Jan 6, 2019

फ़िर जो ज़रूरी चाहिए






रोज की जिंदगी में

सुबह से ही

इतनी व्यस्तता

अनगिनत सूचनाएं जानकारियाँ और ढेर सारे काम

शांति और मौन के बिना जीने की भागदौड़

सोचने-समझने का समय नहीं

शाम तक थकान उदासी और मन पर बोझ बरकरार

ये अब आदत में तब्दील

सबके मन में एक ही सवाल कि क्या करें?


कुछ पल आँखे करें बंद भूल जाएं दुनिया को और ख़ुद को दें कुछ वक़्त

सुनें अपनी साँसों की आवाज़

सुनें जीवन की अस्थिरता का संगीत मधुर धुनों के साथ

करें भीतर की जागरूकता का उदय

और छोड़ दें छोटी-मोटी चिंताएं करना

बस दें अपना सर्वश्रेष्ठ

बना लें अपनी दुनिया को बेहतर

हो जाएं थोड़ा दयालु बिना किसी अपेक्षा के

प्रेम और शांति की कल्पना करें उन्हें अपने अंदर जन्म दें

विश्राम करें गहरा

ऊर्जा को भर लें भीतर

सीखते रहें कुछ नया मौका मिलते ही 

हटा लें दूसरों की कमियों से अपना ध्यान

प्रेम विश्वास और आस्था को कर लें ख़ुद से बड़ा

दूर भगा दें शिकायतें और असुरक्षा की भावना

अस्तित्व को चला रही कृपा का अनुभव करें एक बार 

और

फ़िर जो ज़रूरी चाहिए
वो सब अपने आप मिलने लगेगा.

 7 जनवरी 2019
11.42 AM

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