Jun 30, 2019

रेबीज़ के इंजेक्शन से कहीं बेहतर है दूर से ही दोस्ती निभा लेना.





Magicmoments123 लेकर आया हैं बेहतरीन 10 कोट्स कलेक्शन. ख़ास आपके लिए. आपके अपनों के लिए. सबके लिए.

इनका आनंद लें और फ़ील करें कुछ ज्यादा बेहतर. कुछ शानदार और सेंसफुल जर्नी.


Quote:
जब मैं आपको याद दिलाता हूँ कि आप सबसे अच्छे हैं तो इसका सीधा सा मतलब है कि आपने अब तक बहुत अच्छे काम किए हैं. और आपका ये सब्र आज नहीं तो कल आपको बहुत ऊँचाइयों पर लेकर ही जायेगा.

Quote:
सेल्फिश होना उतना भी बुरा नहीं है. जब आप किसी को प्रेरित करते हैं तो आपको सबसे पहले हिम्मत मिलती ही है.

Quote:
दुनिया में भरोसा सबसे बड़ी प्रॉपर्टी है. अगर आप ख़ुद पर भरोसा रखते हैं तो आप एक दिन अपनी पसंद का काम ज़रूर कर सकेंगे और यदि आप भगवान् पर भरोसा रख सकते हैं तो आपको वो भी मिल सकता है, जिसके बारें में शायद आपने अब तक सोचा भी नहीं हो.

Quote:
जब बिक्री कम और लागत ज्यादा हो जाए तो सबकुछ गिर जाता है. जॉब्स चली जाती हैं, बिज़नेस फ्लॉप हो जाते हैं. लेकिन अगर लोग एक दूसरे पर यकीन रख सकें, एक दूसरे की मदद करना सीख सकें तो सही प्लानिंग के जरिए चीज़ों को फ़िर से हासिल किया जा सकता है. सब विश्वास का गेम है और उससे ही किसी की भी जीत या हार तय हो जाती है.

Quote:
हर आदमी का अपना एक अनुभव होता है. कोई नदी किनारे भी प्यासा रह जाता है और किसी की प्यास रेगिस्तानों में भी बुझ सकती है. इसीलिए शायद जितने लोग हैं, उन सभी को आप एक फिलोसोफी कह कर पुकार सकते हैं.

Quote:
जबसे जीवन पैदा हुआ है, कुत्ते हमेशा रिश्तों के प्रति वफ़ादार माने जाते रहे हैं. अगर हम भी उनसे ये सीख सकें तो शायद ये दुनिया और भी खुबसूरत हो सकेगी.

Quote:
जो ख़ुद को बहुत कुछ मानते हैं, उन्हें बाहर जाकर ही ख़ुशी मिल सकती है. रिमार्क्स बेस्ड हैप्पीनेस. लेकिन जो इस टैग से ख़ुद को फ्री कर लेते हैं, ख़ुशी उनके भीतर समा जाती है. ये केवल समर्पण और आस्था के कॉम्बिनेशन का इशू है.

Quote:
अधिकांश समय जब मैं लाइफ़ का थैंक यू करता हूँ तो उसमें शामिल हैं – दूसरों का योगदान, दूसरा का मददगार होना, ईश्वर की कृपा और मुझे दी गई सांसे. इसमें सेवा का भाव डालकर मैं ज्यादा ख़ुशी बटोरना चाहता हूँ. और जब मैं ऐसा नहीं कर पाता तो ये एक बोरिंग और उदासी भरा पल बन जाता है.


Quote:
ये ब्रह्मांड, ये दुनिया और इसमें रहने वाले कितने ही जीव जंतु मुझसे बड़े हैं. और अगर कभी मेरे मन में अपने बड़प्पन का ओवर-कॉन्फिडेंस आ जाता है तो मैं ख़ुद को बहुत छोटी सोच वाला मानने लगता हूँ. ये प्रैक्टिकल एप्रोच नहीं है.


Quote:
जब मैं अपने दोस्त को मिस करता हूँ तो उसके घर चला जाता हूँ. जैसे ही गेट पर आवाज़ लगाता हूँ तो उसका कुत्ता बड़ा तेज भौकता हुआ मेरी तरफ़ झपटने की कोशिश करता है. मैं पसीने-पसीने हो जाता हूँ और बिना मेरे दोस्त से मिले वापिस घर आ जाता हूँ. रेबीज़ के इंजेक्शन से कहीं बेहतर है दूर से ही दोस्ती निभा लेना. अब दोस्त मेरे घर पर ही आ जाता है. कुत्ता अब भी वहीँ बैठा हुआ है.


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Jun 29, 2019

सब चीज़ों के पीछे एक ही परछाई है – प्रेशर






कई बार ऐसा होता ही है कि
हम कोई भी काम बड़े जोश के साथ स्टार्ट करते हैं
और कुछ समय बाद ही
हमारे तोते उड़ने लगते हैं.
तोते बेचारे भी क्या करें?
बिना उड़े उन्हें नेचुरल फील नहीं हो पाता.

अपनी जगह वो भी सहीं हैं
लेकिन
हमारे लिए वापिस ट्रैक पर आ पाना लम्बा होता जाता है.
फ़िर जीवन हमें बब्बल-गम की तरह स्ट्रेच करता है.

सब चीज़ों के पीछे एक ही परछाई है – प्रेशर


सचमुच
कितने प्रेशर में जीता है आदमी.
बचपन से
घर का प्रेशर,
सामाजिक प्रेशर,
कम्पटीशन का प्रेशर,  
ख़ुद को सफ़ल बनाने का प्रेशर
और उस सफ़लता को बनाए रखने का प्रेशर.

फ़िर ज़िम्मेदारी वाला घरेलू प्रेशर,
हेल्थ एंड प्लानिंग प्रेशर.
मरते दम तक प्रेशर ही प्रेशर.
रेगुलर में ब्लड प्रेशर.


कई बार लगता है कि
हर नाम के पीछे कास्ट कॉमन कर 
प्रेशर रख देनी चाहिए
जैसे
मिस्टर “A प्रेशर”
मिस “Y प्रेशर”.
सीनियर सिटीजन “श्री Z प्रेशर”
आदि-आदि.

चलो ये तो हँसाने के लिए था
मगर वैसे भी
आप देखते ही होंगे कि 
जंगल कम हैं, 
पहाड़ और नदियाँ भी सिकुड़ते चले गए
जानवरों के झुंड भी अब यदा-कदा 
किसी टूरिस्ट प्लेस पर
किसी हरियाली वाली जगह पर दिख जाए
तो बंदा उनके साथ सेल्फी लेकर
सोशल मीडिया पर ज़रूर बता देना चाहता है
कि वो कितना ख़ुश है?

लो जी,
ये ख़ुश दिखने का प्रेशर
शायद आज की डेट में सबसे बड़ा विचार बन कर उभरा है.

और अगर आप ख़ुशी के इस मुकाम से चूक गए
तो आउटडेटिड मान लिए जाओगे
यानि आउटडेटिड हो जाने का प्रेशर भी फ्री.

कितनी मज़ेदार स्कीम है ये रहने की.

बचपन में तो बताया गया कि
इंसान जन्म सबसे बेस्ट है.
कड़ी तपस्या के बाद मिलता है.

लेकिन ये किसी ने नहीं बताया कि
तपस्या प्रेशर के रूप में कंटिन्यू चलती रहेगी
जब तक कि आप की “टें” ना बोल जाए.

तो वापिस उसी बात पर लौटते हैं
कि
समय के साथ जोश आख़िरकार क्यों 
गिरगिट की तरह रंग बदलने लगता है?

साहब जी,

अब आप ही बताइए
इतने सारे प्रेशर के बीच में
क्या जिंदा रह पाना ही सबसे बड़ा जोश नहीं है?

क्या आप “ना” कह सकेंगे?

प्लीज,
प्रेशर अब कम लीजिए.

घर जाइए और चाय पीजिए.

प्रेशर से अलग भी कुछ कीजिए.
प्रेशर को ही प्रेस कर दीजिए.

वरना वैसे भी अभी किस्मत की मंदी का दौर है.

हंसिये, मुस्कुराइए या रो-धो के काम चलाइए,

सिलेक्शन आपका ही है जी.




(केवल एक हास्य-रचना)

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Jun 27, 2019

बच्चे का रोना अब मुस्कराहट में बदल गया.





छोटे से एक कमरे में 4 दीपक जल रहे थे.
लेकिन एक दूसरे से कोई बात ही नहीं कर रहा था.
भयंकर चुप्पी.
कम्पलीट साइलेंस.
सब जैसे जाने की तैयारी में थे.


जाते जाते कुछ बातचीत होने लगी.
पहले दीपक ने दुखी होकर कहा – 
मैं पीस हूँ यानि शांति.
मुझे कोई प्यार नहीं करता. 
सब मुझे छोड़ कर चले गए.
अब मुझे बुझ ही जाना चाहिए 
और वो बुझ गया.


दूसरा दीपक बोला  – 
मैं ट्रस्ट हूँ यानि विश्वास.
अधिकतर लोग मुझे लम्बे समय तक 
कायम नहीं रख सकते हैं.
बार-बार मेरा दिल तोड़ते हैं.
तो फ़िर मैं भी
जलते रहकर क्या करूँगा?
उसके ऐसा कहते ही हवा का एक झोका आया 
और वो भी बुझ गया.


अब तीसरा दीपक बोला – 
मैं नॉलेज हूँ यानी ज्ञान.
अब लोग मुझे इम्पोर्टेन्ट नहीं समझते.
अब मैं और ज्यादा नहीं जल सकूँगा 
और
ये कहकर वो भी बुझ गया.


तभी एक बच्चे ने कमरे में एंट्री की.
उसने पाया कि जिन्हें जलते रहना चाहिए था
उनमें से सिर्फ़ 1 दीपक ही जिंदा बचा है.
ऐसा देखकर वो रोने लगा.


उसे ऐसा करते देख चौथे दीपक से रहा नहीं गया.
उसने कहा – डोंट वरी. जब तक मैं जल रहा हूँ,
तुम्हें रोने-धोने की कोई ज़रूरत नहीं है.
मैं उम्मीद यानि आशा का दीपक हूँ.
तुम मेरी मदद से इन सभी 3 दीपकों को दोबारा जला सकते हो.


बच्चे का रोना अब मुस्कराहट में बदल गया.
सभी चारों दीपक अब फ़िर से जल पड़े थे.


सार:
आशा ही वह दीपक है जिससे पीस, ट्रस्ट और नॉलेज को पुनर्जीवित किया जा सकता है. 

इसीलिए कैसी भी नेगेटिव चीज़ें सामने आ रहीं हों, आशा का दामन थाम के चलते चलो. 

बुरा बीतेगा और अच्छा आएगा ज़रूर. 

यकीन बनाये रखना.


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Jun 25, 2019

यक़ीनन भागते ही रहेंगे.मगर पहुंचेगे कहीं नहीं.





एक पूरे दिन के लिए
कोई भी जीवन हो,
संतुष्टि चाहता ही है


और
संतुष्टि बाज़ार की रेस नहीं है,
मन की सैर है.
फीलिंगफुल जॉय.


ये बड़ी बारीकी से देखना पड़ता है.
क्योंकि मन बड़ा चालाक है.


ये आपसे तुलना करवाएगा
ये अपनी चालाकी को समझदारी डिक्लेअर करवाएगा


ये आपकी आपसे ही फाइट करा कर कहेगा
ये करना है, वो बनना है, ये गलत है,
ये सही है आदि-आदि


और जब आप
इसके चंगुल में पूरी तरह फंस जायेंगे  
तो संतुष्टि आपके पैरों को कैसे टच कर सकेगी?


कुछ दिनों बाद ये आपका मन ही आपको
यकीन दिला देगा
कि भागते रहना ही जिंदगी है
और
यक़ीनन आप भागते ही रहेंगे.

कभी इधर, कभी उधर, कभी आगे, कभी पीछे,
कभी ऊपर और कभी नीचे,
मगर आप पहुंचेगे कहीं नहीं.


आस-पास नज़र दौड़ाइये,
मन की उथल-पुथल ने
लोगों को अमीर तो बना दिया
मगर वो किसी को कुछ देने लायक बन ही नहीं सके?  
उल्टे उनकी भूख और डिमांड और बढ़ गयी.
इसे मानसिक ग़रीबी कह सकते हैं.


अब उन्हें कुछ और आगे जाना है,
ये जर्नी रुकने वाली नहीं.
और रोकने वाला बता कर तो कुछ करेगा नहीं,
वो अचानक ब्रेक लगाएगा
और सब मिट्टी हो जाएगा.


तो संतुष्टि
मन से कुछ आगे का पड़ाव है
और इसके लिए आपको हर दिन कुछ देर
ठहरने ही पड़ेगा.
और,
एक दिन मंजिल का रास्ता आपकी पकड़
में आ ही जायेगा.

उससे पहले तक बस टाइम-पास
एलिमेंट ही बनी रहेगी जिंदगी.
असली लाइफ़ संतुष्टि से गुज़र कर ही शुरू होगी.
क्या आप तैयार हैं?

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