Jan 19, 2019

दुःख होगा भी तो खुशबू की तरह बहेगा





उसे पत्थरों में ढूंढने की जरुरत कहाँ
सभी दिशाओं के ज्ञान की जरुरत कहाँ
तुम्हारा घर
तुम्हारा परिवार
तुम्हें प्यार करने वाले आत्मीय लोग
जिस दिन भीतर से तुम उन्हें
अपना ब्रह्मांड अपना संसार मान लोगे
उसी पल कुछ नया घटित हो उठेगा
शांति प्रवेश कर जाएगी
ना कोई शंका बचेगी
ना संदेह
ना कोई ग़लतफहमी और
ना ही कोई उदासी
हर रिश्ता स्वाभाविक और विश्वसनीय
दुःख होगा भी तो खुशबू की तरह बहेगा
सुख होगा भी तो बढ़कर चौगुना
फ़िर कहीं और मत्था टेक
झूठी आस कमज़ोर तलाश से मुक्ति मिलेगी
तुम असली कोहिनूर को भीतर ही पा लोगे
बस तुम पहले देने वाले बनना
तुमसे लेने वाले तुम्हें
आज नहीं तो कल
समझ ही लेंगे
फ़िर घर बैठे तुम कर सकोगे
अपना राजतिलक

19 जनवरी 2019
7.49 AM

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