Jul 26, 2019

मकड़ी ने अपने इंजीनियरिंग टैलेंट से एक लंबा धागा बुना.





अक्सर 2 चीज़ों में आदमी हमेशा से कंफ्यूज रहा है.
पहली दया और दूसरी मदद.
पहली कॉमन फॉर आल है और 
दूसरी सेलेक्टिव हो सकती है.

दया स्पिरिचुअल आस्पेक्ट है और मदद करना प्रैक्टिकल आस्पेक्ट.
हम इसे मिक्स करते चलते हैं 
और इसीलिए कंफ्यूज हो जाते है.

एक सेल्फिश आदमी जो
दूसरों के बारें में हमेशा ही लापरवाह है,
उसको मदद मिलना बड़ा ही टफ होगा,
मगर उसको दया की नज़र से कोई भी देख सकता है.
दया प्रार्थना की वाइब्रेशनल थेरेपी है.

आइए,
एक शानदार पुरानी कहानी से जीवन के इस पहलू
को समझने की कोशिश करते हैं.


इसे एक टीचर अपने स्टूडेंट्स को सुना रहे थे.

टीचर ने कहानी स्टार्ट की.

बुद्ध ध्यानमग्न थे.
किसी ने “बचाओबचाओ” की आवाज़ लगाई.
वो समझ गए कि नर्क के गड्ढे में कोई नई एंट्री हुई है
और बंदा परेशानी में है.

फ़िर पता चला कि जब वो बंदा जिंदा था तब
उसने कई सारे क़त्ल, चोरियां 
और किडनैप जैसे घिनोने काम 
अपने बायोडाटा में शामिल किए थे.

महात्मा तो करुणामय होते हैं.
बुद्ध अब उसकी मदद करना चाहते थे.
उन्होंने उसकी लाइफ की सभी फाइल्स चेक की.
उस बंदे ने एक बार एक मकड़ी को अपने पैरों के 
नीचे आने से बचाया था.

उन्होंने उस मकड़ी से उस बंदे की हेल्प करने की रिक्वेस्ट की.
मकड़ी ने यस कहा.
उसने अपने इंजीनियरिंग टैलेंट से मजबूत जाल वाला
एक लंबा धागा बुना और गड्ढे में भेज दिया.

वो बंदा उस धागे को पकड़ कर नर्क के गड्ढे से बाहर आने लगा.
वहां जो दूसरे सज़ा काट रहे कलाकार भी थे,
उनको भी जोश आया और 
वो भी धागे को पकड़ने लगे.

वो बंदा तनाव और चिंता से पसीने-पसीने हो गया.
गुस्से में चिल्लाकर बोला – ये सुविधा मेरे लिए है
और अगर सब इसका यूज़ करेंगे तो ये टूट जाएगा.
उसके इतना कहते ही धागा टूटा 
और वो धम्म से वापिस गड्ढे में गिर गया.

बंदा फिर “बचाओ – बचाओ” मोड में आ गया.
लेकिन इस बार बुद्ध ने उसकी आवाज़ अनसुनी कर दी.

अब टीचर ने स्टूडेंट्स से पूछा – बताओ. स्टोरी में क्या सही नहीं है?

पहले स्टूडेंट ने कहा – 
मकड़ी का धागा कमजोर होता है.

दूसरा बोला – 
नर्क और स्वर्ग जैसी कोई जगह नहीं होती.

तीसरे ने कहा – 
बुद्ध ध्यान करते हुए आवाज़ क्यों सुनेंगे?

टीचर मुस्कुराए और बोले –
ये सभी आंसर क्रिएटिव हैं लेकिन
तुमने सबसे इम्पोर्टेन्ट चीज़ को मिस कर दिया.

स्टूडेंट्स चिल्लाये – वो क्या गुरु जी?
टीचर ने कहा –
एक सच्चा महात्मा दया और करुणा सबके लिए ही बरसाएगा.
वो इसे किसी एक के लिए फिक्स नहीं रख सकता.
जब उस बंदे को मदद का धागा मिला तो भी 
नर्क में भी उसका लालच ये ही रहा कि
सिर्फ़ मैं ही इसे पकड़ कर गड्ढे से बाहर निकल जाऊं.
और 
जब कोई सिर्फ़ और सिर्फ़ स्वार्थी होने लगता है तो
दया का धागा अपने आप टूट जाता है.

स्टोरी में बंदा ही सही नहीं है.
कोई कब तक उसकी हेल्प कर सकेगा?


स्टूडेंट्स को स्टोरी समझ आई और
सबने ख़ूब तालियाँ बजाई.


इमेज एंड स्टोरी सोर्स: गूगल.





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