May 14, 2019

आज आपका जन्मदिन है पिता जी. अंग्रेजी में हैप्पी बर्थडे.




गर मैं कभी कोई स्टोरी बुक लिख पाया तो
उसे अब तक की मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि मानूंगा
क्योंकि
उसमें मैं अपने पिता के बारे में लिखूंगा.
मैं लिखूंगा कि उनके पास सिर्फ़ दिल ही नहीं था
बल्कि 24 कैरेट सोने का दिल था.

हालांकि मैं उनसे हमेशा डरता रहा हूँ
और ऐसे डरना ही मुझे सिखाता है
कि एक इंसान की सही वैल्यू क्या
और क्यों होती है?

एक्चुअली
मैं अब हर उस चीज़ से डरता हूँ
जिससे मैं प्यार करता हूँ
ये खोने का डर है
जो हमेशा बना भी रहना चाहिए.


खैर,
मुझ जैसे फ्लेक्स्बिल बेवकूफ के लिए
ऐसे ईमानदार इंटेलीजेंट
और
संजीदा पिता का होना
केवल और केवल भाग्यशाली होने जैसा है.

ये मुझे हमेशा हर सिचुएशन में
मुस्कराहट बनाये रखने में
मदद करता रहा है.

किसी हार के बाद तो ये
और इफेक्टिव हो जाता है.
और
किसी जीत के बाद ये
मुझे कभी एगोइस्टिक भी नहीं होने देता.


हालांकि पिता का कभी-कभार गुस्सैल
होना हमें अखरता रहा है
लेकिन शायद तभी हम जान सकें हैं
कि हर एक पर गुस्सा क्यों नहीं किया जा सकता?


एक ऐसे माहौल में जहाँ
उनके लिए भीतर और बाहर
सहानुभूति के
अवसर कभी नहीं रहे,

बावजूद उसके
ख़ुद को खड़े रखना
कई किलोमीटर दूर नौकरी करना
वो भी ईमानदारी के साथ
साथी कर्मचारियों की भी चिंता रखते हुए.


फ़िर ट्रांसफर लेना
मां के साथ साथ
हम बच्चों का पालन पोषण
सुनिश्चित करने के लिए
हर घड़ी तैयार रहना

और
कर्म करते रहने का लेक्चर
पिलाते रहना.

मैं लिखूंगा कि उनके अत्याधिक प्रतिभाशाली
और ऊर्जावान  
होने से मेरे तोते सबसे ज्यादा उड़े क्योंकि
उनकी उम्मीदें मुझे लेकर आसमान तक रही.
और मैं जमीन का आदमी निकला.


मैं लिखूंगा उनका
समय-समय पर पारिवारिक दुखद अवस्थाओं में बेहद शांत बने रहना
अकेले में ख़ुद को हिम्मती बनाए रखना
अंदर ही अंदर सब झेल जाना

काश कुछ ऐसे गुण मुझ में ईश्वर ने डाले होते.


उन्होंने
मुझे गलत से सही होना सिखाया
पर अभी तक मैं वैसा हो भी नहीं पाया.


फ़िर भी
उन्होंने मुझे मूल्यों के लिए प्रेरित किया
ताकि मैं एक दिन मजबूत बनूँ
और डर का, हार का सामना करना सीख लूँ.

मैं लिखूंगा कि
इस कहानी में एक ट्विस्टेड फ्लेवर भी है
कि 
मां सब ईश्वर पर छोड़ देने की बात करती थी
और पिता कर्म पर.
इस कॉम्बो-पैक से हमनें लाइफ़ को बैलेंस कर सकने  की कला जानी.


अच्छा ये हुआ
कि हम जान सके
कि ऐसी कई चीजें हैं
जिन्हें हम कभी नहीं बदल सकते
और अब मैं शायद ही 
अपने लिए कुछ रख पाता हूँ?


मैं लिखूंगा कि
मैं अब सबके लिए उपलब्ध हूँ,
अपना सर ऊँचा रख कर
क्योंकि
पिता ने मुझे सिर्फ़
ख़ुद से उम्मीद रखने की
आदत डलवाई.

वरना बहुत दर्द होता है.
मैंने देखा है.
महसूस भी किया है.


मैं लिखूंगा
कि मुझ जैसे आलसी जीव को पॉलिश
करने के लिए
और ये सिखाने के लिए
कि
तुम खुशबू बनना चाहे
जीवन तुम्हें कितना ही लपेटे
और
किसी के दिल पर चोट मत करना  
चाहे
लालच कितना भी हावी क्यों ना हो.


मैं पिता के बारे में ज़रूर लिखूंगा,
क्योंकि वो असली नायक हैं
बिना किसी पहचान की उम्मीद करे बगैर.

आज आपका जन्मदिन है पिता जी.

अंग्रेजी में हैप्पी बर्थडे.



07.48 AM
14 May 2019
इमेज सोर्स: गूगल

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