Aug 24, 2018

हर कोई Excited था



ये उस Time की बात है जब बहुत Heavy वेट उठाने वाली क्रेनें हर जगह Available नहीं थीं. एक बड़ी इंडस्ट्री का प्लांट Construction चल रहा था लेकिन उस प्लांट को बनाने के दौरान एक बहुत बड़ी Problem सामने आ रही थी. Problem ये कि एक भारी भरकम मशीन को प्लांट में बने एक गहरे गढ्ढे के Base में Fit करना था. लेकिन मशीन का भारी वजन एक Challenge बन कर सामने था.

किसी तरह उस मशीन को Site पर लाया गया लेकिन Problem ये कि कैसे उसे 30 फीट गहरे गढ्ढे में उतारा जाये. ये एक बड़ी Complicated समस्या थी जिसे Solve किये बिना Mission Flop होना तय था और अगर किसी भी तरह Setting ठीक नहीं बैठी तो Base और मशीन दोनों को बहुत नुकसान उठाना पड़ सकता था.

In Last, इस समस्या का Solution ढूढ़ने के लिए प्लांट बनाने वाली कम्पनी ने एक टेंडर निकाला और इस टेंडर निकालने का Result ये हुआ कि बहुत से लोगो ने इस मशीन को गड्ढे में Fit करने के लिए अपने Offers भेजे. उन्होंने सोचा कि एक बड़ी क्रेन मंगवा कर आराम से मशीन फिट करवा देंगे. इस हिसाब से तक़रीबन टेंडर Apply करने वाले लगभग सभी लोगों ने 15 से 20 लाख रुपये तक के टेंडर Fill कर दिए.

उन्हीं लोगों के बीच एक आम आदमी भी मौजूद था.
उसने कंपनी से पूछा कि अगर ये मशीन किसी Reason से पानी से भीग जाये तो कोई समस्या होगी या सबकुछ ठीक रहेगा ?

इस पर कंपनी ने जबाव दिया कि मशीन को पानी में भीग जाने पर कोई फर्क नहीं पड़ता और इसका कोई Side Effect नहीं है. उसके बाद उस आदमी ने भी अपना टेंडर भर दिया.

जब सारे Offers देखे गये तो उस व्यक्ति ने काम करने के सिर्फ 5 लाख मांगे थे. जाहिर है मशीन Fitting का काम उसे ही मिला.
लेकिन Surprising Element ये था कि उस ने ये बताने से मना कर दिया कि वो इस काम को अंजाम तक कैसे पहुचायेगा?

उसने सिर्फ़ इतना कहा कि ये काम करने का Talent और Effective Team उसके पास है. कम्पनी बस उसे Date और Time बतायें कि किस दिन ये काम करना है.

आखिरकार वो दिन भी आ ही गया.
हर कोई Excited था ये जानने के लिए कि ये आदमी क्या कमाल करने वाला है और कैसे?
उसने तो Working Site पर भी कोई Experiment नहीं किया. बस जैसे ही वो दिन आया, उसके कई ट्रक उस Site पर पहुँचने लगे. उन सभी ट्रकों पर बर्फ लदी हुई थी, जिनसे गढ्ढे भरने का काम शुरू हो गया. जब बर्फ से पूरा गढ्ढा भर गया तो उन्होंने मशीन को खिसकाकर बर्फ की सिल्लियों के ऊपर लगा दिया. इसके बाद एक पोर्टेबल Water-pump स्टार्ट किया गया और गढ्ढे में Pipe डाल दिया जिससे कि पानी बाहर निकाला जा सके. बर्फ पिघलती गयी, पानी बाहर निकाला जाता रहा, मशीन नीचे जाने लगी.

2-3 घंटे में ही सारा काम पूरा हो गया और कुल Costing 1.43 लाख रुपये से भी कम आया. मशीन एकदम अच्छे से फिट हो गयी और उस व्यक्ति ने 3.5 लाख रुपये से अधिक Profit भी कमा लिया.

सार:
Tough से Tough Problems का भी Easy Solution निकाला जा सकता है. ये एक Art है, जो आदमी की Thinking, Vision और कुछ अलग करने की व्यवहारिक समझ पर Depend करता है. उस आदमी ने अपनी सफ़लता से ये साबित कर दिया कि भीड़ से अलग सोचकर और Peacefully उसके + और – पर विचार करके हम कहां से कहां पहुच सकते हैं. अब उस कंपनी के लगभग सभी टेंडर इसी आदमी को मिलते हैं.
आप क्या सोच रहे हैं? बहुत लोगों ने ऐसे कमाल किये हैं और आप भी उनमें से एक बन सकते हैं.

Aug 20, 2018

केकड़े



एक बार की बात है. एक विकसित कंट्री में एक इवेंट कंडक्ट किया गया. इवेंट अपने आप में अनूठा था क्योंकि उसमें पूरे विश्व भर के विभिन्न देशों से अलग-अलग तरह की यूनिक चीज़ें मंगाई गयी थी और उनका प्रदर्शन एक ही जगह पर करना था.

सभी देशों से रिक्वेस्ट की गयी कि वे कोई भी ऑब्जेक्ट, जीव-जन्तु, पेड़-प्लांट आदि एंट्री के रूप में सबमिट कर सकते हैं. इवेंट में शामिल होने की शर्त केवल ये थी कि भेजी गयी चीज़ खूबसूरत मेसेज या प्रेरणा देकर कुछ सिखाने वाली हो.

सभी देशों नें इस दिलचस्प इवेंट में आगे बढ़ कर हिस्सा लिया. आयोजन प्लेस पर एंट्री ही एंट्री कलेक्ट होने लगी. Organizers सभी चीज़ों को अच्छे से कलेक्ट कर संभाल कर रखने लगे ताकि कोई चीज़ इधर से उधर ना हो जाये. 

एक दिन Organizers सभी चीज़ों की लिस्ट तैयार कर रहे थे ताकि सभी चीज़ों को डिस्प्ले किया जा सके तभी उनकी नज़र एक टोकरी पर गयी. टोकरी में कुछ केकड़े रखे हुए थे. Organizers सरप्राइज रह गये. 


क्यों?

क्योंकि सभी केकड़े खुली टोकरी में रखे गए थे, टोकरी पर एक टैग लगा था जिसे पढ़ने से पता चला कि केकड़े भारत की तरफ़ से आई एक यूनिक एंट्री है. टैग पर केकड़ों की संख्या भी लिखी हुई थी. 
37 केकड़े. 
Organizers ने काउंटिंग की तो देखा कि टोकरी में अब भी पूरे 37 केकड़े मौजूद थे यानि एक भी केकड़ा Misplace नहीं था. सभी के सभी उस खुली टोकरी में प्रेजेंट थे. Organizers अब एक दूसरे को बड़ी हैरानी से देख रहे थे. उनके लिए ये एक चमत्कार से कम नहीं था.

फिर उस टोकरी को भी दूसरी अन्य चीज़ों के बीच रख दिया गया. अब इवेंट कंडक्ट होने वाले दिन का इन्तजार चल रहा था.  
Schedule के मुताबिक इवेंट स्टार्ट हुआ तो दिलचस्प फैक्ट्स सामने आने लगे. Organizers सब पॉइंट्स को नोट कर रहे थे.

कुछ समय बाद भारत का नंबर आया तो वो महानुभाव स्टेज पर पहुंचे जिन्हें भारत से आये केकड़ों की स्पेशलिटी Describe करनी थी. उनके स्टेज पर आते ही Organizers ने अपना क्वेश्चन पूछा  " ये 37 केकड़े इतना ट्रेवल करके इस खुली टोकरी में यहां तक कैसे पहुचें और इनमें से एक भी इस टोकरी को छोड़कर भागा क्यों नहीं?

आंसर था "केकड़ों की नेचर है एक दूसरे की टांग खिंचते रहना". इसलिए जब भी कोई केकड़ा टोकरी से बाहर आने की ट्राई करता तो तुरंत ही दूसरा उसको पकड़ कर वापिस खींच लेता और इसी तरह सभी 37 केकड़े खुली टोकरी में बिना भागे यहां तक आराम से पहुंच गए.

सार :
ये महान 37 केकड़े हम इंसानों को भी एक शानदार मेसेज देते हैं क्योंकि कहीं न कहीं हम इंसानों में भी ये गुण प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. ये बताता है हमारे अंदर छुपी नेगेटिव और जेलस नेचर को.
जब भी हम में से कोई साहसी पॉजिटिव आदमी नया या अच्छा रास्ता चुनना चाहता है या आगे बढ़ना या किसी को आगे बढ़ाना चाहता है तो हम उसे तरह-तरह का फियर दिखाकर या आलोचना करके उसे Demoralize करके पीछे खींचने में जुट जाते हैं. 

आईये हम अपने अंदर भी एक बार झाँक कर देख लें. कहीं ऐसे केकड़े हमारे अंदर छुपे ना बैठे हों? 
अब इंसान बनने का सबसे सही समय आ चुका है. चूकिएगा मत.