May 26, 2019

अरबों-खरबों लोग और सिर्फ़ 4 केटेगरी. कमाल है.





मानवीय सभ्यता के अरबों-खरबों लोगों को
आसानी से
सिर्फ़ 4 केटेगरी में रखा जा सकता है.

पहला कर्म योगी यानी जिन्हें आप 
वर्क-अल्कोहलिक कह सकते हैं.
इनके लिए काम ही सबकुछ है.


दूसरा ज्ञान योगी यानि 
जो थिंकर्स या फिलोसोफ़र्स हों.
आगे तक की सोच लिए हुए. 
एंड को जानने वाले.


तीसरे भक्ति योगी यानि 
सबकुछ ईश्वर पर छोड़कर जीने वाले.
मालिक की मर्ज़ी पर जीवन यात्रा को चलाने वाले. अद्भुत माइंड मैनेजमेंट वाले.


और चौथे क्रिया योगी यानि 
एनर्जी मैनेजमेंट पर जीने वाले.
जैसी शरीर की एनर्जी, वैसा ही रिएक्शन. 
कभी हाँ, कभी ना पीपल.


चूंकि ये चारों अलग-अलग कांसेप्ट पर 
लाइफ़ के साथ चलते हैं तो
सीधी सी बात है कि एक दूसरे को चारों
बमुश्किल ही कभी लाइक कर पाते हैं
क्योंकि सबकी विचारधारा में ही
जमीन-आसमान का फ़र्क है
लेकिन यूनिवर्स की खूबसूरती भी ये ही है.


अगर ईश्वर सभी को एक जैसा बनाकर भेज देते तो
कितना बोरिंग हो जाता जिंदगी का सफ़र.


आप परिवार से शुरू कीजिए
फ़िर समाज पर नज़र डालिए
फ़िर देश की तरफ़ देखिये
और फिर ग्लोबली चेक कीजिए.
हर टाइप का आदमी हर जगह मौजूद मिलेगा
और ये मिक्सचर कॉम्बिनेशन
बड़ा ही तीखा और चटपटा होता है.


हर कोई ख़ुद को बेस्ट बताने पर तुला रहता है
और जीवन चलता रहता है


एक दिन की बात है
ये चारों एक साथ कहीं जा रहे थे
अचानक तेज बिजली कड़की
और बारिश आ गयी


अब क्या करें?
सबने दिमाग लगाना शुरू किया
कि कैसे बचा जाए?
भक्ति योगी ने बताया कि
पास में एक पुराना मंदिर है
वहीं शरण लेते हैं
इस टाइप पर सबका भरोसा ज्यादा रहता है सो
सब उसके हिसाब से चल दिए.


टूटा-फूटा मंदिर
सिर्फ़ छत और 
नीचे भगवान् की मूर्ति
बारिश ऐसे आये कि
सबको मूर्ति के साथ चिपक कर बैठना पड़ा.
4 कोनों पर चारों बैठ गए चुपचाप.


अचानक भगवान् प्रकट हो गए.
सभी हैरान? आपको तो हमनें बुलाया ही नहीं.
भगवान् हंस पड़े.
बोले – मैं जानता हूँ कि तुम सब ख़ुद ही इतने समझदार हो
कि मुझे बुलाने की जरूरत कहाँ?
सबने कहा – फ़िर आप यहाँ कैसे?
भगवान् फ़िर हंस पड़े.
बोले- तुम चारों को मजबूरीवश ही सही
लेकिन एक साथ देखने का मज़ा ही कुछ और है.
फ़िर वो निकल गए.



वो चारों अब एक दूसरे का मुहं ताकने लगे.
बारिश रुकी तो वो भी निकल गए.



सरल भाषा में बात ये है कि
हम बजाय एक टाइप के बनने के
25-25% सभी टाइप का बैलेंस अपने भीतर
उतार लें तो लाइफ़ जन्नत ही हो जाए
क्योंकि फ़िर हम साथ-साथ रह जो सकेंगे.
अभी तो एक-दूसरे से अलग-अलग दिखाई दे रहे हैं.

और बारिश तो कभी भी आ सकती है?


हाँ या ना?




इमेज सोर्स: गूगल



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