Jan 15, 2019

सब उथल-पुथल इंसान ही तो करते हैं जिंदगी में.





समय समय पर

सब उथल-पुथल इंसान ही तो करते हैं जिंदगी में

आपको पैदा करने से लेकर अर्थी उठाने तक

आपको पढ़ाने से लेकर आपको आगे बढ़ाने तक

आपको प्यार देने से लेकर आपको धोखा देने तक

आपका विश्वास बढ़ाने से लेकर आपका विश्वास तोड़ने तक

आपको भयमुक्त करने से लेकर भयभीत करने तक

आपको बेचना सिखाने से लेकर खरीदने तक

आपको छोटा बनाने से लेकर बड़ा बनाने तक

आपको सिर पे बिठाने से लेकर गिरा देने तक

आपको राजा से लेकर रंक बनाने तक

एंड वाईस-वर्सा

चक्र चलता रहता है

आप घूमते रहते हैं

फ़िर एक दिन थम जाते हैं और स्वाहा

हस्ती अलविदा बस्ती अलविदा

कमाल देखिए

मिटटी वहीँ है

पानी वही है

आकाश चाँद सितारे सूरज सब वहीँ

पेड़–पौधे गिलहरी तक वहीँ हैं

बस आप नहीं हैं बाकि सब वैसे के वैसे

फ़िर इतराना कैसा, किस पर और कब तलक


आखिर आप भी एक इंसान हैं 


और 


सब उथल-पुथल इंसान ही तो करते हैं जिंदगी में

कुछ तो नया कीजिये बीत जाने से पहले.

15 जनवरी 2019
10.36 PM

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