Apr 9, 2019

आप "थू" भी नहीं कर सकते.






लोगों को जन्म से लेकर अब तक

कठिन परिश्रम करने को कहा गया

करियर और पैकेज पर सबने दिमाग लगाया
मगर

किसी ने ये काउंसलिंग नहीं की

कि ऐसा काम करना जिसमें

दुविधा और कठिनाई कम हो

और

बीच-बीच में ख़ुशी मिलती रहे

यानि संतुलन का एहसास.





हो सकता है दुनिया में ऐसा कोई काम

हो ही ना,


लेकिन किसी का भी मन

ख़ुशी और तसल्ली तो चाहता ही है ना.








असल में



अब अधिकांश लोग

अपना

लगभग हर काम

बड़ी पीड़ा से कर रहें हैं,


अपना मन मार कर

लाचारी और बेबसी से,


बस पैकेज है जो

लोलीपोप की तरह टेस्टी लगता है,

कई जगह तो वो भी नहीं मिलता

और देखिये कि आप "थू" भी नहीं कर सकते.





मेहनत भी पूरी है,

लेकिन जीवन उदास है,

क्योंकि

चीज़ों को करना मज़बूरी है.



भीतर ही भीतर मरते जाते हैं

शिकायतें बड़ी हो जाती हैं 

और

जिंदगी छोटी.





कितना नाटकीय है ये सब,

पसंद का जीवन ना मिले तो मुसीबत,

जीवन की पसंद ना मिले तो मुसीबत,

मिल भी जायें तो कोई नयी मुसीबत.




सब होते हुए भी एक ख़ालीपन,

फ़िर भी हिम्मत के साथ संतुलन

बनाता आदमी,

अपने भीतर ही भीतर कुछ गुनगुनाता आदमी.





हेल्थ बीमा है लेकिन हेल्थ नहीं,

पैसा आया है लेकिन वेल्थ नहीं

आदमी बड़ा हुआ, रिश्ते खोटे हो गए

पोस्टिंग बड़ी और कद छोटे हो गए.



कहते हैं
आदमी का काम बोलता है,



सच है
अब आदमी कहाँ बोलता है?


वो तुम्हें ख़ोज रहा है.


10 April 2019
6.45 AM
Image Source: Google










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