May 27, 2019

शिकायतें जब प्रार्थना में बदलनी हों तो ये कीजिए.






आपको जब भी लगने लगे कि
आस-पास आपके मन-मुताबिक नहीं हो रहा है
और किसी भी वजह से मन भारी लगने लगे तो
अपने माइंड को हल्के से एक रिमाइंडर दीजिए.


उससे कहिए कि
तुम्हें जज बनने की बिलकुल भी ज़रूरत नहीं है
हर चीज़ तुम्हें ही मालूम होती तो 
तुम यहाँ होते ही नहीं.
फ़िर तो तुम ही क्रिएटर और डिस्ट्रॉयर 
होते यानि ईश्वर.


उसे याद दिलाइए कि
उससे भी गलतियां होती रहती है और आज
किसी और से हो रही है.

उसे भी किसी से नफ़रत होती है और आज
किसी को उससे हो रही है.

उसने भी किसी को रुलाया होगा और आज
वो भी रो सकता है.

उसने भी कभी झूठ बोला होगा और आज
उससे भी कोई झूठ बोल सकता है.

उसने भी किसी को नीचा दिखाया होगा और आज
अचानक उसका नंबर आ गया.

उसने भी कभी दीवार पर सर पटका होगा और आज
कोई और पटक रहा है.

उसने भी कभी चतुराई दिखाई होगी और आज
कोई और चतुर बन रहा है.

उसने भी कभी कुछ छुपाया होगा और आज
कोई और छुपा रहा है.

उसने भी कभी अकड़ दिखाई होगी और आज
कोई और भी अकड़ सकता है.

उसने भी किसी को दर्द दिया होगा और आज
उसको भी दर्द हो सकता है.

उसने भी कभी ज्यादा सोचा होगा और कोई आज
ज्यादा सोच रहा है.

उसने भी किसी का मज़ाक बनाया होगा और आज
कोई उसका भी मज़ाक बना सकता है.


और आप पाएंगे कि
आप अचानक ठहर गए हैं.
माइंड शांत और रिलैक्स हो चला है.
शिकायतें प्रार्थना में बदल रही हैं
मन लाइटवेट चैंपियन हो गया है.


आपने चीज़ों को न्यूट्रल भाव से देख लिया है
और आप जान गए हैं कि
सबकुछ आपके ही अनुसार नहीं चल सकता

और ठीक इसी पल से
हर चीज़ ओके होना शुरू हो जाती है.


क्योंकि हर माइंड कुछ कहता ही है
लेकिन
सच तो दिल में रहता ही है.

है ना? 


इमेज सोर्स: गूगल
 

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