Mar 30, 2018

ऐसे लोगों को मूर्ख समझकर....



हर साल 1 अप्रैल को बच्चों से लेकर बुजर्गों तक सभी एक दूसरे को बेवकूफ बनाने में जुट जाते हैं.  लेकिन क्या आप जानते हैं कि हम 1 अप्रैल को ही क्यों अप्रैल फूल डे यानि “मूर्ख दिवस” मनाते हैं?

1.  माना जाता है कि अप्रैल फूल डे की शुरुआत फ्रांस से हुई थी. पॉप ग्रेगरी 13 ने वर्ष 1582 में हर यूरोपियन देश को जूलियन कैलेंडर छोड़कर ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार चलने को कहा था. ग्रेगोरियन कैलेंडर में नया साल 1 अप्रैल से नहीं बल्कि 1 जनवरी से शुरू होता है. उस समय कई लोगों ने इसे मानने से इनकार कर दिया था. और दूसरे कई लोगों को इस बात की जानकारी तक नहीं हो सकी थी. इस कारण वो लोग नया साल 1 अप्रैल को ही मनाते थे. ऐसे लोगों को मूर्ख समझकर नया कैलेंडर अपनाने वालों ने पहली अप्रैल के दिन विचित्र प्रकार के मजाक करने और झूठे उपहार देने शुरू कर दिए और तभी से आज तक पहली अप्रैल को लोग फूल डे के रूप में मनाते हैं.

2.  अप्रैल फूल डे से जुड़ा एक किस्सा और भी है. 1392 में चॉसर के कैंटबरी टेल्स में इसका इतिहास पाया जाता है. ब्रिटिश लेखक चॉसर की किताब "द कैंटरबरी टेल्स" में कैंटरबरी नाम के एक कस्बे का जिक्र किया गया है. इसमें इंग्लैंड के राजा रिचर्ड द्वितीय और बोहेमिया की रानी एनी की सगाई की तारीख 32 मार्च, 1381 को होने की घोषणा की गई थी. जिसे वहां के लोग सही मान बैठे और मूर्ख बन गए. तभी से एक अप्रैल को मूर्ख दिवस मनाया जाता है.

3.  एक अन्य लोक कथा के अनुसार एक अप्सरा ने किसान से दोस्ती की और कहा- यदि तुम एक मटकी भर पानी एक ही सांस में पी जाओगे तो मैं तुम्हें वरदान दूंगी. मेहनती किसान ने तुरंत पानी से भरा मटका उठाया और पी गया. जब उसने वरदान वाली बात दोहराई तो अप्सरा बोली- तुम बहुत भोले-भाले हो, आज से तुम्हें मैं यह वरदान देती हूं कि तुम अपनी चुटीली बातों द्वारा लोगों के बीच खूब हंसी-मजाक करोगे. अप्सरा का वरदान पाकर किसान ने लोगों को बहुत हंसाया. इसी कारण ही एक हंसी का पर्व जन्मा, जिसे हम अप्रैल फूल यानि के “मूर्ख दिवस” के नाम से पुकारते हैं.

4.  एक अन्य मान्यता के अनुसार बहुत पहले चीन में सनन्ती नामक एक संत थे, जिनकी दाढ़ी जमीन तक लम्बी थी. एक दिन उनकी दाढ़ी में अचानक आग लग गई तो वे बचाओ-बचाओ कह कर उछलने लगे. उन्हें इस तरह उछलते देख कर बच्चे जोर-जोर से हंसने लगे. तभी संत ने कहा, मैं तो मर रहा हूं, लेकिन तुम आज के ही दिन खूब हंसोगे, इतना कह कर उन्होंने प्राण त्याग दिए. उस दिन 1 अप्रैल था. सब हसतें रहें, इसलिए इस दिन को मनाने की प्रथा शुरू हुई.

5.  एक कहानी ये भी. बहुत पहले यूनान में मोक्सर नामक एक मजाकिया राजा था. एक दिन उसने सपने में देखा कि किसी चींटी ने उसे जिंदा निगल लिया है. सुबह उसकी नींद टूटी तो सपना याद आने पर पर वह जोर-जोर से हंसने लगा. रानी ने हंसने का कारण पूछा तो उसने बताया कि रात मैंने सपने में देखा कि एक चींटी ने मुझे जिंदा निगल लिया है. सुन कर रानी भी हंसने लगी. तभी एक ज्योतिष ने आकर कहा, महाराज इस सपने का अर्थ है कि आज का दिन आप हंसी-मजाक के साथ बिताएं. उस दिन अप्रैल महीने की पहली तारीख थी. बस तब से लगातार एक हंसी-मजाक भरा ये दिन हर साल मनाया जाने लगा.

6.  पूरी दुनिया में इस दिन को को बड़े जोश के साथ मनाया जाता है. जापान और जर्मनी में पूरे दिन लोग प्रैंक करते है तो वहीं स्कॉटलैंड में इसे लगातार दो दिनों तक मनाया जाता है. फ्रांस में इसे फिश डे कहा जाता है. इस दिन बच्चे कागज की बनी मछली एक दूसरे के पीठ पर चिपका कर अप्रैल के इस दिन को मनाते हैं.

पूरे दिन को मनोरंजन के साथ बिताना ही अप्रैल फूल या मूर्ख दिवस मनाने का मूल उद्देश्य है.

हैप्पी फूल डे.

Mar 29, 2018

छोटा लड़का

कोई भी युग हो और कोई भी समय-काल हो. कोई कहे या न कहे, कोई समझे या न समझे, कोई जाने या न जाने लेकिन मनुष्य जीवन का एक सच ये भी है कि सामाजिक, आर्थिक विकास के बावजूद भी उसके मानवीय गुणों को हमेशा पहले स्थान पर रखा जाता है. 

वैसे तो आज के दौर की लाइफ ही इतनी व्यस्त है कि जीते जी लोग बिना काम और बिना मतलब के किसी को भी याद करने में शर्म महसूस करने लगे हैं. लेकिन एक ख़ास बात ये है कि किसी के मरने के बाद उसके मानवीय चरित्र और गुणों-अवगुणों को आज भी सबसे पहले लोग याद करते हैं. 

और बड़ी अच्छी बात ये है कि जीते जी आपको चाहे कोई पानी ना पूछ पाए (Due टू बिजी लाइफ) लेकिन आपके निकल जाने के बाद आपके कुछ गुणों की तारीफ़ हो ही जाती है. इसलिए घबराइए नहीं, जिंदा न सही, उसके बाद आपकी तारीफें होंगी तो भी क्या कम है? आप बस ये सुन नहीं पाएंगे. कोई बात नहीं. 

आइये लाइफ के एक प्रैक्टिकल आस्पेक्ट की कहानी सुने. यह कहानी इंसानियत, दयालुता और अपने पर किए एहसान को याद रखकर उसकी कीमत चुकाने के बारे में बताती है. क्या पता, किसके काम आ जाये? 

ये कहानी उस आदमी की कहानी है जिसका नाम जाने-अनजाने हम सब ने सुना हुआ है. ये आदमी है फ़्रांस के महान सम्राट नेपोलियन. नेपोलियन को हमेशा अपनी बहादुरी, ईमानदारी और दृढनिश्चय के लिए याद किया जाता है. आपको पता ही होगा की नेपोलियन अपने पड़ोसियों, सामान्य लोगों और अपने साथ काम करने वाले सेनिकों के साथ भी बड़ी सहजता और सरलता से पेश आता था. इसके पीछे नेपोलियन का कोई लालच या स्वार्थ नहीं होता था. वो अच्छे मानवीय गुण का धनी था और इसलिए शायद जनता का सबसे लोकप्रिय योद्धा.

बचपन में नेपोलियन ने बहुत गरीबी झेली थी. कई बार उसके पास खाने के लिए पैसे नहीं होते थे. जहां वो पढ़ता था, उस स्कूल के मेन गेट के पास ही एक औरत फल और खाने की चीजें बेचा करती थी. कभी-कभी जब ऐसा होता कि नेपोलियन की जेब में पैसे का कोई सिक्का नहीं होता था, ऐसे में भूखा होने पर वो मजबूरी में उस औरत से खाने की चीजें उधार ले लिया करता और पैसे होने पर ईमानदारी से उसको वापिस कर देता. वह औरत भी नेपोलियन पर विश्वास कर उसे उधार दे दिया करती. उन दिनों विश्वास और ईमानदारी के अच्छे दिन हुआ करते.

धीरे-धीरे समय बीता. भाग्य, योग्यता, कड़ी मेहनत और अपनी धुन के चलते नेपोलियन फ़्रांस की सेना में एक सामान्य सैनिक से एक अफसर, फिर सेनापति और अंत में फ़्रांस का सम्राट बना

सम्राट बनने के कुछ दिनों के बाद उसे अपने पुश्तैनी गांव जाने का मौका मिला. गांव पहुचते ही सबसे पहले उसने लोगों से उस औरत का पता पूछा जो बचपन में उस पर यकीन करके उसे फ़ल और खाने की चीज़े दिया करती. 

नेपोलियन फ़ौज की वर्दी में था और सीधे ही उस औरत के घर पर उससे मिलने जा पहुंचा. उसने पूछा “मैडम, क्या आप मुझे पहचानती हैं?” उसे देखकर वह बूढी औरत थोड़ी सहम गयी फिर उसने हैरानी से कहा “माफ़ कीजियेगा, मैं आपको नहीं जानती”.

नेपोलियन ने प्यार से मुस्कुराते हुए कहा “हो सकता है, आप मुझे भूल गयीं हों, पर वह छोटा लड़का आपको अभी तक नहीं भूला है, जिसे आप खुशी ख़ुशी और बड़े प्यार से चीज़े उधार दे दिया करतीं थी”. औरत ने नेपोलियन को पहचान लिया और और वो ख़ूब ख़ुश हुई कि नेपोलियन ने उसे याद रखा. 

उन दोनों ने खूब देर बातें की और नेपोलियन ने उस बूढी औरत को सिक्कों से भरी एक थेली उपहार में देते हुआ कहा- “आपने बचपन में जो यकीन मुझ पर दिखाया, शायद उसकी वजह से ही मैं जीवन में इतना आगे बढ़ सका हूं”. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद. ये कहकर उसका आशीर्वाद लेकर वो लौट गया.


सारांश
अलग-अलग देशों में राजा या सम्राट तो कई हुए होंगे हम उनमें से कितनों के नाम लोग याद रखते हैं? फ्रांस में नेपोलियन को उसके इंसानियत के गुणों के लिए हमेशा याद किया जाता है. 
इसलिए दोस्तों, हमेशा उन लोगों को याद रखिये जो आप पर यकीन करते हैं. आप पर भरोसा करते हैं. आपकी मदद करते हैं. हमेशा उनका एहसान सही तरीके से चुकाने की कोशिश कीजिये. उनको धोखा देकर उनका विश्वास मत तोड़िए. ये ही इंसानियत को हर समय–काल में जिंदा रखने का अकेला प्रैक्टिकल उपाय है.

भरोसा देते रहिये. इंसानियत जिंदा रखिये. आपकी पहल. जीवन सरल. 

Mar 27, 2018

प्यार और रोमांस में इनका स्कोर ?



Q. अप्रैल में जन्में व्यक्ति कैसे होते हैं.
A. बहुत आकर्षक, सुंदर और चंचल स्‍वभाव के मालिक.

Q. उनके स्वभाव का ख़ास पहलू?
A. बहुत हंसमुख होते हैं. खुद भी खुश रहते हैं और आसपास के लोगों को भी खुश रखते हैं. ये अधिकतर मज़ाकिया स्वाभाव के पाए जाते हैं. और इनके बात करने का अंदाज़ बेहद ऊर्जावान होता है.

Q. उनके शौक और उनकी खासियतें?
A. कलात्‍मक (Artistic) होते हैं. Art से जुड़ी चीज़ों का कलेक्शन करने का शौक रखते हैं. ऊर्जा से लबालब रहते हैं. आलसी नहीं होते मगर कोई काम पसंद का ना हो तो बहाने बना सकते हैं. यारों के यार माने जाते हैं यानि दोस्ती निभाने में No. 1.

Q. उनकी नेचर में क्या शामिल रहता है?
A. ये बहुत जिज्ञासु होते हैं. हर बात को जानने के लिए बेताब रहते हैं. दूसरों के बारे में सब कुछ जान लेना चाहते हैं. आज़ाद रहना इन्हें बेहद पसंद है. वैसे खुशमिज़ाज़ होते हैं पर कभी- कभी ये गुस्‍सा भी कर लेते हैं. ये अलग बात है कि कुछ देर के बाद इनका गुस्‍सा अपने आप ठंडा हो जाता है.

Q. प्यार और रोमांस में इनका स्कोर?
A. बहुत ही ज्‍यादा रोमांटिक होते देखे गए हैं. रोमांस में इन्‍हें आप मेरिट-होल्डर मान सकते हैं. दिल जीतने में माहिर होते हैं.

Q. और कुछ अलग सा?
A. जुनूनी होते हैं. एडवेंचर को पसंद करने वाले होते हैं. रौबीले और थोड़े जिद्दी भी. विलक्षण प्रतिभा के धनी पाए जाते हैं. जहां भी क़दम रखते हैं, सफ़लता पीछे-पीछे चलती है. मीडिया में पोपुलर रहना इनको बहुत अच्छा लगता है.  

Q. इनके पसंदीदा कार्य-क्षेत्र?
A. पॉलिटिक्स, स्पोर्ट्स, मीडिया, क्रिएटिव फ़ील्ड्स जैसे एडवरटाइजिंग आदि.

Q. इनके लकी नंबर्स?
A. वैसे तो नंबर गेम साइकोलॉजीकल है. फिर भी 1, 3, 4, 5, 7, 8 और 9 इनके लिए लकी बताये जाते हैं.

Q. लकी कलर?
A. ग्रीन, येलो, पिंक, ऑरेंज, गोल्डन और मेहरून.

Q. लकी डेज?
A. लकी दिन - संडे, मंडे, वेडनसडे, फ्राइडे, सैटरडे और संडे. वैसे सब दिन ही अच्छे होते हैं.

Q. ख़ास सलाह?
A. अपने बर्थडे पर सबको पार्टी देना ना भूलें.

डिप्रेशन, बेसब्री, ब्लड प्रेशर, शुगर आदि आदि...

मॉडर्न लाइफ स्टाइल और टेक्नोलॉजी ने हमें जहां एक छत के नीचे सारी सुख-सुविधाएं उपलब्ध करवाने में मदद की है वहीं तमाम् ऐशो-आराम की चीज़े हासिल होने के बाद भी बहुत कुछ या कहें सब कुछ पा सकने के मनुष्यों के सपने अधूरे दिखाई दे रहें हैं. 


अब तो हालत किसी कम्पटीशन से भी काफ़ी आगे निकल गए हैं. पहले हम खुद से फाइट करते थे कि अपना बेस्ट देकर आगे बढ़ना है. और अब फाइट है कि रुकना ही नहीं. रुक गए तो जैसे सबकुछ वापिस चला जायेगा या कोई और हमारी सीट पर कब्ज़ा जमा लेगा. 
इतना डर? 
देवताओं के देश में? 
किसी पर भरोसा करने का साहस ख़त्म? 
किसी को भरोसा देने की नीयत ख़त्म? 
सबकुछ शरीर पर टिका हुआ? और शरीर साइंटिफिक मिट्टी से अधिक कुछ नहीं. फ़िर भी इसकी इतनी फ़िक्र? 
बाकी सभी किनारे सूखे?

ऐसा लग रहा है जैसे हमें अमर होने का नुस्खा मिल गया हो. तभी सोच एकदम से कमर्शियल हो गयी होगी और इंसानियत किसी अँधेरे कमरे में जाकर सो गयी होगी. 

बड़ी दिलचस्प पिक्चर है आज की जिंदगी की. जिसके पास है, उसे सब्र नहीं (केटेगरी 1) और जिसके पास नही, उसे फ़िक्र नहीं (केटेगरी 2)
पहली केटेगरी के पास ज़रूरी सब साधन मौजूद. दूसरी केटेगरी के पास खाने के लाले.

लेकिन साइंटिफिक स्टडी बताने लगी है कि पहली केटेगरी अब एक गंभीर दौर का सामना कर रही है. वो है डिप्रेशन, बेसब्री, ब्लड प्रेशर, शुगर, लो-ऐज रेश्यो और छोटी-मोटी अन्य स्टैण्डर्ड बीमारियाँ. ऐसा क्यों? - क्योंकि हर हाल में बाकी बचे सपने पूरे करने का दबाव. स्टेटस मेन्टेन रखने का सामाजिक दबाव. और अनेकों अनकहे, अनसुलझे सवाल जो सही भी होंगे पर उनके सही आंसर तलाशने के समय का अभाव.

दूसरी केटेगरी फिलहाल आशावादी पाई जा रही है क्योंकि कुछ खोने को नहीं है उनके पास. उन्हें पता ही नही कि मंजिलें और सपने किस चिड़िया का नाम है. वो जिंदगी को वैसे ही जी पा रहें हैं जैसी मिली हुई है.

केटेगरी 1 को बहुत जल्दी हो गयी है सब कुछ पाने की. पेशेंस ख़त्म होने की लिमिट करीब है. केटेगरी 2 जीवन की ABC में ही मस्त है, फ़िर चाहे वो गरीब है. उन्हें ना हार्ट-अटैक का खतरा है और ना ही शुगर का. धूप में कड़ी मेहनत और शाम ढले चूल्हे पर सरसों के तेल से चुपड़ी रोटी और प्याज उनको संसार की हर बीमारी से दूर रखे हुए है. और दूसरी तरफ़ सबकुछ AC लेकिन डॉक्टर अब हर दिन चेक-अप के लिए आने को तैयार.

ख़ुदा का कमाल का डायरेक्शन है. ख़ुशी, कामयाबी, सफलता, किसे माना जाये, ये एक खुबसूरत पहलू है? 

आप भी थोड़ा गौर फरमाइए. अपने नीचे वालों को देख के तनिक मुस्कुराइए. जब वो इतने इत्मीनान से जीते हैं तो आप किसलिए इतना गम पीते हैं?

गहरी चर्चा फ़िर कभी.

Mar 26, 2018

बच्चे की मां ख़ुशी से रो पड़ी.

एक आइसक्रीम वाला रोज एक मोहल्ले में आइसक्रीम बेचने जाया करता था.


उस कालोनी में पैसे वाले लोग रहा करते थे. लेकिन किराये पर रहने वाला एक परिवार ऐसा भी था जो आर्थिक तंगी से गुजर रहा था. उनका एक 5 साल का बेटा था जो हर दिन खिड़की से उस आइसक्रीम वाले को ललचाई नजरो से देखा करता था.

आइसक्रीम वाला भी उसे पहचानने लगा था. लेकिन कभी वो लड़का आइसक्रीम खाने घर से बाहर नहीं आया. एक दिन उस आइसक्रीम वाले का मन नहीं माना तो वो खिड़की के पास जाकर उस बच्चे से बोला, "बेटा क्या आपको आइसक्रीम अच्छी नहीं लगती. आप कभी मेरी आइसक्रीम नहीं खरीदते?". उस बच्चे ने बड़ी मासूमियत के साथ कहा, "मुझे आइसक्रीम बहुत पसंद है. पर मां के पास पैसे नहीं है. "उस आइसक्रीम वाले को यह सुनकर उस बच्चे पर बड़ा प्यार आया. उसने कहा, "बेटा तुम मुझसे रोज आइसक्रीम ले लिया करो. मुझे तुमसे पैसे नहीं चाहिए".

बच्चा बहुत समझदार था. बहुत सहज भाव से बोला, "नहीं ले सकता, मां ने कहा है कि किसी से मुफ्त में कुछ लेना गंदी बात होती है. इसलिए मैं कुछ बिना दिए आपकी आइसक्रीम नहीं ले सकता". आइसक्रीम वाला बच्चे के मुहं से इतनी गहरी बात सुनकर आश्चर्यचकित रह गया.

उसने कहा, "तुम मुझे आइसक्रीम के बदले में रोज एक प्यारी सी मुस्कराहट (स्माइल) दे दिया करो”. इस तरह मुझे आइसक्रीम की कीमत मिल जाया करेगी". बच्चा ये जानकर बहुत खुश हुआ. दौड़कर घर से बाहर आया. आइसक्रीम वाले ने उसे एक आइसक्रीम दी और बदले में उस बच्चे ने उस आइसक्रीम वाले को  स्माइल दी और खुश होकर घर के अन्दर भाग गया. अब ये सिलसिला रोज चल निकला. वो आइसक्रीम वाला आता और एक स्माइल के बदले उस बच्चे को आइसक्रीम दे जाता. करीब 20 दिनों तक ऐसा ही चलता रहा.

उसके बाद, बच्चे ने अचानक बाहर आना बंद कर दिया. अब वो खिड़की पर भी नजर नहीं आता था.
जब कुछ दिन और बीत गए तो आइसक्रीम वाले का मन नहीं माना और वो उस घर पर पहुच गया.
दरवाजा पर बच्चे की मां थी. आइसक्रीम वाले ने उत्सुकता से उस बच्चे के बारे में पूछा तो उसकी मां ने कहा, "देखिये भाई साहब, हम गरीब लोग हैं. हमारे पास इतना पैसा नहीं है कि हम अपने बच्चे को रोज आइसक्रीम खिला सके”. आप उसे रोज मुफ्त में आइसक्रीम खिलाते रहे. जिस दिन मुझे ये बात पता चली तो मुझे बहुत शर्मिंदगी हुई. आप एक अच्छे इंसान हो सकते हैं पर इस कलयुग में किसी अजनबी पर भरोसा करना और अपने बेटे को मुफ्त में आइसक्रीम खिलाने का कोई मतलब नहीं बनता.

बच्चे की मां की बाते सुनकर उस आइसक्रीम वाले ने कहा, "बहनजी , कौन कहता है कि मैं  उसे मुफ्त में आइसक्रीम खिलाता था. मैं इतना दयालु या उपकार करने वाला नहीं हूं. व्यापार करता हूं. आपके बेटे से जो मुझे मिला, वो उस आइसक्रीम की कीमत से कही अधिक मूल्यवान था. और कम मूल्य की चीज़ का अधिक मूल्य वसूल करना ही व्यापार का नियम है. एक बच्चे का निश्छल प्रेम पा लेना, सोने और चांदी के सिक्के पा लेने से कहीं अधिक बढ़कर है.

आपने अपने बेटे को बहुत अच्छे संस्कार दिए हैं. लेकिन छोटा और गरीब होते हुए भी मैं  आपसे पूछता हूं कि “क्या प्रेम का कोई मूल्य नहीं होता”?. उस आइसक्रीम वाले के शब्द सुनकर मां की आँखें भर आई. उन्होंने बच्चे को आवाज़ दी. वो दौड़ता-दौड़ता दरवाजे पर आ गया. मां का इशारा पाते ही बालक दौड़कर आइसक्रीम वाले से लिपट गया.

आइसक्रीम वाले ने बालक को गोद में उठा लिया और बाहर जाते हुए कहने लगा, "तुम्हारे लिए आज दूध-मलाई वाली आइसक्रीम लाया हूं. तुम्हें बहुत पसंद है ना?" बच्चा उत्साह से बोला, "हां बहुत". बच्चे की मां ख़ुशी से रो पड़ी.

गुस्सा

गुस्सा आना आज एक स्टेटस सिंबल बन गया है. 
हम अगर गुस्सा नहीं करेंगे तो सबको पता कैसे चलेगा कि हम किस लेवल के व्यक्ति हैं.

जितना ज्यादा गुस्सा, उतनी हाई-फाई हमारी पर्सनालिटी.
पर आपने देखा होगा कि हमें गुस्सा हमेशा किसी और पर या किसी और की वजह से आता है.
हमें कभी नहीं लगता कि गुस्से की वजह हम ख़ुद भी हो सकते हैं.
गुस्सा सिचुएशनअल होता है लेकिन हम इसको बबलगम की तरह लम्बा खीचनें लगते हैं. गलती किसी की भी हो, समाधान तो शांतिपूर्वक ही निकल सकेगा.

सही समय पर सही मात्रा में गुस्सा करना जहां हेल्थ के लिए बेहद जरुरी है वहीं इसे पालतू बना लेना समझदारी तो नहीं कही जा सकती. 

स्ट्रेसफुल वातावरण के चलते अब गुस्सा आना स्वाभाविक माना जाने लगा है लेकिन वातावरण स्ट्रेसफुल बन क्यों रहा है? अगर इस पर ध्यान दे दिया जाये तो शायद गुस्सा भी मुस्कराहट लाने में हमारी मदद कर सके. 
आइये देखें कभी-कभी क्या कर लेने से हम रिलैक्स हो सकते हैं?

1.      जब कभी आप किसी भी कारण उदास महसूस कर रहे हों तो कुछ ना करें. या तो टहलने निकल जायें ये चुपचाप जाकर सो जायें. थोड़ी देर बाद उदासी गायब.

2.      मूड ज्यादा ही ख़राब लग रहा हो तो शीशे के आगे खड़े हो जायें. 50 सेकंड्स तक ख़ुद पर हसें और ख़ुद से कहें “ मैं नहीं भी होता, तो क्या दुनिया नहीं चलती”. ख़ुद को डेड-सीरियस होने से रोक लें. कमाल का रिलैक्सेशन मिलेगा.

3.      किसी बात पर गुस्सा आ रहा हो या आने वाला हो तो झट से पानी पी लें. 10 गहरी सांस लें. बहुत आराम मिलेगा.

4.      शोर्ट टर्म गुस्सा ख़त्म करना हो तो दूसरों को माफ़ करना सीख लें.

5.      हमेशा के लिए गुस्सा ख़त्म करना हो तो ख़ुद को और दूसरों को इस ब्रह्माण्ड में एक छोटे से करैक्टर से ज्यादा न समझें. सबका रोल डिफाइंड हैं. सब एक दिन टाटा-बाय-बाय करके निकल लेंगे. जब आप ऐसा न्यूट्रल इफ़ेक्ट ख़ुद में ले आते हैं तो आप देखेंगे कि आप गहन शांति में आ गए.

6.      जिस पर गुस्सा आ रहा हो, तुरंत उसके पॉजिटिव पॉइंट्स ख़ुद को याद दिलाएं. ये नुस्खा भी बढ़िया काम करता है.

7.      गुस्से पर कंट्रोल नहीं कर पा रहें हो तो जिसकी वजह से गुस्सा आ रहा हो, उसकी जगह ख़ुद को एक बार रख कर देखें. क्या पता गलती आपसे ही ना हो गयी हो?

8.      याद रखिये, 95% गुस्से का कारण सिर्फ़ मिस-कम्युनिकेशन होता है. ये दूर करिए तो सब ठीक होने लगेगा.

9.      किन्हीं परिस्थितियों में सामने वाले से आपको बहुत दिक्कतें आने लगी हैं और उसको देखते ही गुस्सा आने लगे तो तुरंत अपना रास्ता बदल लें. उससे दूर रहना शुरू कर दें. अगर वो गलत होगा, तो थोड़े समय बाद वो इस चीज़ को समझ लेगा. आखिर उसे भी एक मनुष्य ही बनाया गया है. उसको भी ख़ुद की परख कर लेने का एक मौका दें. अपने अंदर हर किसी को मालूम होता है कि क्या सही है और क्या गलत.

गुस्सा भी साइंटिफिक लॉजिक पर काम करता है. जैसे गुस्से के इनपुट पैरामीटर्स क्या हो सकते हैं? 
  • हम सिंगल हैं तो इनपुट - हमारे फैमिली मेम्बेर्स या फ्रेंड्स या उनसे जुड़ा कोई Issue.
  • हम डबल यानि शादीशुदा हैं तो इनपुटफैमिली मेम्बेर्स, लाइफ पार्टनर, बच्चे, फैमिली फ्रेंड्स या उनसे जुड़ा कोई Issue
  • बिजनेसमैन हैं तो इनपुट- रेपुटेशन या पैसे का नुकसान या एम्प्लाइज से जुड़ा कोई Issue
  • जॉब में है तो इनपुट- काम और सैलरी, साथी एम्प्लाइज के साथ तालमेल, काम करने के तरीकों में डिफरेंस या उनसे जुड़ा कोई Issue
  • बेरोजगार हैं तो इनपुट- Frustration और रिलेटेड Issues
  • ऊपर दिए गए इनपुट्स का कॉमन आउटपुट- हमारा गुस्सा
अब गलत कौन है, किस पॉइंट पर है, क्यों हैं और कितना है? ये आप आसानी से पता लगा सकते हैं. तो अब किस बात का गुस्सा. गुस्सा थूक दीजिये. 
संसार में सबकी हालत आपके जैसी ही है. फर्क सिर्फ़ इतना है कि किसी का गुस्सा दिख रहा है और किसी का दिख नहीं रहा है.
एक शानदार और सबसे सस्ता तरीका और है. ये है ख़ुद को बेवकूफ और बाकी सबको समझदार समझने का. इससे आपको कुछ मिले या न मिले, पर आप हँसने जरुर लगेंगे. करके देखिये. सामने वाले को ही समझदार हो जाने दीजिये. क्या पता आप और स्वस्थ हो जाएँ? वो भी बिना पैसे खर्च किये.

अगर फिर भी समाधान दिखाई न दे और गुस्सा आना न रुके तो किसी बढ़िया डॉक्टर से सलाह लें. बस डॉक्टर गुस्से वाला ना हो. कहीं गुस्से में हमें एडमिट ना कर ले. उसको बढ़िया डॉक्टर बनाने में हमारा ही सबसे बड़ा योगदान है. जितनी बड़ी भीड़, उतना ही बड़ा डॉक्टर. 


Mar 25, 2018

खेत

एक गुरु अपने एक शिष्य के साथ किसी रास्ते से गुजर रहा था. चलते-चलते वे एक खेत के पास पहुंचे. खेत अच्छी जगह पर स्थित था. खेत का नक्शा भी उम्दा था. लेकिन उसकी जर्जर हालत देखकर लगता था मानो उसका मालिक उस पर जरा भी ध्यान नहीं देता है.

दोनों को बहुत प्यास लगी थी. वे खेत के बीच बने एक टूटे-फूटे घर के सामने पहुंचे और दरवाज़ा खटखटाया. अन्दर से एक आदमी निकला. उसके साथ उसकी पत्नी और तीन बच्चे भी थे. सभी फटे-पुराने कपड़ों में थे.
गुरु ने कहा, “क्या हमें पानी मिल सकता है? बड़ी प्यास लगी है.” “जी अवश्य”, आदमी ने कहा.

“मैं देख रहा हूं कि आपका खेत इतना बड़ा है. पर इसमें कोई फसल नही बोई गयी है. और ना ही यहाँ फलों के वृक्ष दिखायी दे रहे हैं. तो आखिर आप लोगों का गुजारा कैसे चलता है?”, गुरु ने प्रश्न किया.

“जी, हमारे पास एक भैंस है, वो काफी दूध देती है. उसे पास के गाँव में बेच कर कुछ पैसे मिल जाते हैं और बचे हुए दूध का इस्तेमाल कर के हमारा गुजारा चल जाता है.”, आदमी ने समझाया. गुरु और शिष्य आगे बढ़ने को हुए, तभी आदमी बोला, “शाम काफी हो गयी है. आप लोग चाहें तो आज रात यहीं रुक जाएं.” दोनों रुकने को तैयार हो गए.

आधी रात के करीब जब सभी गहरी नींद में सो रहे थे, तभी गुरु ने शिष्य को उठाया और बोला, “चलो हमें अभी यहां से चलना है, और चलने से पहले हम उस आदमी की भैंस को अपने साथ ले चलेंगे.” अपने आश्रम में रख लेंगे और कुछ दिनों बाद वापिस कर देंगे.

शिष्य को अपने गुरु की बात पर यकीन नहीं हो रहा था. पर वो उनकी बात काट भी नहीं सकता था. दोनों भैंस को अपने साथ लेकर रातों-रात गायब हो गए.

यह घटना शिष्य के दिमाग में बैठ गयी. कुछ सालों बाद, उसके गुरु ने कहा कि “समय आ गया है. जाओ और उस आदमी को उसकी भैंस वापिस कर दो.” शिष्य भैंस को लेकर उसी खेत के सामने पहुंचा. उसे मन ही मन पश्चाताप महसूस हो रहा था कि पता नहीं कि बिना भैंस के उस परिवार का क्या हुआ होगा?

जब वो उस जगह पर पहुचा. उसे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ. वह उजाड़ खेत अब फलों के बगीचे में बदल चुका था. टूटे-फूटे घर की जगह एक शानदार बंगला खड़ा था. और जहां अकेली भैंस बंधी रहती थी, वहां अच्छी नस्ल की कई गायें और भैंस अपना चारा खा रही थीं. सब कुछ सामान्य से बहुत अच्छा था.

शिष्य ने सोचा कि शायद भैंस के खो जाने के बाद वो परिवार सबकुछ बेच कर कहीं चला गया होगा. और नए मालिक ने ये सब किया होगा. वो उस भैंस को वही छोड़ कर वापस लौटने लगा. कुछ दूर चलने पर उसे वो दस साल पहले वाला आदमी दिखाई दिया. शिष्य ने उस आदमी को पहचानते हुए कहा “शायद आप मुझे पहचान नहीं पाए, सालों पहले मैं आपसे मिला था”. आदमी शिष्य की तरफ़ बढ़ा. उसके पैरों को छुआ और बोला. “नहीं-नहीं, ऐसा कदापि नहीं है. मुझे अच्छी तरह याद है. आप और आपके गुरु जी यहां आये थे. कैसे भूल सकता हूं उस दिन को? 

उस दिन ने तो मेरा जीवन ही बदल कर रख दिया. आप लोग तो बिना बताये चले गए. पर उसी दिन ना जाने कैसे हमारी भैंस भी हमें छोड़ कर चली गयी. कुछ दिन तो समझ ही नहीं आया कि क्या करें? पर जीने के लिए कुछ तो करना था. तो मैं लकड़ियाँ काट कर बेचने लगा, उससे कुछ पैसे हुए तो खेत में बुवाई कर दी. सौभाग्य से फसल बहुत ही अच्छी निकल आई. फ़सल बेचने पर जो पैसे मिले उससे फलों के बगीचे लगवा दिए और यह काम अच्छा चल पड़ा और इस समय मैं आस-पास के गावों का सबसे सफ़ल फल व्यापारी बन चुका हूं.

सचमुच, ये सब कुछ ना हुआ होता अगर उस दिन मेरी भैंस मुझे छोड़ कर ना जाती. शिष्य हैरानी से देखता रह गया. “लेकिन यही काम आप पहले भी कर सकते थे?”, शिष्य ने आश्चर्य से पूछा.

आदमी बोला, “बिलकुल कर सकता था”. पर तब ज़िन्दगी बिलकुल कम मेहनत के भी बड़े आराम से चल रही थी. मुझे कभी लगा ही नहीं कि मेरे अन्दर इतना कुछ करने की क्षमता है. इसलिए कभी कोशिश ही नहीं की. पर जब भैंस चली गयी, तब हाथ-पैर मारने पड़े और मुझ जैसा गरीब इंसान भी इस मुकाम तक पहुंच गया. ये सब आपके गुरु और आपके आशीर्वाद से ही हो सका है. 

अब शिष्य अपने गुरु के उस आदेश का असली मतलब समझ चुका था. अब वो बिना किसी पश्चाताप के वापस लौट पा रहा था. उसकी प्रसन्नता चरम पर थी. गुरु की दिव्यदृष्टि अब जाकर उसकी समझ में आई थी. उसने मन ही मन गुरु को नमस्कार कर आभार प्रकट किया और वहां से चल पड़ा.

सोचिये, कहीं आपकी ज़िन्दगी में भी तो कोई ऐसी भैंस नहीं जो आपको एक बेहतर ज़िन्दगी जीने से रोक रही हो? कहीं ऐसा तो नहीं कि आपको लगता हो कि आपने उस भैंस को बाँध कर रखा है. जबकि वास्तव में उस भैंस ने आपको बाँध रखा है. 

हम भी, हमारे विचारों से ठीक उसी तरह से बंधे रहते हैं जैसे वो भैंस. अब वो भैंस सही है या हम? समय-समय पर ये जांच करते रहना ही इस कहानी को आपके सामने रखने का मूल उद्देश्य है. 



ऑफिस के हर डेस्क पर लगभग 10 Million बैक्टीरिया होते हैं.

सेनेका द यंगर
जन्म: 4 BC, मृत्यु: 65 AD
कौन थे? – रोमन राजनेता, नाटककार, दार्शनिक और लैटिन साहित्य के सबसे अच्छे दौर के व्यंग्यकार

सेनेका द यंगर (लुशिस अनियस सेनेका) के कहे टॉप 9 कथन
1.      अपना बेस्ट करें, वर्तमान का आनंद लें और जो आपके पास है उसमें खुश रहें.

2.      डरते हुए पूछने वाले को अक्सर ‘ना’ सुननी पड़ती है.

3.      आपने किसी को कुछ दिया है तो शांत रहे लेकिन किसी ने आपको कुछ दिया है तो उसका जिक्र जरुर करें.

4.      केवल खूबसूरती से चकित नहीं होना चाहिए. उन छिपे हुए गुणों को तलाशना चाहिए जो हमेशा बने रहते हैं.

5.      जब परिस्थितियाँ बदल जाती हैं तो रणनीति बदलने में कोई बुराई नहीं है.

6.      सबकुछ आपके नियंत्रण में है. आप चीजों को आसान बना सकते हैं या मुश्किल या फ़िर हास्यास्पद. सिलेक्शन हमेशा आपका ही होता है. कोई और इसके लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

7.      ऐसा नहीं है कि चीज़ें मुश्किल है, इसलिए हम हिम्मत नहीं करते. वास्तव में हम हिम्मत नहीं करते, इसलिए चीज़ें मुश्किल है.

8.      हम हमेशा कहते हैं की जीवन बहुत छोटा है लेकिन बर्ताव ऐसे करते हैं जैसे ये हमेशा के लिए है.

9.      किसी समस्या का सबसे जरुरी पहलू उसका हल नहीं होता. हल निकालते समय जो ताकत मिलती है, वही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है.


चलते-चलते: ऑफिस से जुड़े अनोखे तथ्य
1.      हर 3 में से 1 व्यक्ति बीमार होने पर भी ऑफिस जाता है.
2.      पुरुषों की ऑफिस डेस्क महिलाओं की डेस्क से 20% तक ज्यादा गंदी रहती है.
3.      62% लोग डेस्क पर लंच करते हैं. 50% लोग डेस्क पर ही स्नैक्स लेते हैं. 20% लोग ही खाने से पहले अपनी डेस्क साफ़ करते हैं.
4.      ऑफिस के हर डेस्क पर लगभग 10 Million बैक्टीरिया होते हैं. आम किचन के मुकाबले 100 गुना ज्यादा.
5.      आपके कीबोर्ड, माउस और चेयर पर हर Square Inch में 21,000 Jerms पाए जाते हैं.