Apr 21, 2019

मज़ाक - विरोध - स्वीकार.





एक ऐसा सूरज जो हमेशा चमका. क्योंकि अपनी रौशनी देकर जाना चाहता था. कोई देने वाला ही सूरज की तरह खिलेगा. 

ऐसे ही एक सूरज हैं स्वामी विवेकानंद. आइए जानते हैं उनकी सोच को, उनके कुछ कोट्स के माध्यम से. 

ध्यान से समझेंगे तो आपको भी खिलने में आसानी होगी.


➤ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं। वो हम ही हैं जो अपनी आँखों पर हाँथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अन्धकार है।


➤जिस तरह से विभिन्न श्रोतों से उत्पन्न धाराएँ अपना जल समुद्र में मिला देती हैं, उसी प्रकार मनुष्य द्वारा चुना हर मार्ग, चाहे अच्छा हो या बुरा, भगवान तक जाता है।


➤कभी मत सोचिए कि आत्मा के लिए कुछ असंभव है, ऐसा सोचना सबसे बड़ा विधर्म है, अगर कोई पाप है, तो वो यही है, ये कहना कि तुम निर्बल हो या अन्य निर्बल हैं।


➤अगर धन दूसरों की भलाई करने में मदद करे, तो इसका कुछ मूल्य है, अन्यथा, ये सिर्फ बुराई का एक ढेर है और इससे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाये, उतना बेहतर है।


➤हम वो हैं जो हमें हमारी सोच ने बनाया है, इसलिए इस बात का ध्यान रखिये कि आप क्या सोचते हैं। शब्द गौण हैं, विचार रहते हैं, वे दूर तक यात्रा करते हैं।


➤जिस दिन आपके सामने कोई समस्या ना आए, आप यकीन कर सकते हैं कि आप गलत रास्ते पर सफर कर रहे हैं।


➤यदि स्वयं में विश्वास करना, अधिक विस्तार से पढ़ाया और अभ्यास कराया गया होता, तो मुझे यकीन है कि बुराइयों और दुःख का एक बहुत बड़ा हिस्सा गायब हो गया होता।


➤हम जितना ज्यादा बाहर जाएं और दूसरों का भला करें, हमारा ह्रदय उतना ही शुद्ध होगा और परमात्मा उसमें बसेंगे।


➤तुम्हें अन्दर से बाहर की तरफ विकसित होना है। कोई तुम्हें पढ़ा नहीं सकता, कोई तुम्हें आध्यात्मिक नहीं बना सकता। तुम्हारी आत्मा के अलावा कोई और गुरु नहीं है।


➤पहले हर अच्छी बात का मज़ाक बनता है, फिर उसका विरोध होता है और फिर उसे स्वीकार कर लिया जाता है।


दिल और दिमाग के टकराव में दिल की सुनो।


➤स्वतंत्र होने का साहस करो। जहाँ तक तुम्हारे विचार जाते हैं, वहाँ तक जाने का साहस करो और उन्हें अपने जीवन में उतारने का साहस करो।


➤किसी चीज से डरो मत। तुम अद्भुत काम करोगे। यह निर्भयता ही है, जो क्षण भर में परम आनंद लाती है।


➤सबसे बड़ा धर्म है अपने स्वभाव के प्रति सच्चे होना। स्वयं पर विश्वास करो।


➤सच्ची सफलता और आनंद का सबसे बड़ा रहस्य यह है, वह मनुष्य जो बदले में कुछ नहीं मांगता, पूर्ण रूप से निस्वार्थ व्यक्ति, सबसे सफल है।


➤जो अग्नि हमें गर्मी देती है, हमें नष्ट भी कर सकती है। यह अग्नि का दोष नहीं है।


जो तुम सोचते हो, वो हो जाओगे। यदि तुम खुद को कमजोर सोचते हो, तुम कमजोर हो जाओगे। अगर खुद को ताकतवर सोचते हो, तुम ताकतवर हो जाओगे।


➤मस्तिष्क की शक्तियाँ सूर्य की किरणों के समान हैं। जब वो केन्द्रित होती हैं, चमक उठती हैं।


➤आकांक्षा, अज्ञानता और असमानता - यह बंधन की त्रिमूर्तियाँ हैं।


➤भगवान से प्रेम का बंधन वास्तव में ऐसा है, जो आत्मा को बांधता नहीं है बल्कि प्रभावी ढंग से उसके सारे बंधन तोड़ देता है।


➤कुछ सच्चे, ईमानदार और ऊर्जावान पुरुष और महिलाएं, जितना कोई भीड़ एक सदी में कर सकती है, उससे अधिक एक वर्ष में कर सकते हैं।


➤जितना बड़ा संघर्ष होगा, जीत उतनी ही शानदार होगी।


➤पढ़ने के लिए जरूरी है एकाग्रता, एकाग्रता के लिए जरूरी है ध्यान। ध्यान से ही हम इन्द्रियों पर संयम रखकर एकाग्रता प्राप्त कर सकते हैं।


स्वयं में बहुत सी कमियों के बावजूद अगर मैं स्वयं से प्रेम कर सकता हूँ, तो दूसरों में थोड़ी बहुत कमियों की वजह से उनसे नफ़रत कैसे कर सकता हूँ।


➤विश्व में अधिकांश लोग इसलिए असफल हो जाते हैं, क्योंकि उनमें समय पर साहस का संचार नहीं हो पाता। वे भयभीत हो उठते हैं।


➤किसी मकसद के लिए खड़े हो तो एक पेड़ की तरह और गिरो तो एक बीज की तरह। ताकि दोबारा उगकर उसी मकसद के लिए जंग कर सको।


➤जब तक लाखों लोग भूखे और अज्ञानी हैं। तब तक मैं उस प्रत्येक व्यक्ति को गद्दार मानता हूँ, जो उनके बल पर शिक्षित हुआ और अब वह उसकी और ध्यान नहीं देता।


➤जिस शिक्षा से हम अपना जीवन निर्माण कर सकें, मनुष्य बन सकें, चरित्र गठन कर सकें और विचारों का सामंजस्य कर सकें। वही वास्तव में शिक्षा कहलाने योग्य है।



इमेज और सूचना स्त्रोत : इंटरनेट/गूगल.

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