May 19, 2019

डायरेक्टर परेशान क्योंकि कॉलेज चलाना जो था.






एक कॉलेज अपने लिमिटेड रिसोर्सेस के साथ
बड़ी ही मुश्किलों से चल रहा था.


फोकस था कि कैसे भी बच्चों को अपनी तरफ़ से 
बेस्ट दिया जाए
चाहे पढाई या फ़िर कोई एक्टिविटी
ताकि मंदी के दौर में भी सर्वाइवल इशू से संघर्ष चलता रहे.


एक दिन कॉलेज में
नयी फैकल्टी ने ज्वाइन किया
अब जो काफ़ी पुराना हो जाए
या बिलकुल नया हो
उसके साथ कोई ना कोई कॉमन समस्या रहती ही है.


इस फैकल्टी के साथ दिक्कत ये थी
कि उसे कॉलेज के हर काम में कमी ही दिखाई देती.


उसका रोज का काम होता
डायरेक्टर और बाकी स्टाफ़ को ये बताते रहना
कि
देखो हमारे यहाँ कितनी गंदगी है,
बगीचे साफ़ नहीं है,
टॉयलेट्स में पानी नहीं है,
क्लास में पेंट नहीं हुआ,
हॉस्टल में खाना ठीक नहीं बनता,
दूसरे डिपार्टमेंट के स्टाफ़ को काम करना ही 
नहीं आता,
हमारे यहाँ लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का यूज़ नहीं हो रहा,
सब बर्बाद है,
आदि-आदि.


डायरेक्टर उससे पूछते कि
आपको पढ़ाने में हमारी क्या सपोर्ट चाहिए,
ये बताइए, वी वील देट फॉर यू

और

अगर आपको किसी चीज़ में कमी 
लग ही रही है 
तो
उसको ठीक करने की ज़िम्मेदारी प्लीज लीजिए
एंड वी वील सपोर्ट यू इन देट टू.


लेकिन ज़नाब ना तो ज़िम्मेदारी लें
और ना ही कमी निकलना कम करें.


कॉलेज का माहौल धीरे-धीरे नेगेटिव होने लगा
डायरेक्टर परेशान
कॉलेज चलाना जो था
सो
उन्होंने उसे अपने रूम में बुलाया
और कहा – मैं आपको एक काम देता हूँ
अगर आप वो कर सके तो 
मैं आपकी हर सलाह मानूंगा 
और
हम मिलकर चीज़ों को ठीक करेंगे.
एंड नाउ ही वाज रेडी.



डायरेक्टर ने उसे पूरा पानी भरा एक गिलास दिया
और कहा कि 
आपने बिना एक बूँद जमीन पर गिराए
कॉलेज का एक पूरा राउंड काटना है.


बस इतना सा काम,
वो ख़ुश था इसमें क्या बड़ी बात है
ये तो मेरे बायें हाथ का खेल है.


थोड़ी देर बाद वो राउंड लगाकर वापिस आया
और गर्व से भरकर बोला – सर, 
एक बूँद भी जमीन पर नही गिरी.


डायरेक्टर बोले – जब तुम जा राउंड पर थे 
तो क्या क्या देखा?
उसने कहा – कुछ भी नहीं. 
मेरा पूरा ध्यान तो गिलास पर था.


डायरेक्टर ने फ़िर पूछा – बगीचे में कहाँ गंदगी थी?
कौन से टॉयलेट में पानी नहीं था?
किस-किस क्लास में पेंट नहीं था?
हॉस्टल के खाने में आज क्या-क्या बना था?
दूसरे डिपार्टमेंट का स्टाफ कहाँ-कहाँ टाइम वेस्ट कर रहा था?
आपने किस-किस को प्रोजेक्टर से पढ़ाते हुए देखा?


उसने कहा – सर, मुझे कहीं कोई कमी नहीं दिखी
क्योंकि मैं अपने काम को सही ढंग से करने में बिजी रहा.


डायरेक्टर बोले – ये ही आपके अब तक के 
सभी सवालों का आंसर है
आप ऐसे ही अपने काम पर ध्यान रखते रहे 
तो 
एक दिन यहाँ के बेस्ट टीचर बनेंगे.


वो समझ गया.

आज भी वो कॉलेज ठीक-ठाक चल ही रहा है

और वो फैकल्टी अब सबकी फेवरेट है.




आईडिया / इमेज सोर्स: उज्जवल पाटनी / गूगल







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