Aug 24, 2018

हर कोई Excited था



ये उस Time की बात है जब बहुत Heavy वेट उठाने वाली क्रेनें हर जगह Available नहीं थीं. एक बड़ी इंडस्ट्री का प्लांट Construction चल रहा था लेकिन उस प्लांट को बनाने के दौरान एक बहुत बड़ी Problem सामने आ रही थी. Problem ये कि एक भारी भरकम मशीन को प्लांट में बने एक गहरे गढ्ढे के Base में Fit करना था. लेकिन मशीन का भारी वजन एक Challenge बन कर सामने था.

किसी तरह उस मशीन को Site पर लाया गया लेकिन Problem ये कि कैसे उसे 30 फीट गहरे गढ्ढे में उतारा जाये. ये एक बड़ी Complicated समस्या थी जिसे Solve किये बिना Mission Flop होना तय था और अगर किसी भी तरह Setting ठीक नहीं बैठी तो Base और मशीन दोनों को बहुत नुकसान उठाना पड़ सकता था.

In Last, इस समस्या का Solution ढूढ़ने के लिए प्लांट बनाने वाली कम्पनी ने एक टेंडर निकाला और इस टेंडर निकालने का Result ये हुआ कि बहुत से लोगो ने इस मशीन को गड्ढे में Fit करने के लिए अपने Offers भेजे. उन्होंने सोचा कि एक बड़ी क्रेन मंगवा कर आराम से मशीन फिट करवा देंगे. इस हिसाब से तक़रीबन टेंडर Apply करने वाले लगभग सभी लोगों ने 15 से 20 लाख रुपये तक के टेंडर Fill कर दिए.

उन्हीं लोगों के बीच एक आम आदमी भी मौजूद था.
उसने कंपनी से पूछा कि अगर ये मशीन किसी Reason से पानी से भीग जाये तो कोई समस्या होगी या सबकुछ ठीक रहेगा ?

इस पर कंपनी ने जबाव दिया कि मशीन को पानी में भीग जाने पर कोई फर्क नहीं पड़ता और इसका कोई Side Effect नहीं है. उसके बाद उस आदमी ने भी अपना टेंडर भर दिया.

जब सारे Offers देखे गये तो उस व्यक्ति ने काम करने के सिर्फ 5 लाख मांगे थे. जाहिर है मशीन Fitting का काम उसे ही मिला.
लेकिन Surprising Element ये था कि उस ने ये बताने से मना कर दिया कि वो इस काम को अंजाम तक कैसे पहुचायेगा?

उसने सिर्फ़ इतना कहा कि ये काम करने का Talent और Effective Team उसके पास है. कम्पनी बस उसे Date और Time बतायें कि किस दिन ये काम करना है.

आखिरकार वो दिन भी आ ही गया.
हर कोई Excited था ये जानने के लिए कि ये आदमी क्या कमाल करने वाला है और कैसे?
उसने तो Working Site पर भी कोई Experiment नहीं किया. बस जैसे ही वो दिन आया, उसके कई ट्रक उस Site पर पहुँचने लगे. उन सभी ट्रकों पर बर्फ लदी हुई थी, जिनसे गढ्ढे भरने का काम शुरू हो गया. जब बर्फ से पूरा गढ्ढा भर गया तो उन्होंने मशीन को खिसकाकर बर्फ की सिल्लियों के ऊपर लगा दिया. इसके बाद एक पोर्टेबल Water-pump स्टार्ट किया गया और गढ्ढे में Pipe डाल दिया जिससे कि पानी बाहर निकाला जा सके. बर्फ पिघलती गयी, पानी बाहर निकाला जाता रहा, मशीन नीचे जाने लगी.

2-3 घंटे में ही सारा काम पूरा हो गया और कुल Costing 1.43 लाख रुपये से भी कम आया. मशीन एकदम अच्छे से फिट हो गयी और उस व्यक्ति ने 3.5 लाख रुपये से अधिक Profit भी कमा लिया.

सार:
Tough से Tough Problems का भी Easy Solution निकाला जा सकता है. ये एक Art है, जो आदमी की Thinking, Vision और कुछ अलग करने की व्यवहारिक समझ पर Depend करता है. उस आदमी ने अपनी सफ़लता से ये साबित कर दिया कि भीड़ से अलग सोचकर और Peacefully उसके + और – पर विचार करके हम कहां से कहां पहुच सकते हैं. अब उस कंपनी के लगभग सभी टेंडर इसी आदमी को मिलते हैं.
आप क्या सोच रहे हैं? बहुत लोगों ने ऐसे कमाल किये हैं और आप भी उनमें से एक बन सकते हैं.

Aug 20, 2018

केकड़े



एक बार की बात है. एक विकसित कंट्री में एक इवेंट कंडक्ट किया गया. इवेंट अपने आप में अनूठा था क्योंकि उसमें पूरे विश्व भर के विभिन्न देशों से अलग-अलग तरह की यूनिक चीज़ें मंगाई गयी थी और उनका प्रदर्शन एक ही जगह पर करना था.

सभी देशों से रिक्वेस्ट की गयी कि वे कोई भी ऑब्जेक्ट, जीव-जन्तु, पेड़-प्लांट आदि एंट्री के रूप में सबमिट कर सकते हैं. इवेंट में शामिल होने की शर्त केवल ये थी कि भेजी गयी चीज़ खूबसूरत मेसेज या प्रेरणा देकर कुछ सिखाने वाली हो.

सभी देशों नें इस दिलचस्प इवेंट में आगे बढ़ कर हिस्सा लिया. आयोजन प्लेस पर एंट्री ही एंट्री कलेक्ट होने लगी. Organizers सभी चीज़ों को अच्छे से कलेक्ट कर संभाल कर रखने लगे ताकि कोई चीज़ इधर से उधर ना हो जाये. 

एक दिन Organizers सभी चीज़ों की लिस्ट तैयार कर रहे थे ताकि सभी चीज़ों को डिस्प्ले किया जा सके तभी उनकी नज़र एक टोकरी पर गयी. टोकरी में कुछ केकड़े रखे हुए थे. Organizers सरप्राइज रह गये. 


क्यों?

क्योंकि सभी केकड़े खुली टोकरी में रखे गए थे, टोकरी पर एक टैग लगा था जिसे पढ़ने से पता चला कि केकड़े भारत की तरफ़ से आई एक यूनिक एंट्री है. टैग पर केकड़ों की संख्या भी लिखी हुई थी. 
37 केकड़े. 
Organizers ने काउंटिंग की तो देखा कि टोकरी में अब भी पूरे 37 केकड़े मौजूद थे यानि एक भी केकड़ा Misplace नहीं था. सभी के सभी उस खुली टोकरी में प्रेजेंट थे. Organizers अब एक दूसरे को बड़ी हैरानी से देख रहे थे. उनके लिए ये एक चमत्कार से कम नहीं था.

फिर उस टोकरी को भी दूसरी अन्य चीज़ों के बीच रख दिया गया. अब इवेंट कंडक्ट होने वाले दिन का इन्तजार चल रहा था.  
Schedule के मुताबिक इवेंट स्टार्ट हुआ तो दिलचस्प फैक्ट्स सामने आने लगे. Organizers सब पॉइंट्स को नोट कर रहे थे.

कुछ समय बाद भारत का नंबर आया तो वो महानुभाव स्टेज पर पहुंचे जिन्हें भारत से आये केकड़ों की स्पेशलिटी Describe करनी थी. उनके स्टेज पर आते ही Organizers ने अपना क्वेश्चन पूछा  " ये 37 केकड़े इतना ट्रेवल करके इस खुली टोकरी में यहां तक कैसे पहुचें और इनमें से एक भी इस टोकरी को छोड़कर भागा क्यों नहीं?

आंसर था "केकड़ों की नेचर है एक दूसरे की टांग खिंचते रहना". इसलिए जब भी कोई केकड़ा टोकरी से बाहर आने की ट्राई करता तो तुरंत ही दूसरा उसको पकड़ कर वापिस खींच लेता और इसी तरह सभी 37 केकड़े खुली टोकरी में बिना भागे यहां तक आराम से पहुंच गए.

सार :
ये महान 37 केकड़े हम इंसानों को भी एक शानदार मेसेज देते हैं क्योंकि कहीं न कहीं हम इंसानों में भी ये गुण प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. ये बताता है हमारे अंदर छुपी नेगेटिव और जेलस नेचर को.
जब भी हम में से कोई साहसी पॉजिटिव आदमी नया या अच्छा रास्ता चुनना चाहता है या आगे बढ़ना या किसी को आगे बढ़ाना चाहता है तो हम उसे तरह-तरह का फियर दिखाकर या आलोचना करके उसे Demoralize करके पीछे खींचने में जुट जाते हैं. 

आईये हम अपने अंदर भी एक बार झाँक कर देख लें. कहीं ऐसे केकड़े हमारे अंदर छुपे ना बैठे हों? 
अब इंसान बनने का सबसे सही समय आ चुका है. चूकिएगा मत.

Aug 15, 2018

अटल बिहारी वाजपेयी



भारत के महानतम नेताओं, बुद्धिजीवियों और कवियों के सरताज अटल बिहारी वाजपेयी. 
अटल जी आज एम्स में अपनी ख़राब तबियत के चलते एडमिट हैं और पूरा देश उनके लिए प्रार्थना कर रहा है.
आइए जाने अटल जी के कुछ अनमोल कोट्स जो हमें नए सपने, नए रास्ते दिखाते हैं और सफ़ल जीवन की तरफ़ इशारा करते हैं बशर्ते हम उन रास्तों पर चलना चाहते हों.

Quote 1: खेती ही भारत का बुनियादी उद्योग है.

Quote 2: वास्तव में हमारे देश की लाठी कमजोर नहीं है, वरन् वह जिन हाथों में है, वे कांप रहे हैं.

Quote 3: शहीदों का रक्त अभी गीला है और चिता की राख में चिनगारियां बाकी हैं.

Quote 4: भगवान जो कुछ करता है, हमारी भलाई के लिए ही करता है.

Quote 5: आप मित्र बदल सकते हैं पर पड़ोसी नहीं.

Quote 6: मैं चाहता हूं भारत एक महान राष्ट्र बने, शक्तिशाली बने, संसार के राष्ट्रों में प्रथम पंक्ति में आए.

Quote 7: हम उम्मीद करते हैं की विश्व प्रबुद्ध स्वार्थ की भावना से काम करेगा.

Quote 8: हम अहिंसा में आस्था रखते हैं और चाहते हैं कि, विश्व के संघर्षों का समाधान शांति और समझौते के मार्ग से हो.

Quote 9: धर्म के प्रति मेरे आकर्षण का सबसे मुख्य कारण है कि, यह मानव का सर्वोत्कृष्ट धर्म है.

Quote 10: भारत एक प्राचीन राष्ट्र है. 15 अगस्त को किसी नए राष्ट्र का जन्म नहीं, इस प्राचीन राष्ट्र को ही स्वतंत्रता मिली.

Quote 11: भारत के प्रति अनन्य निष्ठा रखने वाले सभी भारतीय एक हैं, फिर उनका मजहब, भाषा तथा प्रदेश कोई भी क्यों न हो.

Quote 12: जीवन के फूल को पूर्ण ताकत से खिलाएं.

Quote 13: देश एक मंदिर है, हम पुजारी हैं. राष्ट्रदेव की पूजा में हमें अपने को समर्पित कर देना चाहिए.

Quote 14: मैं हिन्दू परम्परा में गर्व महसूस करता हूं लेकिन मुझे भारतीय परम्परा में और ज्यादा गर्व है.

Quote 15: हमारा कृषि-विकास संतुलित नहीं है और न उसे स्थायी ही माना जा सकता है.

Quote 16: हिन्दू धर्म के अनुसार जीवन का न प्रारंभ है और न अंत ही, यह एक अनंत चक्र है.

Quote 17: इतिहास ने, भूगोल ने, परंपरा ने, संस्कृति ने, धर्म ने, नदियों ने हमें आपस में बांधा है.

Quote 18: मजहब बदलने से न राष्ट्रीयता बदलती है और न संस्कृति में परिवर्तन होता.

Quote 19: मुझे अपने हिंदुत्व पर अभिमान है, किंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि मैं मुस्लिम-विरोधी हूं.

Quote 20: आदिवासियों की समस्याओं पर हमें सहानुभूति के साथ विचार करना होगा.

Quote 21: इंसान बनो, केवल नाम से नहीं, रूप से नहीं, शक्ल से नहीं, हृदय से, बुद्धि से, सरकार से, ज्ञान से.

Quote 22: हमें हिन्दू कहलाने में गर्व महसूस करना चाहिए, बशर्ते कि हम भारतीय होने में भी आत्मगौरव महसूस करें.

Quote 23: रामचरितमानस तो मेरी प्रेरणा का स्रोत रहा है.

Quote 24: हम अहिंसा में आस्था रखते हैं और चाहते हैं कि विश्व के संघर्षों का समाधान शांति और समझौते के मार्ग से हो.

Quote 25: जहां-जहां हमें सत्ता द्वारा सेवा का अवसर मिला है, हमने ईमानदारी, निष्पक्षता तथा सिद्धांतप्रियता का परिचय दिया है.


Aug 13, 2018

1 सप्ताह बाद यानि ठीक 8वें दिन



गांव ढोल-माजरा में एक यंगमैन रहता था. नाम था संदीप. था तो वह बहुत ही भला लेकिन उसमें एक शानदार कमी भी थी. वह हर काम को टाल दिया करता था. उसका ये हमेशा मानना था कि जो कुछ होता है, केवल भाग्य से होता है.

एक दिन एक साधु महाराज उसके पास आये. संदीप ने साधु की बहुत सेवा की। उसकी सेवा से खुश होकर साधु ने उसे पारस पत्थर देते हुए कहा - मैं तुम्हारी सेवा से बहुत ख़ुश हूं. तुम बहुत गरीब हो इसलिये मैं तुम्हे यह पारस पत्थर दे रहा हूं. ठीक 7 दिन बाद मै इसे तुम्हारे पास से ले जाऊंगा. इस बीच तुम जितना चाहो, उतना सोना बना लेना.

संदीप ने अपने घर में लोहा तलाश किया. थोड़ा सा लोहा मिला तो उसने उसी का सोना बनाकर बाजार में बेच दिया और उससे वह घर के लिए कुछ सामान ले आया. अगले दिन वह लोहा खरीदने के लिए बाजार गया, तो उस समय लोहा थोड़ा मंहगा मिला रहा था. यह देख कर संदीप खाली हाथ घर वापिस आ आया. 

3 दिन बाद वह फिर बाजार गया तो उसे पता चला कि इस बार तो लोहा और भी महंगा हो गया है. इसलिए वह लोहा खरीदे बिना ही वापस लौट गया. उसने सोचा - एक ना एक दिन तो लोहा जरुर सस्ता मिलेगा और जब सस्ता हो जाएगा तभी खरीदूंगा. ये सोचकर वह आराम से अपने घर पर बैठ गया और लोहे के दाम सस्ते होने और फिर उससे सोना बनाने के सपने में खो गया.

1 सप्ताह बाद यानि ठीक 8वें दिन साधु महाराज पारस लेने के लिए उसके घर पहुँच गए. संदीप ने कहा मेरा तो सारा समय ऐसे ही निकल गया. अभी तो मैं कुछ भी सोना नहीं बना पाया हूं. आप कृपया इस पत्थर को कुछ दिन और मेरे पास रहने दीजिए. लेकिन साधु ने साफ़ मना कर दिया. 

साधु ने कहा – तुम भी कमाल हो. लोहे के सस्ते होने का वेट करते रहे. ये नहीं सोचा कि सोना बना लेते तो कई गुना ज्यादा धन कमा और बचा सकते थे. तुम्हारे आलस और छोटी सोच ने तुम्हें भाग्य से मिले इस शानदार मौके का फ़ायदा भी नहीं लेने दिया. तुम्हारी जगह कोई और होता तो अब तक पता नहीं क्या-क्या कर डालता.

अब तुम भगवान को दोष मत देना. तुम्हें चांस मिला और तुमने वो खो दिया. अब जो है, उसमें संतोष करो और आगे से ध्यान रखना कि अवसर लाइफ में बार-बार नहीं आते. जो समय का उपयोग करना नहीं जानता, वह हमेशा दु:खी रहता है. इतना कहते हुए साधु महाराज पत्थर लेकर वहां से चले गए.

सार: - काम को टालते रहना और भाग्य भरोसे बैठे रहना सिर्फ़ आपको दुखी ही करेगा. और कुछ नहीं. लाइफ में ब्रेक लेकर अपनी इस आदत को बदलते रहिये. सुख लौट आएगा.
(सभी नाम काल्पनिक हैं)

Aug 7, 2018

टेबल नंबर 2



जाने-अनजाने आपको कभी-कभी ऑटोमेटिकली कुछ ऐसी टिप्स मिल जाती हैं जो जीवन के सफ़र को और गहरा और फोकस्ड बना डालती हैं और ऐसी टिप्स फ्री में नसीब हों तो फिर क्या कहने.... तब ये सब एक लाटरी निकलने जैसा फील होता है और लम्बी उम्र तक इसका असर बरकरार रह जाता है. 

ये छोटी सी कहानी आज उसके नाम. एक दोस्त की एक कहानी...उसकी जुबानी.

कई दिनों की मेहनत के बाद कभी कभी विद फैमिली घर से बाहर जाने का मौका मिले तो क्या कहने...हमारे साथ भी पिछले दिनों कुछ ऐसा ही हुआ. हम शहर के एक पोपुलर होटल गुलफ़ाम में शाम के खाने के लिए टेबल नंबर 2 पर बैठे थे. टेबल नंबर 1 पर एक छोटी फैमिली अपने लम्हों के साथ सफर पर थी. और अब उन्हें जोरों की भूख लगी थी.
उस फैमिली के हेड यानि बच्चों के डैड खाने का आर्डर करने वाले थे. वो बाकि सभी मेंबर्स से उनकी चॉइस पूछ रहे थे.
बेटी बोली- डैड, प्लीज बर्गर फोर मी.
वाइफ – डोसा फोर मी.
डैड ने कहा ओके एंड मैं तो चोवमिन लूंगा.
बेटा कन्फ्यूज्ड था. उसकी 2 चॉइस उसे कंफ्यूज कर रही थी. क्या खाऊ? डोसा या बर्गर?
डैड – बेटे, जल्दी फाइनल करो. बस तुम्हारा चॉइस करना बाकी है. तुम जो भी मांगोगे, वो मिलेगा लेकिन किसी और की प्लेट पर लार मत टपकाना.
उधर हमारा आर्डर आ चुका था लेकिन उस फैमिली का ट्रायल पीरियड अभी चल रहा था.
उनका बेटा कंफ्यूज था.
उसकी मम्मी ने कहा – ऐसा करो हम मंगा लेते हैं. तुम सबमें से थोड़ा-थोड़ा खा लेना.
डैड ने कहा – इतना क्या सोच रहे हो? अपनी पसंद की कोई एक चीज़ मंगा लो और एन्जॉय करो.
मैं उन्हें देख कर हैरान हो रहा था. सोच रहा था की उसके डैड उसे उसकी पसंद को दोनों चीज़ क्यों नहीं दिलवा रहे?
लेकिन उसके डैड अपने बेटे को पक्का करना चाह रहे थे कि वो कोई एक चॉइस फाइनल करे. इन लास्ट, बेटे ने डोसा फाइनल कर दिया. अब जाकर उनका आर्डर बुक हो सका.

उधर हमने अपना खाना निपटा लिया था. हम फ्री होकर टेबल छोड़ने ही लगे थे कि चलते-चलते मैंने अपना परिचय उस लड़के के डैड को दिया और हैरान होते हुए कहा – सर, मेरे मन में एक सवाल है. क्या मैं पूछ सकता हूं?
उन्होंने कहा – बिलकुल.
मैंने कहा – आपका बेटा अपनी चॉइस फाइनल नहीं कर पा रहा था. वो कन्फ्यूज्ड था. फ़िर भी आपने ना कोई जल्दी दिखाई और ना ही आप उस पर गुस्सा हुए? और तो और आपने ये भी नहीं कहा कि तुम दोनों चीज़ें ले लो? मैं होता तो दोनों चीज़ें दिलवा देता ताकि वो ख़ुश महसूस कर सके और हम भी शांति से कुछ खा लें. आप प्लीज मुझे अपना लॉजिक बता सकेंगे?

उन्होंने रिप्लाई किया – सर, ये अभी छोटा बच्चा है. और कच्ची मिट्टी के जैसा है. अभी इसे समय रहते फ़ैसले लेना सीख लेना चाहिए. दोनों चीज़ें दिलाना बड़ी बात नहीं थी. लेकिन इसे धीरे-धीरे ये पक्का करना ज़रूरी है कि मन तो हमेशा अलग-अलग चीज़ों के लिए भटकेगा पर उसे कहीं ना कहीं तो रोकना ही होगा क्योंकि जिंदगी में डबल माइंड होने से प्रॉब्लम कभी सोल्व नहीं हो सकती.
बड़ी बात ये है कि इससे मेरा बेटा जहां अपनी कई सारी चॉइस (इच्छाओं) में सही और गलत इच्छा को पहचानना सीख पायेगा वहीँ अपनी फाइनल की गयी चॉइस को सेलेक्ट कर पेशेंस रखने में भी कामयाब रहेगा वरना बड़ा होते होते इसके विचारों में हमेशा सिर्फ़ अपने फ़ायदे की बात होगी और ये दूसरों की चॉइस का रेस्पेक्ट करना भी नहीं सीख सकेगा.
और फाइनली मैं इसे समझाना चाहता हूं कि हमें हमेशा एक ही चीज़ पर फोकस करने की कोशिश करते रहना चाहिए ताकि हम अपनी मंजिल को पाने में अफ़सोस के दर्द से ना गुजरें. बस सर, ये ही वजह थी कि मैंने आर्डर करने में इतना समय लिया.

लास्ट में उन्होंने मुझ से हाथ मिलाया और कहा – सर, सच बात तो ये है कि अपनी पसंदीदा हर चीज़ ना तो किसी को मिलती है और ना ही मिलेगी. ये बात हम जितनी जल्दी समझ लें तो ही बेहतर.

मैं उन शख्स से मिलकर मानो अपने बचपन की सैर करता हुआ घर पंहुचा और सबको सुला कर ख़ुद के साथ पूरा सोया.

 (दिए गए नाम काल्पनिक हैं)

Aug 3, 2018

म्यूजिक - ईयर-वर्म : “कान का कीड़ा”



म्यूजिक किसे अच्छा नहीं लगता? और गाना सुनने का मतलब है कि वो आपको  किसी ख़ास सफ़र पर ले जा रहा है. ये सफ़र आपके थॉट्स, आपकी यादों और आपके इमोशन की अंदरूनी यात्रा है और गाना उस सफ़र को हवा देते चलता है. 

बड़ी इंटरेस्टिंग बात है कि अगर आप गाने सुनने का शौक रखते हैं तो आपने कई बार फील किया होगा कि आपको किसी खास गाने का इतना क्रेज चढ़ जाता है कि कई दिनों तक आप वही गाना बार-बार सुनना चाहते हैं. वह गाना आपके दिल, आपके दिमाग में ऐसे मूव करता है मानो आप किसी मैडिटेशन प्रोसेस को फॉलो कर रहे हों. होता है ना ऐसा अक्सर. आप हर टाइम बस उस गाने में खोये रहते हैं, उसे जाने-अनजाने ही गुनगुनाते रहते हैं.

आपके लिए यह एक सामान्य बात है कि ठीक है जी गाना अच्छा लगा, गुनगुना लिया..इसमें क्या ख़ास बात है? लेकिन है साहब बिलकुल है, साइंटिफिक है जी. यह सब एक स्पेशल मेंटल सिचुएशन में ही हो पाता है.
गोल्डस्मिथ कॉलेज, लंदन की म्यूजिक साइकॉलजी रिसर्चर डॉ. वी. विलियमसन की माने तो इस सिचुएशन को कॉग्निटिव इच या स्टक-सॉन्ग सिंड्रोम या फिर स्टिकी म्यूजिक कहा जा सकता है. आम बोलचाल की लैंग्वेज में इसे ईयर-वर्म मीन्स “कान का कीड़ा” भी बोल दिया जाता है. हुआ ये कि अपनी रिसर्च के दौरान  विलियमसन ने अपने सर्वे में करीब 3000 लोगों से इस तरह के गानों और और इसके एक्सपीरियंस से जुड़े कई क्वेश्चन पूछे. लोगों ने इसके जवाब में करीब 10-15 गानों के नाम बता डाले. डॉ. वी. ने जब इन गानों पर रिसर्च स्टार्ट की तो इन सब में एक यूनिक सा रिलेशन देखा. क्या देखा?

रिजल्ट 1: 
उनके रिजल्ट्स बताते है कि जब भी कोई नया गाना ऑन रिलीज होता है तो लगभग हर प्लेटफ़ॉर्म जैसे कि टीवी चैनल्स, इंटरनेट या रेडियो पर हमें बस वही गाना बजता दिखाई देता है. और हर जगह एक ही गाने के रिपीट डिस्कशन से आपका माइंड और आपका हार्ट उस गाने से एक बोंडिंग फील करने लगता है. जब आपके आस-पास के लोग भी उसी गाने की बात करते हैं तो ये सिचुएशन और भी शानदार हो जाती है. ईयरवर्म यानि किसी एक ही ऑडियो-विडियो गाने का बार-बार सुनाई देना.

रिजल्ट 2: 
डॉ. वी. की रिसर्च से यह भी सामने आया है कि इस तरह से एक ही गाने को पसंद करने का एक फोकस्ड रीज़न आपकी टेंशन भी हो सकती है. आप ओब्सर्व करें कि जब आप बहुत ज्यादा पजल और तनावग्रस्त फील करते हैं तो उस पर्टिकुलर सिचुएशन के अनुसार ही आपके माइंड में एक ही गाना चलता रहता है. जैसे अगर एक मोमेंट पर आपके रिश्तों में खटास है तो आपका माइंड आपको  सैड सॉन्ग्स की चॉइस ऑफर करेगा और आप उस सिचुएशन में उदास रिएक्शन से गुजरेंगे क्योंकि उस टाइम जोन में ऐसे गाने से आप खुद को फीलिंगफुल तरीके से जुड़ा हुआ पाते हैं. और बस फ़िर आपको इस तरह से वो एक ही गाना बार-बार सुनने की विश होने लगती है और वो गाना कुछ दिनों तक आपका हमसफ़र बन जाता है. जहां एक और इसे प्रॉब्लम की तरह देखा जाता है वहीँ दूसरी तरफ ये एक रिलैक्सिंग रेमेडी भी है जो आपको टेंशन फ्री करने में हेल्प करती है.

टिप्स: 
अगर आप लम्बे समय से ये चीज़ फेस कर रहें हैं तो थोड़ा सोचिये क्योंकि इसकी ज्यादा आदत आपको कोई एडिक्शन ना दे दे. अगर आपको इस प्रॉब्लम  से पीछा छुड़ाना है तो अपने माइंड को नए थॉट्स देकर किसी और काम में बिजी रहना स्टार्ट करिए. कोई गेम खेलिए. एक्सरसाइज कीजिये. पसीना बहाइये. गाने सुनने का मज़ा सिर्फ़ तब तक लीजिये जब तक वो आपको रिलैक्स और पॉजिटिव रख रहा हो. अदरवाइज ये कहीं आपको कहीं ज्यादा सरप्राइज कर सकता है.


कृष्ण लीला


एक छोटी लेकिन समझ कर जीना सिखाने वाली कहानी. आइये देखें.

महाभारत का युद्ध चल रहा था. भीष्म और द्रोणाचार्य मारे जा चुके थे. और सेनाध्यक्ष की पोस्ट दुर्योधन ने कर्ण के हवाले कर दी थी. कर्ण के रणकौशल के सामने पाण्डव सेना के छक्के छूटने लगे थे. ख़ुद अर्जुन की हालत भी पस्त हो चली थी. वह निराश होने लगा.
अब भाग्य का कमाल देखिये या कर्ण के बैड लक का या के परशुराम जी के श्राप का: कर्ण के रथ का पहिया कीचड़ में धँस गया. यह देखकर कर्ण तुरंत रथ से नीचे कूदा और उसे निकालने की कोशिश करने लगा.
श्रीकृष्ण ने कर्ण की यह पोजीशन देख अर्जुन को उस पर बाण वर्षा करने का इशारा किया. अर्जुन ने उनके आदेशों का पालन किया. नतीजा ये हुआ कि कर्ण बाणों की वर्षा को नहीं झेल सका. 
उसने अर्जुन से कहा, "हे अर्जुन, थोड़ी देर रुक जाओ. क्या तुम्हें दिखाई नहीं दे रहा कि मेरा फोकस रथ का पहिया निकालने की तरफ़ है? क्या तुम नहीं जानते कि जो फाइटर रथविहीन हो, जिसके अस्त्र-शस्त्र ख़त्म हो गये हों, या जो निहत्था हो और युद्ध रोकने की प्रेयर कर रहा हो, ऐसे फाइटर पर धर्मयुद्ध के जानकार और बहादुर शस्त्र-प्रहार नहीं करते?
इसलिए हे धनुर्धर ! जब तक मैं इस पहिये को कीचड़ से बाहर न निकाल लूँ, मुझ पर प्रहार न करो, क्योंकि यह धर्म के फेवर में नहीं होगा".

कर्ण का अर्जुन को ऐसा कहना श्रीकृष्ण को शूल की तरह चुभा.

उन्होंने प्रेमपूर्वक कर्ण से कहा, "बड़े आश्चर्य की बात है कर्ण कि आज अचानक तुम्हें धर्म याद आ रहा है?
सच है कि जब नीच मनुष्य मुसीबत में पड़ता है, तो उसे अपने कुकर्मों की याद तो नहीं आती, मगर दूसरों को धर्मोपदेश देने का विचार अवश्य आता है. 
हे कर्ण, उचित होता, तुमने अपने धूर्त कर्मों और पापों का विचार किया होता! हे महावीर योद्धा कर्ण ! जब दुर्योधन के साथ मिलकर तुमने लाक्षागृह बनवाया, भीम को खत्म करने के इरादे से जहर पिलवाया, 13 साल बीत जाने के बाद भी पाण्डवों को उनका राज्य नहीं दिया, देवी द्रौपदी का चीरहरण करवाया, निहत्थे अभिमन्यु को तुम्हारे समेत 7 महारथियों ने क्रूरता से मारा, तब तुम्हारा ये धर्मज्ञान कहाँ चला गया था?

क्या तब तुम्हें धर्मपालन की याद नहीं आई? और अब जब तुम पर मौत का साया मंडरा रहा है तो तुम अच्छाई और धर्म की बातें कर रहे हो?
कर्ण के पास भगवान के सवालों का कोई जवाब नहीं था.
वह अर्जुन की बाणवर्षा के सामने कुछ नहीं कर सका और कुछ ही देर बाद धराशायी हो कर काल के मुहं में समा गया.

सार: 
हम चाहे जितना चालाक बन जायें लेकिन अटल सत्य ये ही है कि कर्मों की चेकिंग टाइम तो टाइम होती ही है. और हमारा हिसाब तो हमें ही चुकता करना पड़ेगा. 
जैसी करनी, वैसी भरनी - इस कहावत को पुरानी मानकर अनदेखा ना करें तो ही बेहतर.