Sep 30, 2018

वह बड़ा खुश था. हैप्पी.





एक राजा ने अपनी सेवा के लिए अपने दरबार में एक नाई की अपॉइंटमेंट की. नाई उसकी मालिश करता, शेव बनाता और कुछ गुनगुनाता रहता. 

राजा हैरान. क्यों? नाई हर पल प्रसन्न, बड़ा आनंदित, हमेशा मस्ती में. 

राजा से उसे 1 रुपया रोज की सैलरी मिलती. उस 1 रुपया सैलरी में वह खूब खाता-पीता, दोस्तों को भी खिलाता-पिलाता और लाइफ़ को एन्जॉय करता. नाई रात को जब सोता तो उसके पास एक फूटी कोड़ी ना बचती लेकिन वो रिलैक्स होकर सोता. अगले दिन उसे फिर उसे फ़िर 1 रुपया मिल जाता और उसका रूटीन वैसे ही चलता. वह बड़ा खुश था. हैप्पी.

वो इतना खुश था कि राजा को मन ही मन उससे जलन होती. राजा होते हुए भी वो इतना खुश नहीं था. खुशी राजा बनने से मिल ही जाए, ये ज़रूरी तो नहीं. उदासी और चिंताओं के बोझ और पहाड़ उसके सिर पर थे.

उसने पूछा तेरी हैप्पीनेस का सीक्रेट बता ओ नाई?
नाई: मैं तो जीरो हो महाराज. मैं कोई बड़ा बुद्धिमान नहीं. लेकिन, जैसे आप मुझे ख़ुश देख कर सरप्राइज होते हो. वैसे ही मैं भी आपको देख कर सरप्राइज होता हूं कि आपके दुखी होने का कारण क्या है?

मेरे पास तो कुछ भी नहीं और मैं फ़िर भी happy फील करता हूं. आपके पास सब है और आप फ़िर भी sad. आप मुझे ज्यादा surprise में डाल देते हैं. मैं तो ख़ुश हूं क्योंकि ख़ुश रहना स्वाभाविक है, और होने को है ही क्या?

राजा के मन को तसल्ली नहीं हुई. उसने अपने वफ़ादार मिनिस्टर को बुलाया और कहा कि ये नाई इतना ख़ुश है कि मेरे मन में विचार आता है कि राजा होने से बेहतर तो मैं नाई ही होता तो ज्यादा अच्छा था. राजा होकर क्यों फंस गया? ना मुझे रात को नींद आती है. न दिन में चैन मिलता है और रोज चिंताएं बढ़ती ही चली जाती हैं. 1 problem solve करो तो 10 दूसरी खड़ी हो जाती हैं. नाई होना कितना lucky है.

मिनिस्टर ने कहा, आप tension मत लीजिए. let मी find the solution.

राजा ने कहा, क्या करोगे

उसने कहा, कुछ नहीं. आप कुछ दिनों में फ़र्क देखना. मिनिस्टर ने क्या किया? एक रात को 99 रुपये एक थैली में रखे और नाई के घर में फेंक आया. जब सुबह नाई उठा, तो उसने 99 गिने, वह परेशान हो गया. उसने कहा, बस 1 रुपया आज और मिल जाए तो आज उपवास ही रखेंगे, 100 पूरे हो जायेंगे.

अब क्या था. टेंशन स्टार्ट हो गयी. खेल शुरू हो गया. 

जिसने कभी “कल” की चिंता ही नहीं की थी. जो बस “आज” में जीता था वो दुविधा में फंस गया. 99 उसके पास थे, 100 करने में देर ही क्या बची थी. केवल एक दिन की तकलीफ उठानी थी कि पूरे 100 हुए. फ़िर क्या हुआ?

जब दूसरे दिन वो राजा के पैर दबाने पहुंचा तो वो मस्ती, वो ख़ुशी, वो चहकना गायब था. बड़ी उदासी थी. चिंता में पड़ा मालूम हो रहा था. कोई गणित मन ही मन उसे उलझा रहा था.

राजा ने पूछा, क्या हुआ भाई? आज अचानक इतने परेशान? चक्कर क्या है?
उसने कहा: नहीं मालिक, कुछ भी नहीं. सब ठीक है।

मगर आज नाई की बातों में वो पुरानी मिठास, वो सुगंध नहीं थी, जो हमेशा होती थी. जब पहले कहता था तो सब ठीक था ही. आज formality  करता मालूम हो रहा था.

राजा ने कहा, नहीं मैं नहीं मान सकता. तुम उदास दिखाई देते हो. आंखों में वो रौनक नहीं. तुम रात ठीक से सोए भी?
उसने कहा, अब आप पूछ ही रहें हैं तो आपसे झूठ कैसे बोलूं. रात नहीं सो पाया. लेकिन सब ठीक हो जाएगा, बस एक दिन की बात है. आप चिंता ना करें.

लेकिन tension तो tension है. वो जल्दी से कहाँ विदा होती है.

उसकी tension अब रोज बढ़ने लगी. 100 रूपए पूरे हो गए तो नाई सोचने लगा कि अब 100 तो हो ही गए. अब धीरे-धीरे इकट्ठा कर लूं तो कभी ना कभी 200 भी हो ही जाएंगे.

अब naturality समझदारी के mathematics में बदलने की और थी. एक-एक कदम धन इकठ्ठा करने की तरफ़ उठता हुआ. नतीजा, 20 दिनों में ही नाई बिलकुल ठुस्स हो गया. उसकी सब खुशी चली गई. उसकी happiness अब sorrow में कन्वर्ट हो चली थी.

राजा ने कहा, अब तू सच-सच बता ही दे कि आख़िर मामला क्या है? मेरे मिनिस्टर ने कुछ किया?

तब नाई चौका? बोला, क्या मतलब? आपका मिनिस्टर...?

अच्छा, तो अब मैं समझा. अचानक मेरे घर में एक रात 99 रूपए से भरी एक थैली पड़ी मिली. बस, उसी दिन से ही मैं मुश्किल में पड़ गया हूं. ओह. ये है असली बात. धीरे-धीरे उसे सब समझ आने लगा.

राजा ज़ोर से हंसा और जिंदगी फ़िर से मुस्कुराने लगी. थोड़ी देर में मिनिस्टर भी आ गया. सब ये जान कर ख़ुश थे कि उन्हें लाइफ़ की मिठास का राज पता चल गया था. उसके बाद उनमें से किसी को कभी टेंशन नहीं हुई.



साभार: ओशो

Sep 29, 2018

शिक्षा बुढ़ापे के लिए सबसे अच्छा सहारा है.





अरस्तु. दुनिया के महानतम दार्शनिकों में से एक. एलेग्जेंडर के गुरु और प्लेटो के शिष्य.

शानदार प्रतिभा वाली पर्सनालिटी. ज़मीन से जुड़े हुए कमाल के आदमी. ग्रीस को दुनियाभर में पहचान दिलाने वाला एक सरल और बुद्धिमान व्यक्तित्व.

उन्होंने कुछ छोटी लेकिन मीनिंगफुल बातें लोगों से शेयर की. आइए जानते हैं कि अरस्तु ने क्या कहा?

Quote: डर बुराई की वजह से पैदा होने वाला दर्द है.

Quote: कोई भी उस आदमी से प्रेम नहीं कर सकता जिससे वो डरता हो.

Quote: आदमी प्राकृतिक रूप से ही ज्ञान पाने की इच्छा रखता है.

Quote: अच्छा व्यवहार सभी गुणों का सार है.

Quote: आदमी के सभी काम इन 7 में से किसी एक या अधिक कारणों की वजह से ही होते हैं: उसकी मौकापरस्ती, उसकी मज़बूरी, उसकी अपनी आदत, कोई कारण, उसका जूनून, उसकी इच्छा या उसका स्वभाव.

Quote: बुरे आदमी अंदर ही अंदर पश्चाताप से भरे होते हैं.

Quote: आदमी सभी जीवों में सबसे उदार प्राणी है, लेकिन यदि क़ानून और न्याय ना हों तो वो सबसे खराब भी बन जाता है.

Quote: जो सभी का मित्र होता है वो किसी का मित्र नहीं होता है.

Quote: संकोच युवाओं के लिए एक आभूषण है, लेकिन बड़ी उम्र के लोगों के लिए धिक्कार.

Quote: चरित्र यानि करैक्टर अपनी बात मनवाने का सबसे प्रभावी मीडियम है.

Quote: शिक्षा बुढ़ापे के लिए सबसे अच्छा सहारा है.

Sep 27, 2018

लाइफ इज good.






आप दुनिया को 24 घंटे ख़ुश नहीं रख सकते. ये कोई नहीं कर सकता. आप बस अपनी तरफ़ से best दे सकते हैं. अगर हम वैसा ही बने जैसे के हम हैं यानि original. बजाय इसके कि दुनिया हमें कैसा देखना चाहती है.
नतीजा: लाइफ इज good.

अपना काम, अपनी जिम्मेदारियां अच्छे से निभाइये. ये आपको सकून देगा. दूसरों को कमियां निकालते रहने दीजिये. उनके पास शायद अच्छे से करने के लिए कोई और काम हो ही ना? थोड़ा सा मुस्कुराइए.
नतीजा: लाइफ इज good.

सबके लिए अच्छा करिये. नहीं कर पा रहे तो सबके लिए अच्छा ज़रूर सोचिये. इससे आप अपने नजरिये और attitude को सही लेवल पर ला सकेंगे.
नतीजा: लाइफ इज good.

संगत का असर होता है. अपने circle में उन लोगों को शामिल कीजिये जो आपको उत्साहित करें, demoralize ना करें. उन लोगों पर trust करना सीखिए जो आपके अच्छे काम पर आपकी पीठ थपथपाएं और आपके किसी गलत काम पर आपको टोक भी दें. ऐसे लोग हमेशा आपका भला ही चाहेंगे. अगर ऐसा साथ आपको मिल सके तो.
नतीजा: लाइफ इज good.

आप सबसे उम्मीद तो करते हैं कि वो आपको समझें. सही बात है. लेकिन इससे अच्छी बात तब होगी जब आप पहले ये जानना सिख लें कि आपसे भी कोई ऐसी ही उम्मीद रख रहा होगा. क्यों ना पहले आप उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश करें. इससे आपका थॉट प्रोसेस पॉजिटिव बन जायेगा और आपसे जुड़े लोग ख़ुद फ़िर आपके प्रति अच्छा सोचना शुरू कर देंगे. ये कर के देखिये.
नतीजा: लाइफ इज good.


आज इतना सा करने की try करें. आज में ही जीवन है. 21 दिन रोजाना अगर आप ऐसा कर सकें तो आप पाएंगे कि कुछ भी गलत नहीं हो रहा है बल्कि आप ही कहीं ना कहीं ख़ुद को misguide कर रहें थे.

जब आपको अच्छा महसूस होना स्टार्ट हो जाये तो बस इतना कर दीजियेगा कि इस ब्लॉग को अपने near एंड dear से शेयर कर दें. ये ही हमारे लिए आपके प्रेम का उपहार होगा.
नतीजा: हमारी लाइफ भी good.

हँसते रहिये, खिलखिलाते रहिये. सबके लिए गुनगुनाते रहिये. इससे पहले कि वक़्त कहीं और ले चले, बिछड़े हुए रिश्ते मिलाते रहिये.

आपका दिन शुभ हो.



Sep 24, 2018

उस आदमी को घबराहट हुई.





आज़ादी का दिन आने वाला था. 15 अगस्त बेहद करीब था. 

एक 10 साल का बच्चा अपना पेट भरने के लिए छोटे-छोटे झंडे बेच रहा था. वो कार में AC चला कर बैठे लोगों के पास जाता. दुकानों पर सामान ख़रीद रहे लोगों को कन्विंस करने की कोशिश भी करता. कॉलेज से घर लौट रहे स्टूडेंट्स से भी झंडे खरीदने की रिक्वेस्ट करता. 

इसी बीच उसके कस्टमर भी उससे भाव-तौल कर रहे थे. आखिर कौन अपने पैसे नहीं बचाना चाहता? 

पास से गुजर रहे एक 52 साल के आदमी ने जब उस बच्चे के पैरों की तरफ देखा तो बड़ा दुखी हुआ. वो फटाफट पास की जूतों के दुकान पर गया और उस बच्चे के लिए नए जूते ख़रीदे. बच्चे ने तुरंत अपने फटे – कुचले जूते निकाले और नए वाले पहन लिए. 

उसके चेहरे की ख़ुशी अब देखते ही बन रही थी. उसने उन सज्जन को बड़ी अद्ब भरी निगाहों से देखा और पूछा : “क्या आप भगवान हैं?”. उस आदमी को घबराहट हुई. उन्होंने अपने कानों को हाथ लगाया और बोले: “नहीं बेटे, मैं भगवान नहीं हूं.” बच्चा फ़िर से मुस्कुरा कर बोला: “ तो फ़िर पक्का आप भगवान के दोस्त होंगे?”.

सज्जन बोले “कैसे”. 

बच्चे ने बड़ी मासूमियत से कहा कि कल रात ही मैंने भगवान से रिक्वेस्ट की थी कि मुझे नए जूते दिला दो. वो आदमी मुस्कुराया और बच्चे के सर पर हाथ फेर कर वहां से जाने लगा. अब वो ख़ुद भी जान गया था कि भगवान का दोस्त होना कोई मुश्किल काम नहीं है.

सार:
अपनी सोच को सही दिशा में ले जाने की कोशिश ही असली आज़ादी है.

जिंदगी को रोकिंग बनाएं. दूरियां मिटाएं.





शब्द यानि वर्ड.

अगर पॉजिटिव बोले जायें तो मैजिक कर सकते हैं.
अगर नेगेटिव बोले जायें तो बवंडर भी.

कभी-कभी हमें जिंदगी से इतनी निराशा हो जाती है कि कुछ भी समझ नहीं आता. कोई लाख़ तसल्ली देता रहे, फ़िर भी दिल भर ही आता है.

कभी जख्म हरे हो जाते हैं तो कभी बीता हुआ जमाना याद आता है.
कभी कोई मिलकर बिछुड़ जाता है तो कभी बचपन का कारवां सामने से गुजर जाता है.

ये पल ही होते हैं जो हमें जिंदा रखते हैं. बड़ा होते होते तो हम जजमेंटल बनते जाते हैं.

आइए. कुछ ऐसे कोट्स को लाइफ़ में अपनाएं जो हमें जिंदा रखें, आबाद रखें और सबके लिए अच्छा सोचते हुए आगे बढें. 

दुआएं लें, दुआएं दें. कामयाब हों और जिंदगी को रोकिंग बनाएं. दूरियां मिटाएं. रिश्तों की वफादारियां निभाएं. किसी रोते हुए को हसाएं.

आओ फ़िर से बचपन में जाएँ. एक बच्चे की तरह जीवन को आसां बनाए.

Quote: कोई भी आदमी गलतियों का पुतला नहीं है. केवल गलतफहमियों का शिकार है.

Quote: किसी की कोई बादशाहत नहीं होती. वक़्त सबसे बड़ा बाज़ीगर है.

Quote: आपके पास पैसा है या नहीं, ये इतना मायने नहीं रखता जितना कि ये कि आप किन चीज़ों पर मुस्कुराते हैं या चिल्लाते हैं?

Quote: मैं इतनी सारी जमीन – जायदाद का मालिक हूं, इसके बजाय आप अगर ये कहें कि थैंक यू धरती माँ, आपने मुझ पर इतनी कृपा की. ये अप्रत्याशित रूप से सब कुछ बदल सकता है. आप को भी. आपके आस-पास को भी.

Quote: प्रसिद्ध या बदनाम होना आपके हाथ में नहीं होता. ऐसी Circumstances अपने आप पैदा होती हैं और एक समय बाद अपने आप ख़त्म भी हो जाती हैं.

Quote: जब आप दूसरों की बेबसी का मज़ाक उड़ा रहे होते हैं, ठीक उसी समय से बेबसी आपका इंतजार करना शुरू कर देती है.

Quote: केवल शून्य यानि जीरो (0) ही अमर रहेगा. बाकि सब इसके आस-पास बढ़ता-घटता रहता है. 0 से सबकी यात्रा शुरू होती है और 0 पर आकर ही थम जाती है.

Quote: आप हमेशा स्वस्थ नहीं रह सकते. आप बस कोशिश कर सकते हैं. लेकिन 24 घंटे कभी भी एक जैसे नहीं बीत सकते. जैसे भी रहें, मस्त रहें.

Quote: उदास रहना भी कभी-कभी उतना ही ज़रूरी हो जाता है, जितना कि ख़ुश रहना. नेगेटिव के बिना अकेले पॉजिटिव से क्या करंट मिलेगा? ये आपको नयी एनर्जी देता है. और expectations कम करता है.

Quote: दो इंसानों की लड़ाई में कोई इंसान नहीं हारता. हारती है तो केवल इंसानियत और जीत जाता है वहम. और वहम का कोई इलाज़ नहीं.

Quote: ईश्वर से ज्यादा शिकायत करने से पहले अपने जिंदा रहने का शुक्रिया ज़रूर अदा करें. आपकी शिकायतें धीरे-धीरे कम होना शुरू हो जाएंगी.



Sep 23, 2018

एक बार एक बिजनेसमैन ने सोचा ?






चाहे हम कितनी ही बड़ी Post पर हों या हमारी हैसियत का लोहा पूरी दुनिया मानती हो. बावजूद इसके, हमें हर बात की सही-सही Knowledge हो ही, ये हमेशा ज़रूरी नहीं होता.

इसलिए कभी भी किसी बात को बिना पूरा जाने, बिना समझे और जल्दीबाज़ी में ग़लत समझने की भूल ना करें. कई बार हमसे भी गलती हो सकती है. हर समय सामने वाला ही ग़लत हो, ये Misunderstanding भी हो सकती है. ऐसा ही कुछ हुआ टापू के उस राजा के साथ.

आइए, एक छोटी सी स्टोरी से ये समझने की कोशिश करें कि ग़लती हो भी जाए तो उसे सुधारा कैसे जा सकता है?

बात पुराने समय की है. एक बार एक व्यापारी यानि बिजनेसमैन ने सोचा कि क्यों ना, इस बार किसी ऐसी जगह पर बिज़नेस किया जाए, जहां पर कोई गाय के बारे में नहीं जानता हो. ये सोच कर उस व्यापारी ने एक गाय खरीदी और एक ऐसे ही टापू पर चला गया, जहां पर आज तक किसी ने गाय को नहीं देखा था. वहां जाकर उसने उस टापू के कबीले वाले राजा से कांटेक्ट किया और उसे अपने बिज़नेस के बारें में बताया. राजा ने कहा कि हमारे कानून के मुताबिक आपको कुछ टैक्स देना होगा. व्यापारी ने कहा ओके और बोला कि मैं आपको Daily कुछ ना कुछ नया उपहार दिया करूंगा और इसे ही आप मेरा टैक्स मान लें. 

राजा ने परमिशन दे दी. व्यापारी ने काम स्टार्ट कर दिया. अपने वादे के मुताबिक वो रोज राजा को कभी दूध तो कभी दही. कभी लस्सी तो कभी मक्खन तो और कभी-कभी घी ले जाकर दे देता. राजा जब इन चीज़ों को खाता तो बहुत ही खुश होता. वो व्यापारी से मिलने वाले इन डेली गिफ्ट्स से बेहद ख़ुश था.

समय के साथ व्यापारी का सारा सामान बिक गया और वो वापिस अपने घर जाने की तैयारी में लग गया. जब वो जाने लगा तो राजा ने कहा कि आपने मुझे बहुत ही नायाब गिफ्ट्स दिए हैं. आप जाते जाते मुझे वो गिफ्ट बनाने वाली चीज़ दे जाओ ताकि आपके जाने के बाद भी मैं उससे वो गिफ्ट्स ले सकूं. 

व्यापारी ने ख़ुशी ख़ुशी अपनी गाय राजा को भेंट कर दी और वहां से चला गया.

राजा ने उस गाय के चारों तरफ़ अपने सिक्यूरिटी गार्ड्स तैनात कर दिए और उन्हें आदेश दिया कि जब भी ये कोई गिफ्ट दे तो वो सबसे पहले तुम मुझे लाकर दोगे.

थोड़ी देर के बाद गाय ने अपना मूत्र त्याग किया तो गार्ड ने वो मूत्र एक बर्तन में डालकर राजा को दे दिया. राजा ने उसे चखा तो वो स्वादिष्ट नहीं लगा. थोड़ी देर बाद गाय ने गोबर कर दिया तो गार्ड ने वो भी ले जाकर राजा को दे दिया. राजा को वो भी अच्छा नहीं लगा.

अब तो राजा बहुत ही नाराज़ हुआ और उसे लगा कि उस व्यापारी ने हमें धोखा किया है. राजा ने तुरंत अपने सिपाहियों को आदेश दिया कि जाओ और उस व्यापारी को पकड़ कर लाओ. व्यापारी तो अभी कुछ ही दूर गया था. सिपाही उसे पकड़ कर अपने राजा के पास ले गए.
राजा ने तमतमाते हुए कहा कि आपने मेरे साथ धोखा क्यों किया?
व्यापारी ने कहा कि मैंने आपको कोई धोखा नहीं दिया है. और फिर उसने गाय से दूध निकाल कर राजा को दिया और दही जमाकर राजा को खिलाया. फिर लस्सी, मक्खन दिया और घी भी दिया.
तब राजा को यकीन हुआ और समझ में आया कि जब तक सही जानकारी न हो, तब तक मूल्यवान वस्तु भी हमारे लिए किसी काम की नहीं होती. फिर राजा ने उस व्यापारी को खूब ईनाम देकर Respect के साथ विदा किया.

सार:
जब तक हमें किसी चीज़ के बारे में पूरी और सही जानकारी ना हो, तब तक हम उसका सही तरीके से यूज़ कर ही नहीं सकते.


Sep 22, 2018

तो फ़िर और क्या पाना बाकी रह जाता है.





जिंदगी वास्तव में फाइट कराने से बाज़ नहीं आती.
जवान बॉर्डर पर देश को बचाने के लिए फाइट कर रहा है.
कोई भूख और ग़रीबी से फाइट कर रहा है.
कोई सिस्टम की weakness दूर करने के लिए फाइट कर रहा है.
कोई खेल के मैदान में फाइट कर रहा है.
कोई अपने बिज़नेस को expand करने के लिए फाइट कर रहा है.
कोई नौकरी पाने के लिए तो कोई उसे बचाने के लिए फाइट कर रहा है.
कोई एजुकेशन लेने के लिए, कोई एजुकेशन लोन के लिए फाइट कर रहा है.
कोई लंबी लाइन में सबसे पीछे खड़ा रहकर भी राशन के लिए फाइट कर रहा है.
कोई लंबा स्ट्रगल करते हुए फ़िल्म लाइन में पैर जमाने के लिए फाइट कर रहा है.
कोई अपना सब कुछ बचाने के लिए फाइट कर रहा है.

इसके अलावा भी कितने स्ट्राइक, अनशन और धरने जारी हैं.
विकास पर विकासशीलता बर्षों से भारी है.
कुछ ज़िम्मेदारी है तो थोड़ी लाचारी है.
बातें करने को कितनी सारी हैं.
बेहोश हुई वफ़ादारी है और इतरा रही गद्दारी है.
रिश्तों में जलेबी जैसी कलाकारी है.
फ़िर भी दुनिया निराली और प्यारी है.
बातें करने को कितनी सारी हैं.
कहीं गूंजती शहनाई तो कहीं किलकारी है.
कहीं हाथ खुले तो कहीं कितनी मारामारी है.
कहीं जीने का खौफ़ तो कहीं जिंदगी कितनी आभारी है.
बातें करने को कितनी सारी हैं.
कहीं पीर की दरगाह तो कहीं गणेश जी की सवारी है.
कहीं घर में कलह और बाहर की समझदारी है.
कहीं ईमानदारी तो कहीं-कहीं रिश्वतखोरी भारी है.
बातें करने को कितनी सारी हैं.
अब 10 नए कोट्स पढ़ने की बारी है.
आखिर सबकी कोई ना कोई ज़िम्मेदारी है.
चाहे प्राइवेट है या सरकारी है.
बातें करने को कितनी सारी हैं.

Quote: in the end of life, आपको ऊपर वाले के नाटक पर ही भरोसा करना होगा. आज से ही शुरू करिए. गैप ऑफ़ कम्युनिकेशन कम होता जायेगा.

Quote: आपका प्यार ही आपकी ताकत है. आपकी नफ़रत आपको बहुत छोटा बना देगी.

Quote: जब आपके जाने के बाद भी लोग आपको किसी अच्छे मोमेंट के लिए याद करें तो ये बहुत बड़ी बात है. अपने बिजी schedule में भी आपको याद करना कोई छोटी बात नहीं है.

Quote: अगर आप सबकुछ उस परमेश्वर के हाथों में सौंप देते हैं तो फ़िर एक दिन वक़्त भी आपके आगे हाथ जोड़ लेता है.

Quote: सिर्फ़ अपने लिए सोचना frustration लाता है. अपने परिवार के लिए सोचना ख़ुशी लाता है. लेकिन सबके लिए सोचना आपको शानदार इंसान बनाता है.

Quote: कोई चाहकर भी अपनी destiny नहीं बदल सकता. आप pray ज़रूर कर सकते हैं कि चीज़ें आपके favor में हों.

Quote: आज से 100 साल पहले जो नहीं था, वो आज है. आज जो है वो 100 साल बाद नहीं होगा. जीवन मौसम की तरह है. बदलेगा जरुर.

Quote: हवा होती है. चलती है पर दिखती नहीं. ख़ुदा होता है. चलाता है पर ख़ामोश मुस्कुराता है.

Quote: हर रोज ख़ुद को improve करने का मतलब है: जिंदगी की simplicity को और करीब से देख पाना.

Quote: अगर मैं तुम्हें तुम्हारे एंगल से और तुम मुझे मेरे एंगल से समझ पाओ तो फ़िर और क्या पाना बाकी रह जाता है.





Sep 21, 2018

क्या सचमुच तुम्हारा सब कुछ ख़त्म हो गया है?



जब जिंदगी बिलकुल करीब आकर आपसे बड़े प्यार से पूछे: 
क्या सचमुच तुम्हारा सब कुछ ख़त्म हो गया है? 
तब आपके मन में पहला क्या विचार आता है? ये पहला विचार ही आपके आने वाले भविष्य का चुनाव करेगा.

आप किधर भी देख रहें हो. जैसे कि पेरेंट्स, फ्रेंड्स, फॅमिली, सामाजिक कामयाबी, nearby रिलेशनशिप, आपका सोशल सर्किल आपकी इमेज, आपकी प्रॉपर्टी, बैंक बैलेंस, सेविंग्स आदि-आदि.

इन सब में से सबसे ज्यादा इम्पोर्टेन्ट क्या है? दिल और दिमाग को इस question का answer देने के लिए 120 सेकंड्स का टाइम दीजिए.
ये आपके सारे पुराने और नए सब फंडे क्लियर कर देगा. यकीन ना आए तो करके देखिए. ये अद्भुत सवाल है और मज़े की बात ये कि इसका आंसर भी अद्भुत ही है.

ये सिंपल सा प्रैक्टिकल सवाल है विद प्रैक्टिकल आंसर.
किसी ग्रंथ को नहीं पढ़ना. कोई intelligency नहीं चाहिए. कोई क्वालिफिकेशन नहीं चाहिए. किसी से गाइडेंस की ज़रूरत भी नहीं. हर कोई इसका आंसर जानता है, लेकिन समझने का समय आपने नहीं लिया. इसे सबसे सस्ता और छोटा मान लिया और दुनिया के ड्रामे में एक्टिंग करते करते सब भूलते चले गए. ये सबके साथ होता है. होगा ही. समय आता है और फ़िर आपको बताता है कि सबसे छोटा ही सबसे बड़ा है.

तो फ़िर करना क्या होगा?

सिर्फ़ आपको अपने मन की स्लेट ख़ाली करके वो तस्वीर देखनी है, जो अब तक किसी वजह से आप देख ही नहीं सके.

जिंदगी आपको बहा ले गई. आप बहते गए. आपको ख़ुश होना चाहिए. सब बातों के लिए जो आपकी लाइफ में हुई हैं. इससे आपको हल्का सा एहसास होना स्टार्ट होगा कि 
1. सब कुछ आपके हाथों में नहीं हो सकता. 
2. जो 10 साल पहले आपकी सोच थी, वो अब नहीं है. 
3. समय के साथ हर किसी को डांस करना पड़ता है, कई बार अपनी पसंद का गाना ना होने पर भी. 
4. जिस बात पर कभी इतराने का मन होता था, आज वो मेमोरी से ही डिलीट हो गयी है. 
5. लाइफ़ में कुछ भी फ़िक्स नहीं होता. जो चाहते हैं, वो नहीं होता और जो नहीं चाहते, वो हो जाता है. 
6. अगर ख़ुशी सिर्फ़ पैसों से ही ख़रीद ली जाती तो सबसे इनोसेंट स्माइल किसी गरीब की कभी ना होती. 
7. अगर by chance सब कुछ अपने हिसाब से हो भी जाए तो भी क्या अलग हुआ. 
8. सब कुछ सिर्फ़ अपने लिए बटोर लेने से अगर शांति मिल जाती तो हॉस्पिटल में बड़े लोग कभी बीमार ही ना पड़ते. 
9. क्या लाइफ़ का purpose होना ज़रूरी है या लाइफ़ होना ही सबसे बड़ा purpose है.

अब उस सवाल का आंसर आपको मिल गया होगा. आप ही के पास था, बस ध्यान कहीं और था. अब 120 सेकंड्स फ्री-माइंड होकर सोचा तो देखो मिला ना मस्त आंसर.

आंसर है: कि अभी आप जिंदा हो. आपका जिंदा होना ही सबसे महत्वपूर्ण है, इम्पोर्टेन्ट है.
अगर आप होते ही नहीं तो क्या कुछ भी होता? जैसे कि पेरेंट्स, फ्रेंड्स, फॅमिली, सामाजिक कामयाबी, nearby रिलेशनशिप, आपका सोशल सर्किल आपकी इमेज, आपकी प्रॉपर्टी, बैंक बैलेंस, सेविंग्स आदि-आदि.

अगर आप होते ही नहीं तो ऐसा कुछ नहीं होता. फ़िर ना कोई लक्ष्य होता, न कोई प्रायोरिटी होती, ना कुछ पॉजिटिव होता, ना नेगेटिव होता. ना कोई मोबाइल होता, ना कोई उम्मीद होती, ना कोई शिकायतें होती. ना आप दुखी होते, ना आप सुखी होते.

मतलब ये कि आपके होने से ही सब कुछ है. वर्ना कुछ भी नहीं.
अब आप ही बताइए कि क्या आप भाग्यशाली नहीं हैं.
आप जिंदा हैं, क्या ये सबसे खुबसूरत बात नहीं है?
और अगर आप जिंदा हैं तो इस जिंदगी के साथ कैसे पेश आना चाहेंगे.
बस आपको, हम सभी को इतना सा, छोटा सा काम करना है. और कुछ भी नहीं करना.

अगर अब आप मानते हैं कि आप जिंदा हैं तो क्या शेयर करना चाहेंगे? प्यार या नफरत?

अगर अब आप मानते हैं कि आप जिंदा हैं तो क्या शेयर करना चाहेंगे? कॉन्ट्रिब्यूशन या स्वार्थ?

अगर अब आप मानते हैं कि आप जिंदा हैं तो क्या शेयर करना चाहेंगे? मैं और मेरा या के हम सब की सांझी खुशियाँ?

अगर अब आप मानते हैं कि आप जिंदा हैं तो क्या शेयर करना चाहेंगे? सिर्फ़ सबसे लेना या सबमें बाटने का आनंद?

एक जिंदगी. आप जिंदा. दूसरों को भी जिंदा करें. उन्हें मारें नहीं. जिंदगी हमसे बस इतना सा मांगती है. क्या आप देना चाहेंगे?
ये सवाल ख़ुद से पूछते रहिए. अगर आप जिंदा हैं तो. नहीं हैं तो कोई बात नहीं.