Mar 10, 2018

Miracles




अंग्रेजी में एक कविता है कि तितली को बगीचे में अगर पकड़ने के लिए दौड़ो तो वह हाथ नहीं आती. परंतु आप चुपचाप बैठ जाओ या घूमते रहो तो वह स्वयं आकर कंधे पर बैठ जाती है. 

इसी प्रकार जो व्यक्ति Life में ईश्वर (GOD) को ध्येय बनाकर पाने का प्रयत्न करते हैं, उनके लिए बड़ी मुश्किल है ईश्वर-प्राप्ति. क्योंकि GOD किसी नियम के मोहताज़ नहीं. 

जिस साधना पद्धति से आपको प्रेम है. जिसे करने में खुशी होती है, वह साधना ही ईश्वर तक पहुंचा सकती है. ध्यान ईश्वर प्राप्ति में नहीं, बल्कि साधना से प्राप्त होने वाली खुशी में ही होना चाहिए. वही गहराई में जाकर आपको आनंद प्रदान कर सकती है.

ध्यान दीजिये कि अपने किसी शौक के काम में मनुष्य जब तल्लीन हो जाता है, जो एक गहरी प्रसन्नता होती है, उसमें थकावट भी नहीं होती और फल की इच्छा भी नहीं होती. केवल कर्म ही प्रसन्नतादायक होता है. कर्म स्वयं निष्काम हो जाता है. यह निष्कामता ही ईश्वर की प्राप्ति है.



एक फकीर से किसी ने पूछा, ''ईश्वर है, तो दिखाई क्यों नहीं देता?''
उस फकीर ने कहा, ''ईश्वर कोई वस्तु नहीं है, वह तो अनुभूति है. उसे देखने का कोई उपाय नहीं, हां, अनुभव करने का अवश्य है.'' किंतु, वह जिज्ञासु संतुष्ट नहीं दिखाई दिया. उसकी आंखों में प्रश्न वैसा का वैसा ही खड़ा था. तब फकीर ने पास में ही पड़ा एक बड़ा पत्थर उठाया और अपने पैर पर दे मारा. उसके पैर को गहरी चोट पहुंची और खून बहने लगा. वह व्यक्ति बोला, ''यह आपने क्या किया? इससे तो बहुत पीड़ा होगी? यह कैसा पागलपन?''

वह फकीर हंसने लगा और बोला, ''पीड़ा दिखती नहीं, फिर भी है. प्रेम दिखता नहीं, फिर भी होता है. ऐसा ही ईश्वर भी है. और Miracles ऐसे ही हो जाते हैं.

जीवन में जो दिखाई पड़ता है, उसकी ही नहीं- उसकी भी सत्ता है, जो कि दिखाई नहीं पड़ता है. और, दृश्य से अदृश्य की सत्ता बहुत गहरी है, क्योंकि उसे अनुभव करने को स्वयं के प्राणों की गहराई में उतरना आवश्यक होता है। तभी वह ग्रहणशीलता उपलब्ध होती है, जो कि उसे स्पर्श और प्रत्यक्ष कर सके। साधारण आंखें नहीं, उसे जानने को तो अनुभूति की गहरी संवेदनशीलता पानी होती है. तभी उसका आविष्कार होता है. और, तभी पता चल पाता है कि वह बाहर नहीं है कि उसे देखा जा सके, वह तो भीतर है, वह तो देखने वाले में ही भीतर छुप कर बैठा है.



संसार में प्राकृतिक शक्तियों का खेल हो रहा है. पृथ्वी, चंद्र आदि ग्रहों की गति खेल या नृत्य के समान है. मनुष्य भी जन्म लेकर अभिनय करने के लिए इस संसार रूपी रंग मंच पर आता है. 

मृत्यु के साथ अभिनय पूरा हो जाता है. और जीवन के नाटक का समय समाप्त हो जाता है. बजने वाली तालियां फ़िर सुनाई भी नहीं देती. और सिर्फ़ आपको ही पता होता है कि आगे क्या हुआ? कौन आपके साथ गया? या आप क्या अपने साथ ले कर गए?


सार: सुखी व्यक्ति से मैत्री करो, दुःखी व्यक्ति पर करुणा, पुण्यात्मा को देखकर प्रसन्न हो जाओ और पापी की उपेक्षा करो.

परंतु हम कर देते हैं उल्टा. सुखी व्यक्ति से नफ़रत करते हैं. दुःखी व्यक्ति की सहायता करने की बजाय उसे कोरी सहानुभूति देने में लग जाते हैं. क्यों? क्योंकि उसके संपर्क में अपने आपको बड़ा समझने का मौका जो मिलता है. जब किसी का नुकसान हो जाता है तो हमारे चेहरे पर एक अलग सा तेज आ जाता है, और हम शोक प्रकट करने चल देते हैं. किसी पुण्यात्मा को देखकर उस पर पाखंडी होने का संदेह जताने लगते है. ग़लत व्यक्ति की बुराई और आलोचना करते हैं, इससे वह गुस्से में आकर और अधिक ग़लत काम करता है. क्योंकि अपनी नज़र में तो वो सही ही है, ठीक उसी तरह जैसे के हम सभी. यदि उसको दूर ही रहने दें तो वह सुधर सकता है और हम भी शांत बने रह सकते हैं.

प्रत्येक काम यदि आवश्यकता के समय कर लिया जाए तो उस समय मन विचार-शून्य होता है अर्थात्‌ प्रसन्न और शांत होता है. इसी तरह मनुष्य को व्यवसाय भी अपनी रुचि या स्वभाव के अनुसार चुनना चाहिए, उससे सुख स्वयं उत्पन्न होता है. उसे खरीदना या किसी से मांगना नहीं पड़ता.

सुख स्वयं मिलने वाली चीज है, जैसे हम गेहूं और चावल अपने खाने के लिए बोते हैं, तो उनकी खेती से पशुओं के लिए भूसा अपने आप मिल जाता है. या मिट्टी के तेल को साफ करते हैं उससे कचरा (पैराफीन हार्ड) निकलता है. उससे मोमबत्तियां और नकली कपूर स्वयं मिल  जाता है. और विशेष यंत्र बनाने के लिए लोहे को जब उबाला जाता है, तो गुड़ के शीरे की तरह जो उसके ऊपर मैल आती है, उससे कैंचियां, पाइप वाली खाट एवं कुर्सियां स्वयं बन जाती हैं.

Mar 9, 2018

दोस्ती




दो सगे भाई थे. दोनों ही राजा थे लेकिन दोनों अलग अलग राज्यों मेँ अपना शासन संभालते थे. बड़े राजा के राज्य मेँ प्रजा बेहद खुशहाल, सुखी और संतुष्ट थी. राज्य मेँ हमेशा शांति बनी रहती थी और तनाव का नामोनिशान तक नहीँ था. वहां की प्रजा हमेशा राजा के गुण गाती थी और अपनी जिम्मेदारियों का पालन भी अच्छी तरह से करती थी ताकि राजा का विश्वास ख़त्म ना हो.

लेकिन छोटे भाई अर्थात् छोटे राजा के राज्य मेँ आए दिन झगड़े होते रहते थे और वहां प्रजा बहुत ही ज्यादा दुखी रहती थी. जब छोटे राजा को पता चला कि उसके बड़े भाई के राज्य मेँ ऐसी कोई भी परेशानी नहीँ है तो वह अपने बड़े भाई के पास गया और उनके राज्य की खुशहाली का राज उनसे जानने की कोशिश की.

तब बड़े भाई ने छोटे भाई को अपने राज्य की खुशहाली का रहस्य बताते हुये कहा कि “भाई मेरे राज्य मेँ शांति मेरे 4 बेहतरीन दोस्तों से दोस्ती की वजह से है.”
इस बात को सुनते ही छोटे भाई की उत्सुकता और भी बढ़ गई. उसने कहा- कौन हैं आपके वो  4 दोस्त ?
क्या वे मेरी भी मदद करेंगे?
बड़े राजा ने कहा – क्यों नहीं, जरूर कर सकते हैं?
तो सुनो, मेरा पहला दोस्त है - ‘सत्य.’ वह मुझे कभी असत्य बोलनेँ नहीँ देता है.
दूसरा दोस्त है - ‘प्रेम.’ ये मुझे कभी नफ़रत करने का मौका ही नहीं देता.
तीसरा दोस्त है - ‘ईमानदारी.’ ये मुझे हमेशा लोभ और लालच से बचाती है और बेईमानी को मुझ तक आने ही नहीं देती.
और मेरा चौथा और अंतिम दोस्त है - ‘त्याग.’ -  त्याग की भावना मेरे अंदर कभी जलन पैदा होने नहीं देती और हमेशा मुझे ईर्ष्या से बचाती है.
ये चारों दोस्त हमेशा मेरा साथ देते हैँ और इस तरह हमारे राज्य की रक्षा भी करते हैं.
छोटे राजा को जीवन की असली सफलता का रहस्य समझ मेँ आ गया. अब उसने भी अपने राज्य में उन चार दोस्तों को हमेशा के लिए बुलाने की ठान ली.

Mar 8, 2018

#PressForProgress




अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है. ये महिलाओं का स्पेशल दिन है. संसार की रचना करने वाली और हम सब की जन्मदाता वो ही है. मां, पत्नी, बहन, दोस्त जैसे कई रिश्तों में एक महिला हमेशा हमारे साथ होती है. मां के रूप में एक महिला को ईश्वर से भी बढ़कर माना गया है.

ये दिन International Women’s Day के रूप में कुछ ज्यादा ही ख़ास मायने रखता है. ये दिन सारी दुनिया में महिलाओं को सम्मान देने, हर क्षेत्र में महिलाओ द्वारा प्राप्त की गयी उपलब्धियों को मनाने और लिंग समानता पर बल देने के लिए मनाया जाता है. इस दिन महिलाओं को उनके द्वारा दिए गए योगदानों को सम्मान दिया जाता है और समाज और परिवार के लिए उनके समर्पण को नमन किया जाता है.

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2018 की थीम क्या है?
हर साल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के लिए एक थीम फाइनल की जाती है. इस साल 2018 की थीम है #PressForProgress. इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं को उनके अधिकारों के लिए प्रोत्साहित और जागरूक करना है।

हम अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस क्यों मनाते हैं?  
किसी भी देश की प्रगति के लिए बेहद आवश्यक है उस देश की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रो में महिलाओ की भूमिका और उनका आगे आना. बिना महिलाओं के योगदान के किसी भी देश को प्रगतिशील नहीं कहा जा सकता. ऐसे कई देश है जहां सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रो में महिलाओ की भागीदारी पुरूषों के मुकाबले बहुत कम है. और तो और, कई जगहों पर तो महिलाएं पुरुषों की तुलना में बहुत पिछड़ी हुई है. फ़िर चाहे वो शिक्षा क्षेत्र हो, समान अधिकार से जुड़े मसलें हो या फ़िर सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे. अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन इन असमानताओं को मिटाने, समाज को ध्यान दिलाने के लिए सारी दुनिया महिलाएं एक साथ एकत्रित होती है. अलग-अलग कार्यक्रम, स्पीच और सेमिनार आयोजित होते हैं जिनमें महिलाओं की भूमिका पर विचार-विमर्श किया जाता है.इस अवसर पर उन महान महिलाओं को सम्मानित भी किया जाता है जिन्होंने सभी असमानताओं से लड़ते हुए कमाल की उपलब्धियाँ हासिल की हों.

भारत में भी महिला दिवस बड़े स्तर पर मनाया जाने लगा है. इस दिन महिलाओं को समाज में उनके विशेष योगदान के लिए सम्मानित किया जाता है और महिलाओं के लिए काम कर रहे कई संस्थानों द्वारा कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. साहित्य, शिक्षा, सोसाइटी, राजनीति, संगीत, फिल्म, खेल आदि क्षेत्रों में श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए महिलाओं को सम्मानित किया जाता है.






Mar 5, 2018

अमेज़न



·      Day -1 Concept: आप जानकर हैरान होंगे कि बेजो कहीं पर भी अपना काम कर रहें हों, पर जिस बिल्डिंग में वो काम काम करते मिलेंगे, उस बिल्डिंग का नाम हमेशा ‘Day-1’ रखते हैं. उनका मानना है कि ऐसा करने से उन्हें तेजी से decision लेने में बहुत मदद मिलती है. Fast Decision लेने के साथ-साथ बेजो इस बात का भी पूरा ख़याल रखते हैं कि काम की क्वालिटी से कोई Compromise न हो.

·      Re-invent Everything: बेजो का दूसरा गोल्डन मूलमंत्र है कि किसी भी चीज़ को ट्रेडिशनल तरीके से करते रहने से बचना चाहिए. उनके अनुसार ‘हर छोटी से छोटी चीज़ को re-invent करने की कोशिश करनी चाहिए. इससे हमें उस चीज़ को सही तरीके से करने और अच्छा करने की ऊर्जा मिलती रहती है. परम्परागत तरीके से हर चीज़ को देखने का मतलब है कि आप कभी कुछ नया नहीं करने वाले हैं.


अपने Innovative सोचने के तरीके से बेजो ने ये दो कमाल कर दिखाए.

1.  2013 में अमेज़न ने Kindle Tablets लांच किये. ऐसे कामों के लिए बड़ी-बड़ी कम्पनीज टेक्निकल कांफ्रेंस करके प्रोडक्ट को मार्किट में पेश करतीं हैं. बेजो ने क्या किया? सिर्फ़ 20 से 25 Reporters से संपर्क किया. उनके अलग-अलग Areawise ग्रुप्स बना दिए. और हर ग्रुप को अपने प्रोडक्ट का अलग-अलग Demo दिया. सभी रिपोर्टर्स इम्प्रेस हुए. उन्हें लगा कि इतनी बड़ी कंपनी का CEO डायरेक्ट उनसे बात कर रहा है. अमेज़न को इससे ग़ज़ब की सफलता मिली.

2.  भारत में अमेज़न को Establish करने के लिए बेजो ने 10,000 से भी ज्यादा छोटे-बड़े बिजनेसमैन को Identify किया. उनसे बातचीत की और ऑनलाइन ट्रेडिंग से जुड़े उतार-चढ़ाव Share किये. ऐसा करते रहने के दौरान बेजो ने ये जान लिया की चाय कार्ट यानि वो ट्राली जिसमें चाय ऑफर की जाती है, एक शानदार उभरते मार्केट का भारत में कामयाब Concept हो सकता है. उन्होंने इसे Try किया और नतीजा सब के सामने है. आज अमेज़न इंडिया में धूम मचा रही है.

आप क्या सोच रहें हैं?