Dec 15, 2018

ऑपरेशन करीब 3 घंटो तक चला.





कभी-कभी आप सिर्फ़ इस बात पर गुस्सा कर लेते हैं और अपना गुस्सा बिना सोचे समझे दूसरों पर उतार देते हैं क्योंकि आपको लग रहा होता है कि सिर्फ़ मुसीबत आपके सर पर ही आई हैं और इसका ज़िम्मेदार कोई और ही होगा. है ना?

ऐसा हर दफ़ा नहीं होता. दूसरों को समझने की आदत विकसित कीजिए.

आइये, एक छोटी सी कहानी से समझने की कोशिश करें?

एक डॉक्टर को जैसे ही एक सर्जरी के बारे में फोन करके बताया गया, वो जितना जल्दी वहाँ आ सकते थे, आ गए. वो तुरंत ही अपने कपड़े बदल कर ऑपरेशन थिएटर की और बढे. डॉक्टर को वहाँ उस लड़के के पिता दिखाई दिए, जिसका इलाज होना था.

पिता डॉक्टर को देखते ही भड़क उठे और चिल्लाने लगे.. "आखिर इतनी देर तक कहाँ थे आप? क्या आपको पता नहीं है कि मेरे बच्चे की जिंदगी खतरे में है? क्या आपकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती. आप का कोई कर्तव्य है या नहीं?”

डॉक्टर ने हल्की सी मुस्कराहट के साथ कहा- “मुझे माफ़ कीजिये. मैं हॉस्पिटल में नहीं था. मुझे जैसे ही पता लगाजितनी जल्दी हो सका, मैं आ गया. अब आप शांत हो जाइए, गुस्सा करने से कुछ नहीं होगा”.

ये सुनकर पिता का गुस्सा और चढ़ गया.

भला अपने बेटे की इस नाजुक हालत में वो शांत कैसे रह सकते थे. उन्होंने कहा- “ऐसे समय में दूसरों को संयम रखने का कहना बहुत आसान है. आपको क्या पता की मेरे मन में क्या चल रहा है. अगर आपका बेटा इस तरह मर रहा होता तो क्या आप इतनी देर करते?
यदि आपका बेटा मर जाए अभी, तो आप शांत रहेगे? कहिये.”

डॉक्टर ने स्थिति को भांपा और कहा - “किसी की मौत और जिंदगी केवल और केवल ईश्वर के हाथ में है. हम तो केवल उसे बचाने का प्रयास कर सकते है. आप ईश्वर से प्राथना कीजिये और मैं अन्दर जाकर ऑपरेशन करता हूँ.” ये कहकर डॉक्टर अंदर चले गए.

ऑपरेशन करीब 3 घंटो तक चला.

लड़के के पिता भी धीरज के साथ बाहर बैठे रहे. ऑपरेशन के बाद जैसे ही डाक्टर बाहर निकले, वे मुस्कुराते हुए, सीधे पिता के पास गए. और उन्हें कहा- “ईश्वर का बहुत ही आशीर्वाद है. आपका बेटा अब ठीक है. अब आपको जो भी सवाल पूछना हो पीछे आ रही नर्स से पूछ लीजियेगा. ये कहकर वो जल्दी में चले गए.

उनके बेटे की जान बच गयी इसके लिए वो बहुत खुश तो हुए पर जैसे ही नर्स उनके पास आई, वे बोले “ये कैसे डॉक्टर हैं? इन्हें किस बात का गुरुर है? इनके पास हमारे लिए जरा भी समय नहीं है.”

तब नर्स ने उन्हें बताया कि ये वही डॉक्टर है जिसके बेटे के साथ आपके बेटे का एक्सीडेँट हो गया था. उस दुर्घटना में इनके बेटे की मृत्यु हो गयी और हमने जब उन्हें फोन किया गया तो वे उसके क्रिया-कर्म कर रहे थे. और सब कुछ जानते हुए भी वो यहाँ आए और आपके बेटे का इलाज किया. नर्स की बातें सुनकर बाप की आँखो मेँ ख़ामोश आँसू बहने लगे.

सार:
इंसान बनिये. ये ही एक रास्ता है, जो आपको इंसानियत के सही दर्शन करा सकता है. सिर्फ़ इंसानी जिस्म लेके चलते रहना काफ़ी नहीं होता. अपने शरीर में उस आत्मा को जिंदा रहने दीजिए जो चिंतन करवा दे. तभी आप सही मायनों में इंसान बनेंगे. 

और गजब की बात ये है कि दुनिया में अभी सिर्फ़ शरीरों का शोर है क्योंकि वो अपने अंदर झाकनें से डर रहें हैं. जैसे ही डर निकला, मानवता एक नया, प्यारा सा रूप अपने आप धारण कर लेगी.

Dec 12, 2018

"अजी सुनिए! प्लीज़ बेबी को चेंज तो कर दो।"







लाइफ कई बार गज़ब का सेंस ऑफ़ ह्यूमर ख़ुद ही create कर देती है और आप फ़िर हसे बिना रह ही नहीं सकते। कुछ ऐसा ही हुआ एक पति-पत्नी के वार्तालाप के दौरान। आप भी देखिए कि एक लैंग्वेज की जादूगरी से क्या से क्या हो सकता है?

बच्चे के पैदा होने के 5 साल बाद एक दिन अचानक माँ को एहसास हुआ कि यह बच्चा हमारा नहीं लगता, क्यों न इसका DNA Test करवाया जाए।

शाम को उसका पति थका हारा ड्यूटी से घर वापस आया तो उसने अपना संदेह व्यक्त किया कि देखो यह बच्चा बड़ा विचित्र व्यवहार करता है। इसका चलना, खाना, पीना और सोना, इत्यादि हमारे से बहुत भिन्न है। मुझे नहीं लगता कि यह बच्चा हमारा है। चलो इसका DNA Test करवाते हैं।

पति: डार्लिंग! तुम्हें यह बात आज अचानक 5 साल बाद क्यों याद आ गई? यह तो तुम मुझसे 5 साल पहले भी पूछ सकती थी...!

पत्नी (आश्चर्यचकित होते हुए) : क्या मतलब है तुम्हारा? तुम कहना क्या चाहते हो?

पति : याद करो अस्पताल की वह पहली रात, जब हमारा बच्चा पैदा हुआ था और कुछ ही देर बाद उसने पैम्पर खराब कर दिया था। तब तुम्हीं ने तो मुझसे कहा था कि "अजी सुनिए! प्लीज़ बेबी को चेंज तो कर दो।"

तब मैंने बड़ा हैरान होकर तुम्हारी ओर देखा था तो तुमने ही कहा था कि "तुम्हारे प्यार की खातिर मैंने 9 महीने इस बच्चे को अपनी कोख में रखा है और अब जबकि मैं हिल भी नहीं सकती तो क्या आप यह छोटा सा काम भी नहीं कर सकते."..???

तब मैं अपने बच्चे को उठाकर दूसरे वार्ड में गया था, वहाँ अपने गंदे बच्चे को चेंज करके दूसरे साफ बच्चे को उठाकर तुम्हारे पास लाकर सुला दिया था।

सार: 
जैसा क्वेश्चन, वैसा आंसर. जैसा इनपुट, वैसा आउटपुट.

Dec 11, 2018

क्योंकि आज तुम्हारे जीवन का अन्तिम दिन है।




एक राजा बहुत दिनों से पुत्र की प्राप्ति के लिये उम्मीद लगाये बैठा था, पर पुत्र नहीं हुआ। उसके सलाहकारों ने तांत्रिकों से सहयोग की बात बताई। सुझाव मिला कि किसी बच्चे की बलि दे दी जाये तो पुत्र प्राप्ति हो जायेगी। राजा ने राज्य में ये बात फैलाई कि जो अपना बच्चा देगा, उसे बहुत सारे पैसे दिये जायेंगे

एक परिवार में कई बच्चें थे, गरीबी भी थीएक ऐसा बच्चा भी था जो ईश्वर पर आस्था रखता था और सन्तों के संग सत्संग में ज्यादा समय देता था।
परिवार को लगा कि इसे  राजा को दे दिया जाये क्योंकि ये कुछ काम भी नही करता है और शायद हमारे किसी काम का भी नही। इससे राजा ख़ुश होकर बहुत सारा धन भी देगा। ऐसा ही किया गया और उस बच्चे को बलि के लिए राजा को दे दिया गया।

राजा के तात्रिकों द्वारा बच्चे की बलि की तैयारी हो गई राजा को भी बुलाया गया और बच्चे से पूछा गया कि तुम्हारी आखिरी इच्छा क्या है? क्योंकि आज तुम्हारे जीवन का अन्तिम दिन है।

बच्चे ने कहा कि ठीक है। ऐसा कीजिए कि मेरे लिये परात भर मिट्टी मंगवा दीजिए। मिट्टी आ गयी। बच्चे ने मिट्टी के 4 ढ़ेर बनाये 1-1 करके मिट्टी से बनाए 3 ढ़ेरों को तोड़ दिया और चौथे ढ़ेर के सामने अपने दोनों हाथ जोड़कर बैठ गया और कहा कि अब जो करना है, आप कीजिए।

ये सब देखकर तॉत्रिक डर गये बोले कि ये तुमने क्या किया है, पहले बताओ? 
राजा ने भी पूछा तो बच्चे ने कहा कि पहली ढ़ेरी मेरे माता पिता की है। मेरी रक्षा करना उनका कर्तब्य था पर उन्होनें पैसे के लिये मुझे बेच दिया, इसलिए मैंने ये ढ़ेरी तोड़ी। दूसरी मेरे सगे-सम्बन्धियों की। उन्होंने भी मेरे माता-पिता को नहीं समझाया, इसलिए मैंने दूसरी ढ़ेरी भी तोड़ी। तीसरा नंबर आपका है राजा जी। क्योंकि राज्य के सभी इंसानों की रक्षा करना राजा का ही काम होता है, लेकिन राजा ही मेरी बलि देना चाह रहा है तो ये ढ़ेरी भी मैंने तोड़ दी। अब सिर्फ मेरे ईश्वर पर ही मुझे भरोसा है, इसलिए ये 1 ढ़ेरी मैने छोड़ दी है।

राजा ने मन ही मन चिंतन किया और सोचा कि पता नहीं बच्चे की बलि से बाद भी मुझे पुत्र प्राप्त हो या न हो, क्यों ना इस बच्चे को ही अपना पुत्र बना ले? इतना समझदार और ईश्वर भक्त बच्चा है। इससे अच्छा बच्चा और कहाँ मिलेगा? राजा ने उस बच्चे को ही अपना बेटा बना लिया और राजकुमार घोषित कर दिया।

सार: जो ईश्वर पर यकीन रखते हैंउनका जीवन तकलीफों में भी संवर सकता है। भाग्य कब दुर्भाग्य से सौभाग्य में बदल जाए, उसके अलावा और कौन जान सकता है? और कौन कर सकता है?