Jun 25, 2019

यक़ीनन भागते ही रहेंगे.मगर पहुंचेगे कहीं नहीं.





एक पूरे दिन के लिए
कोई भी जीवन हो,
संतुष्टि चाहता ही है


और
संतुष्टि बाज़ार की रेस नहीं है,
मन की सैर है.
फीलिंगफुल जॉय.


ये बड़ी बारीकी से देखना पड़ता है.
क्योंकि मन बड़ा चालाक है.


ये आपसे तुलना करवाएगा
ये अपनी चालाकी को समझदारी डिक्लेअर करवाएगा


ये आपकी आपसे ही फाइट करा कर कहेगा
ये करना है, वो बनना है, ये गलत है,
ये सही है आदि-आदि


और जब आप
इसके चंगुल में पूरी तरह फंस जायेंगे  
तो संतुष्टि आपके पैरों को कैसे टच कर सकेगी?


कुछ दिनों बाद ये आपका मन ही आपको
यकीन दिला देगा
कि भागते रहना ही जिंदगी है
और
यक़ीनन आप भागते ही रहेंगे.

कभी इधर, कभी उधर, कभी आगे, कभी पीछे,
कभी ऊपर और कभी नीचे,
मगर आप पहुंचेगे कहीं नहीं.


आस-पास नज़र दौड़ाइये,
मन की उथल-पुथल ने
लोगों को अमीर तो बना दिया
मगर वो किसी को कुछ देने लायक बन ही नहीं सके?  
उल्टे उनकी भूख और डिमांड और बढ़ गयी.
इसे मानसिक ग़रीबी कह सकते हैं.


अब उन्हें कुछ और आगे जाना है,
ये जर्नी रुकने वाली नहीं.
और रोकने वाला बता कर तो कुछ करेगा नहीं,
वो अचानक ब्रेक लगाएगा
और सब मिट्टी हो जाएगा.


तो संतुष्टि
मन से कुछ आगे का पड़ाव है
और इसके लिए आपको हर दिन कुछ देर
ठहरने ही पड़ेगा.
और,
एक दिन मंजिल का रास्ता आपकी पकड़
में आ ही जायेगा.

उससे पहले तक बस टाइम-पास
एलिमेंट ही बनी रहेगी जिंदगी.
असली लाइफ़ संतुष्टि से गुज़र कर ही शुरू होगी.
क्या आप तैयार हैं?

इमेज सोर्स: गूगल





No comments: