May 1, 2019

अमीरी इंतजार नहीं कर सकती. जल्दी करो.





कोई सबसे रईस जब 
किसी साधारण से आदमी के पास जाता है 
तो 
उसे क्या नया पता चलता है?
आइए जानते हैं.


यूनान देश का सबसे अमीर आदमी
एक बार
उस समय के सबसे बड़े विद्वान 
सुकरात से मिला.


उन्होंने उसे थोड़ा इंतजार करने को कहा.

अमीर बोला - 
‘‘क्या आप जानते भी हैं कि मैं कौन हूं?’’

सुकरात ने कहा - 
‘‘आइए, जरा इधर बैठिए.
वो बैठ गया.
साथ में एक मेज रखी हुई थी.

सुकरात बोले – 
"चलो, अब ये समझने की कोशिश करते हैं 
कि तुम कौन हो?’’

सुकरात ने दुनिया का नक्शा उसके सामने रख दिया
और
उस अमीर आदमी से पूछा –
‘‘प्लीज बताओ, इसमें एथेंस कहां है?’’

उसने कहा - 
‘‘दुनिया के नक्शे में एथेंस तो एक बिंदु (डॉट) भर है.’’

आदमी ने एथेंस पर उंगली रखी और कहा - ‘‘ये रहा एथेंस.’’

सुकरात ने दूसरा सवाल पूछा -
‘‘प्लीज मुझे ये भी बताओ कि इस एथेंस में तुम्हारा महल कहां है?’’

आदमी परेशान.
वहां तो डॉट ही था, अब वो इस डॉट में महल कहां से बताए?

फिर सुकरात ने अंतिम सवाल किया.
कहा –
‘‘प्लीज ये तो बता दो कि उस महल में तुम कहां हो?’’

अमीर आदमी चुप.
घोर सन्नाटा. 
वो कहे तो कहे क्या?
वो नक्शे में मिल ही नहीं रहा.

सुकरात बोले -
यह नक्शा तो बस इस एक छोटी सी दुनिया का है.
ऐसी अनंत दुनिया हैं.
अनंत सूरज.
अनंत ब्रह्मांड.

और
तुम मुझसे पूछते हो 
कि
‘‘क्या आप जानते भी हैं कि मैं कौन हूं?’’
तुम हो कौन

ये तुम ही नहीं बता सके तो 
भला मैं कैसे बता सकता हूँ?


वो आदमी सिर झुका कर खड़ा हो गया.

सुकरात ने कहा - 
‘‘अब तुम जान गए होंगे
कि वास्तव में हम कुछ भी नहीं हैं.
लेकिन कुछ होने की अकड़ ही हमें पकड़े हुए है.

बस ये ही हमारा दुख है, ये ही नर्क है.


कहते हैं कि
जब वो अमीर आदमी वहां से जाने लगा
तो
सुकरात ने वो नक्शा यह कहकर गिफ्ट किया
कि इसे सदा अपने पास रखना
और
जब भी तुम्हें घमंड जकड़े
तो एक बार
ये नक्शा खोलकर देख लेना कि
कहां है एथेंस?
कहां है मेरा महल?
और फिर मैं कौन हूं?

इंफो एंड इमेज: गूगल


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