May 9, 2019

वो प्रैक्टिकल बनने की एक्टिंग मारेगा. तुम छुप के देखना कभी.






ये फ़ील कि जो कुछ भी है, बेस्ट ही है,
इससे बेहतर और क्या होगा?
ये ही है तुम्हारा पीसफुल होना
मतलब ये कि जो कुछ भी है, बहुत सुंदर है.

कोई सिलेक्शन नहीं,
जो भी है, उसके लिए सिर्फ़ “हाँ”
और
तुम भीतर ही भीतर स्वीकार लेते हो पूरे अस्तित्व को.
अपने वजूद को. सबके वजूद को.


कभी देख पाओ तो जरा ध्यान से देखना
तुम्हारा मन बड़ा खिलाड़ी है.
ताल ठोक के कहेगा - कुछ भी ठीक नहीं है’.
मन खोजेगा तो बस कमियाँ या शिकायतें 
– ‘ये गलत है, वो गलत है’.

वो हर चीज़ के लिए ‘ना’ बोलेगा. बड़ी आसानी से.
प्रैक्टिकल बनने की एक्टिंग मारेगा.
तुम छुप के देखना कभी.

मन के लिए ‘हां’ कहना बड़ा ही टफ है,
क्योंकि जब तुम किसी भी चीज़ के लिए
‘हां’ कहते हो, तो मन ठहर जाता है
और तब
मन की कोई जरुरत ही नहीं. इम्पोर्टेंस ख़त्म.

वो क्यों चाहेगा कि ऐसा हो,
इसीलिए 
हमेशा शिकायतें करता है
और हर काम के लिए ‘ना’ भी.
बड़ा खिलाड़ी है. नखरेबाज.

पर जब कभी तुम मन की नहीं सुनते,
डिस्कार्ड कर देते हो
फ़िर क्या शिकवा
और
क्या शिकायत और कैसी ‘ना’.
कुछ भी नहीं रहता.
और मन ठहर जाता है.
ये ठहरना ही पीस है और तुम पीसफुल.

गौर करना कि
पीसफुल होने और संतुष्ट होने में 
बड़ा बारीक डिफरेंस है.
संतुष्टि यानि मन को बस समझा लेना,
ख़ुद को तसल्ली का लोलीपॉप पकड़ा देना.
ये पीसफुल होना नहीं होगा.
यहाँ तुमने ख़ुद को गोली दे दी बस.
और 
गोली से बीमारी दब सकती है, ठीक कैसे होगी? 

ये गहरा असंतोष है,
जो तुमने भीतर छुपा लिया है
ताकि तुम्हारी चोरी पकड़ ना ले कोई.

ये फ़र्क जान लेना
तो जीना एक उत्सव बनेगा
नहीं तो रोज कुआँ खुदेगा, तभी पानी मिलेगा.


वो लोमड़ी वाली कहानी ज़रूर याद रखना,  
कि अंगूर खट्टे हैं.

अंगूर कैसे भी रहे हों,
तुम्हारा मन खट्टा नहीं रहना चाहिए.

और तुम ख़िल उठोगे जैसे गुलाब.

मेरा विचार है
कि सभी को खिलना ही चाहिए,
बिना कोई वजह ढूंढे.

ये ही शांति और सफ़लता होगी.

हाँ या ना?


10.13 PM

09 मई 2019

इमेज सोर्स: गूगल









No comments: