Jun 14, 2019

हालात चाहे जैसे भी हों.





ये आप हैं जिसे तय करना है कि
आप कहाँ और क्यों जा रहें हैं?

ये आप ही हैं जिसे चेक करते रहना होगा
कि आप किस लेवल पर जिंदादिली फ़ील कर रहे हैं?


क्या आपकी कोशिकाओं में उत्साह और हैरानी तैर रही है
या अब सबकुछ एक्सेप्टेड फॉर्म में बहने लगा है?
सभी चीज़ों से कुछ नया हमेशा ही सामने आता है.


जिंदा आदमी थोड़ा क्यूरियस दिखाई देता है
क्योंकि उसकी एनर्जी ने किसी 
स्पेसिफिक विचारधारा से
अभी तक एक डिस्टेंस मेन्टेन रखा है
और 
जिसके अंदर से ये हैरानी विलुप्त हो गयी
वो समझदार तो दिखाई पड़ेगा
लेकिन अंदर ही अंदर एक खोखलापन उसे निचोड़ता चलेगा.


ये लॉजिकल भी है क्योंकि
जिसे लगता है कि उसे सब पता है
उसके करने के लिए बचा ही क्या?
वो दूसरों को भी खोखला करके छोड़ देना चाहेगा.


इसीलिए
हालात चाहे जैसे भी हों,
आप अपनी क्यूरियसनेस को मरने मत दीजिए.
इससे एक तरफ़ आपका जूनून कायम रहेगा
वहीँ दूसरी तरफ़ आपके इमोशन 
बाहर आना शुरू कर देंगे.


आपका अपना डर
जिसमें आप समझदार होने का नाटक करते रहे हैं,
वो ख़त्म होगा.


आप ओरिजिनल नज़र आना स्टार्ट होंगे.
नकलीपन से मुक्ति आसान होगी.
आप फ्रेंडली, पैशनेट और दूसरों की फीलिंग को
समझने वालों की केटेगरी में एंटर करेंगे.


सहजता आपका एसेंशियल पार्ट हो जाएगी
और
आप एक मैनेज्ड आइटम बन पायेंगे
वरना
आपका नाटक लंबा तो चलेगा
लेकिन उसमें
भाव का अभाव स्पष्ट दिखाई देगा,
ठीक उस फ्लॉप फ़िल्म की तरह
जिसमें फेमस एक्टर तो हो सकते हैं
लेकिन कोई कहानी, कोई संदेश, कोई दिशा नहीं होती.


आप देखिए कि
आप क्या पसंद करेंगे?
अपनी कोई हिट फ़िल्म
या अपना कोई फ्लॉप शो.


सब आपके हाथ में हैं
क्योंकि
ये आप हैं जिसे तय करना है कि
आप कहाँ और क्यों जा रहें हैं?



इमेज सोर्स: गूगल

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