Jun 5, 2019

मातुराम की गोल-गोल, घुमावदार पहाड़ियों जैसी मीठी रसीली जलेबियाँ.






ख़ासकर गर्मियों में भी इसे देश विदेश में पोपुलर करने में हरियाणा ने जी जान से मेहनत की है.
और 
लोग अब सर्दियों का वेट नहीं करते.


गर्मा-गरम जलेबियाँ देखकर मुहं में पानी आ जाता है.
गोल-गोल, घुमावदार पहाड़ियों जैसी
मीठी रसीली जलेबियाँ.


आप कभी सड़क के रास्ते से रोहतक - गोहाना 
के पास से गुजरिए.
गोहाना मेन बाज़ार के अलावा,
हाईवे सड़कों के साथ बने ढ़ाबों और रेस्टोरेंट में
ये आसानी से मिल जाती हैं.


मातुराम का ट्रेडमार्क चलता है.
ये ही माने जाते हैं असली जलेबी नायक.


उनकी जलेबियों को कभी कोई योगा या एक्सरसाइज नहीं करनी पड़ती और फ़िर भी स्वस्थ रहती हैं.
शुद्ध देसी घी में बनी मोटी-मोटी मजबूत और स्वादिष्ट जलेबियाँ.


लगभग 250 ग्राम की एक.
4 में ही किलो हो जाता है.
260 रूपए किलो का भाव अफोर्डेबल भी है.


बिना दिखावे के मन को सुकून देने वाला ये प्रोडक्ट
आज गोहाना की शान बन गया है
और 
विदेशों में भी इसका डंका बजता है.


मातुराम ने अपने साथ-साथ हज़ारों दूसरे लोगों का
जीवन भी जलेबी मेकिंग से ही सेट कर दिया
और 
उन्हें इंजिनियर, डॉक्टर या कोई ऑफिसर बनने के तनाव से मुक्ति भी दिला डाली.

कुछ ही दिनों की ट्रेनिंग से आप अपने ही घर में
खा-कमाकर शांति से जी सकते हैं एक लम्बी उम्र.


एक ख़ास बात और भी है
कि गरम तो गरम
ये जलेबियाँ ठंडी भी उतनी ही शानदार लगती हैं खाने में.
एक वीक तक तो ख़राब होने का कोई चांस भी नहीं होता.

जरुर रेसिपी लाज़वाब ही रही होगी.

थोड़े दिनों में कहीं मातुराम जलेबी मंदिर ही देखने को ना मिल जाए?

क्योंकि स्वाद से बड़ी और कौन सी जन्नत होती है इस जहाँ में?

एक बार जाकर और खाकर देखना ज़रूर.
आप निराश नहीं होंगे.

इमेज सोर्स: गूगल


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