Jun 27, 2019

बच्चे का रोना अब मुस्कराहट में बदल गया.





छोटे से एक कमरे में 4 दीपक जल रहे थे.
लेकिन एक दूसरे से कोई बात ही नहीं कर रहा था.
भयंकर चुप्पी.
कम्पलीट साइलेंस.
सब जैसे जाने की तैयारी में थे.


जाते जाते कुछ बातचीत होने लगी.
पहले दीपक ने दुखी होकर कहा – 
मैं पीस हूँ यानि शांति.
मुझे कोई प्यार नहीं करता. 
सब मुझे छोड़ कर चले गए.
अब मुझे बुझ ही जाना चाहिए 
और वो बुझ गया.


दूसरा दीपक बोला  – 
मैं ट्रस्ट हूँ यानि विश्वास.
अधिकतर लोग मुझे लम्बे समय तक 
कायम नहीं रख सकते हैं.
बार-बार मेरा दिल तोड़ते हैं.
तो फ़िर मैं भी
जलते रहकर क्या करूँगा?
उसके ऐसा कहते ही हवा का एक झोका आया 
और वो भी बुझ गया.


अब तीसरा दीपक बोला – 
मैं नॉलेज हूँ यानी ज्ञान.
अब लोग मुझे इम्पोर्टेन्ट नहीं समझते.
अब मैं और ज्यादा नहीं जल सकूँगा 
और
ये कहकर वो भी बुझ गया.


तभी एक बच्चे ने कमरे में एंट्री की.
उसने पाया कि जिन्हें जलते रहना चाहिए था
उनमें से सिर्फ़ 1 दीपक ही जिंदा बचा है.
ऐसा देखकर वो रोने लगा.


उसे ऐसा करते देख चौथे दीपक से रहा नहीं गया.
उसने कहा – डोंट वरी. जब तक मैं जल रहा हूँ,
तुम्हें रोने-धोने की कोई ज़रूरत नहीं है.
मैं उम्मीद यानि आशा का दीपक हूँ.
तुम मेरी मदद से इन सभी 3 दीपकों को दोबारा जला सकते हो.


बच्चे का रोना अब मुस्कराहट में बदल गया.
सभी चारों दीपक अब फ़िर से जल पड़े थे.


सार:
आशा ही वह दीपक है जिससे पीस, ट्रस्ट और नॉलेज को पुनर्जीवित किया जा सकता है. 

इसीलिए कैसी भी नेगेटिव चीज़ें सामने आ रहीं हों, आशा का दामन थाम के चलते चलो. 

बुरा बीतेगा और अच्छा आएगा ज़रूर. 

यकीन बनाये रखना.


इमेज सोर्स: गूगल


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