Dec 26, 2018

1 Kg. ख़ुशी पैक कर दो. कितने पैसे हुए भैया?




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किसी भी सिचुएशन से जुड़े थॉट को आपका मन किस दिशा में मोड़ रहा है?, उसके According ही ख़ुशी या गम की तस्वीर बननी शुरू हो जाती है. हम में से हर कोई खुश रहना चाहता है. फिर भी इसे हासिल करने के लिए कई संघर्ष करने पड़ते हैं. उनमें से सबसे मिस्टीरियस है एक ख़ास सिचुएशन में आपके मन की स्थिति.

लोगों को कई दफ़ा यह समझने में काफ़ी समय लगाना पड़ता है कि खुशी एक चॉइस है यानी उनका अपना Selection. 

चूंकि ख़ुशी के मुकाबले दुःख को थामे रखना आसान रहता है, इसीलिए ज्यादातर लोग ख़ुशी की तरफ जाने में हिचकिचाते हैं और ख़ुशी वाला रास्ता छोड़ देते हैं. शुरुआत में हमें खुशी को Choose करना होता है. यह ऐसा कुछ नहीं है कि बिना चाहे हमें मिल जायेगा. 

यह ऐसा भी नहीं है कि बाज़ार गये और दुकानदार से कहा – 1 Kg. ख़ुशी पैक कर दो. कितने पैसे हुए भैया?

यह ऐसा भी कुछ नहीं है जिसे पकड़ कर Oven में रख दिया और जब मन किया, गर्म करके मुहं में लपक लिया?  

In Short, सही मायनों में हमें यह जानना होता है कि भीतर से खुश कैसे रहें?

खुशी की खोज में सबसे बड़ी ग़लतफहमी यह रही है कि लोग बाज़ार में, बाहर की दुनिया में खुशी की तलाश में भटकते हैं. वे Purchasing, शो-ऑफ या Comparison को ही ख़ुशी मान बैठते हैं. ये तो वास्तव में त्रासदी होगी, हताशा होगी. क्योंकि इसका मतलब ये हुआ कि अगर कभी ये चीज़ें नहीं हो पाईं तो क्या लोग ख़ुश नहीं रहेंगे? हाँ या ना?

लोग इसी उम्मीद में पैसा और भौतिक संपत्ति जमा करने की इच्छा ज़रूरत से ज्यादा करते हैं कि ये चीजें उन्हें सदा के लिए खुश कर देंगी. उनकी सारी इच्छाएं एक समय में ही पूरी हो जायेंगी, बिना यह महसूस किए कि वे अतृप्त हैं. क्योंकि जरूरतें तो पूरी करने की Try की जा सकती है लेकिन इच्छाओं का नेटवर्क तोड़ पाना....इसका Code और Password आज तक तो किसी को मिल नहीं पाया. हां या ना?

चलिए, विषय को थोड़ा और नजदीक से देख लेते हैं.

जब खुश होने की बात आती है, तो ये जान लेना अच्छा है कि खुशी अपने आप से शुरू होती है. ये आपकी सोच प्रक्रियाओं का एक सीधा-साधा रिजल्ट है। इससे भी अधिक ये बात और ज्यादा मायने रखती है कि आप कैसे सोचते हैं कि आपके साथ क्या होता है? 

यदि आप कठिनाइयों के साथ सामना करने पर Positive सोचने का Option चुनते हैं तो आप एक खुश रवैया बनाए रखने की अधिक संभावना रख पाते हैं.


रॉबर्ट फ्रॉस्ट कहते हैं -
कठिनाइयाँ बीतेंगी, जीवन आगे बढ़ेगा.
चाहे कुछ भी हो जाए, जीवन हमेशा चलता रहेगा.

अपने आप को यह बताने से कि "यह भी बीत जाएगा और जीवन आगे बढ़ जाएगा," आप अपना ध्यान स्थिति की Negativity से दूर कर सकते हैं. यह एक शानदार विचार है जिसकी मदद से आप पैदा होने वाले सभी नकारात्मक या निराशाजनक विचारों का मुकाबला करने के लिए अपने माइंड को Entertain कर सकते हैं. इस सुखद विचार को अपनाने से आप चीजों को एक अलग नजरिये से देख सकेंगे और ख़ुद को याद दिला सकेंगे कि Failure भी कभी स्टेबल नहीं होता. आपका ऐसा करना आपको मुस्कुराने की वजह देगा जो आगे चल कर आपको सूरज भी बना सकता है.

याद रखिये कि आज अगर आपके साथ बुरी चीज़ें हो रही हैं तो कल अच्छी चीजें भी जरुर होंगी.

कोई भी इंसान केवल अपनी Bright Side पर कभी भी जीवन नहीं जी सकता है. हम सभी को कभी-कभी कठिन समय से भी गुजरना पड़ता है. – हम सभी को.
और ये ही हमारा Testing पीरियड होता है. ऐसे समय पर दुःख ही दुःख, टेंशन, स्ट्रेस, उदासी – ये सब आपको पकड़ के खड़े होंगे. दिन में भी अँधेरा फील होगा. ऐसा लगेगा जैसे  आप पूरी तरह से भूल गए हों कि जीवन के Bright Side पर कैसा महसूस होता है? ख़ूब पैसा होने के बाद भी ऐसा होता है और ख़ाली हाथ होने पर भी ऐसा होता है. हां या ना?

इन चुनौतीपूर्ण स्थितियों में, अपने आप को याद दिलाना महत्वपूर्ण है कि बेहतर दिन भी होंगे. वास्तव में, इन समयों के दौरान सकारात्मक और आशावादी रवैया बनाए रखना Practically इम्पोर्टेन्ट है. ऐसा करना आपको राहत देता रहेगा जब तक कि आपके अच्छे दिन फिर से नहीं आ जाते. ऐसे पलों में ख़ुद को ये याद दिलाते रहना कि बुरे दिन जायेंगे, तभी तो अच्छे दिन आयेंगे- आपको धैर्य के साथ आगे बढ़ने में हेल्प करता रहेगा. दिन के बाद रात, रात के बाद दिन एंड So On.....


आज का Practice Session :
जब भी मन और परिस्थितियाँ साथ ना दें रहीं हों, ख़ुद से केवल ये 4 सवाल ज़रूर पूछिए?

पहला सवाल: क्या ये हमेशा के लिए टिकने वाला है?

दूसरा सवाल: ज्यादा से ज्यादा बुरा क्या हो सकता है ? क्या मैं उसे स्वीकार करके आगे बढ़ सकता/सकती हूँ ?

तीसरा सवाल: इतनी बड़ी दुनिया में क्या ऐसा सिर्फ़ मेरे साथ ही हो रहा है ?

चौथा सवाल: अगर अभी, बिलकुल अभी, यहां पर भूकंप या सुनामी या कोई शेर आ जाता तो जिस बात को लेकर इतनी टेंशन में हूं, उसकी चिंता करता रहता / रहती या कुछ और करता / करती ?

हो सकता है कि आपको सही आंसर मिलने में आसानी होने
लगे कि ख़ुशी के असली मायने क्या हैं?

गुड लक.




Dec 25, 2018

ये सब बिना पैसे के माल कैसे उठा लेते हैं?





एक छोटे से क़स्बे में एक आदमी कपड़े सीने यानि टेलरिंग की दुकान चलाता था. उसके पास उस काम को करने का हुनर भी था और साथ ही साथ लोगों के साथ उसका व्यवहार भी काफ़ी अच्छा था. 

अपनी स्किल और विल इन दोनों के सहारे उसका काम ठीक चल जाता था और परिवार की गुजर-बसर अच्छी चल रही थी.

पर वक़्त तो वक़्त है. कब कहाँ क्या सिखाना चाहें, ये तो उसकी मर्ज़ी.

एक दिन ज्यादा काम आने की वजह से वो दुकान पर थोड़ा लेट हो गया. काम खत्म कर जब वो देर रात अपने घर की ओर निकला तो रास्ते में उसे कुछ चोर मिल गए. टेलर ने उनसे पूछा कि साहब इतनी रात को आप सब कहां जा रहे हैं?

अब चोर तो चोर हैं. Highly प्रैक्टिकल, Sharp माइंड, Clever पीपल्स. दूसरे को आगे कर अपना काम निकाल फ़रार.

उनमें से एक मासूम चोर बोला : अरे भाई, हम तो छोटे-मोटे सौदागर है और कुछ माल खरीदने जा रहे हैं. यह सुनकर टेलर ने हैरान होते हुए कहा कि इतनी रात को तुम किससे और कौन सा माल खरीदने जा रहे हो? माल कैश में लेते हो या फिर उधार?  

उस चोर ने कहा – भाई, पैसे तो हम देते ही नहीं कभी.

यह सुनते ही टेलर को और ज्यादा हैरानी हुई. उसे लगा कि मैं पूरे दिन इतना पसीना बहा कर काम करता हूं तब जाकर कुछ मिलता है और ये सब बिना पैसे के माल कैसे उठा लेते हैं?  

कुछ देर बाद टेलर ने कहा कि आप तो कोई बड़ा काम करने वाले मालूम पड़ते है. वो इम्प्रेस हो गया. बोला -ऐसा करिये, मुझे भी अपने साथ ले चलिये. मैं भी टेलरिंग का काम करता करता बोर होने लगा हूं. आप वाला काम सीख कर शायद मेरा कुछ और भला हो जाये.

चोरों ने कहा – ठीक है, तुम भी हमारे साथ चलो. टेलर साथ उनके साथ निकल पड़ा.

रास्ते में उनसे पूछा: मुझे इस काम के बारे में कोई नॉलेज तो है नहीं. ऐसा करिये कि आप मुझे समझा दीजिए कि ये काम कैसे करना होता है?

एक चोर ने समझाना स्टार्ट किया.

ऐसा करो कि जो भी हम तुम्हें बताने वाले है, तुम उसे एक कागज पर अच्छी तरह लिख लो. उसका रट्टा मार लो ताकि कभी भूलो नहीं.

टेलर ने कहा – ठीक है.

चोर ने लिखवाया – ”सबसे पहले किसी के घर के पिछवाड़े चुपचाप सेंध लगाना. फ़िर दबें पाँव घर में घुस जाना. वहां जो कुछ भी मिले, वो सब बटोर लेना. ना तो मकान मालिक से कुछ पूछना और ना ही उसे कोई पैसे देना. अंत में चुपचाप सब कुछ समेटकर अपने घर ले आना“. 

टेलर ने सबकुछ एक कागज पर लिखकर उसे अपनी दाहिने हाथ वाली जेब में रख लिया.

दूसरे क़स्बे में पहुँच कर चोरों ने टेलर से कहा – भाई, अब तुम्हारा सही समय आ गया है. तुम किसी भी घर में घुस जाओ और हाँ कागज पर लिखी सभी बातों का ध्यान ज़रूर रखना. बेस्ट ऑफ़ लक.

टेलर दबे पाँव चुपचाप एक घर के पिछवाड़े से अंदर गया. घर के सभी लोग सो रहे थे. वो घर का सामान बटोरने में लग गया. चूक हुई और उसके हाथ से एक बर्तन फ़र्श पर गिर गया. तेज आवाज़ हुई. घर के सभी लोग जाग गये. चोर-चोर चिल्लाते हुए सभी ने टेलर की धुलाई करनी शुरू कर दी.

अब जब पिटाई जोरों पर थी तो टेलर भी रुआंसा होकर जोर-जोर से चिल्लाने लगा कि मेरी बात तो सुनो, इस कागज में ऐसा कुछ भी नहीं लिखा था. पड़ोसी भी आ गये. जब तक सबको बात समझ आती, टेलर साहब बेहोश हो चुके थे और सौदागर फ़रार. 

खैर, अगली सुबह जब सारी कहानी सामने आई तो टेलर महोदय इज्ज़त के साथ अपने घर वापस लौट पाए. 

लेकिन अब उन्होंने कान पकड़ लिए थे कि आज में ही जीऊंगा और जो मेरे पास है, उससे ख़ुश रहूंगा और अपने काम और सही दिशा में आगे बढ़ाऊंगा. रास्ते चलते सलाह देने वालों से भी दूरी बना के चलूंगा. वो अपनी जगह ठीक होंगे. पर मेरे लिए क्या सही है? ये मुझे ही सोचना चाहिये.


प्यारे दोस्तों, 
हमारी लाइफ़ भी कुछ ऐसी ही है. हर इंसान के पास अपना एक ख़ास नजरिया, हुनर और टैलेंट होता है. 

हैरान होइये, Respect कीजिए लेकिन किसी की Copy मत बनिए. आप किसी की Copy नहीं हैं. आप यूनिक हैं. आधार कार्ड की तरह.

आप जो बन सकते हैं, वो हर कोई नहीं बन सकता और जो दूसरे बन सकते हैं, ज़रूरी नहीं आप भी वैसे ही बनकर सक्सेसफुल बनें.  

नतीजा इस कहानी की तरह कोई ना कोई बर्तन गिरता रहता है और शोर चलता रहता है. कागज़ पर लिखी हर बात, हर एक के लिए, एक जैसी नहीं हुआ करती. सबकी अपनी कहानी होती है. सबकी सबसे अलग. ये ही हमारे यूनिवर्स की ब्यूटी है. हर बच्चे की ब्यूटी.

इसलिए हर माता-पिता को, टीचर्स को बच्चों के अंदर की प्रतिभा की पहचान कर उन्हें उस क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए मोटीवेट करते रहना चाहिये. इससे ना केवल वो तेज़ी से आगे बढ़ेंगे, बल्कि अपनी पसंदीदा फील्ड में सही सक्सेस भी हासिल कर पायेंगे. साथ ही साथ अपनी लाइफ़ में ख़ुश रहने का मुकाम पाने में भी ज़रूर कामयाब होंगे. आपका और सबका नाम रौशन करने में भी सहायक सिद्ध हो सकते हैं, बिना किसी दबाव के, बिना इंसानियत को खोये हुए.

है के नहीं?  
प्रैक्टिकल होकर सोचिये तो ज़रा.

इतनी पापुलेशन में, इतने कम्पटीशन में, इतने स्ट्रेस में आप अपने बच्चे को उसके सपने पूरा करने, उसका नेचुरल हुनर तराशने के मौके दे रहें हैं या केवल अपने सपने उनके माध्यम से पूरा करने की फ़िराक में हैं.

सवाल छोटा है लेकिन आंसर देने के लिए जिंदगी छोटी पड़ेगी. आज नहीं तो कल. सोचियेगा ज़रूर.
(कहानी के सभी पात्र काल्पनिक हैं.)