Apr 14, 2019

Car Washing और Zomato. बाकी सब Tomato.







Quotes शानदार छोटे शब्द हैं. दिल को छू लें तो दिन बना देते हैं. और दिल में उतर जायें तो नसीब बदल देते हैं.

आज की दुनिया में आदमी अब सकून की तरफ़ वापिस लौटने लगा है. चाँद, मंगल तक जाकर भी उसकी ख़ोज अधूरी है और वो जान पा रहा है कि उसकी असली रिसर्च बिना इतना दौड़े भी पूरी हो सकती है.

इसी से जुड़े कुल 29 कोट्स मैजिक मोमेंट्स लाया है, ख़ास आपके लिए. पढ़िए, महसूस कीजिये और अच्छे लगें तो ब्लॉग को शेयर भी ज़रूर कीजिये.




जब मन खुश होता है तो सबकी अच्छाईयां नज़र आती हैं. जब मन उदास होता है तो कुछ भी अच्छा नहीं लगता. और देखो कि मन मुझसे कितना ज्यादा Professional है. वो हर चीज़ की कीमत चाहता है.


एक दिन मैंने ख़ुद से वादा किया कि 24 घंटे एक ही Mode में रह कर देखता हूँ. लेकिन वादा टूट गया, मुझे रात होते होते नींद आ गयी.


गर्मियां आ गयी हैं. मच्छर मिलने लगे हैं. जब मैंने एक मच्छर को करीब से देखा तो मन में सवाल उठा कि क्या उसे किसी भी चीज़ की चिंता नहीं होती? और अगर इसका उत्तर “हाँ” है तो फ़िर हमने ख़ाक विकास पाया. मनुष्यों की दुनिया में तो डर और चिंता कहीं ज्यादा है.


जिस हिसाब से हर भारतीय काम कर रहा है और बेहद व्यस्त है, उसे देख कर लगता है कि कुछ ही दिनों में हमारे यहाँ विकास की आंधी आएगी और बाकी सभी देश उस आंधी में डूब जायेंगे.


Car Washing का बिज़नेस इस समय अपने पूरे शबाब पर है. उसने Zomato को भी पीछे छोड़ने का मन बना लिया है. इससे रोजगार के नए रास्ते खुले हैं. बस धरती पानी सप्लाई की स्पीड ना Slow कर दे. पेट्रोल महंगा पड़ता है अभी. 


मैं तब तक हल्का नहीं हो पाता जब तक ख़ुद को बेवकूफ साबित ना कर लूँ. समझदार और Mature रहने तक दिमाग बक-बक बड़ा करता है.


क्या जानवर भी कभी एक दूसरे के लिए कुछ अच्छा करने की कोशिश करते हैं? या वो भी हमारे जैसे ही हैं.


आदमी 50% कॉमेडी है और 50% ट्रेजडी. आप जानते हैं कि आप कभी भी सबसे इंटेलीजेंट, सबसे अमीर और सर्वगुण संपन्न नहीं हो सकते और फ़िर भी ऐसा साबित करने के लिए 60 – 70 साल तक भागते हैं.


एक कोकक्रोज शान्ति से बैठा था. मुझे देखते ही इधर-उधर भागने लगा. सभी जानवर इंसानों से इतना खौफ़ क्यों खाते हैं? क्या हम सचमुच इसी सम्मान के  लायक हैं?


जो काम मैं अकेला नहीं कर सकता, वो हम मिलकर कर सकते हैं लेकिन फ़िर भी हम मिलना नहीं चाहते. क्यों?


कोई अमीर जब मरता हैं तो हज़ारों लोग इकठ्ठा होते हैं. मिडिल क्लास के मरते समय कुछ सैकड़ों और किसी गरीब की मौत के समय कुछ चुनिंदा लोग. आप किसी के भी बुलावे पर गए हो, आपको वहां पर बुलाने का सीधा सा मतलब बस ये है कि तुम चाहे कोई भी हो, नंबर तुम्हारा भी लगेगा. लोग तुम्हें बस यहीं तक छोड़ने आयेंगे.


लोग ख़ुद को इसलिए व्यस्त नहीं रखते कि सिर्फ़ पैसा कमा सकें. उन्हें पैसों से ज्यादा ये डर ज्यादा सताता है कि अगर हम ख़ाली बैठे तो ख़ुद के साथ कितनी बातें कर पायेंगे.


तुमनें मुझे प्यार दिया, मैं ख़ुश था. तुमनें मुझसे उम्मीदें की, मैं नाराज हो गया. मैं क्या बस लेने ही लेने के लिए पैदा हुआ? ये सवाल हर आदमी को ख़ुद से पूछते रहना चाहिए.


जब लोगों को ये पता चल जाता है कि आप भावुक नहीं हैं और सिर्फ़ अपना काम निकलवाने के लिए उनके आस-पास चक्कर लगा रहे हैं, तो वो धीमे से आपके चक्करों की संख्या बढ़ा देते हैं ताकि आपकी सेहत ठीक रहे.


ईश्वर मनुष्य के भीतर रहता है, बिलकुल सही. मगर शैतान भी आपसे ज्यादा दूर नहीं रहते और ये दोनों दुश्मन नहीं हैं. ये ही समझने वाली बात है.


अगर मैं तुम्हें आज कोई धोखा दूंगा तो वो कल मुझसे कोई ना कोई गलत काम ज़रूर करवा लेगा. ईश्वर वाकई एक शक्तिशाली अनुभव है.


4 जगह मंत्र पढ़े जा रहे हों और 400 जगह गालियाँ दी जा रही हों तो फ़िर ब्रह्मांड भी आखिर कितनी शांति और पॉजिटिव ऊर्जा लौटा सकेगा?


हर कोई उधार की ही जिंदगी लेकर आया है. आप ईश्वर का कर्ज़ कभी नहीं चुका सकते. आप एक मेंढक भी हो सकते थे.


अगर मैं किसी एक बात के लिए भी तुम्हारा थैंक्स नहीं कर सकता तो फ़िर मेरा जीना बेकार है.


अगर तुम्हें मदद की ज़रूरत है तो पुकारो. कुछ लोग जरूर आयेंगे. वो बात अलग है कि तुम अपना गला ख़राब ही नहीं करना चाहते.


अगर सबकुछ तुम्हारे हिसाब का ही होने लगे तो फ़िर मैं कहाँ जाऊंगा?


जब कोई अपनी बात या उपलब्धि बताता है तो मैं ख़ुश होकर सुनता हूँ. जब कोई उसमें परमात्मा की कृपा अनुभव कराता है तो मैं मदहोश हो जाता हूँ.


चमत्कार होते हैं. कितना भी ध्यान रखो मगर मुहं से वो शब्द भी निकल जाते हैं जो आपने कभी सोचे भी नहीं होते. क्या वाकई ये चमत्कार नहीं है?


मेरी कमियों के बावजूद भी तुम मुझे स्वीकारते हो, तुम्हारा बड़प्पन है. तुम मुझसे कहीं ज्यादा ईश्वर के करीब हो.


मुझे जीवन में चाहे जो कुछ भी मिला हो. सुख-दुःख, सबकुछ. मैं जानता हूँ कि सबकुछ ही मेरी वजह से हो, ऐसा बिलकुल भी नहीं है. इसमें कितने ही लोगों का महान योगदान है. शायद इसे ही किस्मत कहते हैं.


किसी भी तरह ख़ुश रहना ही सफ़लता है. अगर आपको ख़ुशी महसूस करने के लिए बाज़ार में इज्ज़त की ही फ़िक्र करनी पड़े तो ये जीवन के साथ कितनी बड़ी नाइंसाफी होगी? है के नहीं.


अगर आप अपने साथ रहकर ख़ुश होते हैं तो अकेलापन भी एक वरदान है. और अगर आप अपने साथ ही दुखी रहते हैं तो आपके साथ रहकर कोई और सुखी कैसे रह सकता है?


13 अप्रैल 2019
05.08 PM
इमेज सोर्स: गूगल



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