May 16, 2019

रिजल्ट से पहले और रिजल्ट के बाद.






इन दिनों अलग-अलग एग्जाम के रिजल्ट्स 
डिक्लेअर हो रहे हैं
या होने वाले हैं.

रिजल्ट से पहले और रिजल्ट के बाद
बच्चों और पेरेंट्स का मेंटल टेम्परामेंट
मौसम की तरह बदलता रहेगा.

कभी बारिश, कभी लू,
कभी ठंडक तो कभी आंधी
जैसे मानसिक हालात सामने आयेंगे.

जहां कुछ चेहरे बेहद खिले-खिले मिल सकते हैं
तो   
वहीँ कुछ चेहरों पर शिकन की घंटी भी 
बजती मालूम पड़ेगी.

अब ये वो समय होगा
जिसमें आपको ना चाहते हुए भी 
सेल्फ़-कंट्रोल का रिमोट
अपने पास रखना होगा.

क्योंकि उम्मीदें पृथ्वी की तरह गोल-गोल घूमेंगी
और उनको पूरा करने का दबाव पूरे परिवार को
रातों में भी सोने नहीं देगा.

यहाँ बस इतना ध्यान रखें कि
बारीकी से इन पलों में संयम बना रहे
और  
आपकी उम्मीदें 
आपके बच्चों से ज्यादा बड़ी ना होने पाए 
वरना 
आपका प्यारा सा बीज पेड़ बनने से पहले ही 
मुरझा भी सकता है
यहां आपकी मेंटरिंग उसके लिए 
जैविक खाद का काम कर सकती है.


कैसे?

ऐसे?

एक बार सभी हिरणों ने जंगल में
अपने ऊपर हो रहे हमलों पर
विचार-विमर्श करने के लिए मीटिंग की.
जंगल के मांसाहारी जीवों ने
उनका जीना जो मुश्किल बना रखा था.

सो, मीटिंग में डिसिशन हुआ
कि
सभी हिरण जल-समाधि लेकर मुक्ति पा लें.
सभी इकट्ठे होकर तालाब की तरफ़ कूच कर गए.

तालाब में सैकड़ों-हज़ारों मेंढकों का रेजिडेंस था.
अच्छी धूप के चलते वो सब विटामिन डी का मज़ा ले रहे थे.

जैसे ही उन्होंने हिरणों के आने का शोर सुना,
छपाक से वो अपने रेजिडेंस में चले गए
यानि के तालाब में कूद गए.

ये सब देखकर हिरणों के सेनापति का माथा ठनका.
उसने सभी को रुकने का ईशारा किया
और
बोला - हम में से किसी को भी सुसाइड करने की ज़रूरत नहीं है.

सबने एक दूसरे की तरफ़ देखा और पूछा – क्यों?
सेनापति बोला – ध्यान से देखो, हमसे डरने वाले जीव भी इस जंगल में है
और
जब वो सुसाइड करने जैसा कुछ नहीं सोच रहे हैं तो फ़िर हम ऐसा क्यों करें?

हिरणों के माइंड में बात घुसी  
और
वो हँसते मुस्कुराते हुए वापस लौट गए.

इमेज सोर्स: गूगल

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