Apr 28, 2019

बवंडर या सुनामी?






आजकल पाँव जमीं पर नहीं पड़ते मेरे.

ये ही गुनगुनाते हैं सब, जब होता है कुछ ऐसा

आइए नीचे चल कर देखते हैं कि हुआ?




जब मैं ऑफिस पहुंचा,
1 घंटे बाद ही
बीवी का फोन आया,
बोली- आज क्या तारीख है?

मैं घबराते हुए बोला- 28 अप्रैल

उसने तुरंत फोन काट दिया.

मैं काफी डर रहा था
और सोचने लगा....


उसका बर्थडे - नहीं,

मेरा बर्थडे – बिलकुल भी नहीं,

हमारी एनिवर्सरी – फ़रवरी में थी.

बच्चों का बर्थडे नहीं,

सास-ससुर का बर्थडे – सर्दियों में है.

सास-ससुर की एनिवर्सरी – जनवरी में ही तो गयी है.

सिलिंडर बुकिंग - करवा चुका हूँ.

मोबाइल और डिश टीवी रिचार्ज – हो गया था.

बिजली बिल और दूध का बिल – चुका दिया गया है.

पानी का बिल- ये भी हो चुका.

बच्चों की किताबें और फ़ीस सबमिशन – डन.

सप्ताह की सब्जियां और किरयाना – कल ही तो लाया था.

और कोई गलती – याद नहीं आ रही.

तो
तारीख क्यों पूछी उसने?

मेरा लंच 

और 

लंच ब्रेक भी 

इसी सोच और डर में गुजरा.


खैर,

शाम को छुपता-छुपाता जैसे-तैसे घर पहुंचा.

बच्चे पार्क में खेल रहे थे.

मैंने पूछा - घर का मौसम कैसा है?

बवंडर या सुनामी?

गुड़िया ने कहा- सब ठीक है
पर आप ऐसे क्यों पूछ रहे हो पापा?

मैंने कहा- सुबह तुम्हारी मम्मी ने आज की तारीख पूछी थी.

बेटी मुस्कुराई और बोली – ओ पापा,

आज सुबह ही मैंने रसोई की दीवार पर

टंगे कैलेंडर में से कुछ पन्ने फाड़ लिए थे.

शायद इसलिए वो कंफ्यूज हो गई होंगी.


उफ़्फ़.

मेरी जान में जान आई.

यकीन मानिये.

आपको टीवी देखकर 

नेगेटिव होने

और

लोगों से मिलने की क्या जरुरत है?


एक शादीशुदा आदमी का जीवन 

तो 

पहले से ही दहशत से भरा होता है.


इमेज सोर्स: गूगल.


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