Jul 6, 2019

ये है वर्किंग मैडिटेशन. दुनिया की एक बेहतरीन चीज़.





क्या आपको काम करते हुए जल्दबाज़ी का 
एहसास होता है?
अगर हाँ तो ये बड़ी शानदार क्वालिटी है
जो आपने ख़ुद में पैदा की है.

आप निश्चिंत रहें,
ये फैक्टर कोई टेंशन नहीं है
बल्कि आपके आगे बढ़ते रहने की एप्रोच को बताता है.


आस-पास नज़र घुमाइए.
अच्छा परफॉर्म करने वाले लोगों का 
एक कॉमन गुण आप देखेंगे कि
वो काम पर फोकस को ब्रेक नहीं होने देते.
उन्हें अपने सबसे इम्पोर्टेन्ट कामों को निपटाने 
की जल्दी लगी रहती है.


इस प्रोडक्टिव नेचर की वजह से वो
थिंकिंग, प्लानिंग और प्रायोरिटी सेट करने का
समय आराम से निकाल लेते हैं
और पूरी ऊर्जा से अपने लक्ष्यों का पीछा करना
पसंद करते हैं.
शायद इसी मैनेजमेंट के कारण वो
कम टाइम में ज्यादा वर्कआउट कर डालते हैं.


वहीँ,
एक सामान्य आदमी उसी समय को
सोशल रिलेशन बनाने, गॉसिप करने और 
कम इम्पोर्टेन्ट एक्टिविटीज में ही गुजारना 
बेहतर मानते हैं
और 
इसी वजह से उनके नार्मल काम भी
उनके तनाव का कारण बन जाते हैं.


एक्चुअल में एक्टिव होने का मतलब है
एक लय में आ जाना.


ये मैडिटेशन करने जैसा प्रोसेस है,
लेकिन उससे कहीं ज्यादा सहज.


जब आप काम करते हुए भूल जाते हैं कि “मैं कौन हूँ”
इसका सीधा सा मीनिंग है कि आपका काम अब आपसे इम्पोर्टेन्ट हो गया
और
ये ही वर्किंग मैडिटेशन कहा जा सकता है.
ये बेहतरीन चीज़ है,
अगर आप इसे हासिल कर सकें तो?

एक बार आपने इस का स्वाद चख़ लिया तो बस,
फ़िर आप एक “फ्लो” बन जाते हैं
और लगातार बहते रहते हैं,
रिजल्ट की चिंता से दूर.


आप फ़ास्ट स्पीड से सक्सेस ज़ोन में एंट्री कर जाते हैं.
संतुष्टि और मुस्कराहट आपको मिलनी स्टार्ट हो जाती है.

अब आप लोगों के बारे में कम,
काम के बारे में ज्यादा बातें करते दिखाई देते हैं.
ये किसी और से आगे निकल जाने की होड़ नहीं है,
बल्कि ख़ुद की बाउंड्री को जान सकने
और अपने लिए कुछ अच्छा चुन लेने की कोशिश है.


इसीलिए,
अब तक चाहे जो कुछ भी आपका एक्सपीरियंस रहा हो,
उसे तो ध्यान में रखिए ही
पर हाँ,
साथ ही साथ
एक बार फ़िर से एक्टिव होने की कोशिश,
एक बार फ़िर से उठने की कोशिश ज़रूर करें.


काम को समय पर निपटा देने की झलक
जिस दिन आपके भीतर से आनी शुरू हो गई
समझो दिमाग की बत्ती जलना शुरू कर देगी.


सेल्फ-थॉट प्रोसेस से ख़ुद को ये याद दिलाते रहना कि
“काम को अभी स्टार्ट करो. अभी स्टार्ट करो”.

ये आपको एक्स्ट्रा एनर्जी और पुश देगा
और
कभी आपकी अगर स्पीड स्लो भी हो जाए
तो ख़ुद को रिमाइंडर दीजिए कि
“चलो दोबारा काम पर चलो. चलो दोबारा”.

और जब आप ऐसा करेंगे
तो कुछ और मिले ना मिले
कोई आपको कुछ कहे, ना कहे
लेकिन
आप ख़ुद से ऐसे मिलेंगे
जैसे सालों बाद कोई अपने प्रियतम से मिलता है.

इमेज सोर्स: गूगल






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