May 28, 2019

ये सब्जेक्ट्स की किताबों से बाहर का सिलेबस है.






जिसने कुछ खोया ही ना हो
वो पाने का मजा चख भी कैसे सकेगा?



और
लाइफ़ की ये केमिस्ट्री जिसे समझ आ जाये
उल्टे-पुल्टे इस रहस्य का हल्का सा भी क्लू मिल जाए तो
जीवन का सारा राज़ जान लिया समझो.



लाइफ़ कोई सज़ा नहीं है.
लाइफ़ में संघर्ष करते हुए भटक जाना एक खुबसूरत पहलू है
क्योंकि इस तरह भटककर पाने का मजा ही कुछ और है
आप सचमुच कुछ असली ही हासिल करते हैं
और सारा नकलीपन ख़ुद ब ख़ुद हवा.



आप
समंदर से एक मछली को निकाल कर देखिए
और उसे छोड़ दीजिए जमीन पर
देखिए वो कितना तड़फ जाती है.
 .


उसे पहली दफा पता चलता है कि
समंदर में होने का मजा क्या था.


जब तक समंदर में थी
तब तक उसकी वैल्यू नहीं पता थी.



अब उसी मछली को वापिस समंदर में डाल दीजिए
अब उसकी दृष्टि डिफरेंट होगी
समंदर के लिए अब उसके मन में थैंक्स होगा
वो एक स्वस्थ और अच्छे भाव से समंदर को ताउम्र अब देख पाएगी.
अब वो जान पाई है कि समंदर का कितना सारा उपकार है उसके ऊपर.



ये जानना ही लाइफ़ है.
असलियत है. मंजिल है.




तो अंतत इम्पोर्टेन्ट ये ही है कि पता चल जाए कि
दुःख के बिना सुख का मज़ा नहीं?
दूर हुए बिना पास आने का मजा नहीं?
काँटों के बिना गुलाब के फूल में खुश्बू और रस का आनंद नहीं?
रात बिना सुबह की वैल्यू नहीं?
और
मृत्यु आए ही ना तो लाइफ़ की वैल्यू फ़िर कौन करता है?



और
लाइफ़ जीने के तरीके में कौन से ऐसे विटामिन और मिनरल्स हों
कि जीना अधूरा ना रहे. जीना पूरा हो जाए
मरने पर भी हँसना आ जाए तो असली जानना हुआ
वरना पल-पल मृत्यु है.



ठीक इसी तरह
ईश्वर पहले हमें अपने पास नहीं बुलात्ता
दूर करता है
एग्जाम लेता है
कांटे चुभाता है.



वो समंदरों का भी समंदर है
और हम मछली से भी छोटी मछलियां.
वो भी पक्का कर लेना चाहता है
कि उसकी चॉइस कहीं ग़लत ना निकल जाए.



और जब हम कभी जमीन पर पटक दिए जायेंगे
तब ही खुली आँखों से आसमां की तरफ़ देख पायेंगे?
और सारा डिफरेंस ख़त्म.



अब आप अस्तित्व में उतर गए.
सही मायनों में ये ही जीने का तरीका होना चाहिए
ये सब्जेक्ट्स की किताबों से बाहर का सिलेबस है.



ये महसूस करने का मसला है
और ये हर किसी को स्वयं ही करना पड़ता है.
आज नहीं तो कल.
और इसे आप तक पहुंचना ही चाहिए.



हाँ या ना?

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May 27, 2019

शिकायतें जब प्रार्थना में बदलनी हों तो ये कीजिए.






आपको जब भी लगने लगे कि
आस-पास आपके मन-मुताबिक नहीं हो रहा है
और किसी भी वजह से मन भारी लगने लगे तो
अपने माइंड को हल्के से एक रिमाइंडर दीजिए.


उससे कहिए कि
तुम्हें जज बनने की बिलकुल भी ज़रूरत नहीं है
हर चीज़ तुम्हें ही मालूम होती तो 
तुम यहाँ होते ही नहीं.
फ़िर तो तुम ही क्रिएटर और डिस्ट्रॉयर 
होते यानि ईश्वर.


उसे याद दिलाइए कि
उससे भी गलतियां होती रहती है और आज
किसी और से हो रही है.

उसे भी किसी से नफ़रत होती है और आज
किसी को उससे हो रही है.

उसने भी किसी को रुलाया होगा और आज
वो भी रो सकता है.

उसने भी कभी झूठ बोला होगा और आज
उससे भी कोई झूठ बोल सकता है.

उसने भी किसी को नीचा दिखाया होगा और आज
अचानक उसका नंबर आ गया.

उसने भी कभी दीवार पर सर पटका होगा और आज
कोई और पटक रहा है.

उसने भी कभी चतुराई दिखाई होगी और आज
कोई और चतुर बन रहा है.

उसने भी कभी कुछ छुपाया होगा और आज
कोई और छुपा रहा है.

उसने भी कभी अकड़ दिखाई होगी और आज
कोई और भी अकड़ सकता है.

उसने भी किसी को दर्द दिया होगा और आज
उसको भी दर्द हो सकता है.

उसने भी कभी ज्यादा सोचा होगा और कोई आज
ज्यादा सोच रहा है.

उसने भी किसी का मज़ाक बनाया होगा और आज
कोई उसका भी मज़ाक बना सकता है.


और आप पाएंगे कि
आप अचानक ठहर गए हैं.
माइंड शांत और रिलैक्स हो चला है.
शिकायतें प्रार्थना में बदल रही हैं
मन लाइटवेट चैंपियन हो गया है.


आपने चीज़ों को न्यूट्रल भाव से देख लिया है
और आप जान गए हैं कि
सबकुछ आपके ही अनुसार नहीं चल सकता

और ठीक इसी पल से
हर चीज़ ओके होना शुरू हो जाती है.


क्योंकि हर माइंड कुछ कहता ही है
लेकिन
सच तो दिल में रहता ही है.

है ना? 


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May 26, 2019

अरबों-खरबों लोग और सिर्फ़ 4 केटेगरी. कमाल है.





मानवीय सभ्यता के अरबों-खरबों लोगों को
आसानी से
सिर्फ़ 4 केटेगरी में रखा जा सकता है.

पहला कर्म योगी यानी जिन्हें आप 
वर्क-अल्कोहलिक कह सकते हैं.
इनके लिए काम ही सबकुछ है.


दूसरा ज्ञान योगी यानि 
जो थिंकर्स या फिलोसोफ़र्स हों.
आगे तक की सोच लिए हुए. 
एंड को जानने वाले.


तीसरे भक्ति योगी यानि 
सबकुछ ईश्वर पर छोड़कर जीने वाले.
मालिक की मर्ज़ी पर जीवन यात्रा को चलाने वाले. अद्भुत माइंड मैनेजमेंट वाले.


और चौथे क्रिया योगी यानि 
एनर्जी मैनेजमेंट पर जीने वाले.
जैसी शरीर की एनर्जी, वैसा ही रिएक्शन. 
कभी हाँ, कभी ना पीपल.


चूंकि ये चारों अलग-अलग कांसेप्ट पर 
लाइफ़ के साथ चलते हैं तो
सीधी सी बात है कि एक दूसरे को चारों
बमुश्किल ही कभी लाइक कर पाते हैं
क्योंकि सबकी विचारधारा में ही
जमीन-आसमान का फ़र्क है
लेकिन यूनिवर्स की खूबसूरती भी ये ही है.


अगर ईश्वर सभी को एक जैसा बनाकर भेज देते तो
कितना बोरिंग हो जाता जिंदगी का सफ़र.


आप परिवार से शुरू कीजिए
फ़िर समाज पर नज़र डालिए
फ़िर देश की तरफ़ देखिये
और फिर ग्लोबली चेक कीजिए.
हर टाइप का आदमी हर जगह मौजूद मिलेगा
और ये मिक्सचर कॉम्बिनेशन
बड़ा ही तीखा और चटपटा होता है.


हर कोई ख़ुद को बेस्ट बताने पर तुला रहता है
और जीवन चलता रहता है


एक दिन की बात है
ये चारों एक साथ कहीं जा रहे थे
अचानक तेज बिजली कड़की
और बारिश आ गयी


अब क्या करें?
सबने दिमाग लगाना शुरू किया
कि कैसे बचा जाए?
भक्ति योगी ने बताया कि
पास में एक पुराना मंदिर है
वहीं शरण लेते हैं
इस टाइप पर सबका भरोसा ज्यादा रहता है सो
सब उसके हिसाब से चल दिए.


टूटा-फूटा मंदिर
सिर्फ़ छत और 
नीचे भगवान् की मूर्ति
बारिश ऐसे आये कि
सबको मूर्ति के साथ चिपक कर बैठना पड़ा.
4 कोनों पर चारों बैठ गए चुपचाप.


अचानक भगवान् प्रकट हो गए.
सभी हैरान? आपको तो हमनें बुलाया ही नहीं.
भगवान् हंस पड़े.
बोले – मैं जानता हूँ कि तुम सब ख़ुद ही इतने समझदार हो
कि मुझे बुलाने की जरूरत कहाँ?
सबने कहा – फ़िर आप यहाँ कैसे?
भगवान् फ़िर हंस पड़े.
बोले- तुम चारों को मजबूरीवश ही सही
लेकिन एक साथ देखने का मज़ा ही कुछ और है.
फ़िर वो निकल गए.



वो चारों अब एक दूसरे का मुहं ताकने लगे.
बारिश रुकी तो वो भी निकल गए.



सरल भाषा में बात ये है कि
हम बजाय एक टाइप के बनने के
25-25% सभी टाइप का बैलेंस अपने भीतर
उतार लें तो लाइफ़ जन्नत ही हो जाए
क्योंकि फ़िर हम साथ-साथ रह जो सकेंगे.
अभी तो एक-दूसरे से अलग-अलग दिखाई दे रहे हैं.

और बारिश तो कभी भी आ सकती है?


हाँ या ना?




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