Jun 7, 2019

स्वाद कैसा था? स्टूडेंट ने कहा –बिलकुल ही खारा. थू.




प्रैक्टिकल नॉलेज देने हेतु
इंजीनियरिंग की एक कॉमन क्लास के दौरान
प्रोफेसर साहब ने अपने एक स्टूडेंट को
पानी से भरा गिलास और कुछ नमक पकड़ाया.

उन्होंने कहा – पानी में एक मुट्ठी नमक घोलो
और पी जाओ.

स्टूडेंट पी गया.
प्रोफेसर ने कहा – हाऊ वाज द टेस्ट?
स्वाद कैसा था?

स्टूडेंट ने कहा – बिलकुल ही खारा. थू. बकवास.


ओके कहते हुए प्रोफेसर ने उसे और
बाक़ी सभी स्टूडेंट्स को क्लास से बाहर 
चलने का इशारा किया
और
सभी कॉलेज की पानी की टंकी के पास पहुँच गए.

अब प्रोफेसर ने उसी क्वांटिटी के नमक को 
उस पानी की टंकी में डालने को कहा.
स्टूडेंट ने वैसा ही किया.

प्रोफेसर ने अब उसे टंकी का पानी पीने को कहा और स्वाद पूछा.

स्टूडेंट ने कहा- इट्स ओके सर.

प्रोफेसर – क्या तुम्हें ये उतना ही खारा लगा, जितना गिलास वाला था.

स्टूडेंट – नो सर. ये तो नार्मल ही लग रहा है.


अब सभी क्लास में वापिस आ गए.

प्रोफेसर ने अब सभी स्टूडेंट्स को संबोधित
करते हुए कहा कि
आप सब फ्यूचर में अलग-अलग 
सिचुएशन में से गुजरेंगे.

कभी सिचुएशन आपके फेवर में होंगी 
यानि सुख
और 
कभी अगेंस्ट में यानी दुःख.

सुख में तो एडजस्टमेंट की जरुरत ही नहीं होगी
लेकिन
जब भी कोई चीज़ अगेंस्ट में हो जाए  
तो इस एक्सपेरिमेंट को जरुर याद करना
और महसूस करना
कि लाइफ़ में जो भी दुःख हैं
वो बिलकुल इस नमक की तरह होते हैं.
ना कम, ना ज्यादा. बस सेम क्वांटिटी.

लेकिन आप इन दुखों का स्वाद कैसे चखते हैं,
ये डिपेंड करेगा कि आपने ख़ुद को
एक गिलास के रूप में डेवेलप किया है
या
एक बड़ी पानी की टंकी की तरह बनाया है.

और इससे ही पता चलेगा
कि आप लोग दुःख की एक कॉमन पोजीशन में
कैसा रियेक्ट करोगे?

और लाइफ़ अपनी डायरेक्शन ठीक वैसे ही ट्रेवल करेगी.

स्टूडेंट्स ने एक दूसरे की तरफ देखा
और टंकी-टंकी चिल्लाने लगे.

क्लास बिना बोरियत के खत्म हुई.


इमेज सोर्स: गूगल

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