Mar 16, 2018

भारतीय जनता - कितनी ख़ुश हैं ?



यूनाइटेड नेशन ने हाल ही में 2017 के लिए वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट जारी कर दी है. इसमें लोगों की खुशहाली को लेकर किये गए सर्वेक्षण के आंकड़े प्रस्तुत किये है. 

रिपोर्ट में बताया गया है कि विश्व में सबसे खुशहाल देश कौन सा है? यूनाइटेड नेशन की संस्‍था सस्‍टेनेबल डेवलपमेंट सॉल्‍यूशंस नेटवर्क (SDSN) ने ये वर्ल्‍ड हैप्‍पीनेस रिपोर्ट-2018 प्रकाशित की है.

खुशहाली का सीधे-सीधे मतलब है कि किस देश के नागरिक कितने खुश हैं? और आंकड़े हैरान कर देने वाले हैं. 

2017 की रिपोर्ट में विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत 156 देशों की लिस्ट में जहां 133वें नंबर पर आया है. वहीं छोटा सा देश फिनलैंड पहले नंबर पर है. फिनलैंड ने खुशहाल देशों की लिस्ट में नॉर्वे को पछाड़कर पहला स्थान हासिल किया है. 2016 में नॉर्वे नंबर 1 पर रह चुका है. 2016 में भारत का नंबर 122वां रहा था. यानि भारत ख़ुशी के मामले में 11 स्थान नीचे ख़िसक गया है.

भारत के पड़ोसी देशों का नंबर
हमारे पड़ोसी देशों की बात करें तो हैरानी और बढ़ने वाली है. रिपोर्ट के मुताबिक भूटान, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका, बांग्लादेश, चीन, और पाकिस्तान और जैसे देशों से हम खासे पीछे चल रहे है. पापुलेशन में जहां भारत ने सबको पछाड़ दिया था, वही खुशहाली के मामले में इन देशों ने भारत को पीछे छोड़ दिया है.
टॉप 5 खुशहाल देश
टॉप 5 नाख़ुश देश
एशियाई देश
खुशहाली रैंक 2017
फिनलैंड
बुरुंडी
पाकिस्तान
75
नॉर्वे
मध्य अफ्रीका
चीन
85
डेनमार्क
दक्षिणी सूडान
भूटान
97
आइसलैंड
तंजानिया
नेपाल
101
स्विट्जरलैंड
यमन
भारत
133


प्रति व्‍यक्ति जीडीपी
भ्रष्‍टाचार में कमी
सोशल फ्रीडम
स्‍वस्‍थ जीवन की संभावना
सामाजिक सहयोग
SDSN के आधार फैक्टर्स

SDSN ने 2015 से 2017 के दौरान अलग-अलग फैक्टर्स के आधार पर इस लिस्ट को तैयार किया है. प्रमुख फैक्टर्स ऊपर की टेबल में दर्शाए गए हैं.
सोर्स: सस्‍टेनेबल डेवलपमेंट सॉल्‍यूशंस नेटवर्क

Mar 15, 2018

नवरात्रि



नौ देवियां
जीवनी शक्ति मां दुर्गा के नौ रूप हैं :
1. शैलपुत्री
2. ब्रह्मचारिणी
3. चंद्रघंटा
4. कूष्माण्डा
5. स्कन्दमाता
6. कात्यायनी
7. कालरात्रि
8. महागौरी
9. सिध्दीदात्री

नवरात्र क्यों, नव-दिन क्यों नहीं?
प्राचीन ऋषियों-मुनियों ने ने रात्रि के महत्व को अत्यंत सूक्ष्मता के साथ वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में समझने और समझाने का प्रयत्न किया. रात्रि में प्रकृति की बहुत सारी रुकावटें खत्म हो जाती  हैं. आधुनिक विज्ञान भी इस बात से सहमत है. उदाहरण के लिए – अगर दिन में आप किसी को आवाज दें तो वह ज्यादा दूर तक नहीं जा पाती. लेकिन ये ही आवाज रात को दी जाए तो वह बहुत दूर तक जा सकती है. इसके पीछे दिन के डिस्टर्बेंस के अलावा एक वैज्ञानिक आधार यह भी है कि दिन में सूर्य की किरणें रेडियो तरंगों और साउंड की तरंगों को आगे बढ़ने से रोक देती हैं. रेडियो इस बात का जीता-जागता प्रमाण है. कम पॉवर के रेडियो स्टेशनों को दिन में पकड़ना यानि सुनना कई बार मुश्किल होता है. जबकि सूर्यास्त के बाद छोटे से छोटा रेडियो स्टेशन भी आसानी से सुना जा सकता है. इसीलिए, भारत के प्राचीन ऋषियों-मुनियों ने रात्रि को दिन की अपेक्षा अधिक महत्व दिया है. और ये ही कारण है कि दीपावली, होली, शिवरात्रि और नवरात्र आदि उत्सवों को रात में ही मनाया जाता है.

नवरात्र क्या है?
पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा के काल में एक साल की चार संधियाँ हैं. उनमें मार्च व सितंबर माह में पड़ने वाली गोल संधियों में साल के दो मुख्य नवरात्र पड़ते हैं. इस समय के दौरान रोगाणुओं, विषाणुओं आदि के आक्रमण की संभावना सबसे अधिक होती है. शारीरिक बीमारियाँ अचानक बढ़ जाती हैं. इसलिए इस समय पर अच्छा स्वस्थ रखने के लिए, शरीर को शुध्द रखने के लिए और तन-मन को निर्मल रखने के लिए की जाने वाली प्रक्रिया का नाम ही 'नवरात्र' है. इस समय शक्ति (देवी) के नव रूपों की उपासना की जाती है. 'रात्रि' शब्द सिद्धि का प्रतीक माना गया है. नव का मतलब है 9.

वर्ष में दो बार नवरात्र?
भारत के प्राचीन ऋषियों-मुनियों ने वर्ष में दो बार नवरात्रों का विधान बनाया है. विक्रम संवत के पहले दिन अर्थात चैत्र मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (पहली तिथि) से नौ दिन अर्थात नवमी तक. और इसी प्रकार ठीक छह महीने बाद आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से महानवमी अर्थात विजयादशमी के एक दिन पहले तक. सिद्धि और साधना की दृष्टि से शारदीय नवरात्रों को ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है. इन नवरात्रों में लोग अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति संचय करने के लिए अनेक प्रकार के यज्ञ, व्रत, पूजन, भजन, आदि करते हैं. शक्ति के 51 पीठों पर भक्त शक्ति की उपासना करने जाते हैं. जो भक्त इन शक्ति पीठों पर नहीं पहुंच पाते, वे अपने घर पर ही शक्ति की पूजा-अर्चना करते हैं.

क्या है नवरात्रों के पीछे का वैज्ञानिक रहस्य?
सूर्य की किरणें दिन के समय रेडियो तरंगों को जिस प्रकार रोकती हैं, उसी प्रकार मंत्र जाप की विचार तरंगों में भी दिन के समय रुकावट पड़ती रहती है. इसीलिए ऋषि - मुनियों ने रात का महत्व दिन की अपेक्षा बहुत अधिक कहा है. पूजा के समय, मंदिरों में घंटे और शंख की आवाज के वाइब्रेशन से दूर-दूर तक वातावरण कीटाणुओं से मुक्त हो जाता है. यह रात्रि का वैज्ञानिक रहस्य है. जो इस वैज्ञानिक तथ्य को ध्यान में रखते हुए रात्रियों में अपनी विचार तरंगों को वायुमंडल में भेजते हैं. उनके शुभ संकल्प अवश्य पूर्ण होते हैं. ऐसा माना जाता है.

अष्टमी या नवमी?
यह कुल की परम्परा के अनुसार तय किया जाता है.

जय माता दी.



इनपुट और आउटपुट


अभी कुछ पलों पहले ही महान साइंटिस्ट स्टीफन हाकिंग इस दुनिया को अलविदा कह गए. उन्होंने ब्रह्माण्ड की थ्योरी पर कमाल का काम किया था.
लेकिन उन्हें भी जाना पड़ा.
और कोई नहीं जान सका आज तक कि जाना क्यों पड़ता है? आप सोच सकते हैं, डिस्कस कर सकते हैं, ख़ुद को कन्विंस कर सकते हैं. डिबेट कर सकते हैं. अच्छा कह सकते हैं. बुरा कह सकते हैं. लेकिन जाना तो होगा ही.
ये ही एकमात्र स्टेबल थ्योरी है कि एक दिन कोई पॉवर आपको खींच लेगी. हमेशा के लिए. और ये सच सिर्फ़ आप तक सीमित रहेगा.
संसार में कितनी भी थ्योरी बन जायें. इस थ्योरी की सच्चाई और इसका पासवर्ड सिर्फ़ और सिर्फ़ उसके पास ही सुरक्षित रहेगा, जो वहा गया होगा. और ये पासवर्ड कोई दूसरा चुरा ही नहीं सकता.
ये ओपन नेटवर्क है. कोई सिक्यूरिटी मैकेनिज्म नहीं है, फ़िर भी नज़ारा देखिये कि आपका पासवर्ड कोई और नहीं चुरा सकेगा. और कमाल ये है कि आपका ये पासवर्ड आपको पता होगा लेकिन आप चाह कर भी किसी को बता नहीं सकते. बताइए? क्या आप ऐसा कर सकेंगे?
ये तो क्लाउड कंप्यूटिंग, फ़ोग कंप्यूटिंग या बिग डाटा या फ़िर इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स के भी बियॉन्ड का मामला लगता है. अभी तो साइंटिस्ट इनकी ही वर्किंग और सिक्यूरिटी पर काम कर रहे हैं.
पर उस नेटवर्क का क्या जो ओपन है. सबको पता है. सबके पास उसके लॉग इन और पासवर्ड है. लेकिन मज़ाल है कि कोई उस नेटवर्क में सेंधमारी कर सका हो? ये सचमुच हैरानी से भर देता है जीवन को.
आप अगर सोचें तो देखेंगे कि अमीर हो या गरीब, समझदार हो या नादान, मालिक हो या नौकर, राजा हो या प्रजा, और लाखों केटेगरी में जन्में अरबों जीव-जंतु, फूल, पत्ते, फसलें. इन सभी को एक समय अपने नेटवर्क में वापिस जाना होगा.
इसलिए कुछ ऐसा कर जायें कि दूसरे नेटवर्क के लोग भी ये कह सकें की कमाल का यूजर था. 
और ये सिर्फ़ अपने तक सोचने का विषय नहीं है. ये किस्मत का विषय नहीं है. ये टेक्नोलॉजी का विषय भी नहीं है. ये आपको स्वयं को पहचानने का विषय है. ख़ुद से मुलाकात का विषय है. 

प्रैक्टिकल लाइफ में भी तो आप ये ही सब करते होंगे. 
दूसरों से तो ख़ूब मिलते हैं. हम एक बार ख़ुद से ही मिलें. हमारा ही नेटवर्क है. पता तो चले कि हम ख़ुद की कंपनी में कैसा महसूस करते हैं? ख़ुद के विचारों के साथ ख़ुद कैसे जी पाते हैं. फ़िर किसी और नेटवर्क की और देखने और तुलना करने के बोझ से शायद मुक्ति मिले. आप अब अच्छा महसूस करेंगे और दूसरे नेटवर्क के लिए प्रोडक्टिव भी.
और करना भी क्या था? 
इसे भी आज़मा कर देखिये. और ख़ुद को याद दिलाते रहियेगा कि आपका पासवर्ड सिक्योर है. प्रोसेसर अपना काम ख़ुद कर देंगे.
शायद फ़िर हम देख पायें कि हमारा नेटवर्क एक ही है जस्ट विद यूनिक पासवर्ड फॉर इच. फ़िर हमें कुछ नहीं करना होगा. नेटवर्क ऑटो-मोड पर काम करेगा. जैसा आप इनपुट देंगे. आउटपुट मिल जायेगा.
अच्छा इनपुट देते रहिये. शानदार आउटपुट लेते रहिये. पहले देना पड़ता है. इनपुट पहले है, फ़िर आउटपुट. बाकी किस्मत.


क्या आप अब भी इसे सिर्फ़ किस्मत का दस्तूर मानते हैं? या ये आप से ही जुड़ा सीधा-साधा मामला है. आपको पता ही होगा कि आपका नेटवर्क कौन सा है? और पासवर्ड? और इनपुट भी? 

Mar 14, 2018

स्टीफन हॉकिंग


जन्म: जनवरी 8, 1942.
मृत्यु: मार्च 14, 2018.

आधुनिक विज्ञान की दुनिया में अपने ज्ञान और शोध के कारण हॉकिंग दुनिया में एक अलग पहचान रखते थे. वह एक महान वैज्ञानिक और अद्भुत व्यक्ति थे जिनके कार्य और विरासत आने वाले लंबे समय तक जीवित रहेंगे. उनकी बुद्धिमतता और हास्य के साथ उनके साहस और दृढ़-प्रतिज्ञा ने पूरी दुनिया में लोगों को प्रेरित किया है.

हॉकिंग अपनी शारीरिक अक्षमता के बावजूद आज विश्व के सबसे बड़े वैज्ञानिक थे. उन्हें मोटर न्यूरॉन नाम की बीमारी थी. इस बीमारी में मनुष्य का नर्वस सिस्टम धीरे-धीरे खत्म हो जाता है और शरीर के मूवमेंट करने और कम्यूनिकेशन पावर समाप्त हो जाती है. स्टीफन हॉकिंग के दिमाग को छोड़कर उनके शरीर का कोई भी भाग काम नहीं करता था.

स्टीफन हॉकिंग ने एक बार बताया भी था कि उनकी बीमारी ने उन्हें वैज्ञानिक बनाने में सबसे बड़ी भूमिका अदा की थी. बीमारी से पहले वे अपनी पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे लेकिन बीमारी के दौरान उन्हें लगने लगा कि वे अब जिंदा नहीं रहेंगे जिसके बाद उन्होंने अपना सारा ध्यान रिसर्च पर लगा दिया. हॉकिंग ने ब्लैक हॉल्स पर रिसर्च किया है. स्टीफन हॉकिंग ने बिग बैंग सिद्धांत को समझने में भी अहम योगदान दिया था.

1974 में ब्लैक हॉल्स पर असाधारण रिसर्च करके उसकी थ्योरी मोड़ देने के कारण वे साइंस की दुनिया के सेलेब्रेटी बन गए थे.  हॉकिंग ने अपने रिसर्च के माध्यम से यह कहा था कि “ईश्वर ने यह दुनिया नहीं रची है बल्कि यह तो भौतिक विज्ञान के नियमों का नतीजा है”. अपनी किताब 'ग्रांड डिजाइन' में कहा था कि गुरुत्वाकर्षण जैसे कई नियम हैं और ब्राह्मांड कुछ नहीं से भी खुद को बना सकता है.

स्टीफन हॉकिंग ने ये अनुमान भी लगाया था कि ग्लोबल वार्मिंग और नए वायरसों के कारण संपूर्ण मानवता नष्ट हो सकती है. स्टीफन हॉकिंग की पीएचडी थीसिस को अब तक लाखों बार रेफ़र किया गया है.

हॉकिंग, एल्बर्ट आइंस्टिन के बाद दुनिया के सबसे महान सैद्धांतिक भौतिकीविद बने. दुनिया के सबसे प्रसिद्ध इस भौतिकीविद और ब्रह्मांड साइंटिस्ट पर 2014 में 'थ्योरी ऑफ एवरीथिंग' नामक फिल्म भी बन चुकी है.

हॉकिंग के पास 12 मानद डिग्रियां हैं. हॉकिंग के कार्य को देखते हुए अमेरिका का सबसे उच्च नागरिक सम्मान उन्हें दिया जा चुका है. ब्रह्मांड के रहस्यों पर उनकी किताब 'अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम' काफी चर्चित हुई थी.

जन्म और मृत्यु क्यों होती है?
और मृत्यु के बाद हमारी प्लेसमेंट कहां होती है? 
ये आने वाली पीढ़ियों के साइंटिस्ट्स ज़रूर खोज पाएंगे. लेकिन ये खेल नेचर को जाने बिना शायद ही खेला जा सके. फ़िर सभी इंडिया को समझने की कोशिश कर सकेंगे. क्या पता ब्रह्माण्ड से आगे भी कोई और हो?
फ़िलहाल स्टीफन हॉकिंग को और उनके ज़ज्बे और खोजों को नमन.

सरप्राइज

जिसके पास जो खजाना होता है, वो ही उसे आगे बाँट सकता है.

हम वो ही बाँट सकते हैं, जो हमारे पास है. कोई टेक्नोलॉजी बाँट रहा है. कोई डाटा, इंटरनेट और उसकी स्पीड बाँट रहा है. कोई नौकरियां बाँट रहा है. कोई आईडिया बाँट रहा है. कोई ऑफलाइन कुछ बाँट रहा है तो कोई ऑनलाइन बाँट रहा है.
ऐसे ही कोई दुःख बाँट रहा है. कोई सुख बाँट रहा है. कोई प्रेम बाँट रहा है तो कोई नफ़रत बाँट रहा है. कोई दिलों को बाँट रहा है. जिसके पास कुछ नहीं बाँटने को, वो ख़ुद को ही बाँट रहा है.
सबसे खुबसूरत बात ये है कि हर कोई कुछ ना कुछ बाँट रहा है.
जो जिसके पास ज्यादा है और उसके पास उसे रखने की जगह कम पड़ गयी है, वो वही बाँट रहा है.
इसी बीच एक ऐसे व्यक्तित्व भी हैं, जो आनंद बाँट रहे हैं. ये कमाल है. ये सद्गुरु है. जो ये बाँट रहे हैं, वो अगर हम ग्रहण करना सीख सकें तो शायद हमारे पास भी कुछ बांटने लायक इकठ्ठा हो सके? 
उनके विचार इस सदी के पार ले जाने वाले हैं. क्लासिकल हैं. अभूतपूर्व और गौरवशाली हैं.
आइये जानने और समझने की कोशिश करें कि सद्गुरु सबको क्या बताना चाहते हैं? और क्या वाकई ये सोचने के कोई नए मैजिकल मोमेंट्स तो नहीं?
ये आनंद का विषय है जिसके आगे और पीछे कुछ नहीं है. जो है, बस अभी है. 
ये एक शानदार सरप्राइज भी हो सकता है. जो आगे चल कर हमें हैरान भी कर सकता है? 
उनके अनुसार
वर्तमान में जीने के दो ही तरीके हैं.
पहला तो यह है कि बहुत तीव्रता के साथ क्रियाशील रहें और बिना सोचे बस अपने काम को करते जाएं. कोई इच्छा नहीं, कोई खास लक्ष्य नहीं, कोई महत्वाकांक्षा नहीं, बस काम करते जाना है.

दूसरा तरीका है कि अगर कोई स्थिर हो जाए, अकर्मण्यता की स्थिति में आ जाए तो भी ऐसा हो सकता है. 

या तो तीव्र क्रियाशीलता हो या फिर निष्क्रियता. या तो जबर्दस्त जुनून हो या बिल्कुल उदासीन.

दोनों ही तरीके आपको उस ओर ले जाएंगे, लेकिन समस्या यह है कि लोग कोई भी काम पूरी तरह से नहीं करते, क्योंकि उन्हें डर लगा रहता है कि पता नहीं क्या हो जाए. वे अपने काम में पूरे जुनून के साथ शामिल नहीं होते, ढीले पड़ जाते हैं. न तो वे पूरी तरह जुनूनी ही हो पाते हैं और न ही पूरी तरह उदासीन. हर स्थिति में वे खुद को रोकने लगते हैं। रोकने की यही आदत हर चीज को भविष्य में ले जाकर खड़ा कर देती है. ज्ञान प्राप्ति भी इसीलिए भविष्य में है, क्योंकि चीजों को रोकने की हमारी आदत हो गई है.
हमारे भीतर जीवन को सुरक्षित रखने की जो सहज प्रवृत्ति होती है, उसकी वजह से ही यह रोकने की आदत है. जीवित रहने की यह प्रवृत्ति हमारे भीतर बड़े गहरे बैठी हुई है. हम जहां भी जाते हैं, यही सोचते हैं कि खुद को कैसे बचाकर रखा जाए? यहां तक कि धर्म और अध्यात्म को भी खुद को बचाए रखने का साधन बना दिया गया है. धर्म और अध्यात्म आपको बचाने के लिए नहीं हैं, यह तो खुद को तपाने के लिए, तैयार करने के लिए है, वह भी पूरी जागरूकता के साथ. कोई और मुझे नहीं तपा रहा है, खुद मैं अपने आपको तपा रहा हूं.

खुद को बचाने की कोशिश
अब अगर आप खुद को बचाने की कोशिश में लगे हैं, या इस उम्मीद में हैं कि ईश्वर आपको बचा लेगा, तो आप बस खुद को बचाए रखने की प्रवृत्ति को और मजबूत बना रहे हैं.
जो लोग डर की वजह से प्रार्थना करते हैं, वे प्रार्थना के बारे में कुछ भी नहीं जानते. हमें कम-से-कम अपने जीवन-यापन की प्रक्रिया को अपने दिमाग और हाथ-पैर का इस्तेमाल करके सहज और सरल तरीके से संभालना चाहिए. अपनी जीवन-रक्षा के लिए हमें किसी ईश्वरीय शक्ति को बीच में लाने की जरूरत नहीं है,
लेकिन आजकल इसी का पूरा खेल है. लोग ध्यान इसलिए करते हैं कि जीवन सुरक्षित रह सके. प्रार्थना इसलिए करते हैं कि सुरक्षित रह सकें. इस दुनिया में 99 प्रतिशत प्रार्थनाओं में ईश्वर से कुछ न कुछ मांगा जाता है या सुरक्षा की गुहार लगाई जाती है. मैं तो यहां तक कहूंगा कि 99 प्रतिशत लोग प्रार्थना इसीलिए करते हैं, क्योंकि उनके भीतर कहीं न कहीं कोई डर है. अगर उनके भीतर कोई डर न होता तो वे प्रार्थना नहीं करते. जो लोग डर की वजह से प्रार्थना करते हैं, वे प्रार्थना के बारे में कुछ भी नहीं जानते. लेकिन आप खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, आप कहीं पहुंचना चाहते हैं और इसके लिए आप प्रार्थना करते हैं. लोगों के लिए प्रार्थना बस एक करेंसी की तरह है, और ज्यादातर लोगों के लिए एक बेकार करेंसी की तरह.
बहुत सारे लोग धनी बनने के लिए प्रार्थना कर रहे हैं, सफल होने के लिए प्रार्थना कर रहे हैं, तो कोई परीक्षा पास करने के लिए प्रार्थना कर रहा है, लेकिन मुझे लगता है कि ये वे लोग हैं, जो ज्यादातर फेल हो जाते हैं. इसकी वजह यही है कि अपना काम सही तरीके से करने के बजाय वे लोग हर वक्त किसी ईश्वरीय शक्ति के हस्तक्षेप की बात सोचते रहते हैं.

सिर्फ शून्यता असीम हो सकती है
बिना मन के आप खुद को बोर महसूस करते हैं. इसलिए पूरे जीवन आप यही कोशिश करते रहे हैं कि मन की सक्रियता को कैसे बढ़ाया जाए. आत्म-ज्ञान की चाहत रखने का मतलब है कि आप अपने अनुभव में असीम होना चाहते हैं. आपके अनुभव में सिर्फ एक ही चीज है, जो असीम हो सकती है और वह है ‘शून्यता.’ और इसे ही आप हमेशा रोकने की कोशिश में लगे रहते हैं. आप ‘शून्यता’ जैसा महसूस नहीं करना चाहते.
आप हमेशा कुछ चाहते हैं। आप शिक्षित होना चाहते हैं, आप प्यार चाहते हैं, आप जीवित रहना चाहते हैं, और भी न जाने क्या-क्या चाहते हैं. क्यों? क्योंकि इन सब चीजों के दम पर ही आपको यह लगता है कि आप कुछ हैं. इसी वजह से असफलता और सफलता जैसे शब्द बने हैं क्योंकि ‘शून्यता’ जैसा महसूस ही नहीं करना चाहते. आप तो कुछ बनना चाहते हैं. लोग इस दुनिया में प्रेम के लिए बेतहाशा भटक रहे हैं, क्योंकि यही चीज है जो उन्हें कुछ होने का अहसास कराती है. 

कोई दूसरा उन्हें इस बात का यकीन दिलाता है कि वे वाकई कुछ हैं. यह बड़ा दुखद है. सुंदर है, लेकिन दुखद है कि आपको अच्छा महसूस करने के लिए किसी दूसरे इंसान की हरी झंडी की जरूरत पड़ती है.

सही काम नहीं, काम को करने का तरीका होना चाहिए
तो सही चीज क्या है, जो करनी चाहिए? करने के लिए सही चीज क्या है, मसला यह नहीं है. बात यह है कि वह हर चीज जो हम करते हैं उसको करने का सही तरीका क्या है?
ऐसे में आपको या तो पूरी तरह स्थिर और शांत होकर बैठना सीखना चाहिए या फिर बेहद क्रियाशील होना चाहिए. आप दोनों भी करने की कोशिश कर सकते हैं.
लोग हमेशा यह ढूंढते हैं कि उनके लिए सही काम क्या है? कोई सही काम नहीं है. अभी हम जो भी कर रहे हैं, उसे करने का सही तरीका क्या है – अगर हम यह जान लें, तो मन सुलझ जाता है. हमने जिस काम को भी करने के लिए चुना है, बस उसे करते जाएं, न इधर देखें, न उधर देखें, बस उस काम को करें. इससे हमें मन और समय से परे जाने का रास्ता मिलता है.
समय के मुखौटे ने लोगों को फंसा लिया है, क्योंकि वे बिना इच्छा के अपने जीवन को आगे बढ़ाना ही नहीं चाहते. इच्छा समय पैदा करती है. अगर आप बिना किसी इच्छा के, बिना किसी विचार के यहां बैठ सकें तो आपके लिए समय जैसी कोई चीज नहीं होगी. आपके लिए समय का अस्तित्व ही नहीं होगा. तो कह सकते हैं कि समय इच्छाओं का बाईप्रोडक्ट है.
चूंकि आपकी इच्छाएं हैं, इसलिए भविष्य है. भविष्य है तो भूत भी है, और चूंकि भूत है इसलिए आप वर्तमान को खो देते हैं. ऐसे में आपको या तो पूरी तरह स्थिर और शांत होकर बैठना सीखना चाहिए या फिर बेहद क्रियाशील होना चाहिए. आप दोनों भी करने की कोशिश कर सकते हैं. कभी बेहद क्रियाशील और कभी बिल्कुल शांत और स्थिर. इसी तरीके से यह मार्ग भी बनाया गया है कि आप चाहे इस तरह से करें या उस तरह से, दोनों तरीकों से आप एक ही लक्ष्य तक पहुंचेंगे.

Mar 13, 2018

Music




म्यूजिक से सिर्फ मनोरंजन ही नहीं बल्कि हमारी सेहत पर भी अच्छा असर होता हैं.
म्यूजिक सुनने के कुछ ऐसे फायदे भी हैं जो हम भागादौड़ी के चलते मिस करते रह जाते हैं.  
आइए, म्यूजिक सुनना कितना फायदेमंद हैं, ये जाने.

1.  म्यूजिक सुनने से उत्साह बढ़ता हैं.

2.  म्यूजिक सुनने से हमारा धैर्य बढ़ता हैं बशर्ते हम अपनी पसंद का म्यूजिक सुनते हों.

3.  म्यूजिक सुनने से पुरानी यादें जिंदा हो जाती हैं और हमारे बिताए कुछ अच्छे पल रिवाइंड हो उठते हैं. इससे मन मुस्कुरा उठता है और हम लाइफ के लिए फ़िर से पॉजिटिव हो जाते हैं.

4.  म्यूजिक सुनने से मूड़ अच्छा बन सकता हैं.

5.  पढ़ते वक्त स्लो और साइलेंट म्यूजिक सुनने से सोचने और समझने की क्षमता बढ़ती हैं. IQ तेज होने लगता हैं. अब तो Youtube भी है. यहां आप अच्छे से अच्छा म्यूजिक चुन सकते हैं.

6.  म्यूजिक सुनने से बेचैनी और तनाव दूर भाग जाता है. आप ख़ुद के साथ पल बिताते हैं. ख़ुद को जी पाते हैं.

7.  म्यूजिक सुनने से गुस्सा कम होने लगता है.

8.  म्यूजिक सुनने से नींद भी अच्छी और गहरी हो जाती है.

9.  स्लो मोशन म्यूजिक से बढ़ी हुई हार्ट-बीट्स कंट्रोल में रहती है.

10. एक अच्छा म्यूजिक आपके कंधे, पेट व पीठ के तनाव को भी काफ़ी हद तक ठीक रख सकता है.

11. म्यूजिक आपके ब्लड-प्रेशर और दिमाग को बैलेंस करने में भी सहायता करता है.

12. म्यूजिक सुनने से हमारी मैमोरी पर अच्छा असर पड़ता है. भूलने की बीमारी दूर हो सकती है.

13. यदि किसी बच्चे की सर्जरी करनी पड़े तो उसे म्यूजिक सुनाना चाहिए, इससे बच्चे का ड़र खत्म हो जाता है.

14. म्यूजिक सुनते हुए एक्सरसाइज करने से हमारे अंदर रेजिस्टेंस पॉवर बढ़ जाती है.

15.जो लोग रोज म्यूजिक सुनते हैं, उनकी सोच आम सोच से ज्यादा पॉजिटिव हो जाती है और वो ख़ुश रहना सीख जाते हैं.


16. जो महिलाए प्रेगनेंसी के दौरान म्यूज़िक सुनती हैं, उन्हे लेबर-पेन कम हो जाता है.

17. रिसर्च के अनुसार, जो स्टूडेंट्स म्यूजिक की क्लास अटेंड करते हैं, हैं, वे एकेडमिक में भी अच्छे रिजल्ट्स देते हैं.

18. म्यूज़िक सुनने वाले बुजुर्ग ज़्यादा बेहतर सोच पाते हैं और नयी पीढ़ी के साथ उनको तालमेल करने में आसानी हो जाती है. वो मुद्दों को डिस्कस करने में संकोच करना छोड़ सकते हैं. जिससे परिवार में तालमेल बेहतर हो जाता है. प्यार बढ़ता है. एक दूसरे की पसंद-नापसंद को स्वीकार करना आसान हो सकता है.

19. विदेशों में तो म्यूजिक- थेरेपी अब एक आम बात हो गयी है. उदाहरण के लिए- आपरेशन थियेटर में सर्जरी के दौरान म्यूजिक का प्रयोग.

20. अच्छा म्यूजिक सुनना आपकी थकान को मिटा देता है. आप रिफ्रेश महसूस करते हैं.

21. म्यूजिक आपको शांत रखता है. और तो और पेट में एसिडिटी बनने से भी रोकता है.

तो आप भी अपने मोबाइल पर एक अच्छा म्यूजिक प्लेयर एप्प खुद के लिए सेलेक्ट करें.  और रोजाना करीब 30 मिनट्स ख़ुद के लिए निकाले. फ़िर देखिये कमाल. आप ख़ुद भी खुश रहेंगे और आस-पास का माहौल भी ख़ुशनुमा हो उठेगा.

यकीन ना आये तो जरा गुनगुनाइए....पुरानी जींस और गिटार ....मोहल्ले की वो छत और मेरे य़ार. या हवन कुंड मस्तों का झुंड.....और फ़िर बादशाह का कोई लेटेस्ट पंजाबी तड़का सोंग और इंजिनियर हैं तो बैकस्ट्रीट बॉयज. 
मुस्कुराते रहिए. गुनगुनाते रहिए. जीवन के गीत गाते रहिए.
मेरा म्यूजिक. मेरी लाइफ.