May 24, 2019

एक नयी खूबसूरती लिए हुए यक़ीनन ये रोबोटिक्स की दुनिया होगी.






ऐसा कुछ भी जो आपको
अपनी थिंकिंग से आउट ऑफ़ सिलेबस लगता है,
आप उसे चमत्कार कहते हैं.


पुराने समय में लोग चमत्कारों को लेकर 
आश्वस्त रह जाते थे
लेकिन 
अब लोग फैक्ट्स और हकीकत के फ़र्क को समझने में पूरा दिमाग खर्च कर रहें हैं.


मान लीजिए
धातु और प्लास्टिक से बने एक मोबाइल सेट से 
अगर आप भारत से ऑस्ट्रेलिया कॉल करके 
किसी से बात करें और
कहें कि ये चमत्कार है तो क्या सब इसे मान लेंगे? 
क्योंकि आज ये हकीकत है 
और सबको इसके बारे में पता है.


लेकिन अगर ये ही काम 60-70 साल पहले होता
तो शायद उस समय इसे चमत्कार ही कहा जाता.


सीधी सी बात है
कि जब चीज़ों के बारे में आपकी पहचान और समझ 
धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगती है तो आपको
कुछ भी चमत्कार लगना बंद हो जाता है
अदरवाइज हर चीज़ एक चमत्कार ही तो है.


लाइफ़ को टेस्ट करने के ये दो ही तरीके हैं
पहला - सब कुछ ही चमत्कार है
और दूसरा – कुछ भी चमत्कार नहीं है


अक्सर लोग कंफ्यूज होते हैं
कि पहला स्पिरिचुअल है और दूसरा साइंटिफिक

लेकिन ये बस चीज़ों को देखने के नज़रिए पर डिपेंड है
और दोनों ही एक जैसे हैं
विद सेम रिजल्ट्स.


उदाहरण के लिए - 

आप मिटटी में एक बीज डालते हैं, खाद डालते हैं  
और बदबूदार खाद 
अपने ऊपर डलने के बाद भी जो फूल खिल रहा है
उसकी खुशबू तो देखिये
क्या आप विश्वास कर पा रहें हैं? 
इतनी बेहतरीन खुशबू.


आप सोचने लगते हैं कि ऐसा कैसे हो सकता है?
लेकिन ऐसा होता है.


और अगर आप कहें कि ये आपने किया है तो
आपने मिट्टी में बीज, ऊपर खाद और पानी ही डाला था
अब जो भी हुआ वो इंटरनल ही कुछ हुआ होगा
और आपने पाई भीनी-भीनी खुशबू.


बस ये ही स्पिरितुअलिटी और साइंस का नज़रिया है
एक इंटरनल है और एक एक्सटर्नल.


साइंस में प्रोडक्ट तो आप बना लेंगे
लेकिन उसकी खुश्बू एक इंटरनल फंक्शन है
और
शायद 
तभी
पुराने समय में जीवन खुश्बू भरा रहा होगा
और चमत्कार लगता होगा?


आज एक्सटर्नल फंक्शन का दौर है
और 
यक़ीनन ये रोबोटिक्स की दुनिया होगी
एक नयी खूबसूरती लिए हुए 

क्योंकि हकीकत ये ही है.

इसका भी अपना मज़ा है.

बुरा आखिर कुछ भी तो नहीं होता.


इमेज सोर्स: गूगल



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