंने गांव-गांव जाकर महिलाओं को पैड के इस्तेमाल के प्रति जागरूक भी किया.

13. आज अरुणाचलम कोयंबटूर में अपनी खुद की कंपनी चलाते हैं और लगभग 5,000 गावों में उनके बनाये सैनिटरी पैड का इस्तेमाल किया जा रहा है.

14. अरुणाचलम के इस आईडिया को दुनिया भर में बहुत सराहा गया और उनके इस प्रयोग से कई महिलाओं की जिंदगी बदल गयी.

15. उनकी ये मशीन अभी भारत के 23 राज्यों में लगाई गई हैं और यहां बने पैड बाजार में मिलने वाले सैनिटरी पैड से लगभग एक तिहाई कीमत पर मिल जाते हैं.

16. अरुणाचलम अपने इस प्रोजेक्ट को अब 100 से ज्यादा देशों में लांच करने की तैयारी में हैं.

कोई प्रॉब्लम सामने आये तो अधिकतर लोग उसको ये सोच कर टाल जाने की कोशिश करते हैं की ये तो सबके साथ है और ठीक नहीं होगी. लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो प्रॉब्लम की जड़ तक जाते हैं और समाधान निकाल लाते हैं.
और शायद ग़रीबी से बड़ी प्रॉब्लम और क्या हो सकती है?


असली ‘पैडमैन’ को सलाम है और अक्षय कुमार को बड़ा सा थैंक यू जिन्होंने कमर्शियल कामयाब एक्टर होकर भी अपनी फिल्म के लिए ये सब्जेक्ट चुना.

हँसना और रोना




1. एक छोटा बच्चा – उसकी हंसी देखो. उसका रोना देखो. उसका नाचना देखो. कितना नेचुरल. कितना गहरा. कितना सहज. वह इसी तरीके से अपने समाज से जुड़ता है. उसका हिस्सा बन जाता है.

2. सच तो ये है कि यदि आप हंस नहीं सकते तो रो भी नहीं सकेंगे. हंसना और रोना एक दूजे के पक्के दोस्त हैं. ये एक घटना के हिस्से हैं जो आपको परिपक्व, सच्चा और ईमानदार बनाते है. रोना कोई कमज़ोरी नहीं है. ये भी सच के साथ बह जाने की एक अवस्था है. हंसना और रोना दोनों ही आपको हल्का करते हैं. बस दोनों एक्टिविटी नेचुरल होनी चाहिये और आप ध्यान में उतर जाते हो. विचारहीन. जीरो. अब आप बच्चे हो गए दोबारा. इसे मत छोड़ना.

3. यदि आप ठीक से हंस सको और रो सको, तो ही जिन्दा हो. मरा हुआ आदमी कैसे हंसेगा? और कैसे रो सकेगा? वो तो बस सीरियस मालूम पड़ेगा. एक आवरण ओढें हुए नकली सी डेड बॉडी. और कुछ नहीं.


4. एक मरा हुआ आदमी आपकी क्या मदद करेगा? वो तो अपने इर्द-गिर्द मुर्दों की फ़ौज चाहेगा. जिंदा आदमी से नफ़रत करेगा क्योंकि उसका फ्लेवर ही ऐसा बन चुका है. वो आपको नकार देगा. दगा देगा. तो आप सावधान रहना. वो सिर्फ़ सीरियस बातें करेगा और आपको भी मुर्दा बना डालेगा. जिंदा आदमी आपको जिंदगी देगा. हसंना सिखाएगा. रोना सिखाएगा. चुनाव आपका है कि जिंदा रहना है या मुर्दा. इसलिए जीने के लिए हंसना और रोना दोनों ज़रूरी है और गंभीरता मतलब मृत्यु.

5. करोड़ों लोग हैं जिनके आंसू सूख गए है. उनके जीने की चाहत, आत्मा से जुड़ाव मर चुका है. उन्हें ख़ुद पर रोना और हंसना सीखना होगा. कब तक दूसरों के दुखों में खुशियाँ तलाशते खुद को संतुष्ट करने का ग़लत प्रयास करते रहेंगे? उन्हें जुड़ना होगा एक बच्चे की तरह और मुस्कुराना होगा नहीं तो पृथ्वी मानो साँस लेते मुर्दों का बोझ सह रही है.

6. याद रखिये कि हंसते हुए थॉट्स रुक जाते हैं. जैसे कोई शानदार चुटकुला सुना तो जोर की हंसी अपने आप आ जाती है. उस अवस्था में चल रहे विचार थम जाते हैं. आप की ऊर्जा लौट आती है. अगर आप हंसते हुए भी विचार करते चल रहे हो तो आपका हंसना कमज़ोर और बेमानी होगा. आपकी हंसी अपंग और नकली होगी. हंसना, रोना और नाचना तीनों ही परिपक्वता के दरवाजे हैं. पर ये तभी खुलेंगे जब आप दिल से करोगे. दिखाने के लिए करोगे तो मतलब साफ़ है कि अभी जिंदा नहीं हुए हो. कब्र पर कब्ज़ा किये बैठे हो कि जमीन का ये हिस्सा सिर्फ़ मेरा है.

7. लाफिंग बुद्धा को देखो. बस हंसता ही दिखता है. आप किसी के बारें में पूछो और वो हंसता रहेगा. आप किसी के बारें में ना भी पूछो और वो हंसता रहेगा. बोलेगा कुछ नहीं. बस हंसना ही उसका संदेश है. और उसको देख कर सब हंसते हैं. वो क्या सोच के हर बात पर मुस्कुराता है, ये कमाल की साइंस है पर क्या हमारी साइंस सीरियसनेस के अलावा भी कुछ और सिखा रही है?


अंत में जाते जाते...
हंसना मना है: एक ऑफिस में बॉस अपने वर्कर्स को चुटकुले सुना रहा था. सब लोग हंस रहे थे. बॉस चुटकुला सुनाये तो हँसना तो पड़ता ही है. नौकरी जो बचानी है आख़िर. वर्कर्स में से एक महिला रिसेप्शनिस्ट बिल्कुल चुप थी. बॉस ने पूछा व्हाई आर यू नौट लाफिंग? महिला ने उत्तर दिया – ‘मैं इस महीने के अंत में जॉब से रिजाइन दे रहीं हूँ तो हंस कर क्या मिलेगा?’.

सार: मतलब ये कि अब हंसना भी एक बिज़नेस हो चला है. इसकी प्यूरिटी ख़त्म हो रही है. सच मानिये कि अगर आप हंसना भूल रहें हैं तो बड़ी भारी भूल कर रहे हैं. अपनी ओरिजिनालिटी, अपना भोलापन खो रहे हैं. दूसरों को हंसाएं और खुद हंसी आपके गले से लिपट जाएगी. और जब आप को दूसरों का अच्छा करके रोना भी पड़े तो रो लेना. वो ख़ुशी के आंसू होंगे जो आपको जिंदा करते रहेंगे हमेशा. आपके रोने को नेचुरल कर देंगे. आपकी हंसी को नेचुरल कर देंगे, एक बच्चे की हंसी जैसा. बस सच के साथ बहना. फिर कोई दुःख आपको सता नहीं सकेगा. और ये पैसे से नहीं खरीदा जा सकता.


जिंदा रहिये. जिंदा रखिये. 

Feb 8, 2018

NEET 2018



देशभर के मेडिकल कॉलेजों में MBBS और BDS में एडमिशन के लिए CBSE ने NEET 2018 एग्जाम का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है.

1. Exam Date: 6 मई 2018


2. Exam रिजल्ट Announcement: जून 2018


3. First Counseling: 12 जून से 24 जून 2018


4. Online Registration: 9 फ़रवरी से 9 मार्च 2018

5. Online Registration:  वेबसाइट cbseneet.nic.in पर

6. Exam Fee जमा करने की अंतिम तारीख़: 10 मार्च 2018

7. Exam Fee (General) : 1400 रुपये

8. Exam Fee (आरक्षित श्रेणी): 750 रुपये

9. आधार कार्ड अनिवार्य लेकिन यह जम्मू-कश्मीर, असम एवं मेघालय में अभी लागू नही

10.  NRI स्टूडेंट्स के लिए पासपोर्ट नंबर देना अनिवार्य

11.  अधिकतम आयु सीमा: 25 साल. आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को 5 वर्ष की छूट

12.  NEET Exam प्रयास सीमा: General Student के लिए 9 और आरक्षित श्रेणी के लिए 14 चांस

13.  NEET Exam पास करके ही विभिन्न सरकारी तथा प्राइवेट कॉलेजों के मेडिकल तथा डेंटल स्नातक कोर्स में प्रवेश

14. Eligibility: स्टूडेंट को 12 वीं या समकक्ष परीक्षा के PCB विषयों में न्यूनतम 50% marks (सामान्य छात्र ), 45% marks (सामान्य श्रेणी के विकलांग छात्र) तथा 40% marks (अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्र) प्राप्त करना जरूरी

15.  Exam Pattern: 180 MCQs

16.  Exam Mode: Pen एंड Paper

17.  Exam Duration : 3 Hours

18. Exam Language: अंग्रेजी, तमिल, हिंदी, असमिया, बंगाली, गुजराती, मराठी, उड़िया, कन्नड़ और तेलुगु

19.   Exam Marks: For each Right Answer – Plus 4 Marks एंड for the Wrong Answer- Minus 1 Mark

20.  Exam Questions: रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, वनस्पति विज्ञान और प्राणि विज्ञान (45 MCQs each). टोटल Questions: 180. टोटल Exam मार्क्स: 720

21. Study बुक्स एंड other Material लाइक प्रीवियस इयर्स क्वेश्चन पेपर्स एंड सैंपल पेपर्स

22.  टेक केयर ऑफ़ हेल्थ एंड डोंट बी स्ट्रेस्ड


बेस्ट ऑफ़ सक्सेस.

जगजीत सिंह




अब किसी से क्या कहें…
अपने दिल की दास्ताँ…।
बस खुदा का शुक्र है…
जो भी हुआ अच्छा हुआ…।
तुमने दिल की बात कह दी…
आज ये अच्छा हुआ… ।

जब भी गज़ल- गायकी की बात होती है. जगजीत सिंह से ही बातचीत की शुरुआत होती है. हो भी क्यों ना ? गजल को आम आदमी के बीच लोकप्रिय बनाने में जगजीत सिंह का योगदान हिंदुस्तान कैसे भूल सकता है? ग़ज़ल के महानायक जगजीत सिंह आज 8 फरवरी के दिन ही जन्मे थे. आज चाहे वो हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी मखमली आवाज आज भी हमारे जीवन में गुलाब की तरह महकती है.

आइये जानते हैं गज़ल की इस महान आत्मा के बारे में.
1. जगजीत सिंह का जन्म 8 फरवरी 1941 को राजस्थान के श्रीगंगानगर में हुआ था.

2. उनकी Schooling खालसा स्कूल, श्रीगंगानगर में हुई. जालंधर के DAV कॉलेज से उन्होंने ग्रेजुएशन किया और हरियाणा की Kurukshetra University से उन्होंने हिस्ट्री में पोस्ट ग्रेजुएशन की.

3. Kurukshetra University के उस समय के कुलपति प्रोफ़ेसर सूरजभान ने जगजीत सिंह जी की संगीत की प्रतिभा को भांप लिया और उनको म्यूजिक के फ़ील्ड में आगे बढ़ने के लिए उत्साहित किया। उनके मोटिवेशन से जगजीत 1965 में मुंबई चले आये.

4. जगजीत सिंह ने अपनी संगीत समझ को गहराई देने के लिए पंडित छगन लाल शर्मा के मार्गदर्शन में दो साल तक शास्त्रीय संगीत सीखा. उसके बाद उन्हें उस्ताद जमाल ख़ान साहब से ख्याल, ठुमरी और ध्रुपद की बारीकियां सीखने का अवसर भी प्राप्त हुआ.

5. अब उनके संघर्ष करने की बारी आ चुकी थी. मुंबई में शुरुआती दिनों में वो पेइंग गेस्ट के तौर पर रहे.

6. शुरू में पेट भरने के लिए वो विज्ञापनों के लिए जिंगल्स गाते और शादी या किसी फंक्शन में अपनी प्रस्तुति देकर  अपनी रोज़ी रोटी का जुगाड़ करते.

7. 1967 के दिनों में उनको मुलाकात चित्रा जी से हुई. दोनों को एक दूसरे का साथ अच्छा लगा और 1969 में दोनों ने शादी कर ली.

8. शुरू के दिनों में उन्हें कॉलेज स्टूडेंट्स की चॉइस के गाने ही गाने पड़ते थे क्योंकि शास्त्रीय संगीत को सुनने वाली ऑडियंस अभी जगजीत सिंह की रेंज से बाहर थी.

9. फिर एक दिन जगजीत का सितारा चमकने का दिन आ ही गया. मशहूर म्यूज़िक कंपनी H.M.V. को उस वक़्त एक क्लासिकल संगीत एल्बम बनानी थी. जगजीत ने मौका नहीं गवांया और नतीज़ा ये रहा कि 1973 में उनका पहला एलबम ‘द अनफ़ॉरगेटेबल्स’ रिलीज़ हुआ और सुपरहिट रहा. अब जगजीत सिंह का नाम और कद म्यूजिक इंडस्ट्री में बढ़ने लगा.

10. जगजीत सिंह गज़ल को आम आदमी तक ले जाना चाहते थे. उन्होंने इसके लिए गायकी में खूब Experiments भी किये. इस बात के लिये उन्हें उस समय के दिग्गजों की आलोचना भी सहनी पड़ी परन्तु वो अपना काम करते रहे.

11.  जगजीत साहब ने मीरो-ग़ालिब, फ़ैज-फ़िराक़, बशीर बद्र, गुलज़ार, निदा फ़ाज़ली और जावेद अख़्तर जैसे महान शायरों की गज़लों को अपनी मखमली आवाज़ दी.

12.  लता जी के साथ उन्होंने एल्बम ‘सजदा’ की, जो बहुत पसंद की गयी. निदा फ़ाज़ली के साथ एलबम ‘इनसाइट’ और जावेद साहब के साथ ‘सिलसिले’ सुपरहिट रहा.

13.  गुलज़ार के साथ उनकी दोस्ती भी एक मिसाल बनी. उनके साथ जगजीत सिंह ने ‘मिर्ज़ा ग़ालिब’, ‘मरासिम’‘, कहकशां, कोई बात चले’ और डिफ़रेंट स्ट्रोक्स जैसी Superduper ग़ज़ल एल्बम बनाई.

14. जिंदगी का सफ़र लेकिन सबके लिए हमेशा छावं नहीं देता. जगजीत सिंह को भी जिंदगी की कठिन परीक्षा देनी पड़ी. उनके इकलौते बेटे विवेक सिंह की साल 1990 में एक कार दुर्घटना में मौत हो गई. अपने बेटे की मौत से जगजीत सिंह टूट गए. वो सालों तक सदमे में रहे और  इस हादसे से उबरने में उन्हें काफी वक्त लगा.

15.  जगजीत सिंह ने न केवल हिंदी बल्कि पंजाबी, बंगाली, गुजराती और नेपाली भाषाओं में गाना गाकर हर वर्ग के श्रोता को अपना दीवाना बना लिया.

16.   ग़ज़ल गायकी में उनके योगदान को सम्मान देते हुए सरकार ने उन्हें पद्मश्री और पद्मविभूषण से भी नवाजा.

17.   अक्टूबर 10, 2011 को जगजीत सिंह साहब ने आखिरी सांसें ली.

18.  जगजीत सिंह ऐसे फनकार थे जिनकी तुलना किसी से करना जैसे सूरज को रोशनी दिखाने जैसा होगा. मोहब्बत के अलफ़ाज़, ज़ज्बात को बयाँ करना, और जुदाई के दर्द को सुरों में ढालना कोई जगजीत साहब से सीखे.

19. वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी.....तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो...तेरे आने की जब ख़बर महके....पत्थर के ख़ुदा, पत्थर के सनम....न जाने कितनी अमर गज़ल सुना गए जगजीत साहब. सुन कर लगता है कि हम सब की जिंदगी मानो जी हो जगजीत साहब ने....अकेले.


आज का ये आर्टिकल इस महान व्यक्तित्व को समर्पित.