May 9, 2019

क्या है स्कूल, कॉलेज, गुजर-बसर के सिलेबस से बाहर निकल कर देखना ?






कुछ बातें कमाल की होती हैं।
कुछ चीज़ें भी कमाल की होती हैं।
कुछ लोग भी शानदार ही होते हैं.
उनमें से एक है जग्गी वासुदेव.

जे.वी. से सद्गुरु बनने का उनका सफ़र यक़ीनन क्लास रहा होगा.
क्योंकि  
लाइफ़ को लेकर उनका विज़न सीमाओं से परे लगता है
और
हमें सोचने पर मजबूर करता है कि 
क्या हम भी कभी
स्कूल, कॉलेज, गुजर-बसर के सिलेबस से कभी बाहर निकल कर
लाइफ़ की नेचुरल खूबसूरती को देख पायेंगे
या 
ख़ुद को अंदर समेटे-समेटे जीवन को यूँ ही गुजर जाने देंगे?
सवाल सरल है और आंसर भी.
बस पहचान करने की देर है.


उनके कुछ कोट्स जो फ्रेशनेस महसूस कराते हैं,
ये रहे आपके सामने।

दुनिया में जो हो रहा है, अगर वो आपके मन मुताबिक नहीं हो रहा है, तो आपके भीतर जो हो रहा है, कम से कम उसे तो आपके मन मुताबिक होना चाहिए।

⏩अगर आप यह नहीं जानते कि क्या चुनें, तो आप हर चीज में संपूर्ण भागीदारी दिखाइए। तब जीवन चुन लेगा, और यह कभी गलत नहीं होता।

⏩सत्य का मतलब है ‘वह जो है’। ‘वह जो है’ के साथ तालमेल बनाने के लिए आपको बस ‘होने’ की जरुरत है।

⏩जो इंसान हँस नहीं सकता, ध्यान भी नहीं कर सकता। हंसी, एक तरह से आपकी ऊर्जा का उमड़ना है। बिना किसी शारीरिक गतिविधि के आपकी ऊर्जा का शिखर तक उमड़ना ही ध्यान है।

⏩अस्तित्व में होना ही अस्तित्व का मकसद है। ये इतना शानदार है कि इसका कोई अर्थ निकालकर सीमित नहीं किया जा सकता।

मेरी कामना है कि आप अपने जीवन में तकलीफों भरी मेहनत न करें, बल्कि आपकी मेहनत प्रेम और आनंद भरी हो।

⏩जब लोग अकेले होते हैं, तब वे आध्यात्मिक बन जाते हैं। जब वे समूह में होते हैं, तब धार्मिक बन जाते हैं।

हर काम ऐसे कीजिए, जैसे वो आपका आखिरी काम हो। रोककर रखने के लिए कुछ नहीं होता, और भविष्य के लिए बचाकर रखने के लिए भी कुछ नहीं होता।

⏩भीतरी खुशहाली की तकनीकें आज सबसे महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि जैसे-जैसे बाहरी दुनिया में हमारे लिए संभावनाएं बढ़ती हैं, हमारा भीतरी खालीपन उतना ही अधिक स्पष्ट नजर आने लगता है।

⏩आप अपने आस-पास के लोगों, चीजों, या जहाँ रहते है उस जगह के साथ कितने तालमेल में हैं - यही तय करेगा कि आप दुनिया में कितनी सहजता से काम करते हैं।

⏩हर जीव एक संभावना है। अगर आप उस संभावना को खुला रखना चाहते हैं, तो कभी किसी व्यक्ति के बारे में किसी भी प्रकार की राय मत बनाइए।

⏩हम सभी को अपनी भीतरी समझ के अनुसार वोट देना चाहिए, इस आधार पर कि देश के लिए सबसे अच्छा क्या है। अगर हम समुदाय, जाति या धर्म के आधार पर वोट देते हैं, तो हम लोकतंत्र का मज़ाक बना देंगे।

जो इंसान बार-बार अपनी दिशा बदलते रहता है, जाहिर है कि उसमें कहीं पहुँचने की इच्छा नहीं है।

⏩जब आप खाते हैं, तब आप धरती के एक हिस्से को अपने भीतर लेते हैं। जैसा बर्ताव हम इस धरती के साथ करते हैं, वैसा ही बर्ताव हम अपने शरीर के साथ करते हैं।

⏩अतीत और भविष्य का अस्तित्व सिर्फ आपकी याद्दाश्त और कल्पना में है। जो अभी इस पल में है, यही एकमात्र चीज है, जिसका आप अनुभव करते हैं।

⏩आपके द्वारा बोला गया हर शब्द, आपके द्वारा अपने जीवन में किया गया हर कार्य - क्या यह सबके कल्याण के लिए है, या ये सिर्फ आपके लिए है? बस इस एक चीज को ठीक कीजिए।

⏩शिक्षा बस जानकारी इकट्ठा करना नहीं है, यह असल में व्यक्ति के बोध की क्षमता को बढ़ाने के लिए है।

⏩वासना एक जबरदस्त जरूरत होती है। प्रेम कोई जरूरत नहीं है। जब आप प्रेम करते हैं, तब आप स्थिर और शांत हो जाते हैं; फिर और किसी चीज़ की जरुरत नहीं रह जाती।

⏩किसी चीज़ को उच्च दृष्टि से न देखें, और न ही किसी चीज़ को निम्न दृष्टि से देखें। तभी आप सृष्टि को वैसी देखेंगे जैसी वह है।

⏩आप जो करते हैं, उससे ये तय नहीं होना चाहिए कि आप कौन हैं। आप जो हैं, उससे ये तय होना चाहिए कि आप क्या करते हैं।

⏩जीवन एक खास रफ्तार में चलता है। आपको जल्दी में होना चाहिए, पर आनंदपूर्वक। कभी बेचैन नहीं होना चाहिए।

शंका होना अच्छा है - इसका मतलब है कि आप सत्य को खोज रहे हैं। शक करना बीमारी है - इसका मतलब है कि आपने पहले से ही नकारात्मक राय बना ली है।

⏩जीवन में सबसे महत्वपूर्ण चीज़ संतुलन है। अगर संतुलन नहीं होगा, तो आपका अपना शरीर और मन आपके खिलाफ काम करेंगे।

⏩स्वास्थ्य सिर्फ निरोग होना नहीं है। स्वास्थ्य का मतलब है आपके शरीर की हर कोशिका में जीवन उमड़ रहा है।

⏩आपके पास क्या है, आप क्या पहनते हैं, आप कहां रहते हैं, आपके आस-पास कौन है - यह जीवन नहीं है। आपके अनुभव की गहनता ही जीवन है।

⏩नीतियों की और सरकार के काम करने के तरीके की रचनात्मक आलोचना करना ठीक है। यह प्रजातंत्र के जीवित रहने के लिए सांस की तरह है। पर अंधाधुंध विरोध करना पक्षपात है।

अपने जीवन को लेकर बहुत गंभीर मत होइए। गंभीर होने से, जीते जी आपमें मुर्दों जैसे गुण आ जाएंगे।

⏩सवाल यह नहीं है कि आप कितना कुछ करते हैं। सवाल सिर्फ ये है कि क्या आप पूरी तरह से समर्पित हैं। क्या आपका जीवन पूरे प्रवाह में है?

जब आप हर किसी के लिए जीते हैं, तो हर कोई आपका ख्याल रखता है। और फ़िर आप एक वरदान बन जाते हैं।

⏩अगर आप बस दूसरों से आगे होने को सफलता मानते हैं, तो ये तय है कि आप अपनी पूर्ण क्षमता को कभी नहीं खोज पाएंगे।

⏩चरित्र व निष्ठा का संबंध सबको शामिल करने से है। ये नैतिकता या नियमों की सूची नहीं है, बल्कि इसका संबंध अपने आस-पास के हर जीव के प्रति संवेदनशील होना है।

⏩अगर आप सृष्टि को वैसी ही देखें, जैसी ये है - तो आपको यह बेहद खूबसूरत दिखाई देगी। आपको इसे सजाने की जरुरत नहीं है – ना ही अपने जीवन को, ना ही किसी और चीज़ को।

उम्र के साथ, आपके शरीर की फुर्ती कम हो सकती है; आपकी जीवंतता को कम नहीं होना चाहिए।

अगर आप ये हर दिन नहीं करते, तो महीने में कम से कम एक बार इसका आंकलन जरूर कीजिए – कि क्या आप एक बेहतर इंसान में विकसित हो रहे हैं?

⏩सोचने' का मतलब है, उस जानकारी को बार-बार दोहराते रहना जिसे आपने अतीत में जमा किया है।

⏩प्रजातंत्र का मतलब है कि उंगलियां उठाने की बजाय, हम सब इस जगह को, रहने के लिए एक शानदार जगह बनाने में, सक्रिय रूप से हिस्सा लें।

⏩आपकी प्रेम करने की क्षमता, लोगों तक पहुंचने की, और जीवन को अनुभव करने की क्षमता असीम है। सीमाएं सिर्फ मन की होती हैं।

आप हमेशा यह देखिए कि अपने आस-पास के हर इंसान के लिए सबसे बेहतर क्या कर सकते हैं। खुद को अर्पित करने के इस भाव से आप जगमगा उठेंगे।


इमेज सोर्स: गूगल

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