Jul 8, 2019

इस किस्से को एक स्टोरी से जोड़कर आपको सुनाता हूँ.





चीज़ें बदल जाने के बाद ही आप
चीज़ों को उनके सही रूप में देख सकते हैं.
जब तक वो वैसी ही घिसी-पिटी सी चल रही होती हैं,
तब तक उस तरफ़ शायद ही किसी की अटेंशन जाती हो
और
अगर आप ये देख पा रहे हों
तो फ़िर उन्हीं चीज़ों में हंसी, आराम 
और ह्यूमर देख पायेंगे.


इस किस्से को मैं एक स्टोरी से जोड़कर आपको सुनाता हूँ.


हम शहर के एक छोटे से कॉलेज में काम करते हैं.
वैसे तो इस कॉलेज ने हजारों स्टूडेंट्स की 
लाइफ़ को सेट करने में मदद की है.


यहाँ के कई स्टाफ मेंबर्स भी यहाँ रहते हुए, 
आगे पढ़ते हुए
अब अच्छी-अच्छी जगहों पर काम कर रहे हैं.


खैर, मैं किसी की तरफ़ किसी ख़ास उम्मीद से नहीं देख रहा हूँ
लेकिन जब लोगों को बातें करते सुनता हूँ
तो पाता हूँ कि
लोग चाहे कहीं भी निकल गए हों
लेकिन यहाँ की उनकी यादें अब भी शानदार ही हैं.
और शायद ये ही कारण है कि वो आज जहाँ भी हैं,
वहां की कम और यहाँ की बातें बड़ी तसल्ली से कहना और सुनना पसंद करते हैं.


इस कॉलेज ने सबको बड़े ही गज़ब के दिन दिखायें हैं.
हर केटेगरी के बंदे को.
फ़िर चाहे वो सबसे नीचे का हो, बीच का या सबसे ऊपर का.


कोई भी यहाँ रहना चाहता था
क्योंकि यहाँ वो सबकुछ था
जो जीने के लिए चाहिए.
घर से आना जाना बेहद आसान है.
आप घर जाकर गर्मागर्म लंच भी कर सकते हैं.
सुबह लेट भी उठे तो समय पर पहुँच सकते हैं.
शाम को भी आपको पता है कि लेट हो भी गए 
तो भी
मार्केट के 4 काम निपटा कर घर पहुंचा जा सकता है.
कुल- मिलाकर हर दिन को ख़ुशी के साथ जीने का एक ठीक-ठाक आप्शन मौजूद है.


अब तो कॉलेज में मंदिर भी है,
पुजारी घंटी तो रोज बजाता है
लेकिन मंदी का असर साफ़ दिखाई देता है.
सूना-सूना सा दिन गुजरता है.


इन दिनों एडमिशन का समय है,

पर नयी जनरेशन कोर्सेज 

नहीं होने की वजह से उत्साह पहले जैसा नहीं है.

कभी ख़ुशी-कभी गम की तरह दिन गुजरते हैं.


पुराने साथी अब इतिहास बन गए हैं,
उनकी यादों की पोटली अब भी स्टाफ रूम के लोकर्स में बंद है.


चुनिंदा पुरानों के साथ अब नई पीढ़ी के कुछ साए हैं.
उनके साथ दौड़ते-भागते मल्टीटास्किंग चलती रहती है.


फ़िर भी दिल ये ही चाहता है
कि कुछ ऐसा हो सके
कि यहाँ से जुड़े लोगों के परिवारों को रोज शाम
तसल्ली की रोटी नसीब हो सके.
इसी कोशिश में रोज शाम हो जाती है.


हालांकि संभावनाएं बेहद कम है
लेकिन जाने से पहले एक बार इस ऐतिहासिक
जगह का कर्ज़ लौटा के जाने का मन है.


मुझे याद है कि जब मेरे पास कुछ नहीं था
तो ये ही था.
और मैं तभी जाना चाहता हूँ, जब ये मुझे परमिशन दे.
मेरा इतना करना बनता भी है.


मुझे अपडेट रहना पसंद है
पर ये भी पसंद है कि
जो मेरा था, मैं हमेशा उसके साथ खड़ा मिलूं.


वैसे अब ज्यादा समय नहीं है,
ये गठबंधन टूट भी सकता है
लेकिन मेरी ख्वाहिश है कि ये चले.


मन की तसल्ली, सामाजिक सफ़लता से 
बहुत ऊँची चीज़ है.
और सच में
चीज़ें बदल जाने के बाद ही आप
चीज़ों को उनके सही रूप में देख सकते हैं.


ये हिस्टोरिकल फ़ील है.
वो बात अलग है कि अपने हाथ झाड़ कर कोई भी कह सकता है
कि इसमें मेरा क्या दोष?

वैसे आज बारिश भी शानदार हो रही है.

केबिन में खिड़की है 

और मैं 

बूंदों को महसूस कर पा रहा हूँ.


इमेज सोर्स: गूगल









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