Jul 4, 2019

ये बड़ा ही तीखा और चटपट है. ये आम बजट है.





इस मौसम में आम ख़ूब होते हैं
और
ये बजट भी आम बजट कहलाता है.
आज बजट आ रहा है.

देखो क्या होगा इसके पिटारे में?
किसके वारे- न्यारे होंगे
और कौन डूबेगा निराशा की झील में
कौन बांधेगा तारीफ़ों के पुल
और कौन डालेगा इसे अपील में.

ये बजट है, आम बजट
लेकिन हमेशा ही ख़ास बना रहता है.
हर वर्ग के लिए कुछ नई बातें कहता है.
नौकरीपेशा हो या बिजनेसमैन
सबकी धडकनें बढ़ जाती हैं
जब बजट की कापियां पढ़ी जाती हैं.

किसान और मजदूर भी आस लगा कर बैठे हैं
छोटे उद्योग वाले भी अपना भविष्य चेक कर रहे हैं.
बड़े खिलाडियों की भी इस पर पूरी नज़र है.

ये बजट है, आम बजट.
करोड़ों लोगों के सपनों का लेखा-जोखा कागजों में समाया है.
पूरे 365 दिनों बाद फ़िर से बजट आया है.

क्या होगा, कैसे होगा, कितना होगा?
सिस्टम, पालिसी, प्लानिंग सब कुछ ही बयाँ होगा.
छोटे-बड़े
प्राइवेट - सरकारी
बिज़नेस बड़ा या दुकान तरकारी
उत्तर – दक्षिण
पूर्व – पश्चिम
सब दिशाओं के लिए सिस्टम की तैयारी

जो भी है,
ये बड़ा ही तीखा और चटपट है.
ये बजट है, ये आम बजट है.


इमेज सोर्स: गूगल







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