Jun 4, 2019

इससे पहले कि आप “द स्टेचू ऑफ़ शिकायत” बन जाएँ.






इस दुनिया में
आप ही नहीं
बल्कि सभी लोग अपनी मनमर्जी का ही जीना चाहते हैं
और 
जब किसी वजह से ऐसा नहीं हो पाता तो
शिकायतें जन्म लेती हैं.


लेकिन इससे पहले कि आप “द स्टेचू ऑफ़ शिकायत” बन जाएँ,


थोड़ा ठहरिये
और
बस इतना सा विचार कीजिए कि
आपको आज तक जितने भी अनुभव हुए हैं,


वो चाहे जैसे भी हों
बस आपके भीतर ही हुए हैं,


बाहर की दुनिया में वो ठीक वैसे ही हों
जैसा आपके भीतर हुए, इसमें आपको डिफरेंस मिलेगा.


ये अच्छा-बुरा, छोटा-बड़ा, कम-ज्यादा, ऊपर-नीचे
जैसा तुलनात्मक नहीं है,

अपितु केवल ये फील कर पाना है
कि इतनी सारी घटनाओं और चीज़ों में से
किसने आपको ख़ुश किया या दुखी किया?
और आप देखेंगे कि 
कोई भी ख़ुशी या दुख बाहर नहीं था
वो सबकुछ तो आपके अंदर जन्मा.


हाँ या ना?

जैसे कि
आप भारत में पैदा हुए और दुखी हैं,
सोचते हैं कि काश अमेरिका में जन्में होते
क्योंकि वो आपको स्वर्ग लगता है
वो भी बिना वहां गए 
क्योंकि आपने बस सुना किसी से.


अगर सचमुच ऐसा ही होता तो वहां के लोग हीलिंग के लिए कहीं और क्यों भागते?


हाँ, वहां का अनुशासन शानदार हो सकता है
लेकिन सिर्फ़ इसी वजह से आप उसे स्वर्ग समझने लगें तो ये तो कॉमेडी हो गयी समझो.


एक्चुअली 
हर जगह के अपने प्लस और माइनस होते हैं
तो स्वर्ग किसी एक ही देश में कैसे हो सकता है?
और 
सच में अगर वो किसी एक ही जगह पर है तो
वो है आपके अंदर, आपके भीतर.


आपका घर आपको अच्छा या बुरा लगता है – आपके भीतर

आपका स्कूल आपको अच्छा या बुरा लगता है – आपके भीतर

आपके रिश्तेदार और दोस्त अच्छे या बुरे – आपके भीतर

आपके पड़ोसी या आस-पास के लोग अच्छे या बुरे – आपके भीतर

आपकी नौकरी या बिज़नेस अच्छा या बुरा – आपके भीतर

आपके साथ काम करने वाले लोग अच्छे या बुरे – आपके भीतर

आपकी क़िस्मत अच्छी या बुरी – आपके भीतर

आप कान के कच्चे या पक्के – आपके भीतर

आपका शो-ऑफ या आपकी सादगी – आपके भीतर

आपकी नज़र में अमीरी और गरीबी की डेफिनिशन – आपके भीतर

आपकी नज़र में सक्सेस और फेलियर का मीनिंग – आपके भीतर

आपकी नज़र में स्वर्ग और नरक – आपके भीतर

आपकी नज़र में सुख और दुःख- आपके भीतर


सबकुछ आपके भीतर ही जन्म लेता है 
और दम तोड़ता है
बाहर तो आपके अप्रूवल के डिजिटल सिग्नेचर हैं बस

और इसीलिए

लम्बे समय तक अंदर स्वर्ग बनाये रखने के लिए
आपको पूरा सेल्फिश हो जाना चाहिए,

एक ऐसा सेल्फिश कि जो कहे
कि जो भी चीज़ मैं अपने लिए चाहता हूँ
वहीँ सेम चीज़ मैं दुनिया में हर किसी के लिए चाहूँगा


और फ़िर देखिए
आपका भीतर और बाहर कैसे जगमगा उठता है.
बस ये बैलेंस पनपा और आप हर पल स्वर्ग में.

क्या आप ऐसा कर सकने की हिम्मत करेंगे? 

करके तो देखिये
फ़िर एक साथ चाय पियेंगे कभी,
कम चीनी वाली, कड़क 

ताकि आपको शुगर का डर भी ना सताए

क्योंकि वो डर भी कहीं ना कहीं आपके ही भीतर.

और 

डर के आगे "होनी" है 

और होनी तो टलने से रही 

आप डरें या ना डरें 

उसे किसी के कमेंट्स की जरुरत कहाँ? 
                                 



इमेज सोर्स: गूगल




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