Jun 14, 2019

टाइम टू टाइम ट्विस्ट आता रहता है. तोते उड़ते रहते हैं.







ये कितना शानदार है कि हम
छोटी भीड़ को इतनी इम्पोर्टेंस देते हैं.  


छोटी भीड़ माने तो आस-पास के लोग,
उनमें भी कुछ करीबी लोग
जिनसे आप किसी % रेंज में कुछ उम्मीदें रख सकते हैं
और वो भी आपसे कुछ ऐसा ही एक्स्पेक्ट करते हैं.


उन लोगों में से कुछ को आप बेहद पसंद करते हैं
और
कुछ को थोड़ा कम पसंद.
सारी उंगलियाँ एक जैसी हों, 
ये होता भी कहाँ हैं?


साइंटिफिक रूप से ये फ्रीक्वेंसी मैचिंग का मामला है.
लगने को कुछ भी अच्छा लग सकता है
और कुछ भी बुरा.


टाइम टू टाइम ट्विस्ट इसमें भी आता रहता है.
आप देख सकते हैं कि
कभी कभी किसी तनाव, व्यस्तता या कम्युनिकेशन गैप की वजह से
फ्रीक्वेंसी मिस-मैच भी हो सकता है और
बड़े से बड़े रिलेशनशिप के तोत्ते उड़ जाते हैं.


लाख़ चाहकर भी पुरानी चीज़ों को मैनेज करना टफ तक हो जाता है.
ये गाड़ी को पटरी पर वापिस लाने की 
एक लम्बी एक्सरसाइज है,
जो धीरे-धीरे दिलों से निकलकर 
दिमाग में असर करने लगती है.


कितने ही सालों तक आप उम्मीदों की 
उड़ान भरते चलते हैं
और एक दिन अचानक पतंग कट जाती है.
सब यहीं का यहीं रह जाता है
ना कोई भीड़, ना कोई शिकवे-शिकायत
और ना कोई फ्यूचर प्लानिंग.


सब पूरा हो जाता है
आप आज़ाद हो जाते हो.


हालांकि ये सभी के साथ ही होना है
लेकिन जाने से पहले आप यहाँ एक 
छोटा सा एक्सपेरिमेंट करके जा सकते हैं.

देखिए
छोटी भीड़ तो बाहर की दुनिया है.
इसमें एडजस्टमेंट और हंसना-रोना ही मेन थीम है,
लेकिन 
असली चीज़ तो आपके अंदर की लाइफ़ है,
जाने से पहले उससे मिलना मिस मत कीजिए,
कुछ समय अंदर के रिश्तों के लिए भी संभाल कर रखिए,
ख़ुद के साथ कुछ पल बिता डालिए.


क्योंकि 

आप अगर अंदर से शानदार हो गए
तो चाहे भीड़ में अकेले भी पड़ जाएँ
लेकिन जीने के सफ़र में दागी नहीं कहलायेंगे,
आपने कम से कम ख़ुद के साथ तो
ईमानदारी निभा ही ली है. 
वैसे भी भीड़ का सर्टिफिकेशन चेंज होता रहता है.



आने वाले समय में छोटी भीड़
और छोटी ही होती जायेगी.
इस बारें में टेक्नोलॉजी आपको अपडेट करती रहेगी.



अपना ख़याल रखना.


                                                                                   इमेज सोर्स: गूगल








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