Nov 30, 2018

आप कॉन्फिडेंस तो देखिए.






ये छोटी सी हास्य रचना,
अपने महान शायर दोस्तों संदीप गौड़ और वी. ऍम. बेचैन की लेखनी को समर्पित करता हूँ.
छोटा सा कवि हूँ, बड़े इंसानों से मगर डरता हूँ.

प्रयास अच्छा लगे तो हौसला दीजियेगा.
किसी बेघर चिड़िया के बच्चों को इक घोंसला दीजियेगा.


पेश है आपके लिए.


एक पति-पत्नी पक्की Job में हैं. (पहले)
एक पति-पत्नी कच्ची Job में हैं. (दूसरे)
पहले की दूसरे से कभी नहीं पटती.
पहले का दिन नहीं कटता, दूसरे की रात नहीं कटती.

(आप कॉन्फिडेंस तो देखिए)
कोई ना कोई डर, इन दोनों को ही सताता है.
फ़िर भी कोई एक दूसरे को कुछ भी बता नहीं पाता है.

पहले को अगले Pay कमीशन की चिंता में नींद नहीं आ रही है.
दूसरे को लग रहा है कि बस कल ही हमारी नौकरी जा रही है.

फिर भी Common Cause के लिए, दोनों ही ज़ोर लगाते हैं.
एक दूसरे के दुखों में से अपने लिए खुशियाँ ढूँढ़ ही लाते हैं.

Nov 29, 2018

ये एक थैंक्यू एप्रोच थी.






कांशसनेस शब्दों में बयान करना बेहद टफ होता है. आप इसे हमेशा किसी कर्म से या किसी कारण से जोड़कर नहीं देख सकते. 

ये बाहर का प्रोसेस नहीं है. ये अंदर की बात है. ये फील करने का सब्जेक्ट है. ये ही आपको हँसाता है, रुलाता है, नचाता है और बचाता है.

एक छोटी सी कहानी इसी विषय पर. आपको रोचक लगेगी.

एक गाय घास चरने के लिए एक जंगल में चली गई. शाम ढलने के करीब थी. उसने देखा कि एक शेर उसकी तरफ दबे पांव बढ़ रहा है. वह डर के मारे इधर-उधर भागने लगी. शेर भी उसके पीछे दौड़ने लगा.

दौड़ते हुए गाय को सामने एक तालाब दिखाई दिया. आनन-फानन में घबराई हुई गाय उस तालाब के अंदर घुस गई. शेर भी उसका पीछा करते हुए तालाब के अंदर तक घुस गया. 

तालाब बहुत गहरा नहीं था. उसमें पानी कम था लेकिन वो कीचड़ से भरा हुआ था. शेर और गाय दोनों के बीच की दूरी काफी कम थी. लेकिन अब दोनों लाचार थे. गाय धीरे-धीरे कीचड़ के अंदर धंसने लगी. शेर उसके पास होते हुए भी उसे पकड़ नहीं सका था. वो भी धीरे-धीरे कीचड़ के अंदर धंसने लगा. 

अंतत दोनों ही करीब-करीब गले तक उस कीचड़ के अंदर धस गए. अब वो दोनों बिलकुल भी हिल नहीं पा रहे थे. गाय के करीब होने के बावजूद शेर उसे पकड़ पाने में असमर्थ था.

थोड़ी देर बाद गाय ने उस शेर से पूछा, क्या तुम्हारा कोई मालिक यानि ओनर है?

शेर ने गुर्राते हुए कहा, मैं तो जंगल का राजा हूं. मेरा कोई ओनर कैसे हो सकता है? मैं तो खुद ही इस जंगल का ओनर हूं.

गाय ने कहा - लेकिन तुम्हारी इस पॉवर का यहां पर क्या यूज़ है?

शेर ने कहा, तुम भी तो यहाँ फंसी हुई हो और मरने के बेहद करीब हो. तुम्हारी भी तो कंडीशन मेरे जैसी ही है. फ़िर ये सवाल क्यों?

गाय ने स्माइल हुए कहा, बिलकुल नहीं. मेरा ओनर जब शाम को घर आएगा और मुझे अपनी जगह पर ना पाकर मुझे ढूंढते हुए यहां तक जरूर आएगा और मुझे इस कीचड़ से निकाल कर अपने घर ले जाएगा.

तुम्हें कौन लेकर जाएगा?

शेर हंसा और बोला- चलो ये भी देख लेते हैं. लेट्स सी.

थोड़ी ही देर में सच में ही एक आदमी वहां पर आया और गाय को कीचड़ से निकालकर अपने घर ले गया. जाते समय गाय और उसका मालिक दोनों एक दूसरे की तरफ कृतज्ञतापूर्वक देख रहे थे. 
ये एक थैंक्यू एप्रोच थी.

वे चाहते हुए भी उस शेर को कीचड़ से नहीं निकाल सकते थे, क्योंकि इससे उनकी अपनी जान के लिए खतरा पैदा हो जाता.

शेर कुछ देर बाद वहीँ तड़फ कर मर गया.


सार:
कहानी को सीधी तरह समझें तो यहाँ गाय आपके समर्पित दिल का प्रतीक है. शेर आपका अहंकारी मन है और मालिक यानि ओनर यहाँ ईश्वर को रिप्रेजेंट करता है. कीचड़ यह संसार है और शेर और गाय के बीच का संघर्ष लाइफ़ की लड़ाई है.

किसी पर डिपेंड नहीं होना बहुत अच्छी बात है, लेकिन उसकी अति नहीं होनी चाहिए.

आपको किसी अपने, किसी दोस्त,किसी गाइड या किसी सच्चे सहयोगी की हमेशा ही जरूरत होती है. 

हर पल, हर दफ़ा केवल आप ही राजा नहीं हो सकते. आपको और औरों को बनाने वाला परमतत्व ही असली राजा है. पूरा जगत उसकी प्रजा है और आप उसकी प्रजा का एक छोटा सा हिस्सा. इससे ज्यादा कुछ नहीं.


Nov 28, 2018

2020 में आप बिलकुल एक नए आदमी होंगे. 2018 से बिलकुल अलग.





क्या नहीं बदल सकता, तुम चाहो तो सही.
क्यों नहीं बदल सकता, तुम चाहो तो सही.
कैसे नहीं बदल सकता, तुम चाहो तो सही.
कब नहीं बदल सकता, तुम चाहो तो सही.
कहाँ नहीं बदल सकता, तुम चाहो तो सही.

अगर आप चाहें तो सब बदल सकता है. थोड़ा अपना नज़रिया बदलने के देर है. फिर ना कोई अँधेरा है, ना कोई धुंधलापन और और ना ही कुछ ऐसा, जिसे समझा ना जा सके.

छोटे-छोटे efforts से आप ख़ुद में बदलाव महसूस कर सकते हैं. कई मीलों का सफ़र नहीं तय करना. बस तय करना है कि आज अपनी पुरानी दुखी कर रही किसी एक आदत को बदलने की शुरुआत करनी है.

2019 बस आने ही वाला है. आगे आने वाले 12 महीने होंगे. हर महीने सिर्फ एक बात पर फोकस रखना है और इस तरह आप सालभर में 12 नए अनुभवों से गुजरेंगे. 

2020 में आप बिलकुल एक नए आदमी होंगे. 2018 से बिलकुल अलग. 

एक शानदार मनुष्य, जिस पर सब गर्व कर सकेंगे. आप ख़ुद, आपका परिवार, आपके दोस्त, आपके वर्कप्लेस पर काम करने वाले साथी और आपको यहाँ भेजने वाला भी यानि हम सबका ऊपर वाला भी. और जिदंगी से किसी को क्या चाहिए होता है?


करना क्या है?
बेहद सिंपल है. बस आपको month wise नीचे लिखे शब्दों को रिपीट करते रहना है और कुछ भी नहीं करना. कुछ समय बाद आप देखेंगे कि ये मैजिक काम करने लगा है. आपको जब भी कोई परेशानी आए तो उस महीने के अपने वैल्यू स्टेटमेंट को ख़ुद को याद दिलाते रहें. और कुछ नहीं करना. आसान है लेकिन आपको consistent रहना होगा. फ़िर देखिए चमत्कार. और चमत्कार को नमस्कार है.

आइए शुरू करते हैं.

महीना
आपको सिर्फ़ ख़ुद को ये याद दिलाते रहना है कि
जनवरी
हम अपना past कभी नहीं बदल सकते. मैं आज में जीता हूँ.

फरवरी
मेरी अच्छी सोच मुझे अच्छा बनाएगी और बुरी सोच बुरा.

मार्च
ईश्वर जो करता है, अच्छे के लिए ही करता है.

अप्रैल
हर एक आदमी की लाइफ अलग है. सबकी अपनी कहानी है. मुझे किसी से तुलना नहीं करनी चाहिए.

मई
मैं किसी rumour पर ध्यान नहीं दूंगा. मैं wait करना पसंद करूँगा. सच ज्यादा देर छुप ही नहीं सकता और झूठ ज्यादा देर टिक नहीं सकता.

जून
जब तक मैं हार नहीं मानता, तब तक मुझे कोई नहीं हरा सकता.

जुलाई
kindness बिलकुल फ्री है. मुझे हमेशा ये करते रहना चाहिए. अपने साथ भी और दूसरों के साथ भी. ये मुझे इंसान बनाने में मदद करता है.

अगस्त
ख़ुशी मार्केट में नहीं मिलती. ये मेरे अंदर है. मुझे इसे बढ़ाते रहना चाहिए.

सितम्बर
मुझे लोगों के बीच जज नहीं बनना. मुझे सबसे प्यार करते हुए जिंदगी को खुबसूरत बनाना है. मुझे दूरियाँ मिटानी सीखनी हैं, बढ़ानी नहीं.

अक्तूबर
समय के साथ सबकुछ अच्छा हो जाता है. ना सुख हमेशा रहेगा और ना ही दुःख. ये दिन और रात की तरह आते-जाते हैं.

नवम्बर
किसी और से उम्मीद करने से पहले मैं ख़ुद इस लायक बनूँगा कि दूसरों की उम्मीदों पर खरा उतर सकूँ. सबके फायदे में ही मेरा फायदा है. कोई चीज़ अकेले मेरे लिए कभी अच्छी कैसे हो सकती है?

दिसम्बर
मैं हर दिन 2 ऐसे काम जरुर करूँगा जिससे किसी और के चेहरे पर स्माइल आए.




Nov 25, 2018

देश को उत्साह, प्रेरणा और गौरव दिलाने का शुक्रिया मैरीकॉम.






संघर्ष की आग में जब कोई तपता है, तब जाकर वह मैरीकॉम बनता है.

भारत के नार्थ-इस्ट स्टेट मणिपुर के एक बेहद ही गरीब परिवार में 1 मार्च 1983 को मैरीकॉम का जन्म हुआ.

उसने जिंदगी के दर्द से हार नहीं मानी. वो लड़ी अपने लिए. अपने सपने लिए. दिन-रात खेतों में काम किया. बचपन से जो जूनून था, उसे दिल में पाले रखा और अब उसी ने छठी दफ़ा वर्ल्ड वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशिप जीतकर इतिहास रच दिया है.

गृहस्थ जीवन के साथ अपने सपनों के सफ़र को नया आकार देकर हर भारतीय का गौरव बन गयी हैं ऍम. सी. मैरीकॉम.  

मैरीकॉम ने 48 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में यूक्रेन की हना ओखोता को 5-0 से हरा डाला.

वर्ल्ड चैम्पियनशिप में 6 गोल्ड जीतने वाली वो अब दुनिया की पहली महिला बॉक्सर बन गई हैं.

इस छठी जीत के साथ ही उन्होंने वर्ल्ड बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में कुल 8वां पदक भी अपने नाम कर लिया है.

मैरीकॉम अब आयरलैंड की कैटी टेलर को पछाड़कर सबसे अधिक बार वर्ल्ड चैम्पियनशिप जीतने वाली दुनिया की पहली वीमेन बॉक्सर हैं.

मैरीकॉम (48 kg केटेगरी) को 10वीं A.I.B.A. वर्ल्ड चैम्पियनशिप का सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज भी चुना गया है.

चैंपियन बनने के बाद मैरीकॉम की आंखों में खुशी और गर्व के आंसू थे. उन्होंने अपनी इस रिकॉर्ड जीत को देश को समर्पित किया है.

मैरीकॉम की निगाहें अब 2020 के टोक्यो ओलंपिक में क्वालीफाई करने के लिए होने वाले टूर्नामेंट पर लगी हुई हैं.


देश को उत्साह, प्रेरणा और गौरव दिलाने का शुक्रिया मैरीकॉम.

Nov 24, 2018

आज तो सब बिल्कुल उल्टा है.





आजकल डिस्कशन के मुद्दे ऊपर तक असर करने लगे हैं. ख़ासकर सोशल मीडिया आने के बाद तो चर्चाएं जोर पकड़ने लगी हैं और पृथ्वी लोक के साथ साथ यमलोक भी डिजिटल मीडिया की मदद से ख़ुद को अपडेट रखने लगा है. 

आइए, एक ऐसी ही छोटी सी हास्य रचना से जानने का प्रयास करते हैं.

एक नेता जी मरने के बाद यमपुरी पहुंचे.
वहां यमराज ने उनका भव्य स्वागत किया, और कहा कि इससे पहले कि मैं आपको स्वर्ग या नरक भेजूं, पहले मैं चाहता हूँ कि आप दोनों जगहों का मुआयना कर लें कि आपके लिए कौन सी जगह ज्यादा अनुकूल होगी!

यमराज ने यमदूत को बुलाकर कहा कि नेता जी को एक दिन के लिए नरक और फिर एक दिन स्वर्ग घुमा कर वापिस मेरे पास ले आना.

यमदूत नेताजी को पहले नरक में ले गया. नेता तो नरक कि चकाचौंध देखकर हैरान रह गया चारों तरफ हरी भरी घास और बीच में गोल्फ खेलने का मैदान, नेता ने देखा उसके सभी दोस्त वहां घास के मैदानों में शांति से बैठे है और कुछ गोल्फ खेलने का आनंद ले रहे हैं. उन्होंने जब उसे देखा तो वे बहुत खुश हुए और सब उससे गले मिलने आ गए और बीते हुए दिनों कि बातें करने लगे. पूरा दिन उन्होंने साथ में गोल्फ खेला, और रात भर आनंद से काटी.

अगले दिन यमदूत नेता को स्वर्ग लेकर गया. जैसे ही वे स्वर्ग के दरवाजे पर पहुंचे, स्वर्ग का दरवाजा खुला.
नेता ने देखा रोशनी से भरा दरबार था स्वर्ग का!

सभी लोगों के चेहरे पर असीम शांति. कोई भी एक दूसरे से बात नहीं कर रहे थे. मधुर संगीत बज रहा था. कुछ लोग बादलों के ऊपर तैर रहे थे.

नेता ने देखा कि सभी लोग अपने अपने कार्यों में व्यस्त थे. नेता उन सब को गौर से देख रहा था. नेता ने बड़ी मुश्किल से एक दिन काटा!

सुबह जब यमदूत उसे लेकर यमराज के पास पहुंचा तो यमराज ने कहा - हाँ तो नेता जी अब आप अपने लिए स्थान चुनिए जहाँ आप को भेजा जाये!

नेता ने कहा वैसे तो स्वर्ग में बड़ा आनंद है. शांति है. फिर भी वहां मेरे लिए समय काटना मुश्किल है. इसलिए आप मुझे नरक भेजिए. वहां मेरे सभी साथी भी है. मैं वहां आनंद से रहूँगा.
यमराज ने उसे नरक भेज दिया!

यमदूत उसे लेकर जैसे ही नरक पहुंचा तो वहां का दृश्य देखकर स्तब्ध रह गया. वो एक बिलकुल बंजर भूमि पर उतरा. जहाँ चारों ओर कूड़े करकट का ढेर लगा था. उसने देखा कि उसके सभी दोस्त फटे हुए गंदे कपड़ों में कबाड़ इकट्ठा कर रहे थे. वो थोड़ा परेशान हुआ और यमदूत की तरफ देखा और कहा मुझे समझ नहीं आ रहा है कि कल जब मैं यहाँ आया था तो यहाँ घास के हरे भरे मैदान थे. मेरे सभी दोस्त गोल्फ खेल रहे थे. फिर हमने साथ बैठकर खूब मस्तियाँ की थी!
आज तो सब बिल्कुल उल्टा है.

यमदूत हल्की सी हंसी के साथ बोला - नेता जी कल हम चुनाव प्रचार पर थे. और आज आप हमारे पक्ष में मतदान  कर चुके हो..!!
(ये केवल हास्य रचना है. इसे अन्यथा न लें.)

Nov 22, 2018

मुझे नहीं पता कि ख़ुदा का घर कहां है?





आज सिख धर्म के संस्थापक गुरुनानक देव जी का जन्मदिन है. करोड़ों लोगों के लिए गुरु नानक जयंती बड़ा पर्व है. इस दिन को प्रकाश पर्व के तौर पर भी मनाया जाता है.

गुरु नानक से जुड़ी बातें बेहद रोचक और मानवता के संदेश से भरपूर हैं.

एक संवाद से जानने का प्रयास करते हैं. आइए.

गुरु नानक जी के दो शिष्य थे. एक का नाम था “बाला” जो हिंदू था और दूसरा था “मरदाना” जो मुस्लिम था. मरदाना ने गुरु जी से कहा कि मुझे मक्का जाना है. ऐसा इसलिए है, क्योंकि जब तक एक मुसलमान मक्का नहीं जाता, तब तक वह सच्चा मुसलमान नहीं कहलाता है.

गुरु जी यह बात सुनी तो वह उसे लेकर मक्का गए. गुरु जी जैसे ही मक्का पहुंचे तो वह थक गए थे. वहां पर हाजियों के लिए एक आरामगाह बनी हुई थी. आराम करने के लिए गुरु जी मक्का की तरफ पैर करके लेट गए.

आरामगाह में हाजियों की सेवा करने वाले एक शख्स जियोन को यह देखकर बहुत गुस्सा आया और वह गुरु जी से बोला कि आप कैसे आदमी हैं? आपको दिखता नहीं है कि वहां पर मक्का- मदीना है और आप उसी तरफ पैर करके लेट गए हो.

तब गुरु जी ने कहा कि जियोन, तुम गुस्सा मत करो. मैं बहुत थका हुआ हूं और मुझे बस आराम चाहिए. मैं भी तुम्हारी तरह ख़ुदा को मानता हूं. तभी तो मैं यहां आया हूं. मुझे नहीं पता कि ख़ुदा का घर कहां है? पर तुम्हें तो पता है ना. तो तुम ही मेरे पांव उस तरफ कर दो, जहां तुम्हें ठीक लगे.

जैसे ही जियोन ने गुरु जी का पांव दूसरी तरफ किया तो देखा मक्का भी उसी और चला गया. यह देखकर जियोन की हालत पतली हो गयी. वो समझ गया कि यह शख्स कोई आम आदमी नहीं है, बल्कि ख़ुदा का ही बंदा है. जियोन ने तुरंत ही गुरु जी से माफी मांग ली.

गुरुजी उसे कहते हैं “ऐ ख़ुदा के बंदे”, खुदा दिशाओं में राज नहीं करते. वह तो दिलों में राज करते हैं. अच्छे कर्म करो और ख़ुदा को दिल में रखो. यही खुदा का सच्चा सदका है. ख़ुदा की सच्ची सेवा है.