Jan 13, 2019

हाँ या ना?






आज लोहड़ी का पर्व है। कल मकर सक्रांति और आने वाले दिनों में नए साल के अलग-अलग पर्व आपके जीवन में चार चाँद लगाने वाले हैं.

जैसे जैसे उम्र बढ़ती है, जिंदगी आपको ज्यादा से ज्यादा खुबसूरत पल दे कर जाना चाहती है ताकि आप इन पर्वों के माध्यम से जीवन के पलों की महत्ता को महसूस करना सीख लें। अपने आने और अपने जाने की वजह को बेमानी ना कहें। 
इसे समझ लें कि क्या ठीक है? क्यों ठीक है? कैसे ठीक है? कहाँ ठीक है? 

ध्यान से देखें तो हर साल एक्चुअली हम बड़े नहीं होते बल्कि छोटे होते जाते है। तो जब छोटा होते – होते गायब हो ही जाना है तो मंजिल और रास्तों के बीच का Joy बना रहे और Confusion दूर हो, ये करते चलना चाहिए।

एक छोटा सा वार्तालाप मिला। आपके सामने है। पता नहीं सही है या गलत लेकिन पढ़ने के बाद कुछ क्लू मिलने तो शुरू हो ही सकते हैं। ये आपके ऊपर है कि आप क्या Catch करेंगे?

जैसे जैसे मेरी Age बढ़ती गयी, मुझे समझ आने लगा कि अगर मैं Rs. 200 की घड़ी पहनूं या Rs. 20000 की, दोनों समय एक जैसा ही बताएंगी। हाँ या ना?

मेरे पास Rs. 200 का बैग हो या Rs. 20000 का, इसके अंदर के सामान में कोई परिवर्तन नहीं होंगा। हाँ या ना?

मैं 200 गज के मकान में रहूं या 2000 गज के मकान में, प्यार, ख़ुशी या तन्हाई का एहसास एक जैसा ही होगा। हाँ या ना?

बाद में मुझे यह भी पता चला कि यदि मैं बिजनेस क्लास में यात्रा करूं या इकोनोमी क्लास में, अपनी मंजिल पर उसी नियत समय पर ही पहुंचूंगा। हाँ या ना?

इसीलिए, अपने बच्चों को बहुत ज्यादा अमीर होने के लिए प्रोत्साहित करने की बजाय उन्हें यह सिखाने पर ज़ोर दीजिये कि वो खुश कैसे रह सकते हैं?
और जब वो बड़े हों, तो चीजों के महत्व को देख पाएं, सिर्फ़ उसकी कीमत को नहीं।

सुना भी गया है कि ब्रांडेड चीजें व्यापारिक दुनिया का सबसे बड़ा नाम होती हैं लेकिन गरीब और मध्यम वर्ग लोग इससे बहुत जल्दी, बहुत ज्यादा प्रभावित होते नज़र आते हैं।

ब्रांड होना अपनी जगह सही हो सकता है पर
क्या यह सबसे ज़रूरी है कि आप I Phone लेकर चलें और घूमे –फिरें तभी लोग आपको बुद्धिमान और समझदार मान पाएंगे? हाँ या ना?

क्या यह सबसे ज़रूरी है कि आप Mac’D या KFC में जाकर खाएं तभी लोग यह समझेंगे कि आप कंजूस नहीं हैं? हाँ या ना?

क्या यह सबसे ज़रूरी है कि आप रोज अपने Friends के साथ किसी फेमस Cafe पर जाकर बैठे, तभी लोग यह जान सकेंगे कि आप एक रईस परिवार से हैं? हाँ या ना?

क्या यह सबसे ज़रूरी है कि आप Gucci, Lacoste, Adidas या Nike ही पहनेंगे तभी High Status वाले कहलाये जायेंगे? हाँ या ना?

क्या यह सबसे ज़रूरी है कि आप अपनी हर बात में 2-4 अंग्रेजी शब्द शामिल करें, तभी सभ्य समझे जायेंगे? हाँ या ना?

क्या यह सबसे ज़रूरी है कि आप Adele या Rihanna को सुनेंगे तभी साबित होगा कि आप विकसित हो चुके हैं? हाँ या ना?

किसी ने ये भी कहा है कि
मेरे कपड़े तो आम दुकानों से खरीदे हुए होते हैं।
Friends के साथ किसी ढ़ाबे पर भी बैठ जाता हूँ।
भूख लगे तो किसी ठेले से ले कर खाने में भी कोई अपमान नहीं समझता। कोई भी ब्रांड भूख से बड़ा नहीं लगता।
अपनी सीधी सादी भाषा मे बोलता हूँ।

चाहूँ तो वह सब कर सकता हूँ जो ऊपर लिखा है लेकिन
मैंने ऐसे लोग भी देखे हैं जो एक Branded जूतों की जोड़ी की कीमत में पूरे सप्ताह भर का राशन ले सकते हैं। हाँ या ना?

मैंने ऐसे परिवार भी देखे हैं जो मेरे एक Mac'D के बर्गर की कीमत में सारे घर का खाना बना सकते हैं। हाँ या ना?

बस मैंने यहाँ यह रहस्य पाया है कि बहुत सारा पैसा ही सब कुछ नहीं है। किसी की बाहरी हालत से उसकी कीमत लगाना हास्यास्पद सा लगता है।

इंसान होने के असली ब्रांड है उसकी नैतिकता, व्यवहार, मेलजोल का तरीका, सहानुभूति और भाईचारा है, ना कि उसकी मौजूदा शक्ल, सूरत और हालात।

आप भी अपनी कीमत पहचानिए। कौन रोक रहा है? आप किसी बाहरी ब्रांड से जाने जाते हैं या अंदर से ख़ुद एक ब्रांड हैं? 

सार ये है कि आपकी सोच में ताकत और चमक होनी चाहिए। छोटा-बड़ा होने से फर्क नहीं पड़ता, सोच बड़ी होनी चाहिए। मन के भीतर दीप जलाते रहिए और सदा मुस्कुराते रहिए।

इस "सबसे ज़रूरी" शब्द को पकड़ लीजिए और फ़िर रेवड़ी मूंगफली खाते हुए लाइफ़ से कहिये- हैप्पी लोहड़ी 


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