Jun 11, 2019

अलविदा गिरीश कर्नाड.





लोगों को हमेशा ही याद रखा जाता है
उनके कॉन्ट्रिब्यूशन से.
और इंडियन सिनेमा के ऐसे ही एक शानदार
एक्टर-राइटर थे गिरीश कर्नाड.

लेकिन हर किसी का जिस एकमात्र रियलिटी से
परमानेंट मिलन होता है
वो है सांसों का थम जाना.


दो दिन पहले ही उन्होंने अपनी अंतिम साँसे ली
और
81 की ऐज में पूरे सिनेमा जगत को उदास करके चले गए.
मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर उनके जाने की वजह बना.


सच है कि
ख़ुदा वजह बनाता है आने की और फ़िर जाने की
और उसकी कप्तानी में कोई छेड़छाड़ नहीं कर सकता.
आप सिर्फ़ कोशिश कर सकते हैं कि
कोई मैच जीत सकें
लेकिन रिटायरमेंट तय होती ही है.


गिरीश 19 मई 1938 को महाराष्ट्र के माथेरान में पैदा हुए.
मैथ्स और स्टेटिस्टिक्स में बैचलर किया,
देश-विदेश में पढाई की,
देश-विदेश में जॉब भी की,
लेकिन “दिल है कि मानता नहीं” की तर्ज़ पर
अपने दिल की सुनी और साहित्य को
फाइनली अपना साथी चुना.


उन्हें भारत के बेहतरीन समकालीन लेखक, एक्टर,
डायरेक्टर और नाटककार के तौर पर
हमेशा ही पसंद किया गया.


उनकी उपलब्धियों का आलम देखिये-
पद्म भूषण, पद्मश्री, ज्ञानपीठ  पुरस्कार, 4 फिल्मफेयर अवार्ड.


कुछ दिनों पहले वो सलमान खान की फिल्म
‘एक था टाइगर' और ‘टाइगर जिंदा है
में भी नज़र आए. 
आपको याद होगा “डॉ. शेनॉय” का किरदार.


कुल मिलाकर शानदार आर्टिस्ट
और गरिमामय पर्सनालिटी.

सभी को उनके जाने का दुःख है
लेकिन उनके योगदान से साहित्य जगत
सदैव अमीर ही बना रहेगा
क्योंकि वो चीज़ ही ऐसी थे
कि कोई “वाह” करे बिना नहीं रह सकता.
क्योंकि कुछ लोग सिर्फ़ देने के लिए ही पैदा होते हैं
और चले जाते हैं.


अलविदा गिरीश कर्नाड.
आपका सफ़र कमाल का रहा
और ये हमेशा हमें कुछ अच्छा करने के लिए
प्रेरित करता रहेगा.


इमेज सोर्स: गूगल

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