May 29, 2018

दरबान - क्या देखा आपने?


पाण्डवों का अज्ञातवास समाप्त होने में कुछ समय शेष रह गया था। पाँचो पाण्डव एवं द्रोपदी जंगल मे छुपने का स्थान ढूंढ रहे थे। उधर शनिदेव की आकाश मंडल से पाण्डवों पर नजर पड़ी शनिदेव के मन विचार आया कि इन 5 में से बुद्धिमान कौन है? परीक्षा ली जाये। शनिदेव ने एक माया का महल बनाया। कई योजन दूरी में उस महल के चार कोने थे, पूरब, पश्चिम, उतर, दक्षिण।

अचानक भीम की नजर महल पर पड़ी और वो आकर्षित हो गया। भीम, यधिष्ठिर से बोला- भैया मुझे महल देखना है भाई ने कहा जाओ। भीम महल के द्वार पर पहुंचा वहाँ शनिदेव दरबान के रूप में खड़े थे
भीम बोला- मुझे महल देखना है
शनिदेव ने कहा- महल की कुछ शर्त है।
पहली - शर्त : महल में चार कोने हैं आप एक ही कोना देख सकते हैं।
दूसरी - शर्त : महल में जो देखोगे उसकी सार सहित व्याख्या करोगे।
तीसरी -शर्त : अगर व्याख्या नहीं कर सके तो कैद कर लिए जाओगे।
भीम ने कहा- मैं स्वीकार करता हूँ ऐसा ही होगा। और वह महल के पूर्व छोर की ओर गया।
वहां जाकर उसने अद्भूत पशु पक्षी और फूलों एवं फलों से लदे वृक्षों का नजारा देखा।
आगे जाकर देखता है कि तीन कुंए है अगल-बगल में छोटे कुंए और बीच में एक बडा कुआ।
बीच वाला बड़े कुंए में पानी का उफान आता है और दोनों छोटे खाली कुओं को पानी से भर देता है। फिर कुछ देर बाद दोनों छोटे कुओं में उफान आता है तो खाली पड़े बड़े कुंए का पानी आधा रह जाता है इस क्रिया को भीम कई बार देखता है पर समझ नहीं पाता और लौटकर दरबान के पास आता है।

दरबान - क्या देखा आपने?
भीम - महाशय मैंने पेड़ पौधे पशु पक्षी देखा वो मैंने पहले कभी नहीं देखा था जो अजीब थे। एक बात समझ में नहीं आई छोटे कुंए पानी से भर जाते हैं बड़ा क्यों नहीं भर पाता ये समझ में नहीं आया।
दरबान बोला आप शर्त के अनुसार बंदी हो गये हैं और बंदी घर में बैठा दिया।

अर्जुन आया और बोला - मुझे महल देखना है। दरबान ने शर्त बता दी और अर्जुन पश्चिम वाले छोर की तरफ चला गया। आगे जाकर अर्जुन क्या देखता है। एक खेत में दो फसल उग रही थी एक तरफ बाजरे की फसल दूसरी तरफ मक्का की फसल। बाजरे के पौधे से मक्का निकल रही तथा मक्का के पौधे से बाजरी निकल रही। अजीब लगा कुछ समझ नहीं आया वापिस द्वार पर आ गया।

दरबान ने पूछा - क्या देखा?
अर्जुन बोला महाशय सब कुछ देखा पर बाजरा और मक्का की बात समझ में नहीं आई।
शनिदेव ने कहा शर्त के अनुसार आप बंदी हैं।

नकुल आया बोला - मुझे महल देखना है।
फिर वह उत्तर दिशा की और गया। वहाँ उसने देखा कि बहुत सारी सफेद गायें (जब उनको भूख लगती है) तो अपनी छोटी बछियों का दूध पीती है। उसे भी कुछ समझ नहीं आया। वो द्वार पर आया।
शनिदेव ने पूछा - क्या देखा?
नकुल बोला – महाशय, गाय बछियों का दूध पीती हैं। यह समझ नहीं आया। तब उसे भी बंदी बना लिया।

सहदेव आया और बोला कि मुझे भी महल देखना है। और वह दक्षिण दिशा की और गया। अंतिम कोना देखने के लिए क्या देखता है कि वहां पर एक सोने की बड़ी चट्टान एक चांदी के सिक्के पर टिकी हुई डगमग डोले, पर गिरे नहीं छूने पर भी वैसे ही रहती है। उसे कुछ समझ नहीं आया। वह वापिस द्वार पर आ गया और बोला कि सोने की चट्टान की बात समझ में नहीं आई तब वह भी बंदी हो गया।

चारों भाई बहुत देर तक नहीं आये तो युधिष्ठिर को चिंता हुई वह भी द्रोपदी सहित महल में गये।
भाइयों के लिए पूछा तब दरबान ने बताया कि वो चारों तो वो शर्त के अनुसार बंदी है।

युधिष्ठिर बोला - भीम तुमने क्या देखा?
भीम ने कुंऐ के बारे में बताया
तब युधिष्ठिर ने कहा- यह कलियुग में होने वाला है। एक बाप दो बेटों का पेट तो भर देगा परन्तु दो बेटे मिलकर एक बाप का पेट नहीं भर पायेंगे।
भीम को छोड़ दिया गया।

अर्जुन से पुछा - तुमने क्या देखा?
उसने फसल के बारे में बताया।
युधिष्ठिर ने कहा- यह भी कलियुग में होने वाला है।
वंश परिवर्तन अर्थात एक जाति के घर दूसरे जाति की लड़की ब्याही जायेंगी
अर्जुन भी छूट गया।

नकुल से पूछा - तुमने क्या देखा तब उसने गाय का वृतान्त बताया।
तब युधिष्ठिर ने कहा - कलियुग में माताऐं अपनी बेटियों के घर में पलेंगी। बेटी का दाना खायेंगी और बेटे सेवा नहीं करेंगे
तब नकुल भी छूट गया।

सहदेव से पूछा - तुमने क्या देखा, उसने सोने की चट्टान का वृतांत बताया।
तब युधिष्ठिर बोले- कलियुग में पाप धर्म को दबाता रहेगा। परन्तु धर्म फिर भी जिंदा रहेगा खत्म नहीं होगा

आज के कलयुग में यह सारी बातें सच साबित हो रही है।
युधिष्ठर को पूर्ण आभास था कि कलयुग में क्या होगा? इसीलिए उनको बहुत बुद्धिमान और विचारशील माना जाता है।

सार: बहुत चीज़ें इंसान के हाथ में नहीं होती। पर मानता और जानता वो ही है जो निष्पक्ष भाव से विचार कर सके। और कुछ तो ऐसा ज़रूर है जो पहले ही रचा जा चुका होगा इसीलिए निराश कभी ना होइये. समय आने पर सब ठीक हो ही जाता है

(पुरानी कहानियों से साभार)

May 27, 2018

शारदा का एक छोटा सा टेस्ट



एक गांव में एक बूढी औरत रहा करती थी. उसका नाम शारदा था. उसका अपना कोई नहीं था. अपना गुजारा करने के लिए वो दिन-रात गोबर के उपले बनाती और उनको गांव में बेच आती. इससे उसकी दो रोटी का जुगाड़ हो जाया करता. शारदा भगवान कृष्ण को बहुत मानती थी और उठते-बैठते उनका नाम जपा करती. अब जैसा कि हर जगह देखा ही जाता है कि आलोचना और बुराई करने वाले लोग किसी को नहीं छोड़ते. उस गांव में भी कुछ ऐसे ही मास्टरपीस थे जो शारदा की भक्ति का मज़ाक उड़ाते और उसको तंग करने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे.

और एक दिन शाम ढ़लते ही उन लोगों ने शारदा के बनाये सारे उपले चुरा लिए और बात करने लगे कि अब देखते हैं कि जिस कृष्ण का ये नाम लिए फिरती है, वो इसकी हेल्प कैसे करते हैं? अगली सुबह जब शारदा की नींद खुली तो उसने पाया कि उसके बनाये सारे उपले कोई चुरा कर ले गया.

शारदा मन ही मन हंसती है और अपने कान्हा से कहती है,“पहले तू माखन चुराता था और मटकी फोड़ गोपियों को सताता था. और अब इस बुढ़िया के उपले छुपा मुझे सताता है. ठीक है, जैसी तेरी इच्छा”. यह कह शारदा अगले दिन के लिए उपले बनाना शुरू कर देती है. दोपहर होने लगती है. उसे जोरों से भूख लगी है लेकिन घर में खाने को कुछ भी नहीं है. दो गुड़ के टुकड़े रखे हैं बस. शारदा गुड़ का एक टुकड़ा मुहं में डाल कर, पानी के कुछ घूंट पी कर आराम करने लगती है.

अब क्या होता है?
भगवान तो भगवान हैं. भक्त के आगे नतमस्तक. शारदा को कष्ट में होता देख कर वो बैचन हो जाते हैं. लेकिन पहले शारदा का एक छोटा सा टेस्ट लेते हैं. वो साधु का वेश धारण कर उसके घर पहुँच जाते हैं और कुछ खाने को मांगने लगते हैं. बूढी शारदा अपने घर आए एक साधु को देख आनंदित होती है, पर घर में कुछ खाने को नहीं है - यह सोचकर दुखी भी हो जाती है. वो गुड़ का बचा वो अंतिम  टुकड़ा साधु को शीतल जल के साथ खाने को दे देती है. साधु महाराज शारदा के त्याग को देख ख़ुश हो जातें है और उसे सहायता का आश्वासन दे चले जाते हैं. 

साधु सीधे गांव के सरपंच के यहां पहुचते हैं और सरपंच से कहते हैं, “सुना है इस गांव में रहने वाली बूढी शारदा नामक औरत के उपले किसी ने चुरा लिए हैं. सरपंच जी, मेरे पास एक सिद्धि है. यदि गांव के सभी लोग अपने-अपने उपले ले आयें तो मैं अपनी सिद्धि के दम पर शारदा के सारे उपले अलग कर दूंगा”. सरपंच भी एक भला आदमी मालूम होता है और उसे भी शारदा के उपले चोरी होने का दुख है. इसलिए वो साधु रूपी कृष्ण की बात तुरंत मान कर गांव भर में मुनादी करवा देता है कि सब अपने घर के उपले तुरंत गांव की चौपाल पर लाकर रख दें.

जिन शातिर लोगों ने शारदा के उपले चोरी किये थे, वो भी अपने उपलों को शारदा के उपलों में मिला कर उपलों के बाकी ढेर में मिक्स कर देते हैं. उनको ये पूरा यकीन है कि सब उपले तो एक ही जैसे होते हैं अतः साधु महाराज इतने उपलों में से शारदा के उपले पहचान ही नहीं सकते.
यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि दुष्टों और ग़लत करने वाले लोगों को भगवान की लीला और शक्ति दोनों पर ही कभी विश्वास नहीं होता.

आगे क्या होता है?
साधु वेश में पधारे भगवान श्री कृष्ण सब उपलों को कान लगाकर सुनते हैं और पल भर में ही शारदा के उपले अलग निकाल देते हैं. शारदा अपने उपलों को तुरंत पहचान जाती है और ख़ुशी से अपने उपले उठा, साधु को प्रणाम कर अपने घर लौट जाती है.

जिन लोगों ने शारदा के उपले चुराए थे, उन्हें यह समझ में नहीं आता कि साधु ने कान लगाकर उन उपलों को कैसे पहचाना? अतः जब साधु गांव से कुछ दूर निकल जाते हैं तो आए तो वो लोग साधु से इसका कारण जानने पहुंच जाते हैं. 
फ़िर साधु उनको बड़े प्यार से समझाते है कि “शारदा हमेशा कृष्ण का नाम जपा करती थी और उसके भाव इतने पवित्र थे कि नाम जप उसके बनाये उपलों में भी चला जाता था. कान लगाकर मैंने बस यह सुना कि किन उपलों में से कृष्ण का नाम निकलता है और जिन उपलों में से कृष्ण का नाम निकल रहा था, मैंने उन्हे अलग कर दिया”. अब वो सभी लोग बिना कोई सवाल किये गांव वापिस चले जाते हैं.

सार: 
इस कहानी में साधु इम्पोर्टेन्ट नहीं है, भगवान की स्तुति इम्पोर्टेन्ट हैं. वैसे भी आजकल ओरिजिनल साधु मिलना बहुत ही टफ है. इसलिए इनके चक्करों में ना पड़ें. 

लेकिन हां, भगवान को सच्चे मन से ज़रूर याद करें. यकीं मानिये, इससे हम सभी पर ईश्वर कि महान कृपा होती है और मुसीबतों, गलत लोगों और बेवजह की कठिनाइयों से हमारा बचाव बहुत ही आसानी से हो सकता है. आप भी इसका टेस्ट करके देखिये. ये वास्तव में काम करता है और किताबी ज्ञान से थोड़ा हटकर जीने का विषय है.

आपका दिन शुभ हो.
(शारदा नाम काल्पनिक है)


May 24, 2018

"देख बेटी"



एक लड़की स्कूल से घर पहुंची. वो बहुत उदास थी. सीधे अपनी माँ के पास गयी और अपनी परेशानियां बताई. वो एग्जाम में फेल हो गई थी. ऊपर से अपनी बेस्ट फ्रेंड से उसका झगड़ा भी हुआ. और तो और उसकी फ़ेवरेट ड्रेस भी प्रैस करते समय जल गई. अब वो बेहद उदास थी.

वह रोते हुए बोली, "मम्मीदेखो ना, मेरी जिन्दगी के साथ सब कुछ उल्टा-पुल्टा ही हो रहा है". ऐसा क्यों होता है माँ?

माँ ने मुस्कराते हुए कहा - "यह उदासी और रोना छोड़ो, आओ चलो मेरे साथ रसोई में. मैं तुम्हारा मनपसंद केक बनाकर खिलाती हूँ".

लड़की का रोना बंद हो गया और वो हंसते हुये बोली- वाह माँ, "केक तो मेरा फेवरेट है. कितनी देर में बनेगा"? लड़की ने चहकते हुए पूछा. 

माँ ने सबसे पहले मैदे का डिब्बा उठाया और प्यार से अपनी लड़की से कहा- लो, पहले मैदा खा लो.

लड़की मुंह बनाते हुए बोली, इसे कोई खाता है भला?

माँ ने फिर मुस्कराते हुये कहा- "तो ये लो, थोड़ी चीनी ही खा लो".

फ़िर मिल्कमेड और एसेंस का डिब्बा भी दिखाया और कहा- लो, इसका भी स्वाद चख लो". 

लड़की हैरान थी, पूछा - "माँ", ये आज तुम्हें क्या हो गया है? ये मुझे किस तरह की चीजें खाने को दे रही हो"?

माँ ने बड़े प्यार और शांति से जवाब दिया, "देख बेटी" मनपसंद केक इन सभी बेस्वादी चीजों से ही बनता है और ये सभी मिलकर ही तो केक को इतना स्वादिष्ट और मीठा बनाती हैं.

मैं तुम्हें अभी से ही ये सिखाना चाहती हूँ कि "लाइफ़ का केक" भी इसी प्रकार की बेस्वाद घटनाओं को मिलाकर बनाया जाता है. अगर तुम फेल हो भी गई हो तो इसे चुनौती समझो. फिर मेहनत करके पास हो जाओ. अगर फ्रेंड से झगड़ा हो गया है तो अपना स्वभाव और व्यवहार इतना मीठा कर लो कि फिर कभी किसी से झगड़ा करने की नौबत ही ना आये. और यदि माइंड की टेंशन से ध्यान न देने के कारण "ड्रेस" जल गई है तो आगे से हमेशा फोकस रखो ताकि मन को हर परिस्थिति में अच्छा बना कर रख सको.

लड़की को बात समझ में आ गयी. वो माँ के गले लिपट गयी.
अब उसको मनपसंद केक खाने से कोई नहीं रोक सकता था.


May 22, 2018

आख़िर सबको पॉजिटिव होने का हक़ है.



भारत के पूर्व राष्ट्रपति, सबके प्रिय भारत रत्न अबुल पकिर जैनुलाअबदीन अब्दुल कलाम. हम जिन्हें डॉ ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नाम से और ‘मिसाइल मैन’ के नाम से भी जानते हैं. कमाल के व्यक्तित्व. शोभायमान जीवन. संघर्ष से सफ़लता और उससे भी ऊपर इंसानियत और मानवता के जीते जागते दीपक. उनकी सोच और उनके विचार हमारी संभावनाओं को अच्छी दिशा दे सकने में बेहतर रोल अदा कर सकते हैं. आइये उनके विचारों से हम अपने जीवन को ऊर्जा और पाजिटिविटी से भर डालें. ये बहुत ही फायदेमंद और पर्सनल/ प्रोफेशनल लाइफ़ को मैनेज करने में हमारी मदद कर सकते हैं. आपको अच्छे लगें तो आगे भी शेयर करें. आख़िर सबको पॉजिटिव होने का हक़ है.

Quote 1

Quote 2
अपने मिशन में कामयाब होने के लिए, आपको अपने लक्ष्य के प्रति एकचित्त निष्ठावान होना ही पड़ेगा.

Quote 3
इससे पहले कि सपने सच हों, आपको सपने देखने होंगे.

Quote 4
ज़िन्दगी में एक लक्ष्य रखो. लगातार ज्ञान प्राप्त करो. कड़ी मेहनत करो. और महान जीवन को प्राप्त करने के लिए दृढ रहो.

Quote 5
अगर तुम सूरज की तरह चमकना चाहते हो तो पहले सूरज की तरह जलना सीखो. ख़ुद को तपाओ. फ़िर सबकुछ तुम्हारा है.

Quote 6
मेरा विचार है कि छोटी उम्र में आप अधिक आशावादी होते हैं और आपमें कल्पनाशीलता भी अधिक होती है और पूर्वाग्रह भी कम होता है.

Quote 7
जो अपने दिल से काम नहीं कर सकते वे क्या हासिल करते हैं? बस खोखली चीजें. और अधूरे मन से मिली सफलता अपने आस-पास भी कड़वाहट ही पैदा कर सकती हैं. तो पूरे दिल से काम करना सीखो. जीवन में फॉर्मेलिटी के लिए कोई जगह नहीं हैं.

Quote 8
शिखर तक पहुँचने के लिए ताकत चाहिए होती है. फ़िर चाहे वो माउन्ट एवरेस्ट का शिखर हो या आपके पेशे का.

Quote 9
मेरे लिए, नकारात्मक अनुभव जैसी कोई चीज नहीं है.

Quote 10
किसी स्टूडेंट की सबसे ज़रूरी विशेषताओं में से एक है क्वेश्चन पूछना. स्टूडेंट्स को क्वेश्चन पूछने दीजिये.

Quote 11
विज्ञान मानवता के लिए एक खूबसूरत तोहफा है. हमें इसे बिगाड़ना नहीं चाहिए.

Quote 12
जब हृदय में सच्चाई होती है तो उस घर में सामंजस्य होता है. जब घर में सामंजस्य होता है, तब देश में एक व्यवस्था होती है और जब देश में व्यवस्था होती है तब दुनिया में शांति होती है.

Quote 13
शिक्षा का मूल मकसद कौशल और विशेषज्ञता के साथ अच्छे इंसान बनाना है. शिक्षकों द्वारा शानदार मनुष्य बनाये जा सकते हैं.

Quote 14
मेरे लिए सिर्फ़ दो तरह के लोग हैं: युवा और अनुभवी.

Quote 15
लिखना मेरा प्यार है. अगर आप किसी चीज से प्यार करते हैं तो आप उसके लिए बहुत सारा समय निकाल लेते हैं. मैं रोज दो घंटे लिखता हूं. आमतौर पर मैं मध्यरात्रि में शुरू करता हूं. कभी-कभी मैं रात 11 बजे से लिखना शुरू कर देता हूं.

Quote 16
युवाओं के लिए ये मेरा सन्देश है कि वे अलग सोचने का साहस रखें. आविष्कार करने का साहस रखें. अनदेखे रास्तों पर चलने का साहस रखें. असंभव को खोजने और समस्याओं पर जीत हासिल करके सफल होने का साहस रखें. ये महान गुण हैं जिनके लिए उन्हें ज़रूर काम करना चाहिए.

Quote 17
टीचर्स को स्टूडेंट्स के बीच जांच की भावना, रचनात्मकता, उद्यमशीलता और नैतिक नेतृत्व की क्षमता का निर्माण करना चाहिए और उनका रोल मॉडल बनना चाहिए.

Quote 18
भविष्य में सफलता के लिए क्रिएटिविटी सबसे ज़रूरी है और प्राइमरी एजुकेशन वो समय है जब टीचर्स उस स्तर पर बच्चों में क्रिएटिविटी ला सकते हैं.

Quote 19
महान शिक्षक ज्ञान, जूनून और करुणा से बने होते हैं.

Quote 20
यदि चार बातों का पालन किया जाए – एक महान लक्ष्य बनाया जाए, दूसरा ज्ञान अर्जित किया जाए, तीसरा कड़ी मेहनत की जाए और चौथा दृढ रहा जाए – तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है.

Quote 21
मुझे समुद्र से प्यार है.

Quote 22
मैं 18 मिलियन युवाओं से मिला हूं, और उनमें से हर एक सबसे अलग बनना चाहता है. कितना खुबसूरत है ये.

Quote 23
मुझे पक्का यकीन है कि जब तक किसी ने नाकामयाबी की कड़वी गोली न चखी हो, वो कायमाबी के लिए पर्याप्त ऊर्जा और एनर्जी नहीं बनाये रख सकता.



May 12, 2018

लेवल जीरो



वह बेहद मायूस, बेहद उदास था. 
आखिर जिसे उसने अपनी जिंदगी का लक्ष्य माना था, तमाम कोशिशों के बावजूद भी वो वहां नहीं पहुंच सका. निराश हो कर वो बार-बार कहता-मैं थक गया हूं. फेल हो चुका हूं. अपने लक्ष्य को पाने में नाकामयाब कोई भी आदमी शायद इसी तरह से पेश आता है. उसे लगता है कि उसका सब कुछ जैसे लुट गया है. लेकिन क्या ये हमेशा ही सच होता है? 

वर्जीनिया यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञानी जोनाथन हैत की रिसर्च बताती है कि बुरा समय, फेलियर और कभी कभी लेवल जीरो पर आ जाना जिंदगी में खुशहाल और सफ़ल होने के लिए बहुत जरूरी है.

ऐसा क्यों? वास्तव में जब हम फेल या नाकामयाब हो जाते हैं तो हम संसार की मूवमेंट को छोड़ कर अपनी मूवमेंट की तरफ़ चलना शुरू करते है. अपने भीतर गहरे उतरना सीखना शुरू करते हैं. बाहर-बाहर से दुनिया को देखना बंद होने लगता है. हम रीयलिस्टिक फेज पर क्लिक करना शुरू कर जाते हैं. देखना तो हम बाहर ही चाहते हैं लेकिन उस बाहर की दुनिया में मिले झटकों से हम बाहर से अपने भीतर जाने को मजबूर हो जाते हैं. और जैसे ही ऐसा होता है, हम ख़ुद से मिलना शुरू करते हैं. ख़ुद को पाना, ख़ुद को पहचानना स्टार्ट कर पाते हैं. अपने आप की असलियत, ओरिजिनालिटी को जानने के रास्ते पर चलना शुरू हो जाता है.

फ़िर क्या होता है?
जब हम भीतर यानि सेल्फ़ की ओर मूव करते हैं, तो क्या पा सकते हैं? अपने फेलियर पर सोच-विचार करते हुए हम अपनी कमियों को पहचानना शुरू करने लगते हैं. इन कमियों को हम कामयाबी की आंधी में शायद ही कभी देख पाते. फिर उन कमियों, अपनी गलतियों, अपने गुणों को सही रास्तों पर ले जाने का काम शुरू होने लगता है. और हम अचानक हैरान होते हैं कि अब लाइफ में चीज़ें ठीक होने लगी है. और ठीक यहीं से जिंदगी बदलने लगती है. हम अब ये देख पा रहें हैं कि ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है. औरों की अपेक्षा हमारे फेलियर बहुत छोटे और टेम्पररी हैं. और फ़िर जब हम सही तरीकों से ख़ुद को और आस-पास को, इस दुनिया को देखना शुरू करते हैं तो हमें दुनिया, इस दुनिया के लोग बेहद अच्छे लगने लगते हैं. और वो झटके जो हमें लगे थे, वो झटके नहीं बल्कि हमारे असली सलाहकार थे. 

अब हम जीतने लगते हैं ख़ुद को. मुस्कुराना सीख गए हैं हर एंगल से, हर मोमेंट पर. बिना ये परवाह किये कि सक्सेस क्या है और फेलियर क्या. बस जिंदगी इसी का नाम है. तो याद रखिये. फेलियर कोई निगेटिव चीज नहीं है. हार जाना किसी भी जिंदगी का अंत नहीं है. और वैसे भी बिना फेल हुए पास होने का मजा ही क्या है? फेल होना जिंदगी के लिए बेहद जरूरी है. इसके बिना हम असल में कामयाब हो ही नहीं सकते. जब हम अपनी हार से सबक लेना शुरू करेंगे, कामयाबी झक मार के हमारे पास आएगी. और कामयाबी क्या है? - हमारी ख़ुशी, दूसरों को बिना तंग करे.

सार: जिंदगी के सफर में हम सभी जीतना चाहते है. कोशिश ये करिए कि हम जिंदगी जीना सीखें और सफ़र के आनंद को ही सफलता मान लें. सक्सेस बस फेलियर के डर से ख़ुद को आज़ाद कर लेना है, इससे ज्यादा कुछ नहीं. संसार में आना-जाना तो लगा ही रहेगा. और हम हमेशा के लिए इस दुनिया में नहीं रहेंगे. सबके साथ ये ही सर्किल है. मस्त होकर चक्कर लगाते रहिये. बाय-बाय बोलने से पहले लव यू जिंदगी.


May 9, 2018

क्या अब आप ताली बजा सकते हो?

एक बार की बात है. एक गांव में एक औरत घर का सामान लेने एक दूकान पर गयी. दुकान का मालिक उस समय एक बुजुर्ग की बातें सुनने में व्यस्त था. औरत को भी उस बुजुर्ग की बातें अच्छी लगी और उनसे प्रभावित होकर उसने उन्हें अपने घर खाने का निमंत्रण दिया. 

बुजुर्ग निमंत्रण स्वीकार कर उस औरत के घर भोजन के लिए चल पड़े. रास्ते में जब लोगों ने उस औरत के साथ बुजुर्ग को देखा तो अचानक एक आदमी भीड़ को चीरता हुआ उनके पास आया और बोला कि आप इस औरत के साथ कैसे

बुजुर्ग ने बताया कि वह इस औरत के निमंत्रण पर उसके घर भोजन के लिए जा रहे हैं. यह जानने के बाद उस व्यक्ति ने कहा कि आप इस औरत के घर मत जाइये. आप की बहुत बदनामी होगी, क्योंकि यह औरत चरित्रहीन है. लेकिन बुजुर्ग नहीं रुके और उस औरत के साथ चलते रहे. कुछ ही देर में यह बात पूरे गांव में जंगल में आग की तरह फैल गई. 

आनन फानन में गांव का मुखिया दौड़ता हुआ आ गया और बुजुर्ग से उस औरत के घर न जाने की प्रार्थना की. विवाद बढ़ता बुजुर्ग ने सबको शांत रहने को कहा. फिर मुस्कराते हुए मुखिया का एक हाथ अपने हाथ में कस कर पकड़ लिया और बोले - मुखिया जी, क्या अब आप ताली बजा सकते हो? मुखिया बोला - एक हाथ से भला कोई ताली कैसे बजा सकता है?  
इस पर बुजुर्ग मुस्कुराते हुए बोले - जैसे एक हाथ से ताली नहीं बज सकती तो एक अकेली औरत चरित्रहीन कैसे हो सकती है, जब तक कि एक पुरुष उसे चरित्रहीन बनने पर बाध्य न करे?

सभी लोग अपना छोटा सा मुहं ले कर वहां से निकल गए. औरत की आंखों में पानी भर आया. घर पहुँच कर उसने बड़े प्रेम से उन्हें खाना खिलाया और विदा किया.

सार: दूसरों का जज बनने से पहले एक बार ख़ुद को भी परख कर देख लेना चाहिए. 

May 8, 2018

जीवन का अंत उस दिन होना शुरू हो जाता है......


मार्टिन लूथर किंग जूनियर. वाह, क्या व्यक्तित्व थे. उनके कुछ कमाल के विचार.

आपके सामने. कोट्स के रूप में. पढ़िए. जीवन में उतारिए और तर जाइये.


Quote# 1
“एक सच्चा लीडर लोगों के विचारों के पीछे नहीं चलता बल्कि वो लोगों के विचारो को बदल देता है।”


Quote# 2
“अंधकार से अंधकार को दूर नहीं किया जा सकता है, केवल प्रकाश से ही ऐसा किया जा सकता है। नफरत से नफरत को नहीं हटाया जा सकता है, केवल प्यार से ही ऐसा किया जा सकता है।”


Quote# 3
“सही काम को करने के लिए, समय हर क्षण सही होता है।”


Quote# 4
“हमें भाईयों की तरह मिलकर रहना सीखना पड़ेगा, वरना मूर्खों की तरह लड़कर सभी बर्बाद हो जाएंगे।”


Quote# 5
“आँख के बदले आँख” के प्राचीन सिद्धान्त से तो एक दिन सभी अंधे हो जाएंगे।”


Quote# 6
“किसी भी जगह हो रहा अन्याय हर स्थान पर न्याय के लिए खतरा है।”


Quote# 7
“हमारे जीवन का अंत उस दिन होना शुरू हो जाता है, जिस दिन हम उन मुद्दो के बारे में चुप हो जाते है जो आम समाज के लिए मायने रखते है।”


Quote# 8
“हमें सीमित निराशा को स्वीकार करना चाहिए, लेकिन असीमित आशा को कभी नहीं भूलना चाहिए।”


Quote# 9
“व्यक्ति का निर्णायक आकलन इससे नहीं होता है कि वह सुख व सहूलियत की घड़ी में कहां खड़ा है, बल्कि इससे होता है कि वह चुनौती और विवाद के समय में कहां खड़ा होता है।”


Quote# 10
“यदि तुम उड़ नहीं सकते हो तो दौड़ो, यदि तुम दौड़ नहीं सकते हो तो चलो, यदि तुम चल नहीं सकते हो तो रेंगो। लेकिन, तुम जैसे भी करो, तुम्हें आगे बढ़ना ही होगा।”


Quote# 11
“प्रेम एकमात्र ऐसी शक्ति है, जो शत्रु को मित्र में बदल सकती है।”


Quote# 12
“सबसे बड़ी त्रासदी बुरे व्यक्तियों का अत्याचार और दमन नहीं, बल्कि इस पर अच्छे लोगों का मौन रहना है।”


Quote# 13
“सच्ची शिक्षा का लक्ष्य चरित्र के साथ बुद्धिमता का विकास करना है। पूरी एकाग्रता से विचार करने की क्षमता देना ही शिक्षा का कार्य है।”


Quote# 14
“आपके ऊपर तब तक कोई सवार नहीं हो सकता जब तक की आपकी कमर झुकी नहीं हो, इसीलिए अपनी कमर सीधी करे और लक्ष्य के किए काम में जुट जाए।”


Quote# 15
“हमारी वैज्ञानिक शक्ति ने हमारी आध्यात्मिक शक्ति को कुचल दिया। हमारे पास गाइडेड मिसाइल तो है, लेकिन लोग मिस गाइडेड है।”


Quote# 16
“प्रत्येक व्यक्ति को यह फैसला कर लेना चाहिए कि वह रचनात्मक परोपकारिता के आलोक में चलेगा या विनाशकारी खुदगर्जी के अंधेरे मे।”


Quote# 17
“मानव की प्रगति कभी अपने आप नहीं होती। न्याय के लक्ष्य की ओर बढ़ाए गए हर कदम पर बलिदान, संघर्ष और तकलीफे होती है। लक्ष्य के लिए समर्पित व्यक्तियों का अथक परिश्रम और जूनून होता है।”


Quote# 18
“व्यक्ति जब तक व्यक्तिगत चिन्ताओ के दायरे से ऊपर उठकर पूरी मानवता की बड़ी चिंताओं के बारे में नहीं सोचता, तब तक उसने जिंदगी जीना ही शुरू नहीं किया है।”