Jun 1, 2019

और ये ही ट्विस्ट है. अब तुम्हारी डिग्री पूरी हुई.






सीखना और क्या सीखना?
इसमें दिन-रात का डिफरेंस है.


अगर तुम सीखना चाहो तो एक चोर से 
या 
एक सिपाही से भी सीख लोगे
एक फूल 
या 
एक छोटे से कांटे से भी सीख लोगे
और अगर ना सीखना चाहो तो 
परमात्मा के पास से भी खाली हाथ ही लौट आओगे.

ये तुम्हारे सीखने के आर्ट पर डिपेंड करता है कि तुम किसे पढ़ना चाहते हो और कितना?


तुम संसार में हो
लेकिन संसार से नहीं हो
बल्कि संसार तुम में ही है
और ये संसार लाइफटाइम लर्निंग स्कूल है
और तुम पाते हो कि यहाँ तो सबकुछ ही गलत, सबकुछ उल्टा ही हो रहा है
हो भी रहा है
पहले भी हुआ ही है
आगे भी होता रहेगा.


और ये ही ट्विस्ट है
जैसे ही तुम उस गलत को कैच कर लेते हो
उसी पल तुम्हारे अंदर बैलेंस यानि संतुलन का 
आना स्टार्ट हो जाता है.


तुम्हारी स्टेबिलिटी बाहर कभी थी ही नहीं
और तुम्हें लगेगा कितना टाइम वेस्ट किया
पर अब
अंदर ये होना शुरू हो गयी
ये सेल्फ-इंट्रोडक्शन होना हो गया.



तुम्हारा जानना और सीखना शुरू हुआ कि
तुम्हारे होने या ना होने के मायने क्या हैं?

अब तक तुम दूसरों का अहंकार चेक करते थे
अब तुम्हारा चालान कटना शुरू हो गया
और जैसे ही तुम्हें एक झलक मिलेगी  
अंदर लाइट जल उठेगी
तुम्हारा “मैं” गायब होने लगेगा.


और इसीलिए भटकना बहुत ज़रूरी है
बिना भटके वरना कैसे जानोगे कि सही रास्ता है कौन सा?
और इसकी भी एक कीमत है, कोस्ट है
वो चुकाए बिना तुम मंजिल नहीं पा सकोगे
क्योंकि फ्री में मिलने वाली चीज़ 
हमेशा ही खो जाती है.

तुम्हारे पास वो ही रहेगा जो तुम्हारा 
ख़ुद का कमाया हुआ होगा.

तो बस
सीखो
और इतना सीखो
कि कुछ भी याद ही ना रखना पड़े

और

फ़िर तुम्हारा हँसना-रोना
खोना-पाना
सब एक जैसा हो जायेगा
और संसार गलत लगना बंद हो सकेगा
ख़ुद की गलतियां आईने में क्लियर नज़र आने लगेंगी
और तुम उन्हें आसानी से साफ़ कर पाओगे.

अब तुम्हें मंजिल की तरफ़ दौड़ना नहीं पड़ेगा
वो ख़ुद ब ख़ुद तुम्हें खोज लेगी.

ये ही असली जीना है
कि कोई और तुम्हें खोजे
तुम्हारा इंतजार करे
तुम्हें पुकारे

अब तुम्हारी डिग्री पूरी हुई.
बधाई हो.





02 जून 2019

संडे

07:17 AM

इमेज सोर्स: गूगल

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