Jan 11, 2019

अखबार पढ़ने से ज्यादा जीवन को पढ़ना - कितना हसीन है ना.




भोर होने को है
गुनगुनाती ठंड
सुनसान सड़क 
अभी भी लगभग अंधेरा ही पसरा है
मैं चाय लिए खिड़की के पास खड़ा हूं
निहार रहा हूं इस सुबह को
अचानक साइकिल पर पैडल मारता आता है एक लड़का
घर-घर अखबार पहुंचाने के लिए
काली टोपी पुराने सफ़ेद जूते
सलवटों से भरा स्वेटर और कल वाली ही पैंट
आगे अखबार पीछे अख़बार
अंग्रेजी हिंदी पंजाबी
वो बहुत खुश हैं
कहता कुछ नहीं
बस घर के आगे रोकता है साइकिल
लपेटता है अखबार
और दूरी नापकर खोल देता है अपने हाथ
अखबार वहीँ गिरता है जहां उसे होना चाहिए
फ़िर धीरे से निकल जाता है
पैडल की आवाज़ कुछ देर आती रहती है
सुबह हो गई है
साइकिल हल्की हो चली है
लाल सूरज खुबसूरत लग रहा है
हवा से तारों पर लटकी एक लाइट का नाच रोमांचक है
तारों को नींद आने लगी है
जीवन और मृत्यु के मध्य का ये लम्हा
प्यार के अहसास जितना ही कंपन दे रहा है
लड़का ख़ुशी के गीत गाता हुआ मोहल्ले से निकल गया है
लगभग हर सुबह ही ऐसा हो जाता है
अखबार पढ़ने से ज्यादा जीवन को पढ़ना
कितना हसीन है ना.
11 जनवरी 2019
2.30 PM


No comments: