May 8, 2019

तो लाइफ़ सेटल हो जाए.






ऑन रूटीन,
महात्मा बुद्ध की लाइफ़ क्लास चल रही थी.

तभी एक आदमी उनके पास आया और बोला
लोग शांति तो चाहते हैं,
पर चारों ओर शांति तो कहीं नहीं दिखती,
शांति मिलती क्यों नहीं?


बुद्ध ने स्माइल की
और
बोले वास्तव में लोग शांति चाहते ही नहीं.

उस व्यक्ति को उनसे
ऐसे आंसर की उम्मीद नहीं थी.
उसने कहा - ये आप क्या कह रहे हैं?

जहाँ तक मैं जानता हूँ
हर व्यक्ति शांति का ही भूखा है
और
हर पल उसकी तलाश में ही घूम रहा है.


उस समय आश्रम में बहुत क्राउड था.

बुद्ध ने एक दूसरे आदमी को बुलाकर पूछा
भाई, बताओ. तुम क्या चाहते हो?

वह व्यक्ति बोला - मेरा परिवार काफी बड़ा है.
इनकम बहुत कम है
और
हर समय पैसे की प्रॉब्लम बनी रहती है.

बस कुछ पैसे मिल जाए,
तो लाइफ़ सेटल हो जाए.


फ़िर उन्होंने एक तीसरे आदमी को पुकारा
और
उससे पूछा – तुम बताओ कि क्या चाहते हो?

उसने जवाब दिया, ‘प्रभु, पैसा तो बहुत है,
लेकिन मेरे घरवाले मेरी बात नहीं सुनते.

अगर किसी तरह वो मुझे समझ लें,
तो लाइफ़ सेटल हो जाए.



अंत में बुद्ध ने चौथे आदमी को बुलाया
और उससे पूछा.

उसने कहा- हे महात्मा, भगवान् का दिया सबकुछ है.
लेकिन ऐसा लगता है कि
अभी भी कुछ अधूरा है.

किसी तरह ये अधूरापन ख़त्म हो,
तो लाइफ़ सेटल हो जाए.


तब बुद्ध ने सबसे पहले वाले आदमी की तरफ़ देखा
और कहा – देखा तुमने, शांति कोई नहीं चाहता.


सबकी अपनी अपनी इच्छाएं और नीड्स हैं,
और सब
उन्हीं को पूरा करने के मैथमेटिक्स में उलझे हुए हैं.

यह कहकर बुद्ध ध्यानमग्न हो गए.

वो व्यक्ति चुपचाप क्लास से बाहर चला आया.

उसके मन में अब कोई सवाल नहीं बचा.

और
आखिरकार

उसको शांति मिल ही गई.


07.32 AM
8 मई 2019
इमेज सोर्स: गूगल

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