Apr 19, 2019

अभी मैं 55 में हूँ, फ़िर से बचपन में हूँ.





Humour at its Best @ 16 Fabulous.

Quote 1:  मेरे जीवन में आये सभी लोग शानदार थे. बस उनके कपड़े अलग-अलग थे.

Quote 2:  इतने विकास के बाद भी आदमी जल्दी क्यों मर रहा है. पक्का कोई है, जो हमारे विकास से बहुत डर रहा है.

Quote 3:  जैसे जैसे मेरी उम्र बढ़ती गई, मेरा ज्ञान कम होता गया. अभी मैं 55 में हूँ, फ़िर से बचपन में हूँ.

Quote 4:  मैंने तुम्हें बिना मिले ही पा लिया. मैंने तुम्हें भीतर से पुकारा. बस.

Quote 5:  पहले माँ दिखाई ज्यादा देती थी. अब महसूस ज्यादा होती हैं. कितना फ़र्क है ना?

Quote 6:  जब मैं होशियार था तो ख़ुश नहीं था. अब मैं ख़ुश हूँ तो होशियारी चली गई.

Quote 7:  तुम्हारे दुःख और सुख जो तुम्हारे बिना कुछ कहे ही पढ़ ले, कहीं तो तुम्हारा सीनियर ही रहा होगा.

Quote 8:  यूँ ही नहीं मिलती मुस्कुराने की वजह. सदियों तक रोने की रस्में अदा करनी पड़ती हैं.

Quote 9:  तुम मुझे बेवकूफ़ कह कर रिश्ता ख़राब नहीं करना चाहते, पर मैं तो इस सच्चाई को बचपन से जानता हूँ. फ्री रहो.

Quote 10:  सब ऊपर उठना चाहते हैं. ऊपर जाना कोई नहीं चाहता.

Quote 11:  मैंने भगवान् को नहीं देखा, तुम्हें देखा. यक़ीनन भगवान् शानदार ही होंगे.

Quote 12:  हम बाज़ार की खूबसूरती पर मर जाते हैं और अंदर के फूल दम तोड़ देते हैं.

Quote 13:  0 – 25 साल: कुछ बनना है. 25 – 60 साल: बन गए. 60 के बाद: जाना होगा. ख़ुद से कब मिले.

Quote 14:  जब तक मिलता नहीं, जिंदा हो तुम. मिलते ही मुर्दे.

Quote 15:  अगर आपको सबकुछ पता चल ही गया है तो अब यहाँ रह कर करोगे भी क्या?

Quote 16:  ईश्वर सबकी सुनते हैं. तुम 2 – 4 की भी नहीं सुन सकते. कहीं बहरे तो नहीं हो?


07.46 AM
19 April 2019
Image Source: Google

No comments: