Jun 19, 2019

सबकुछ कोई और ही देता है आपको - फ्रॉम बिगिनिंग टू एंड.





आप चाहे किसी भी जनरेशन के प्रोडक्ट हों,
आप चाहे कोई भी लक्ष्य लेकर
चल रहें हों
लेकिन
सबसे खुबसूरत जो चीज़ है
वो ये ही है कि
आप, कोई भी एक्सरसाइज 
सिर्फ़ 2 चीज़ों को लेकर करते हैं.
हर कोई ये ही करना चाहता है.
फाइनली हर कोई.


वो क्या है?
पहली एक्सरसाइज  - प्रेम पाना और प्रेम देना
दूसरी एक्सरसाइज  – जो भी मिलता है, दूसरों से ही मिलता है.


इन दोनों चीज़ों को जान लेना 
और फ़िर पा लेना ही सक्सेस है,
फ़िर चाहे आप इसे आज हासिल कर सकें, 
कल या के परसों.


पहली एक्सरसाइज रिजल्ट को रिप्रेजेंट करती है.
आप चाहे जो मर्ज़ी एक्टिविटी कर रहे हों,
जिस भी फील्ड में एक्टिव हों,
जिस भी लेवल पर काम कर रहें हों,
जिस भी देश, समाज, संस्था या रिश्तों का पार्ट हों,
आप हमेशा चाहते ही हैं कि
आपको प्रेम मिले और
आप भी प्रेम दे सकें.
ये एक इंटरनल प्रैक्टिस है
अंदर ही अंदर चलती है.
ये उम्मीदों का इनपुट लेती है
और तसल्ली रूपी रिजल्ट के साथ
ग्रेडिंग करती है.
इसमें मेंटल माइलस्टोन ज्यादा है
और फिजिकल माइलस्टोन थोड़े कम.
इसमें वेट एंड वाच थ्योरी का भी बड़ा महत्व है.
घूमफिर के रिजल्ट वैसा ही आता है,
जैसा आपने इसकी आंसरशीट पर लिखा होता है.
अक्सर कभी जब रिजल्ट मिसमैच हो जाता है तो
आप इसे किस्मत का खेल कहकर संतुष्ट महसूस कर सकते है.



दूसरी एक्सरसाइज प्रोसेस से जुड़ी हुई है.
ये एक्सटर्नल जर्नी है,
पैदा होने से शुरू होती है
और लास्ट तक चलती रहती है.

इसका लॉजिक और भी क्लियर होता है
प्रक्टिकैलिटी के थोड़ा और क़रीब.

जैसे
दूसरे ही आपको जन्म देते हैं – हाँ या ना
दूसरे ही आपको पालते हैं – हाँ या ना
दूसरे ही आपको पढ़ाते हैं – हाँ या ना
दूसरे ही आपको ट्रेनिंग देते हैं – हाँ या ना
दूसरे ही आपको गाइड करते हैं – हाँ या ना
दूसरे ही आपको जॉब देते हैं – हाँ या ना
दूसरे ही आपको बिज़नेस देते हैं – हाँ या ना
दूसरे ही आपको रेस्पेक्ट या डिसरेस्पेक्ट देते हैं – हाँ या ना
दूसरे ही आपकी हेल्प करते हैं या धोखा देते हैं – हाँ या ना
दूसरे ही आपके काम आते है या नहीं आते – हाँ या ना
दूसरे ही आपसे प्यार या नफ़रत करते हैं – हाँ या ना
दूसरे ही आपकी इमेज बनाते हैं या बिगाड़ते हैं - हाँ या ना
दूसरे ही आपको अंडरस्टैंड करते हैं या नहीं करते – हाँ या ना


इस एक्सरसाइज में आप पाते हैं कि
आज तक या आगे तक या जाने तक
दूसरों का रोल बड़ा इम्पोर्टेन्ट रहता है.


इसके अलावा हवा, पानी, आकाश, 
धरती, ऑक्सीजन और पैसे आदि तक,
दूसरे एलिमेंट ही ये हमें देते हैं,
किसी ना किसी रूप में.
और ये हर किसी के साथ है, 
किसी एक के साथ नहीं.

इन रियल, सभी मांगने वाले ही हैं. 

बस ख़ुद से कहना टफ ही रहता है.


कितना यूनिवर्सल कनेक्शन है. कमाल का.


कुल मिलाकर ये प्रैक्टिकल एक्सरसाइज हमें बताती है
कि दूसरे कितने इम्पोर्टेन्ट हैं आपकी लाइफ़ में.

सबकुछ कोई और ही आपको देता है
फ्रॉम बिगिनिंग टू एंड.
और
उसमें भी आपकी चॉइस होती है 
कि आप क्या पसंद करें या ना करें?
इससे ज्यादा बेहतरीन और क्या हो सकता है?
कई बार चॉइस करना हाथ में रहता भी नहीं,
बाकी सब भी तो दूसरों से ही रिसीव हो रहा है?
ये चांस है.



एक बात तय है कि एक्सरसाइज नंबर 2,
एक्सरसाइज नंबर 1 से
कहीं ना कहीं कनेक्ट करती है.
कभी-कभी ये दोनों मिलकर हिस्ट्री भी क्रिएट कर जाते हैं.
इसे ही वरदान कहा गया होगा.



इन 2 एक्सरसाइज में ही जिंदगी गुजर जाती है.

बाकी एक्सरसाइज फ़िर कभी.



इमेज सोर्स: गूगल


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