Apr 28, 2019

आप कर सकते हैं या बहाना भी बना सकते हैं.







हो सकता है कि 
किसी भी पर्सनल वजह से
आप बेशक पत्थर बन गए हों,

लेकिन
आपके या
किसी और के बच्चे,
सभी बच्चे, 
अभी जिंदा है.


और
इसीलिए
उन्हें बचपन से ही
भावनात्मक सुरक्षा का एहसास कराना 
बेहद ज़रूरी है.


मतलब ये कि
उनके चारों ओर 
एक प्यार भरा वातावरण 
होना ही चाहिये.

घर पर ही नहीं,
बल्कि स्कूल में,
गली में,
रिश्तों में,
यानि जहाँ भी बच्चा जाये,
उसे प्यार भरा, स्वागत मिलना ही चाहिये.


अगर आप उसे ऐसा कुछ नहीं देते
या
कुछ कॉमन नहीं बता पा रहे हैं  
तो

कुछ सालों बाद उनके भीतर भी
खोखली चट्टानें बनने लगेगी
और

वो उन पहाड़ों जैसे होंगे
जो खड़े भी हैं और बड़े भी
लेकिन उनमें से
मानवता का, प्रेम का,
दयालुता
या
आपसी समझ का
झरना कभी नहीं बह सकेगा
और

ये ही सबसे महत्वपूर्ण बात है,
जिससे आने वाले समय में
मानवता आपके योगदान के रूप में 
आपके ही सामने लाएगी.


ये समय है,
अपने बच्चों को जिंदा रखने का
दूसरों के बच्चों को प्यार देने का
सभी बच्चों को संवेदनशील बनाने का.


वरना कुछ समय बाद 
उनके पास 
अच्छे ग्रेड तो होंगे, डिग्री भी होगी,
गैजेट्स भी, टेकनीक भी और शायद पैसा भी
लेकिन जिंदगी की असली परीक्षा के
ग्रेस मार्क्स लेना उनकी पहुँच से बाहर ही होगा.


ऐसा भविष्य और
दिखाई दे रही वो भीड़
किसी कचरे से ज्यादा उपयोगी नहीं होगी
और

उस वक़्त आप इतने बुजुर्ग हो चुके होंगे
कि वो कचरा साफ़ करना तो दूर
आप उनसे कोई सवाल पूछने का
साहस भी नहीं दिखा सकेंगे.


अभी 
आप कर भी सकते हैं
या फ़िर 
कोई बहाना भी बना सकते हैं.

मगर 
आपका रिजल्ट-कार्ड
आपके नंबर अपने आप बता देगा.


क्या आप तैयार हैं?

ये रियल पेरेंटिंग है,


पैदा करने से बस 4 कदम आगे.


आपको बस चलना है.





आज 02:34 PM पर

इमेज स्त्रोत: गूगल

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