Jun 5, 2019

मेरे कुत्ते को सैर करा लाओ, लौटोगे तो जवाब रेडी मिलेगा.





कुछ किस्से रोचक तो होते ही हैं,
टेस्टी भी बड़े लगते हैं.
दौड़ती-भागती इस ऑनलाइन दुनिया में
पुराने किस्से सुनने में आज भी मज़ा आता ही है
और कभी कभी कुछ क्लिक भी हो जाता है.

जैसे

एक बार स्वामी विवेकानंद के पास 
एक आदमी आया,
बहुत दुखी और पीड़ा से भरा.


उनके पैरों में गिरकर बोला -  
मैं अपने जीवन से बहुत परेशान  हूं.
हार्ड-वर्क करता हूं, लेकिन सक्सेस नहीं मिल पाती.
मेरा लक मुझे सपोर्ट क्यों नहीं करता?


विवेकानंद उस समय अपने पालतू कुत्ते के साथ थे.
उन्होंने उस आदमी से कहा कि तुम
कुछ दूर तक मेरे कुत्ते को सैर करा लाओ.
तुम जब लौटोगे तो तुम्हें जवाब रेडी मिलेगा.


आदमी ने सोचा, ठीक है
और
कुत्ते के साथ घूमने निकल गया.


कुछ देर बाद लौटा
तो विवेकानंद क्या देखते हैं कि
आदमी रिलैक्स है और 
उनका कुत्ता थका-थका और उदास.


उन्होंने पूछा – तुम दोनों की एनर्जी में 
इतना फ़र्क कैसे?

आदमी बोला – घूमते समय मैं सीधे-सीधे चला
और
ये जनाब गली के दूसरे सभी कुत्तों के 
साथ उलझते रहे, 
कभी उनके पीछे भागे, कभी लड़े 
और कभी वापिस मेरे पास.

ट्रेवल तो हम दोनों ने बराबर ही किया मगर
इसने मुझसे कहीं ज्यादा दौड़ लगाई है
और इसीलिए शायद ये थक गया है.


विवेकानंद मुस्कुराए और बोले –
ये ही तुम्हारे सवालों का भी आंसर है.


तुम्हारी मंजिल तुम्हारे आसपास ही है
लेकिन तुम दूसरों को देख-देख कर भाग रहे हो,
दौड़ रहे हो,
लड़ रहे हो
और बेवजह थक के फेल महसूस करते हो
बस सीधे चलते रहो.

दूसरों से होड़ करने से बचो.
दूसरों को देखकर नहीं,
बल्कि अपना लक्ष्य ख़ुद तय करते हुए आगे बढ़ो.

फिर क्या फेलियर बचेगा?
तुम्हारा कर्म ही तुम्हें ख़ुश कर देगा.

आदमी प्रसन्नतापूर्वक उनका आशीर्वाद लेकर
वहां से चला गया.


इंफो/ इमेज सोर्स: गूगल

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