Aug 10, 2019

ये बेसिक्स पर काम करने का सबसे शानदार समय आया है.







हम जब भी किसी से कोई उम्मीद रखते हैं तो
हमेशा “हां” ही सुनना चाहते हैं. अपने पसंद वाली “हां”
लेकिन अधिकतर मौकों पर सामने खड़ा होता है “नहीं”.

और अगर आप इस “नहीं” का सम्मान करना सीख लेते हैं
तो समझ जाइए कि
आपने जीते जी
मोक्ष या सच्ची आज़ादी का स्वाद चख लिया,
चाहे कुछ देर के लिए ही सही.
ख़ुशी पकड़ में तो आई.

समय और उम्र बढ़ने के साथ-साथ
आदमी प्रैक्टिकल एप्रोच को सीखना चाहता है.
वो चाहता है हर पल अपने हिसाब का होना यानि “हां”
लेकिन इस दुनिया में “नहीं” के लिए ज्यादा स्कोप है.


आज की दुनिया में प्रैक्टिकल होने की ज़रूरत बहुत कम है.
ये बेसिक्स पर काम करने का सबसे शानदार समय आया है.
देखिए, अगर एक कांटो का पेड़ है और
हर समय आपके लिए मुसीबत पैदा करता है
तो आप अपने माली से उसकी कितनी भी कटाई-छटाई करवा लीजिए,
मगर कुछ दिनों बाद वो फ़िर बढ़ेगा और आपको तंग करने लगेगा.
हाँ या ना?

अब या तो पूरी जिंदगी उसकी कटाई करते-करते थक-मर जाइए
या फ़िर एक बार माली से कह कर उसे जड़ समेत उखड़वा दीजिए.
ये उसकी जड़ यानि बेस पकड़ने की बात है.

ऐसे ही जिंदगी के बेसिक्स पकड़िए.
जहां हल्की कटाई से सुधार हो सकता है, वो कीजिए
लेकिन अगर किसी चीज़ की रिपेयरिंग करते करते आप ही डैमेज होने लगे
तो कहीं ना कहीं समस्या के जड़ को पकड़ कर ख़त्म करने की ज़रूरत होगी.

ये जो “नहीं” वाला फ़ॉर्मूला है,
ये बड़ा काम आता है हर सिचुएशन में.

जब भी आपके अंदर कांटो का या
दुःख का पेड़ घर बनाने लगे तो ख़ुद से कुछ सवाल कीजिए
और उन सवालों को प्रैक्टिकल नजरिए से महसूस करते हुए
उनके आंसर तलाशिए.
आप पायेंगे कि अधिकतर आंसर “नहीं” में है
और आप समझ जायेंगे कि
आपको बेसिक्स पर क्यों जाना चाहिए?


सवाल ये रहे ( याद रहे केवल “हाँ” या “ना”)

क्या कोई भी उन सारी समस्याओं का हल कर सकता है जिनकी वजह से दुनिया में शांति और सुरक्षा खतरे में है?

क्या कोई भी 24 घंटे, हर पल ख़ुशी दे या ले सकता है?

क्या कोई भी हमेशा सबसे अमीर या सबसे गरीब बना रह सकता है?

क्या कोई भी हमेशा के लिए शांतिपूर्ण रह सकता है?

क्या कोई भी हमेशा के लिए सच्चा प्यार पा सकता है?

क्या कोई भी हमेशा अपने करियर से संतुष्ट रह सकता है?

क्या कोई भी हमेशा सभी रिश्तों में मिठास बना के रख सकता है?

क्या कोई भी हमेशा कामयाब या फेलियर रह सकता है?

क्या कोई भी हमेशा के लिए सुखी या दुखी हो सकता है?

क्या कोई भी हमेशा के लिए अपनी मनपसंद चीज़ों को पा सकता है?


अगर आप ये बेसिक पकड़ लें
कि कुल मिलाकर सबकुछ 
हमारे मन की बकवास का रिजल्ट है
तो जैसे ही ये जड़ मिली
आप इस पर काम करना स्टार्ट कर सकेंगे
और कुछ समय बाद पायेंगे कि
लाइफ़ बहुत हल्की और उम्मीद फ्री है


अब आपके सारे सवाल धीरे-धीरे बंद होना शुरू हो जायेंगे
और अब आप ख़ुद से मिलने का लुत्फ़ उठा सकते हैं
बिना किसी प्रैक्टिकल ड्रामे के.
ये सच का इंटरव्यू लेने जैसा अनुभव है.
जिस दिन ये अनुभव आपको मिला
तो समझो लाइफ़ का गुलदस्ता
हमेशा के लिए खुशबूदार और ताज़ा हो गया.
इमेज सोर्स: गूगल


No comments: